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सिर्फ बदमाश ही बैंक नहीं लूटते, बैंक के बाबू भी बैंक लूटते हैं PNB के बाबूओं ने फर्जी अकाउंट खोल कर जनता के पांच करोड़ लूट लिये

लखनऊ ( राज्य मुख्यालय)। सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच लखनऊ की टीम ने विकास भवन स्थित पंजाब नेशनल बैंक शाखा में विभिन्न सरकारी योजनाओं के करोड़ों रुपये के घोटाले के सिलसिले में गुरुवार को छापेमारी की। दो सदस्यीय टीम ने बैंक के साथ ही समाज कल्याण समेत कुछ अन्य विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों से पूछताछ की। कुछ जरूरी दस्तावेज भी लिए। टीम अभी गोरखपुर में ही रुकी है और शुक्रवार को भी जांच कर सकती है।

फर्जी खाते खोलकर सरकारी धन के गबन के मामले की जांच के लिए लखनऊ से आई टीम के अधिकारियों ने मंगलवार को भी गोरखपुर के कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों से भी सम्पर्क किया था। लेकिन गुरुवार को टीम विकास भवन पहुंची। बैंक के अलावा टीम ने समाज कल्याण विभाग, डीपीआरओ कार्यालय समेत कुछ अन्य विभागों में भी पूछताछ की और दस्तावेज एकत्र किए। समाज कल्याण विभाग से 2012 से 2015 के बीच छात्रवृत्ति पाने वाले लाभार्थियों की सूची की मांग की गई लेकिन विभागीय अधिकारियों ने लखनऊ से उपलब्ध होने की बात कहीं।

फिलहाल टीम अभी गोरखपुर में डेरा डाले हुए है। शुक्रवार को लखनऊ प्रस्थान करेंगे। घोटाले की रकम पांच करोड़ होने का आंकलन किया जा रहा लेकिन बताया जा रहा है कि यह रकम और बढ़ सकती है। सीबीआई ने इस मामले में अप्रैल 2017 में पूर्व ब्रांच मैनेजर एसएन चौबे समेत बैंक के 5 अधिकारियों -कर्मचारियों के साथ अज्ञात पर एफआईआर दर्ज किया है। 

सीबीआई के दो अफसरों के अचानक धमकने की सूचना से विकास भवन के कई विभागों में सनसनी का माहौल रहा। उनकी तफ्तीश, पूरे दिन विभागों में चर्चा का विषय बनी रही।इस मामले में सीबीआई बैंक समेत विभिन्न विभागों के अफसरों, कर्मचारियों को लखनऊ में बुलाकर कई बार घंटों पूछताछ कर चुकी है। 2019 में 23 और 24 सितंबर को समाज कल्याण विभाग के दो कर्मचारियों से पूछताछ के बाद विभिन्न योजनाओं से जुड़े दस्तावेज तलब किए गए थे।

माना जा रहा है कि इस मामले में बैंक अफसरों, कर्मचारियों के साथ ही जिले के कुछ अन्य विभागों के भी पूर्व व वर्तमान अफसर-कर्मचारी फंस सकते हैं। प्रारंभिक तौर पर अभी करीब पांच करोड़ रुपये का घोटाला आंका जा रहा है। मगर सूत्र बताते हैं कि जांच में यह रकम और बढ़ सकती है।

आरोप है कि पूर्व प्रबंधक एसएन चौबे ने बैंक के अपने अन्य अफसरों, कर्मचारियों के सहयोग से वर्ष 2012 से 2015 के बीच विभिन्न सरकारी योजनाओं के 15 डमी अकाउंट खोलकर करीब पांच करोड़ रुपये निकाल लिए। इन योजनाओं में छात्रवृत्ति, वृद्धा-विधवा पेंशन, महामाया आर्थिक मदद, रानी लक्ष्मी बाई योजना, विकलांग पेंशन समेत कुछ अन्य योजनाएं शामिल हैं। सीबीआई ने इस मामले में पूर्व ब्रांच मैनेजर एसएन चौबे समेत बैंक के पांच अफसरों, कर्मचारियों के साथ ही कई अन्य अज्ञात पर अप्रैल 2017 में मुकदमा दर्ज किया था। 

विकास भवन शाखा पीएनबी प्रबंधक मैनेजर सिंह ने कहा कि सीबीआई की टीम आई थी। मामला काफी पुराना है। उन्होंने कुछ मामलों में पूछताछ की। जो भी जानकारी मांगी जा रही है, मुहैया कराई जा रही है।

अमेरिकी विदेश मंत्री का देश का दौरा… लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करेंगे और हवा पानी की जांच करेंगे!

लखनऊ / दिल्ली । अमेरिका के विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकेंन 27 और 28 जुलाई को भारत के दौरे पर आएंगे। इस दौरान एंटोनी ब्लिंकेन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और एनएसए अजीत दोहल से मुलाकात करेंगे।विदेश मंत्रालय की ओर से यह जानकारी दी गई है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री की भारत यात्रा उच्च स्तरीय वार्ता जारी रखने, भारत अमेरिका वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का एक अवसर है ।अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे और द्विपक्षीय ,क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

विदेश विभाग के प्रवक्ता नेट प्राइस ने कहा कि नई दिल्ली की अपनी यात्रा के अलावा ब्लिंकेन 26 से 29 जुलाई तक अपनी विदेश यात्रा के दौरान कुवैत की भी यात्रा करेंगे। प्राइस ने कहा कि उनकी आगामी यात्रा साझेदारी को मजबूत करने और उनकी साझा प्राथमिकताओं पर सहयोग को रेखांकित करने के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है। 

प्राइस ने कहा , “नई दिल्ली से 28 जुलाई को ब्लिंकेन विदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। इस दौरान कोविड-19 से निपटने के प्रयासों पर निरंतर सहयोग का हिंद प्रशांत क्षेत्र ,साझा क्षेत्रीय सुरक्षा हितों , लोकतांत्रिक मूल्य और जलवायु संकट सहित कई मुद्दों पर चर्चा होगी।

छापा! दैनिक भास्कर के हर एक ठिकाने पर छापा

लखनऊ /दिल्ली / जयपुर। देश के प्रतिष्ठित अखबारों में से एक दैनिक भास्कर ग्रुप के कई ठिकानों पर गुरुवार, 22 जुलाई को आयकर विभाग ने छापा मारा. टैक्स चोरी के आरोप में कई शहरों में ये कार्रवाई की गई है. ग्रुप के भोपाल, जयपुर, अहमदाबाद और कई अन्य शहरों में बने दफ्तरों और ठिकानों पर इनकम टैक्स विभाग के अफसर जांच पड़ताल में जुटे हैं. आधिकारिक सूत्रों ने जानकारी दी कि ग्रुप के प्रमोटर्स के घरों और ऑफिसों पर भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. इस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है. सरकार ने भी इस पर जवाब दिया है।

मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम ने कहा, ‘मोदी सरकार में प्रजातंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने का , सच को रोकने का काम शुरू से ही किया जा रहा है, अभी पेगासस जासूसी मामले में भी कई मीडिया संस्थान व उससे जुड़े लोग बड़ी संख्या में निशाने पर रहे हैं और अब सरकार की निरंतर पोल खोल रहे। सच को देश भर में निर्भिकता से उजागर कर रहे दैनिक भास्कर मीडिया समूह को दबाने का काम शुरू हो गया है? अपने विरोधियों को दबाने के लिए , सच को सामने आने से रोकने के लिये ईडी, आईटी व अन्य एजेंसियो का दुरुपयोग यह सरकार शुरू से ही करती रही है और यह काम आज भी जारी है? लेकिन ध्यान रखे कि सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नही?

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान उत्तर प्रदेश में गंगा में बहती लाशों ने सभी का ध्यान खींचा था. जिसके बाद भास्कर ने अपने 30 रिपोर्टर्स की टीम के साथ यूपी में गंगा किनारे जिलों में लगभग 1140 किमी में लाशों को लेकर रिपोर्टिंग की थी. खबर में बताया गया था कि इस दौरान दो हजार से ज्यादा शव गंगा किनारे मिले. जिसमें कानपुर, उन्नाव, गाजीपुर और बलिया में हालात सबसे ज्यादा खराब थे। इस खबर का फोटो वायरल होने के बाद भास्कर की रिपोर्टिंग की पूरे देश मे तारीफ होने लगी थी।

केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र के दौरान एक जवाब में कहा कि, पूरे देश में ऑक्सीजन की कमी से एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है. इस बयान के बाद अखबार ने देश के अलग-अलग प्रदेशों का उदाहरण देकर बताया कि कैसे सरकार ने संसद में झूठ बोला। इस खबर में तीन मामलों का जिक्र किया गया है जहां ऑक्सीजन की कमी से लोगों की मौत हुई थी, इस खबर की पूरे देश के साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई भी हुई थी. खबर के अंत में अखबार ने तंज कसते हुए लिखा, … और कहते हैं ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं हुई. कुछ तो सोचकर बोलिए सरकार!

दैनिक भास्कर ने राजस्थान में टीके की बर्बादी को लेकर एक खबर की थी. इस खबर में बताया गया था कि प्रदेश के 8 जिलों के 35 वैक्सीनेशन सेंटरों के कचरे में वैक्सीन की 500 वायल मिली हैं, जिनमें 2500 से भी ज्यादा डोज हैं. इस खबर को राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री ने झूठ और भ्रामक बताया था। इस पर भास्कर ने कहा, “वह अपनी खबर के साथ खड़ी है, सरकार चाहें तो जांच करा ले.” जिसके बाद सरकार ने फैसला लिया कि, वैक्सीनेशन का भी ऑडिट होगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात, जो इस खबर के अंत में लिखी गई है, यह पत्रकारिता के लिए डरावना है. भास्कर ने बताया कि, जब वह छापेमारी के दौरान यह रिपोर्ट लिख रहे थे तब अधिकारियों ने कहा था, कि उन्हें बिना दिखाए खबर प्रकाशित नहीं की जाए।

बता दें कि भास्कर ग्रुप के दफ्तरों के अलावा ग्रुप के मालिकों के घर पर भी यह छापेमारी की जा रही है। साथ ही ग्रुप में काम करने वाले कई कर्मचारियों के घर पर भी रेड की गई है. छापे के दौरान दफ्तरों में मौजूद कर्मचारियों के मोबाइल जब्त कर लिए गए हैं और उन्हें बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है।

नाइट शिफ्ट के लोगों को भी दफ्तर से बाहर जाने से रोक दिया गया. रेड में शामिल अधिकारियों ने कहा था, यह उनके प्रोसेस का हिस्सा है और पंचनामा होने के बाद उन्हें फ्री किया जाएगा. इसके बाद डिजिटल की नाइट शिफ्ट की टीम को दोपहर साढ़े बारह बजे फ्री किया गया।

भास्कर ने अपनी खबर में लिखा है कि जांच एजेंसी ने छापेमारी का कोई कारण साफ नहीं किया है. वहीं एबीपी न्यूज के मुताबिक, भास्कर ग्रुप पर यह छापेमारी टैक्स चोरी को लेकर की जा रही है। हालांकि जयपुर भास्कर के कर्मचारी ने न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में कहा कि, पहली बार भास्कर पर छापा पड़ा है. हमारी कोविड रिपोर्टिंग के कारण ही यह छापेमारी की गई है।

वहीं अहमदाबाद भास्कर के एक अन्य कर्मचारी ने कहा, हम अपना काम करना जारी रखेंगे जैसा कि हम करते रहे हैं और कर रहे हैं. हमारा किसी सरकार के खिलाफ एजेंडा नहीं है, हम तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट करते हैं. हम जो देखते और सुनते हैं हम वही रिपोर्ट करते हैं. अगर सरकार अच्छा काम करती है तो हम उनके अच्छे काम पर रिपोर्ट करेंगे, और अगर वे बुरा काम करेंगे तो उनके बुरे काम के बारे में रिपोर्ट करेंगे।

सीएम सख्त, जिसे अपनी संपत्ति जब्त करानी हो वो गलत काम करे!

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने प्रदेश के युवाओं को बड़ी नसीहत दी है. अपने एक ट्वीट (Tweet) सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश के युवाओं से मेरी अपील है कि वे किसी के बहकावे में न आएं, अब कोई गलत नहीं कर सकता है. जिसको अपनी प्रॉपर्टी जब्त करवानी हो, वे गलत कार्य करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम लोगों ने प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था के लिए हर संभव प्रयास किए हैं. इसी वजह से प्रदेश में निवेश आया और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के कार्य हुए. इसके तहत 1.61 करोड़ से अधिक युवाओं को नौकरी व रोजगार से जोड़ने में सफलता प्राप्त हुई है।

सीएम योगी ने कहा कि हम जनता के मालिक नहीं है, जनता हमारी मालिक है. जनता जो टैक्स देती है, वही हमारी सैलेरी के रूप में आती है. हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने मालिक के साथ ईमानदारी बरतें. कोई भी उस प्रकार का काम ना हो जिससे वो प्रताड़ित होकर व्यवस्था को कोसे. उन्होंने कहा कि केवल विरोध के लिए विरोध करेंगे, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है.. ऐसा नहीं हो सकता है. कहीं भी भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं है। 

पहले प्रदेश में वसूली गैंग था, वो फिर से सक्रिय हो रहा है, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे, उनसे कठोरता से निपटेंगे. सीएम ने कहा कि 2007 मे मायावती सोशल इंजीनियरिंग के तौर पर सत्ता मे आई थीं मगर उन्होने कुछ नही किया।

आपको बताते चले कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने आज 130 नए आबकारी निरीक्षकों (New Excise Inspectors) को नियुक्ति पत्र बांटे. सीएम योगी ने कहा कि इस सरकार में भर्ती की प्रक्रिया पर कोई सवाल नहीं उठा सकता. पहले भर्ती निकलने पर उनकी अपनी प्रक्रिया शुरू हो जाती थी. भर्ती के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वालों की दुकान बंद हो गई।

हम सितंबर में फिर 60 हजार नौकरियां देने जा रहे हैं. पहले हर एक भर्ती पर कोर्ट को रोक लगाना पड़ रहा था. आज नियम के तहत हो रही भर्ती पर कोई सवाल नहीं उठा सकता. अभी हमें बहुत नियुक्तियां करनी हैं, भर्तियां करना है. जो मेहनत करेगा, उसे मौका मिलेगा। 

उन्होंने कहा कि Excise एक अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण विभाग है, जो मादक वस्‍तुओं के अवैध व्‍यापार को रोकने के साथ-साथ राजस्‍व अर्जित कर प्रदेश के संसाधनों एवं विकास के कार्यों में सराहनीय योगदान करता है। विभागीय कार्य-कलापों में पारदर्शिता लाने एवं प्रदेश में उद्योगों को सहज एवं सुगम वातावरण उपलब्‍ध कराने के लिए  ईज आफ डूइं‍ग बिजनेस के अन्‍तर्गत विभाग द्वारा शीरा एवं अल्‍कोहल के उठान एवं वितरण की सम्‍पूर्ण प्रक्रिया को आनलाइन कर दिया गया है। 

सरकार रोजगार के अवसर सृजित करने के लिये लगातार कदम उठा रही है, जिसके क्रम में प्रदेश में कई नई डिस्टलरियां, सैनिटाइजर इकाईयॉं एवं माइक्रो ब्रिवरीज स्‍थापित की गयी है।

मुख्‍यमंत्री द्वारा अन्‍त में नवनियुक्‍त आबकारी निरीक्षकों को शासकीय सेवा में आने की बधाई दी गई तथा निष्‍पक्ष एवं पारदर्शी रहकर राजकीय दायित्‍वों का पूर्ण निष्‍ठा एवं लगन के साथ निर्वहन करने की आशा व्‍यक्‍त की गयी। 

 इस अवसर आबकारी व मद्य निषेध विभाग के मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री के साथ अन्य विभागीय अधिकारी भी मौजूद थे। आबकारी मंत्री ने  130 आबकारी निरीक्षक प्रदान करने के लिये  मुख्‍यमंत्री  का आभार व्‍यक्‍त किया गया तथा नवनियुक्‍त आबकारी निरीक्षकों को सम्‍बोधित करते हुए बताया गया कि प्रदेश के कर राजस्‍व में आबकारी विभाग का दूसरा स्‍थान है। जो सरकार की पारदर्शी एवं निष्‍पक्ष नीति के कारण सम्‍भव हुआ है।

देश में शीरा एवं अल्‍कोहल के उत्‍पादन में भी उत्‍तर प्रदेश प्रथम स्‍थान रखता है। इसके अलावा उत्‍तर प्रदेश भारत सरकार की कच्‍चे पेट्रोलियम पदाथों पर निर्भरता कम करने एवं गन्‍ना किसानों को गन्‍ना मूल्‍य के भुगतान की व्‍यवस्‍था सुदृढ़ करने हेतु पेट्रोल में एथनाल मिश्रित किये जाने में महत्‍वपूर्ण योगदान कर रहा है। 

एथनाल की आपूर्ति करने वाले प्रदेशों में उत्‍तर प्रदेश प्रथम स्‍थान पर है।  आबकारी मंत्री द्वारा नवनियुक्‍त आबकारी निरीक्षकों को शासकीय सेवा में आने की बधाई देते हुए उनसे यह अपेक्षा की गयी कि वे अपने दायित्‍वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करेंगे और कभी भी ऐसा कार्य नहीं करेंगे जिससे कि प्रदेश सरकार एवं आबकारी विभाग की छवि धूमिल हो।

जासूसी कांड पर बोले गृहमंत्री, सफल नहीं होंगे देश के विकास में रोड़े अटकाने वाले

लखनऊ / दिल्ली । फोन टैपिंग व जासूसी कांड (Spying Controversy) को लेकर गृहमंत्री अमित शाह Home Minister Amit Shah) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि भारत को विकास के पथ से भटकाने के लिए रोड़े डालने वाले अपनी साजिशों में कामयाब नहीं होंगे।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग नहीं चाहते है कि देश का विकास हो। वे देश को विकास के रास्ते से हटाना चाहते हैं। गृह मंत्री ने बयान जारी कर कहा कि विघटनकारी और अवरोधक शक्तियां अपने षड्यंत्रों से भारत की विकास यात्रा को नहीं रोक पाएंगी। मानसून सत्र देश में विकास के नए मापदंड स्थापित करेगा।

अमित शाह ने कहा कि इस वाक्य को अक्सर लोग हल्के-फुल्के अंदाज में मेरे साथ जोड़ते रहे हैं, लेकिन आज मैं गंभीरता से कहना चाहता हूं- इस तथाकथित रिपोर्ट के लीक होने का समय और फिर संसद में ये हंगामा! आप क्रोनोलोजी समझिये!

उन्होंने कहा कि संसद के मानसून सत्र में जो भी हंगामा हुआ इस घटनाक्रम को पूरे देश ने देखा। देश के लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए मानसून सत्र से ठीक पहले कल देर शाम एक रिपोर्ट आती है, जिसे कुछ वर्गों द्वारा केवल एक ही उद्देश्य के साथ फैलाया जाता है कि कैसे भारत की विकास यात्रा को पटरी से उतारा जाए और अपने पुराने नैरेटिव के तहत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को अपमानित करने के लिए जो कुछ भी करना पड़े किया जाए। 

गृह मंत्री ने कहा कि मानसून सत्र से देशवासियों की ढ़ेरों अपेक्षाएं और उम्मीदें जुडी हैं। देश के किसानों, युवाओं, महिलाओं और समाज के गरीब व वंचित वर्ग के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में सार्थक बहस और चर्चा के लिए तैयार हैं। 

शाह ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री जी द्वारा केंद्रीय मंत्रिपरिषद का विस्तार किया गया जिसमें देश के हर कोने से समाज के हर वर्ग विशेषकर महिलाओं, किसान, दलित और पिछड़े वर्ग से चुनकर आए सदस्यों को विशेष प्रतिनिधित्व दिया गया। लेकिन, कुछ ऐसी देशविरोधी ताकतें हैं जो मोदी जी द्वारा महिलाओं और समाज के पिछड़े व वंचित वर्ग को दिए गए सम्मान को पचा नहीं पा रही हैं। ये वही लोग हैं जो निरंतर देश की प्रगति को बाधित करने का प्रयास करते रहते हैं।

गृहमंत्री ने कहा कि आज जब प्रधानमंत्री जी लोकसभा और राज्यसभा में अपने नए मंत्रिपरिषद का परिचय कराने के लिए उठे, जो संसद की एक पुरानी व समृद्ध परंपरा है, तो कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष के नेताओं ने दोनों सदनों के वेल में आकर सदन की कार्यवाही की बाधित किया। क्या वो हमारे लोकतंत्र के मंदिर और उसकी गरिमा का ऐसे ही सम्मान करते हैं? यही व्यवहार उन्होंने तब भी जारी रखा जब सूचना एवं प्रसारण मंत्री इस मुद्दे पर बोलने के लिए आए।

शाह ने कहा कि यह भारत के विकास में विघ्न डालने वालो की भारत के विकास के अवरोधकों के लिए एक रिपोर्ट है। कुछ विघटनकारी वैश्विक संगठन हैं जो भारत की प्रगति को पसंद नहीं करते हैं। ये अवरोधक भारत के वो राजनीतिक षड्यंत्रकारी हैं जो नहीं चाहते कि भारत प्रगति कर आत्मनिर्भर बने। भारत की जनता इस क्रोनोलोजी और रिश्ते को बहुत अच्छे से समझती है। मैं देश की जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि मोदी सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है – ‘राष्ट्रीय कल्याण’ और हम इसकी सिद्धि के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे चाहे कितनी भी बाधाएं आएं।

CSJM कानपुर विवि से पीएचडी भी कीजिये और स्कॉलरशिप भी लीजिये

लखनऊ / कानपुर । छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर में PhD के लिए आवेदन मंगाये जा रहे हैं आवेदन पत्र विश्विद्यालय की केे पोोर्ट पर उपलब्ध हैं आपको बतााते चलें कि यह पोर्टल विश्वविद्यालय की PMU टीम ने तैयार किया है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक ने पोर्टल का inauguration किया उन्होंने पूरी Research टीम और PMU टीम को बधाई दी। 

बता दें कि इसमें विश्वविद्यालय परिसर एवं संबद्ध महाविद्यालयों के तकरीबन 41 विषयों में लगभग 1000 छात्र छात्राओं को पीएचडी करने का मौका मिलेगा। शोधकर्ताओं के लिए तीन स्कॉलरशिप भी घोषित की गई हैं।

राधाकृष्णन छात्रवृत्ति में विश्वविद्यालय परिसर के 50 छात्रों को ₹5000 प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी साथ ही साथ संबद्ध महाविद्यालयों के 50 छात्र छात्राओं को ₹5000 छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी जिसमें 60-40 का अनुपात रहेगा 60 परसेंट छात्रवृत्ति महाविद्यालय एवं 40% छात्रवृति विश्वविद्यालय द्वारा दी जायेगी। 

छत्रपति शाहूजी महाराज छात्रवृत्ति एक छात्र को दी जाएगी जिसमें 10,000 रुपये प्रतिमाह की धनराशि छात्रवृत्ति के रूप में प्रदान की जाएगी वहीं दीनदयाल छात्रवृत्ति भी एक शोध छात्र को दी जाएगी जिसमें प्रति माह 10000 प्रदान किया जाएगा। 

संसद में नए मंत्रियों के परिचय के दौरान हुआ विपक्ष का हंगामा, PM बोले, कुछ लोगो को रास नहीं शांति का माहौल

लखनऊ / दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लोकसभा में मंत्रिपरिषद के नये सदस्यों का परिचय कराने के दौरान सोमवार को विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया जिसके बाद प्रधानमंत्री ने कांग्रेस समेत कुछ अन्य विपक्षी दलों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि कुछ लोगों को यह रास नहीं आ रहा है कि दलित, आदिवासी, ओबीसी(OBC) और महिला मंत्रियों का यहां परिचय कराया जाए।

पीएम नरेंद्र मोदी ने मॉनसून सेशन में अपने नए मंत्रियों का परिचय कराते हुए विपक्ष पर तंज कसा। विपक्षी सांसदों के हंगामे को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि आज बड़ी संख्या में महिलाएं, दलित और आदिवासी नेता मंत्री बने हैं। बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण परिवारों से आने वाले लोगों को भी मंत्री बनने का मौका मिला है। इस पर सभी को खुशी होनी चाहिए थी। उनका मेज थपथपाकर स्वागत करना चाहिए था। लेकिन कुछ लोगों को दलितों, महिलाओं और पिछड़ों का मंत्री बनना रास नहीं आता है। इसलिए वे उनका परिचय नहीं कराने दे रहे हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से शांत होने और मंत्रियों का परिचय होने देने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘परंपराओं को न तोड़ें। आप लंबे समय तक शासन में रहे हैं। आप परंपरा को तोड़कर सदन की गरिमा को कम नहीं करें। इस सदन की गरिमा को बनाए रखें…प्रधानमंत्री जी सदन के नेता हैं और फेरबदल के बाद मंत्रिपरिषद का परिचय करा रहे हैं। आप सदन की गरिमा को बनाए रखें।

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से शांति से नये मंत्रियों का परिचय होने देने की अपील की। सदन में कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों की नारेबाजी के बीच प्रधानमंत्री ने उन पर निशाना साधते हुए कहा कि, मैं सोच रहा था कि आज सदन में उत्साह का वातावरण होगा क्योंकि बहुत बड़ी संख्या में हमारी महिला सांसद, दलित भाई, ​आदिवासी, किसान परिवार से सांसदों को मंत्री परिषद में मौका मिला। उनका परिचय करने का आनंद होता लेकिन शायद देश के दलित, महिला, ओबीसी,​ किसानों के बेटे मंत्री बनें ये बात कुछ लोगों को रास नहीं आती है। इसलिए उनका परिचय तक नहीं होने देते।’

बता दें कि विपक्ष जासूसी कांड, महंगाई और तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग को लेकर तथा अन्य मुद्दों को लेकर हंगामा मचा रहे थे इसी दौरान पीएम मोदी अपने नव-नियुक्त मंत्रियों का परिचय दे रहे थे। हालांकि, विपक्ष ने इतना हंगामा किया कि पीएम मोदी बीच में ही रुक गए और उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए यह कहा कि  विपक्षी पार्टियां दलितों, महिलाओं और पिछड़ों को मंत्री नहीं देखना चाहतीं।

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से शांति से नये मंत्रियों का परिचय होने देने की अपील की। सदन में कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों की नारेबाजी के बीच प्रधानमंत्री ने उन पर निशाना साधते हुए कहा, ‘मैं सोच रहा था कि सदन में एक उत्साह का वातावरण होगा क्योंकि बड़ी संख्या में हमारी महिला सांसद मंत्री बनी हैं…आज खुशी का माहौल होगा कि आदिवासी साथी बड़ी संख्या में मंत्री बने हैं।

उन्होंने कहा कि किसान परिवार और ग्रामीण परिवेश से आने वाले, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समाज से आने वालों को बड़ी संख्या में मंत्रिपरिषद में स्थान मिला है, उनके परिचय में खुशी होनी चाहिए थी ।इसके बाद बिरला ने कहा कि प्रधानमंत्री सदन के पटल पर मंत्रियों के परिचय की सूची रख सकते हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैं पटल पर रखता हूं।’ गौरतलब है कि गत सात जुलाई को नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला मंत्रिपरिषद विस्तार हुआ था जिसके तहत 43 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। इनमें 15 कैबिनेट और 28 राज्य मंत्री हैं।

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में हंगामे के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी मंत्रिपरिषद में शामिल नए मंत्रियों का सदन में औपचारिक रूप से परिचय नहीं करा पाए और उन्हें मंत्रियों के परिचय के दस्तावेज सदन के पटल पर रखने पड़े। सदन में 11 कार्यवाही शुरू होते ही सबसे पहले राष्ट्रगान हुआ और फिर नए नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई गई। इसके पश्चात अध्यक्ष ओम बिरला ने नए मंत्रियों का सदन से परिचय कराने के लिए प्रधानमंत्री को पुकारा। लेकिन विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया।

गांजा पहुंचाने के लिए क्या क्या जतन करते हैं लोग, फिर भी पकड़ जाते हैं लोग!

लखनऊ / हैदराबाद। गांजे (Ganja) को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए ड्रग्‍स स्मगलर (Drugs Smuggler) ने बिल्‍कुल फिल्‍मी तरीका अपनाया था. आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) से निकले ट्रक में गांजे को अनानास और कटहल में के बीच छिपाकर ले जाया जा रहा था। डीआरआई (DRI) की पुणे यूनिट ने पुणे-सोलापुर हाईवे (Pune-Solapur Highway) पर एक ट्रक से 1878 किलो गांजा (Ganja) बरामद किया है. सीज किए गए गांजे की कुल कीमत पौने चार करोड़ रुपये बताई जा रही है।

गांजे को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए ड्रग्‍स स्मगलर (Drugs Smuggler) ने बिल्‍कुल फिल्‍मी तरीका अपनाया था. आंध्र प्रदेश से निकले ट्रक में गांजे को अनानास और कटहल में के बीच छिपाकर ले जाया जा रहा था। 

जानकारी के मुताबिक डीआरआई(DRI) को खुफिया जानकारी मिली थी कि आंध्र प्रदेश में एक ट्रक में गांजा भरकर लाया जा रहा है. जानकारी के आधार पर डीआरआई(DRI) की टीम ने पुणे-सोलापुर हाईवे पर ट्रक को पकड़ने ने लिए जाल बिछाया। 

जैसे ही हाईवे से आंध्र प्रदेश का ट्रक आता दिखाई दिया, वैसे ही उसे रोककर उसकी तलाशी ली गई. शुरुआती जांच में लगा कि ट्रक में अनानास और कटहल ही भरा है. इसके बाद जब ट्रक की पूरी तरह से जांच की गई तो अनानास और कटहल के नीचे 40 बैग मिले. इन बैग के अंदर 1878 किलो गांजा भरा हुआ था. इसकी कीमत पौने चार करोड़ रुपये बताई जा रही है।

इस ट्रक को एक मारुति कार एक्सकॉर्ट कर रही  थी.  डीआरआई ने छानबीन के बाद ट्रक में बैठे दो व्यक्तियों साथ ही कार में मौजूद चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इन आरोपियों ने आंध्र प्रदेश से गांजा की स्मगलिंग महाराष्ट्र और अन्य जगहों पर करने की बात कबूली है, जिसके आधार पर डीआरआई आगे की छानबीन कर रही है।

बता दें कि हाल ही में दिल्ली पुलिस के हाथ बड़ी कामयाबी लगी थी. पुलिस ने 2500 करोड़ की 350 किलो हेरोइन जब्त की थी. इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में तीन हरियाणा से गिरफ्तार किए गए थे और एक आरोपी दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था।

बता दें कि इस ट्रक को एक मारुति कार एक्‍सकॉर्ट कर रही थी. डीआरआई की टीम ने ट्रक में सवार दो लोगों और कार में सवार चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इन आरोपियों ने बताया कि वह आंध्र प्रदेश से गांजा लेकर महाराष्‍ट्र के अलग-अलग जगहों पर पहुंचाया करते थे. बयान के आधार पर डीआरआई की टीम आगे की कार्रवाई करेगी।

डीआरआई ने छानबीन के बाद ट्रक में बैठे दो व्यक्तियों के साथ ही कार में मौजूद चार लोगों को हिरासत में ले लिया गया है डीआईआर के अधिकारी ने बताया कि ट्रक में कटहल और अनानास के बीच रखे 40 बोरों में गांजा पैक किया गया था. एक कार ट्रक के साथ चल रही थी. प्रतिबंधित पदार्थ आंध्र प्रदेश से आया था और इसे पुणे में एक जगह पहुंचाया जाना था। 

इन आरोपियों ने आंध्र प्रदेश से गांजा की स्मगलिंग महाराष्ट्र और अन्य जगहों पर करने की बात कबूली है. जिसके आधार पर डीआरआई आगे की छानबीन की जा रही है. डीआईआर के अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विलास पवार, अभिषेक घवटे, विनोद राठौड़, राजू गोंधवे, श्रीनिवास पवार और धर्मराज शिंदे के रूप में हुई। 

पोशाक प्रोटोकोल : विधानसभा सचिवालय में जींस-टॉप टीशर्ट में इंट्री बैन.. साहब पहनेंगे शर्ट-पैंट और साड़ी सलवार-सूट में रहेंगी मैम

लखनऊ (राज्य मुख्यालय) । उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारी अब दफ्तर में जींस-टीशर्ट नहीं पहन पाएंगे। विधानसभा सचिवालय के संयुक्त सचिव ने आदेश जारी कर कहा कि अधिकारी और कर्मचारी सचिवालय की गरिमा के अनुरूप की पोशाक पहने इसी को लेकर जींस, टीशर्ट और अन्य तरह की पोशाक पहनकर दफ्तर आने पर रोक लगा दी है।

विधानसभा सचिवालय के संयुक्त सचिव नरेंद्र कुमार मिश्रा ने आदेश जारी कर कहा कि विधानसभा सचिवालय के कार्मिक कार्यालय अवधि में टी-शर्ट एवं जींस अथवा इसी प्रकार के अन्य परिधानों को धारण नहीं करेंगे। सभी अधिकारी और कर्मचारियों से यह अपेक्षित है की वे विधान सभा सचिवालय की गरिमा के अनुरूप कार्यालय अवधि में औपचारिक पोशाक धारण करेंगे।

विधान सभा सचिवालय में अब पुरुष कर्मचारी शर्ट-पैंट या ट्राउजर जैसी पोशाक और महिला कर्मचारी साड़ी, सलवार, ट्राउजर पैंट-शर्ट, चूड़ीदार कुर्ता और जरूरत पड़ने पर दुपट्टा पहनकर कार्यालय आ सकती हैं। इसके अलावा महिला कर्मचारी चप्पल, सैंडल या जूते और पुरुष कर्मचारी जूते या सैंडल पहन सकते हैं।

UGC का संदेश , 1 अक्टूबर से कॉलेजों /यूनिवर्सिटीज़ में पढाई का आदेश

लखनऊ / दिल्ली । विश्वविद्यालयों और कालेजों में नए शैक्षणिक सत्र को लेकर फिलहाल असमंजस खत्म हो गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसको लेकर एक विस्तृत गाइड लाइन जारी कर दी है। इसके तहत एक अक्टूबर से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होगा। 30 सितंबर तक विश्वविद्यालयों और कालेजों को अपनी दाखिले की प्रक्रिया को पूरा करना होगा।

यूजीसी ने गाइड लाइन में यह भी साफ किया है कि दाखिले की प्रक्रिया केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) सहित सभी बोर्डो का 12वीं का रिजल्ट आने के बाद ही शुरू होगी।यूजीसी ने इसके साथ ही अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट की है और इन्हें अनिवार्य बताया है।

साथ ही विश्वविद्यालयों और कालेजों से इन्हें आनलाइन या आफलाइन मोड में 31 अगस्त से पहले कराने को भी कहा है। यूजीसी ने इस दौरान सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से कोरोना का तय प्रोटोकाल कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने को भी कहा है। 

यूजीसी के दिशानिर्देशों पर छात्रों एवं शिक्षकों से उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए हमारी रिपोर्टर मुस्कान ने कुछ छात्र छात्राओं से बात की, लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्रा निशा ने इस फैसले पर खुशी जाहिर की और कहा कि लगता है अब हमारे अच्छे दिन आने वाले हैं वहीं एमिटी यूनिवर्सिटी के मीडिया गुरु शिवांशु पाठक ने कहा, कि आनलाइन पढाई कभी क्लास रूम की पढाई का विकल्प नहीं हो सकता उन्होंने उम्मीद जताई कि यूजीसी नये सेशन से आफलाइन पढाई की परमिशन देगा। 

यशपाल शर्मा के बिना विश्व कप जीत जाते हम?

मंगलवार को पूर्व भारतीय क्रिकेटर यशपाल शर्मा (Yashpal Sharma) का हार्ट अटैक की वजह से निधन हो गया। यशपाल 1983 में कपिल देव (Kapil Dev) की कप्तानी में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे थे। यशपाल शर्मा ने भारत की ओर से कुल 37 टेस्ट और 42 वनडे इंटरनेशनल मैच खेले हैं। यशपाल के खाते में कुल 1606 टेस्ट और 883 टेस्ट रन दर्ज हैं, जबकि एक-एक टेस्ट और वनडे विकेट भी उनके नाम पर हैं। यशपाल शर्मा ने लॉर्ड्स के मैदान पर 2 अगस्त 1979 को अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेला था।

यशपाल शर्मा ने 1972 में पंजाब स्कूल्स की तरफ से जम्मू-कश्मीर स्कूल्स के खिलाफ 260 रनों की पारी खेली थी, जिसके बाद वह पहली बार नजर में आए थे। इसके दो साल के अंदर उन्होंने स्टेट टीम में जगह बना ली। 1979 वर्ल्ड कप के लिए वह टीम इंडिया का हिस्सा थे, लेकिन उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला था। 1983 वर्ल्ड कप में उन्होंने भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाते हुए पहले मैच में वेस्टइंडीज के खिलाफ 89 रनों की पारी खेली थी। वह उस मैच में मैन ऑफ द मैच चुने गए थे। 

यशपाल शर्मा का जन्म 11 अगस्त 1954 को पंजाब के लुधियाना में हुआ था। 66 साल की उम्र में उनका निधन हुआ।यशपाल शर्मा के निधन पर पु क्रिकेटर कपिल देव भावुक हो गए, उन्होने कहा पिछले हफ़्ते हम लोग मिले थे ,वो अच्छे स्वभाव में थे । भगवान की मर्जी के साथ हम लड़ नहीं सकते। बहुत अजीब लग रहा है। उनके निधन की खबर के बाद मैं अपने आपको ही नहीं संभाल पा रहा हूं।

यशपाल सिंह को अपने जुझारूपन के लिए जाना जाता है। वर्ल्ड कप 1983 में इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में उनकी अर्धशतकीय पारी क्रिकेट फैन्स को हमेशा याद रहेगी।वह 2000 के दशक के शुरुआती सालों में नेशनल सिलेक्टर भी रहे थे। वेंगसरकर ने कहा, ‘यह अविश्वसनीय है। वह हम सभी में सबसे अधिक फिट था। हम जब उस दिन मिले थे, तो मैंने उससे उसकी दिनचर्या के बारे में पूछा था। वह शाकाहारी था। रात को खाने में सूप लेता था और सुबह की सैर पर जरूर जाता था। मैं सकते में हूं। 

 

यशपाल शर्मा ने रणजी ट्राफी में तीन टीमों पंजाब, हरियाणा और रेलवे का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 160 फर्स्ट क्लास मैचों में 8,933 रन बनाए, जिसमें 21 शतक शामिल हैं। उनका बेस्ट स्कोर नॉटआउट 201 रन रहा। वह अंपायर भी थे और दो महिला वनडे मैचों में उन्होंने अंपायरिंग भी की। वह उत्तर प्रदेश रणजी टीम के कोच भी रहे थे।

शादी में विघ्न… शादी का कार्ड वायरल होते ही शादी रद्द करनी पड़ी

महाराष्ट्र के नासिक में लोगों ने लव जिहाद बता कर विरोध कर दो प्रेमियों की शादी रत करवा दी। नासिक में एक हिंदू लड़की और एक मुस्लिम लड़का अपनी मर्जी से शादी करना चाहते थे। इसके लिए दोनों परिवारों की रजामंदी भी थी।लेकिन जैसे ही शादी का कार्ड सर्कुलेट हुआ समाज के लोगों को दो प्रेमियों का यह मिलन रास नहीं आया। आसपास के लोगों ने लव जिहाद बताकर इस शादी का विरोध करना शुरू कर दिया। जिसके बाद मजबूरन लड़की के परिवार वालों को शादी रद्द करनी पड़ी।

हालांकि इतना सब कुछ होने के बाद भी उनकी कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। लड़की के परिवार ने शादी का आयोजन रद्द होने के बाद भी उसकी पसंद का समर्थन करने की ठानी। परिवार के अनुसार इस मामले में जबरन शादी जैसा कुछ नहीं है। दोनों की शादी पहले ही स्थानीय कोर्ट में रजिस्टर्ड हो चुकी है।

दुल्हन रसिका के पिता प्रसाद ऑडवाकर जौहरी का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि ग्रसिका दिव्यांग है और इस कारण परिवार को उसके लिए अच्छा लड़का देखने में परेशानी आ रही थी पूर्णविराम हाल ही में 28 वर्षीय जेसिका और उसके सहपाठी एवं दोस्त आसिफ खान ने उसके साथ शादी के बंधन में बंधने का फैसला किया था।

पिता ने बताया कि मई में दोनों की शादी नासिक कोर्ट में दोनों परिवारों की मौजूदगी में रजिस्टर्ड हुई थी विराम दोनों परिवार 28 जुलाई को रीति रिवाज से शादी करने को राजी भी थे।लेकिन इससे पहले शादी का कार्ड तमाम रिश्तेदारों को सर को लेट हो गया। इसके बाद रिश्तेदारों ने उन पर शादी रद्द करने का दबाव डाला। इसके बाद उन्होंने शादी का आयोजन रद्द करने का फैसला किया।

करने तारों की सैर, सिरीशा उड़ चलीं स्पेस

लखनऊ / दिल्ली । नासा के अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला और सुनीता विलियम के बाद अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली भारतीय मूल की तीसरी महिला सिरीशा बादला ने 11 जुलाई को मशहूर वर्जिन गैलेक्टिक के मालिक और उद्योगपति रिचार्ड ब्रेन सन के साथ इस रोमांचक सफर पर रवाना हुई। सिरीशा बादला वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी में सरकारी मामलों और शोध कार्यों से जुड़ी अधिकारी है।

ब्रेन सन ,सिरीशा और 4 अन्य पायलट डेबिट मैके, और माइकल मसूची ,ब्रेथ मूसा ,वर्जिन गैलेक्टिक के मुख्य अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण और मुख्य संचालन इंजीनियर कॉलिन बैनेट ने गैलेक्टिक यूनिटी 22 अंतरिक्ष पात्र में सवार होकर अंतरिक्ष का रोमांचक सफर किया।

टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत के दौरान सिरीशा ने बताया मैंने फैसला किया था कि अंतरिक्ष में जाना है चाहे कुछ भी हो। मुझे नहीं पता था कि यह कब होने वाला है लेकिन मुझे पूरा यकीन था कि मैं इसे किसी दिन हकीकत बनाऊंगी पूर्वी नाम में इसके श्रेय अपने दादा दादी और मेरे माता-पिता को देती हूं, जिन्होंने मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया, मुझे अपने सपने के पीछा करते रहने के लिए प्रेरित किया। 

सिरीशा आंध्र प्रदेश के गुंटूर की रहने वाली हैं। निशाने पर यूनिवर्सिटी से एरोनॉटिकल से ग्रेजुएट किया है। उसके बाद उन्होंने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री ली है, वर्तमान में शिक्षा वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी में सरकारी मामलों और शोध कार्यों से जुड़े अधिकारी हैं।

कोरोना पर कसी लगाम, तो आस्ट्रेलियाई सांसद को भाया काम… बोले, योगी को हमें दे दीजिये

कोविड-19 (Covid-19) महामारी के मैनेजमेंट (management) को लेकर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की हर तरफ तारीफ हो रही है. ऑस्ट्रेलिया (Australia) के सांसद क्रैग केली (Craig Kelly) ने भी CM योगी की तारीफ की है. क्रैग केली( craig kelly) को CM योगी का काम इतना ज्यादा पसंद आया कि उन्होंने पूछा कि क्या हमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi adityanath) उधार मिल सकते हैं?

बीते 10 जुलाई को सांसद क्रैग केली(Craig kelly) ने अपने ऑफिशियल ट्वविटर हैंडल(Official Twitter handle) से ट्वीट कर कहा कि भारत का राज्य उत्तर प्रदेश क्या किसी तरीके से अपने CM योगी आदित्यनाथ को हमें उधार दे सकता है, जिससे वो हमें lvermectin (आइवरमेक्टिन) की कमी की समस्या से निकाल सकें. इसकी वजह से हमारे देश में निराशाजनक हालात पैदा हो गए हैं। 

गौरतलब है कि क्रैग केली(Craig kelly) का ट्वीट इस वक्त social media पर तेजी से viral हो रहा है. यूपी में योगी मॉडल (Yogi model)की तारीफ करने से ऑस्ट्रेलियाई सांसद क्रैग कैली खुद को नहीं रोक पाये। 

इसके अलावा उन्होंने कहा कि क्रैग ने एक ट्वीट पर यह जवाब दिया है जिसमें यूपी में कोरोना के मामलों के बारे में  कुछ आंकड़े बताए गए हैं. जे चाइमी ने डाटा साझा करते हुए लिखा है कि यूपी में भारत के 17 फीसदी लोग रहते हैं. पिछले 30 दिन में कोरोना की वजह से हुई कुल मौतों में सिर्फ 2.5 फीसदी यूपी में हुईं और 1 फीसदी से भी कम संक्रमित यहां पाए गए. जबकि महाराष्ट्र में भारत की कुल आबादी के 9 फीसदी लोग रहते हैं. यहां 18 प्रतिशत कोरोना के केस मिले और 50 फीसदी संक्रमितों की मौत हुई.महाराष्ट्र भारत का फार्मा हब है और यूपी आइवरमेक्टिन के इस्तेमाल में चैम्पियन।

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया(Australiya) अभी भी कोरोना के कहर से जूझ रहा है. पिछले 24 घंटे में यहां 31 हजार कोरोना केस आए थे। महाराष्ट्र में भारत की 9 प्रतिशत आबादी है और यहां 18 प्रतिशत कोरोना के मामले रहे और कुल मौत का पचास फीसदी आंकड़ा भी यहीं से रहा है.  बता दें कि ऑस्ट्रेलिया(Australia) अभी भी कोरोना के कहर से जूझ रहा है. पिछले 24 घंटे में यहां 31 हजार कोरोना केस आए थे। 

बता दें कि शनिवार को उत्तर प्रदेश में 125 नए कोविड मामले सामने आए. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी ढिलाई के ट्रिपल टी यानी टेस्टिंग (Testing), ट्रैकिंग (Tracking) और ट्रीटमेंट (Treatment) जारी रखने की जरूरत के बारे में अधिकारियों को निर्देश दिया है। कोविड प्रबंधन को लेकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विदेशों में भी तारीफ हो रही है। इस संबंध में ऑस्ट्रेलियाई सांसद क्रेग केली का एक ट्वीट वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने यूपी सरकार के कोविड प्रबंधन की तारीफ की है।

वॉइस चांसलर प्रोफेसर पाठक ने रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए बड़ी पहल की

लखनऊ / कानपुर । छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय  में शुक्रवार को कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की अगुवाई में वित्त समिति की बैठक हुई। अब छात्र-छात्राओं को ऑफिस मैनेजमेंट व सेक्रेटरियल प्रैक्टिस की अप्रेंटिसशिप कराई जाएगी।

कानपुर में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के छात्र अब बिना किसी रुकावट के शोध कर सकेंगे। विवि ने विभिन्न शोध परियोजनाओं के लिए 45 लाख रुपये का बजट पास किया है। यह बजट शोध को बढ़ावा देने के साथ रिसर्च एवं डेवलपमेंट सेल के तहत होने वाले विभिन्न प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे। 

साथ ही छात्रों को अप्रेंटिसशिप व इंटर्नशिप के मानदेय के लिए भी बजट पास कर दिया गया है। विवि में शुक्रवार को कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की अगुवाई में वित्त समिति की बैठक हुई। अब छात्र-छात्राओं को ऑफिस मैनेजमेंट व सेक्रेटरियल प्रैक्टिस की अप्रेंटिसशिप कराई जाएगी।

इसके तहत 20 प्रशिक्षुकों को प्रति माह 8000 रुपये मानदेय दिया जाएगा। इसके लिए वार्षिक बजट 19,20,000 रुपये पास किया गया। वहीं, विभिन्न विभागों के 88 छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाएगी।  इसमें 11 माह तक 8000 रुपये प्रति माह और अंतिम वर्ष के छात्रों को छह माह तक 2000 रुपये प्रति माह दिया जाएगा। 

 नई एमबीए बिल्डिंग के लिए बजट पास हो गया है। शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के पेंशन की धनराशि की सुरक्षा के लिए 50 करोड़ रुपये के कॉरपस फंड बनाया जाएगा। विवि में दो इलेक्ट्रिक कारें भी आएंगी। अधिकारी इन कारों का प्रयोग कर सकेंगे। बैठक में इस मौके पर वित्त अधिकारी साधना श्रीवास्तव, अपर निदेशक कोषागार अजय जौहरी, डीन प्रशासन प्रो. सुधांशु पांडिया, रजिस्ट्रार डॉ. अनिल कुमार यादव, अंजनी कुमार मिश्रा, डॉ.रिपुदमन सिंह आदि मौजूद रहे।

बच गया लखनऊ! काकोरी इलाके से अलकायदा के दो आतंकी गिरफ्तार ATS की टीम को मिला कई हथियार और बम बनाने का सामान

रविवार दोपहर लखनऊ काकोरी थाना क्षेत्र में आतंकी होने की सूचना से हड़कंप मच गया. सूचना पर पुलिस और एटीएस की टीम ने दुबग्गा चौराहे के पास एक घर को अपने घेरे में लिया है। राजधानी लखनऊ के काकोरी इलाके से अलकायदा के दो संदिग्ध आतंकियों को पकड़ा गया है. एक संदिग्ध आतंकी को मंडियाव से हिरासत में लिया गया है. गिरफ्तार अलकायदा के आतंकियों के पास से प्रेशर कुकर और टाइम बम बरामद किया गया है।

एटीएस के आईजी जीके गोस्वामी ने एबीपी न्यूज़ से कहा कि आतंकी कई दिनों से रडार पर थे. इनकी साजिश सीरियल ब्लास्ट को अंजाम देने की थी. भीड़-भाड़ वाले बाजार इनके निशाने पर थे. गिरफ्तार आतंकियों के हैंडलर का नाम उमर अल मंदी है. इसमें से एक आतंकी पर कश्मीर हमले में शामिल होने का आरोप है। 

बताया जा रहा है कि इनके आतंकी कनेक्शन है और जम्मू-कश्मीर की आतंकी घटना से भी सम्बंध हैं. दोनों से पूछताछ की जा रही है. आतंकियों के कब्‍जे से विस्‍फोटक भी मिला है. यूपी ATS  के मुताबिक, इनका हैंडलर पाकिस्तानी है और अलक़ायदा से भी इनके सम्बंध हो सकते हैं, जिसकी पूछताछ की जा रही है। 

केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर ऑपरेशन चलाया गया. एटीएस के जवानों ने अभी भी काकोरी इलाके के एक घर को घेरा हुआ है. आसपास के घरों को खाली करा दिया गया. डॉग स्क्वॉयड और बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया। 

एटीएस के सूत्रों के मुताबिक, आतंकियों के निशाने पर बीजेपी के बड़े नेता थे. काकोरी इलाके में जिस जगह से घर है, उसी के बास ही बीजेपी के सांसद कौशल किशोर का भी आवास है, जिन्हें हाल ही में केंद्र में मंत्री बनाया गया है. बता दें कि इससे पहले काकोरी के हाजी कॉलोनी में सैफुद्दीन सैफी को पुलिस ने मार गिराया था. मार्च 2017 में करीब 12 घंटे तक ऑपरेशन चला था। 

लखनऊ से आतंकियों के गिरफ्तार होने के बाद अयोध्या में अलर्ट जारी कर दिया गया है. पुलिस जगह-जगह पर चेकिंग कर रही है। टीम घर के अंदर मौजूद लोगों से पूछताछ कर रही है. एटीएस की टीम के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद है. मामले में एक को हिरासत में लिया गया है.एटीएस ने मलिहाबाद निवासी शाहिद के गैराज पर छापा मारा है. घर के अंदर वसीम नाम का युवक मौजूद है. पूछताछ पूरी होने के बाद एटीएस मामले की पूरी जानकारी देगी।

उमर अल-मंदी इन आतंकियों का कंट्रोलर था,पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर से हैंडलिंग हुई. छोटे ब्लास्ट की वजह से ATS को सुराग मिला था. आतंकियों ने गिरफ्तारी से पहले घर के अंदर कुछ जलाया था. घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के पुलिस अफसर भी एटीएस टीम के संपर्क में हैं वहीं आईजी एटीएस जीके गोस्वामी मौके पर मौजूद हैं। बम बनाने की 6 से 7 किलो सामग्री भी ATS की टीम को बरामद हुई है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को यूपी ATS ने एक संदिग्ध को छापेमारी कर गिरफ्तार किया था. उसी की निशानदेही पर रविवार सुबह फिर ATS ने दुबग्गा में सिराज, रियाज और शाहिद उर्फ गुड्डू के घर पर छापा मारा. ATS ने छापेमारी के दौरान कॉलोनी से शाहिद उर्फ गुड्डू और वसीम को गिरफ्तार किया और उनसे पूछताछ की. इसके बाद ATS वसीम नाम के युवक गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई है. जानकारी के अनुसार, शाहिद अपने परिवार के साथ दुबग्गा की सीता विहार कॉलोनी में रहता है. बताया गया कि उसने पांच मकानों को किराए पर दिया हुआ है। 

प्रेशर कुकर बम को ले जाने में भी आसानी होती है, और इसका इस्तेमाल भीड़भाड़ वाली जगहों पर ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को हताहत करने में होता है. यूपी में चुनाव होने हैं ऐसे में किसी बड़ी आशंका को ख़ारिज नहीं किया जा सकता है. कुछ मैप और दस्तावेज जलाने की बात भी सामने आई है, जिसको लेकर ATS पूछताछ और छानबीन कर रही है. बताया जा रहा है कि बम बनाने की 6 से 7 किलो सामग्री भी ATS की टीम को बरामद हुई है।

अलकायदा ने साल 2014 इंडिया सबकॉन्टिनेंट का एलान किया था. खुफिया एजंसियों ने बाद में खुलासा किया था कि अलकायदा इंडिया सबकॉन्टिनेंट का चीफ उत्तर प्रदेश के सम्भल का रहने वाला है, जिसका नाम मौलाना असीम उमर है. बहुत पहले असीम उमर पाकिस्तान शिफ्ट हो गया था जो बाद मे अलकायदा से जुड़ गया था. कुछ साल पहले मौलाना असीम उमर को अफगानिस्तान में अफगान एजेंसियों ने मार गिराया था। 

लेकिन अलकायदा के स्लीपर सेल्स को लगातार यूपी से पकड़ा जाता रहा है. इन्हें पकड़ने मे दिल्ली पुलिस समेत तमाम एजेंसियां शामिल रहती हैं। करीब तीन साल पहले इसी इलाके में सैफुल्लाह एनकाउंटर हुआ था. 8 मार्च 2017 को करीब 11 घंटे चले ऑपरेशन में संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह को मारा गया था. उसके पास से कुछ हथियार और दस्तावेज बरामद होने की बात कही थी. बाद में इस एनकाउंटर के मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए थे। 

पहले आतंकी का नाम शाहिद उर्फ गुड्डू बताया जा रहा है, जो उन्नाव का रहने वाला है। उसी के घर में दूसरा आतंकी भी छिपा हुआ था। यह दोनों ट्रेनिंग प्राप्त आतंकी हैं। इके घर में काफी गोला-बारूद होने की मिला है। इसके बाद एक टीम उन्नाव भी रवाना हो गई है।मकान में संदिग्ध लोगों के छुपे होने की आशंका पर उत्तर प्रदेश एटीएस की टीम ने छापा मारा । काकोरी थाना क्षेत्र के दुबग्गा में एटीएस के साथ पुलिस की टीम भी है। घर के अंदर मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है। 

लखनऊ में इससे पहले भी मार्च 2017 में सुरक्षा बलों ने आतंकी सैफुल्ला को मार गिराया था, जो आइएसआइएस के खुरासान मॉड्यूल का सदस्य था। वह कानपुर का रहने वाला था। वारदात के बाद कानुपर और उन्नाव में भी कई आतंकियों की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद सितंबर 2018 में चकेरी के जाजमऊ अहिरवां स्थित शिवनगर कॉलोनी पकड़े गए हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी कमरुज्जमां उर्फ कमरुद्दीन उर्फ डॉ. हुरैरा को गिरफ्तार किया था। इसके साथ ही चंद रोज पहले ही काकोरी में मतांतरण के मामले में उमर गौतम के ठिकानों पर छापा मारा गया था। 

उमर अल-मंदी इन आतंकियों का कंट्रोलर था,पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर से हैंडलिंग हुई. छोटे ब्लास्ट की वजह से ATS को सुराग मिला था. आतंकियों ने गिरफ्तारी से पहले घर के अंदर कुछ जलाया था. घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के पुलिस अफसर भी एटीएस टीम के संपर्क में हैं वहीं आईजी एटीएस जीके गोस्वामी मौके पर मौजूद हैं। 

नए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ऐक्शन मोड में, 2 शिफ्टों में काम करेंगे रेलवे कर्मचारी 

लखनऊ / दिल्ली । रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव एक्शन में नजर आ रहे हैं. मंत्रालय संभालते ही पहले अश्विनी वैष्णव ने रेल मंत्रालय में काम के घंटे को लेकर नए निर्देश जारी कर दिए हैं । मोदी सरकार के नए रेल मंत्री अश्व‍िनी वैष्णव ने गुरुवार को अपना कार्यभार संभाला और पदभार संभालते ही उन्होंने सबसे पहले अपने ऑफिस के स्टाफ के काम करने की टाइमिंग में बदलाव किया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों को दो शिफ्ट में काम करने का आदेश दिया।

रेल मंत्री के दफ्तर से जारी आदेश के मुताबिक, पहली शिफ्ट सुबह 7 बजे शुरू होगी और शाम 4 बजे समाप्त होगी जबकि दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 बजे शुरू होगी और मध्यरात्रि में 12 बजे समाप्त होगी। रेल मंत्रालय के एडीजी पीआर डीजे नारायण के मुताबिक, यह आदेश सिर्फ एमआर सेल (मंत्री कार्यालय) के लिए जारी किया गया है न कि प्राइवेट या रेलवे स्टाफ के लिए। https://sverige-ed.com/kopa-receptf…-levitra/

रेल मंत्रालय के एडीजी पीआर डीजे नारायण ने कहा कि रेल मंत्री ने निर्देश दिया है कि मंत्री के दफ्तर रके सभी कार्यालय और कर्मचारी तत्काल प्रभाव से दो शिफ्ट यानी 7:00 बजे से 4:00 बजे और 3:00 बजे -12:00 बजे तक काम करेंगे। इस आदेश पत्र में लिखा हुआ है कि मिशन मोड पर रेलवे के लिए अभी बहुत कुछ करना है और हर मिटन यहां कीमती है।

कार्यभार संभालने के बाद नए मंत्री ने कहा था कि रेलवे पीएम मोदी के विजन का अहम हिस्सा है और वह इस विजन को हकीकत में बदलने के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा कि रेलवे के जरिये लोगों के जीवन को बदलना है ताकि आम आदमी, किसान, गरीबों को इसका लाभ मिले।

बता दें कि एक पूर्व आईएएस अधिकारी वैष्णव को रेल मंत्री, संचार मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नियुक्त किया गया है। वहीं, वैष्णव से पहले रेल मंत्रालय पहले पीयूष गोयल के अधीन था, जिन्हें वाणिज्य और उद्योग मंत्रालयों, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण और कपड़ा का प्रभार दिया गया है।

प्रेसिडेंट बाइडन ने कहा अमेरिकी सेना की तैनाती अफगानिस्तान समस्या का समाधान नहीं

तालिबान के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को रूस की राजधानी मास्को में अफगानिस्तान के लिए रूस के विशेष दूत जमीर काबुलोव से बातचीत की। खबरों के मुताबिक इस बैठक में काबुलोव ने अफगानिस्तान में तेज हो रही लड़ाई पर रूस की चिंता तालिबान प्रतिनिधिमंडल को बताई।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के ये साफ कर देने के बाद अब अमेरिकी फौज की अफगानिस्तान में तैनाती की अवधि किसी सूरत में नहीं बढ़ाई जाएगी, अफगानिस्तान की भावी व्यवस्था को लेकर आशंकाएं और गहरा गई हैं। बाइडन ने गुरुवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में दो टूक कह दिया कि सारे अमेरिकी फौजी 31 अगस्त तक अफगानिस्तान से चले जाएंगे। बाइडन ने बेलाग ढंग से ये बात मानी कि अमेरिकी सेना की तैनाती अफगानिस्तान की समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि तकरीबन 20 साल के अनुभव से ये साफ है कि अगर अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान में एक साल और रह जाएं, तब भी उससे वहां की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा।

ये स्थिति साफ होने के बाद अब अफगानिस्तान में क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका और बढ़ती नजर आ रही है। खुद अमेरिका भी इसके लिए अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों को प्रोत्साहित कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने एक प्रेस कांफ्रेंस में अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों से कहा कि वे अफगान शांति वार्ता में रचनात्मक भूमिका निभाएं, ताकि वहां ‘न्यायपूर्ण और टिकाऊ शांति’ कायम हो सके। उन्होंने इस सिलसिले में अमेरिका के विरोधी माने जाने वाले ईरान की भूमिका की भी सराहना की। गौरतलब है कि ईरान ने अपने यहां अफगानिस्तान से जुड़े पक्षों की एक-दो दिन की बैठक बुधवार और गुरुवार को आयोजित की।

ईरान की राजधानी तेहरान में हुई बैठक में अफगान के राजनेताओं और तालिबान के प्रतिनिधियों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि युद्ध अफगान समस्या का समाधान नहीं है। बैठक के बाद दोनों पक्षों ने एक छह सूत्री बयान जारी किया, जिसमें शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचने की जरूरत पर जोर दिया गया। इस बयान के मुताबिक दोनों पक्षों में इस बात पर सहमति बनी कि अफगानिस्तान में इस्लामी व्यवस्था लागू की जाएगी। साथ ही एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी, जिससे युद्ध जैसे हालात से देश को निकाल कर वहां स्थायी शांति कायम की जा सके।

पर्यवेक्षक इस सहमति को महत्वपूर्ण मान रहे हैं। इसका मतलब यह समझा गया है कि अफगानिस्तान के राजनेता तालिबान की इस मांग से सहमत हो गए हैं कि अफगानिस्तान में नई व्यवस्था इस्लामी प्रणाली से चलेगी। बैठक में अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति युनूस कानूनी, पूर्व राष्ट्रपति हमीद करजई के चीफ ऑफ स्टाफ रहे अरशाद अहमदी, राष्ट्रपति अशरफ ग़नी के सलाहकार सलाम रहीमी, हिज्ब-ए-वहदात पारटी के नेता जहीर वहदात और जुनबिश पार्टी के नेता मोहम्मदुल्लाह बताश शामिल हुए। बैठक के बाद जारी बयान में आम लोगों के घरों, स्कूलों, मस्जिदों, अस्पतालों आदि पर हमले और नागरिकों को निशाना बनाने की घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा की गई।

बुधवार को दो दिन की ये बैठक ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ के संबोधन से शुरू हुई थी। इसमें तालिबान के दल के नेतृत्व इस संगठन के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद अब्बास स्तनिकजई ने किया। उधर कतर का एक विशेष दूत गुरुवार को काबुल पहुंचा। वहां उसने वरिष्ठ अफगान नेताओं के साथ दोहा वार्ता को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।

इस बीच तालिबान के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को रूस की राजधानी मास्को में अफगानिस्तान के लिए रूस के विशेष दूत जमीर काबुलोव से बातचीत की। खबरों के मुताबिक इस बैठक में काबुलोव ने अफगानिस्तान में तेज हो रही लड़ाई पर रूस की चिंता तालिबान प्रतिनिधिमंडल को बताई। रूसी एजेंसी तास के मुताबिक तालिबान ने रूस को आश्वासन दिया कि तालिबान मध्य एशियाई देशों की सीमा का उल्लंघन नहीं करेगा।

इन घटनाक्रमों से साफ है कि जिस समय अमेरिका ने अफगानिस्तान को उसकी जनता के भरोसे छोड़ कर अपनी फौज लौटाने का अटल फैसला कर लिया है, अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों ने अगस्त के बाद अफगानिस्तान में बनने वाली व्यवस्था को लेकर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। इन गतिविधियों पर अब सारी दुनिया की नजर है। 

कश्मीर : सुंदरबनी में सुरक्षाबलों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया

जम्मू कश्मीर के सुंदरबनी सेक्टर में पाकिस्तान से भारत में घुसपैठ की कोशिश कर रहे दो आतंकी को सुरक्षाबलों ने मार गिराया। इस दौरान एक जेसीओ समेत दो जवान शहीद हो गए और एक जवान घायल भी हो गया। आतंकवादियों ने पिछले 24 घंटे में दूसरी बार घुसपैठ की कोशिश की है।रजौली जिले के सुंदरबनी के डंडाडाल के जंगलों में आतंकियों की तरफ से गोलीबारी हुई इससे सुरक्षा बलों की कार्रवाई में दो पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए।

बताया जा रहा है कि मारे गए दोनों आतंकियों के पास से दो एके-47 राइफल समय भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया है । इस मुठभेड़ के बाद सेना की 17 मद्रास रेजीमेंट के नायब सूबेदार श्रीजीत और सिपाही जसवंत रेड्डी शहीद हो गए।

सेना प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद के मुताबिक 29 जून नियंत्रण रेखा पर सुंदरबनी सेक्टर के गांव दादर में कुछ संदिग्ध को देखा गया था। इन संदिग्धो की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन लगातार जारी था । यह संदिग्ध आतंकवादी थे जो दादर के जंगलों की एक गुफा में छिपे हुए थे , सर्च ऑपरेशन के दौरान जब आतंकियों ने सेना को उनके पास आते देखा तो उन्होंने ग्रेनेड फेंक कर गोलीबारी शुरू कर दी। 

 

उसके बाद सेना ने भी जवाबी कार्रवाई की और दो आतंकवादियों को ढेर कर दिया। इससे पहले जम्मू और कश्मीर के कुलगाम और पुलवामा जिलों में पिछले 24 घंटे के अंदर सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 4 आतंकवादी मारे गए।

कैबिनेट विस्तार… कुछ गये कुछ आये, जानिये कौन गया कौन आया

लखनऊ / दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल का आज यानी बुधवार को विस्तार होने जा रहा है। 43 नए मंत्री शपथ लेंगे। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 2 साल पूरे होने के बाद पहली बार कैबिनेट में बदलाव होने जा रहा है जो 43 नेता आज मंत्री पद की शपथ लेंगे उनके नाम जारी हो गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में 43 नेताओं को शामिल किया गया है। इनके नाम हैं,नारायण राणे,सर्बानंद सोनोवाल, डॉ.वीरेंद्र कुमार, ज्योतिरादित्य सिंधिया, रामचंद्र प्रसाद सिंह, अश्विनी वैष्णव, पशुपति कुमार पारस, किरेन रिजिजू, राजकुमार सिंह, हरदीप सिंह पुरी, मनसुख मंडाविया, भूपेंदर यादव, परषोत्तम रुपाला, जी किशन रेड्डी, अनुराग सिंह ठाकुर, पंकज चौधरी, अनुप्रिया सिंह पटेल, सत्यपाल सिंह बघेल, राजीव चंद्रशेखर, शोभा करांडलाजे, भानु प्रताप सिंह वर्मा, दर्शना विक्रम जरदोश, मीनाक्षी लेखी, अन्नपूर्णा देवी, ए नारायणस्वामी, कौशल किशोर, अजय भट्ट, बीएल वर्मा, अजय कुमार, चौहान देवसिंह, भगवंत खुबा, कपिल मोरेश्वर पाटिल, प्रतिमा भौमिक, सुभाष सरकार, भागवत किशनराव कराड, राजकुमार रंजन सिंह, भारती प्रवीण पवार, बिश्वेश्वर तुडु, शांतनु ठाकुर, मुंजपारा महेंद्रभाई, जॉन बरला, डॉ. एल मुरुगन, नीशीथ प्रमाणिक।

कैबिनेट विस्तार को लेकर कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कुछ दलितों और पिछड़ी जाति के सदस्यों को मंत्री बनाया गया है। वे (केंद्र सरकार) ऐसा चुनावों को देखते हुए कर रहे हैं। ऐसा लोगों को भटकाने के लिए किया जा रहा है। खड़गे ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ऐसा समुदायों के हित के लिए नहीं बल्कि अपने हित के लिए कर रही है।केंद्रीय कैबिनेट के विस्तार में आज 43 नेता शपथ लेंगे। इनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया,पशुपति कुमार पारस,भूपेंदर यादव अनुप्रिया पटेल,शोभा करांडलाजे, मीनाक्षी लेखी,अजय भट्ट और अनुराग ठाकुर आदि नेताओं के नाम शामिल हैं। 

कैबिनेट विस्तार से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन समेत दर्जन भर मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले मंत्रियों में निशंक और हर्षवर्धन के अलावा स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौधरी, महिला बाल विकास मंत्री देबोश्री चौधरी, उर्वरक और रसायन मंत्री सदानंद गौड़ा, श्रम राज्य मंत्री संतोष गंगवार, शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे, बाबुल सुप्रियो, प्रताप सारंगी और रतन लाल कटारिया से भी इस्तीफा लिया जा चुका है। केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत ने मंगलवार को ही इस्तीफा दे दिया था। उन्हें कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया है। 

प्रधानमंत्री मोदी की कैबिनेट विस्तार में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश के चार चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। इन चेहरों में से दा को कैबिनेट और दो को राज्य मंत्री का पद दिया जा सकता है। अभी तक यूपी से जिन नामों की चर्चा हो रही है, उसमें अनुप्रिया पटेल और कौशांबी से सांसद विनोद सोनकर का नाम लगभग फाइनल हो चुका है। वहीं खीरी से सांसद अजय कुमार मिश्र और राज्यसभा सांसद बीएल वर्मा का भी नाम लिस्ट में बताया जा रहा है। सभी प्रधानमंत्री आवास पर पहुंचे हैं।राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, मंत्रिमंडल में बदलाव के बाद ये मोदी की सबसे युवा और टैलेंटेड टीम होगी। मोदी के मंत्रिमंडल में आज शामिल होने वाले मंत्रियो में 12 अनुसूचित जाति, 8 आदिवासी और 27 पिछड़े वर्ग से हो सकते हैं।

पीएम मोदी की कैबिनेट के लिए आज शपथ लेने वाले संभावित चेहरों में  ज्योतिरादित्य सिंधिया, सर्वानंद सोनोवाल, अजय भट्ट, कपिल पाटिल, शांतनु ठाकुर, पशुपति पारस, नारायण राणे, मीनाक्षी लेखी, शोभा करांडलजे, अनुप्रिया पटेल, हिना गावित, अजय मिश्रा, सुनीता दुग्गल, भागवत कराड, भारती पवार, भानु प्रताप वर्मा, मनोज तिवारी और आरसीपी सिंह शामिल है।

बिहार की राजधानी पटना मे केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि आज प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया है, हम वहां भाग लेने जा रहे हैं। एनडीए की सरकार अखंड रहेगी, हमारी सरकार चल रही है, आगे भी लंबी अवधि तक चलती रहेगी।

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कहा कि ये सारी चीजें वे चुनाव को ध्यान में रखकर कर रहे हैं। ये भी देखना है कि दलितों, शोषित वर्गों, अस्पृश्यों और दबे कुचले लोगों को वे कौन से अच्छे पोर्टफोलियो देने वाले हैं। कई बार लोगों को दिखाने के लिए वे ऐसी चीजें करते हैं। वो 2 साल पहले भी कर सकते थे। 

दिलीप कुमार 100 साल के हो जाते …गर 2021 और 22 का बर्थडे और मना लेते!

लखनऊ / दिल्ली / मुंबई। काश कि ऐक्टिंग का चलता फिरता जीता जागता विश्वविद्याय अपना दो बर्थडे और मना लेते तो वो शतायु हो जाते लेेकिन कुदरत के काम में किसने दखल दिया है! लंबे समय से बीमार चल रहे दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का बुधवार की सुबह मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में निधन हो गया वो 98 साल के थे । इस खबर की पुष्टि अभिनेता और पूूर्व सांसद दिलीप कुमार के भतीजे रिहान अहमद ने की । 

जानकारी के मुताबिक बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का बुधवार को सुबह 7 बजकर 30 मिनट पर निधन हो गया वो 98 साल के थे। दिलीप कुमार को सांस लेने में दिक्कत के चलते 29 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एक्टर की पत्नी श्यारा बानो पूरे समय उनके साथ थी , उन्होंने दिलीप कुमार के प्रसंशको को आश्वासन दिया था कि उनकी हालत अब स्थिर है । 

दिलीप कुमार के निधन की खबर मिलते ही देश दुनिया में उनके चाहने वालों एवं फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर छा गई है, राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द, उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख व्यक्त किया है उधर बलीवुड के ऐक्टर्स ऐक्ट्रेस और सपोर्टिंग स्टाफ उनके निधन पर दुख व्यक्त कर रहे है।

आपकों बताते चलें कि दिलीप कुमार का असली नाम मुहम्मद यूसुफ खान था। उनका जन्म 11 दिसंबर 1922 को हुआ था उन्हें हिंदी सिनेमा में “The first Khan” के नाम से जाना जाता हैं, हिंदी सिनेमा में मेथड एक्टिंग का क्रेडिट उन्हें ही जाता हैं। दिलीप कुमार ने अपने एक्टिंग कि शुरूआत 1944 में फिल्म ज्वार भाटा से कि थी इसे बॉम्बे टॉकीज ने प्रोड्यूस किया था । करीब 5 दशक के एक्टिंग कैरियर में 65 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। 

मुगल ए आजम , देवदास ,नया दौर , राम और श्याम जैसी हिट फिल्में रही हैं। 1976 में दिलीप ने काम से 5 साल का ब्रेक लिए था । उसके बाद 1981 में उन्होने क्रांति फिल्म से वापसी की । इसके बाद वो मशाल (1984) , करमा ( 1986 ) , सौदागर (1991) जैसी फिल्में की ।आखिरी बार 1998 में वो फिल्म किला में नजर आए।

उत्तर प्रदेश खुल रहा है … खेल खेलिये, फिल्में देखिये और बॉडी बनाईये

लखनऊ (राज्य मुख्यालय)। उत्तर प्रदेश में अब कोरॉना से लॉकडाउन में फिर से ढील दी रही हैं।वहीं अब लोगों की सुविधाओं को देखते हुए यूपी में दुकानें वा कई चीजों को खोला जा रहा हैं लेकिन शनिवार और रविवार साप्ताहिक बंदी जारी रहेगी। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार कमी आ रही है । ऐसे में देश के बाकी हिस्सों में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो चुकी हैं। यूपी और दिल्ली ,कर्नाटक समेत जम्मू कश्मीर में कोरोना लॉकडॉउन में फिर ढील दी जा रही हैं। 

प्रदेश में कोरोना महामारी के वजह से बंद चल रहे सिनेमाघर मल्टीप्लेक्स ,जिम स्पोर्ट्स स्टेडियम और दफ्तरों को सोमवार से खोलने की अनुमति दे दी गई हैं। वहीं स्विमिंग पूल और शिक्षण कार्य के लिए स्कूल वा कॉलेज अब भी बन्द रहेंगे ।

अपर सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि कोरोना के कम होते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने कोरोना प्रोटोकॉल के तहत गतिविधियों कि शुरूवात कर दी हैं।

बता दें कि सप्ताह में पांच दिन सोमवार से शुक्रवार तक खोलने कि इजाजत दी गई हैं। स्विमिंग पूल पहले कि तरह अगले आदेश तक बंद रहेंगे ।विवाह वा धार्मिक स्थलों पर भी एक समय में अधिकतम 50 लोगो को जमा होने पर छूट होगी। 

राजनीतिक , सामाजिक आयोजनों और सभाओं पर पहले की तरह ही पाबन्दी बरकरार रहेगी। एक जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टीम 9 की बैठक में इन तमाम गतिविधियों को शुरू करने के निर्देश दिए थे।  उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बारे में दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

CBI का छापा : गोमती रिवर फ्रंट में घोटाले की जांच

लखनऊ / दिल्ली । उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार के कार्यकाल के दौरान लखनऊ में बड़े घोटाले में CBI ने अपनी जांच की गति तेज कर दी है। लखनऊ में चर्चित Gomati river front घोटाले में सुबूत जुटाने के लिए सोमवार को CBI ने ताबड़तोड़ छापे मारे। सिंचाई विभाग के इस project से जुड़े रहे तत्कालीन 16 engineer समेत 189 फर्म्स और कंपनियों के प्रतिनिधियों के ठिकानों पर छानबीन की गई। यूपी के 13 शहरों के अलावा अलवर (राजस्थान) और कोलकाता में एक साथ 40 जगहों पर सीबीआई की टीमें पहुंचीं। देर शाम तक सीबीआई की पड़ताल जारी थी। 

 

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने यूपी सरकार के अनुरोध पर दो जुलाई को ही इस मामले में केस दर्ज किया था। यह मुकदमा IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत लिखा गया। सिंचाई विभाग के करीब 407 करोड़ रुपये लागत के गोमती रिवर चैनलाइजेशन प्रोजेक्ट और गोमती रिवर फ्रंट डवलपमेंट प्रोजेक्ट में अनियमितताएं और अवैध गतिविधियां सामने आने पर यह कार्रवाई की गई। इससे पहले लखनऊ के गोमती नगर पुलिस थाने में भी इस मामले में FIR दर्ज हो चुकी है।

सीबीआइ की एंटी करप्शन की टीमों ने एक साथ उत्तर प्रदेश में राजधानी लखनऊ के साथ गाजियाबाद, बरेली, गौतमबुद्धनगर, सीतापुर, बुलंदशहर, आगरा, रायबरेली, इटावा तथा पश्चिम बंगाल और राजस्थान के कई जिलों में छापा मारा है। लखनऊ में करीब 1800 करोड़ के घोटाले में 190 लोगों के खिलाफ नया केस दर्ज किया गया है। इनमें नेता, व्यापारी तथा आइएएस अधिकारी व इंजीनियर भी हैं। सीबीआइ की एंटी करप्शन टीम ने गोमती रिवरफ्रंट घोटाले में आधा दर्जन आरोपितों के कई ठिकानों पर एक साथ छापा मारा है। टीमें कागजों की पड़ताल में लगी हैं। यह मामला बेहद गंभीर होने के कारण कोई भी कसर नहीं छोड़ी जा रही है।

गाजियाबाद के शिवालिक अपार्टमेंट में सिंचाई विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता रूप सिंह यादव के घर पर कई गाडिय़ों में टीम पहुंची है। यहां पर छापेमारी चल रही है। बुलंदशहर में रिवर फ्रंट घोटाले में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य राकेश भाटी के आवास प्रीत विहार के घर पर छापा मारा गया। आगरा में भाजपा नेता नितिन गुप्ता के घर विजय नगर कालोनी में सीबीआइ की टीम पहुंची। नितिन गुप्ता पहले समाजवादी पार्टी में बड़े पद पर था। उसकी अनुपमा ट्रेडिंग कंपनी के नाम से फर्म है। इसने रिवर फ्रंट में पत्थर लगवाने का काम किया था।

इटावा में रिवर फ्रंट घोटाले में सीबीआई का शहर के चोगुर्जी मैं ठेकेदार पुनीत अग्रवाल के घर पर छापा मारा गया। पुनीत अग्रवाल को पूर्व मंत्री शिवपाल यादव का बेहद करीबी बताया जाता है। सीबीआई की छह सदस्य की टीम सुबह पुनीत अग्रवाल के घर पर पहुंची थी। इस टीम ने पुनीत अग्रवाल के ठेके के कागजों की जांच की गई है। पुनीत ने 2012-13 में रिवर फ्रंट पर नहर में बंधा बनाने का कार्य किया था। पुनीत अग्रवाल ने बताया कि वह इस समय इटावा में नहीं है बाहर है वह सीबीआई को सारे कागज पहले ही दे चुका है। 

इसको गुजरात के साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर सजाने की योजना थी। समाजवादी पार्टी की सरकार ने गोमती रिवर फ्रंट के लिए 1513 करोड़ मंजूर किए थे। इसमें 1437 करोड़ रुपये जारी होने के बाद भी मात्र 60 फीसदी काम ही हुआ। इस दौरान रिवर फ्रंट का काम करने वाली संस्थाओं ने 95 फीसदी बजट खर्च करके भी पूरा काम नहीं किया था।

इस घोटाले में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के कई करीबी नेता भी आरोपित हैं। आरोप है कि डिफाल्टर कंपनी को ठेका देने के लिए टेंडर की शर्तों में बदलाव किया गया था। इस बड़े प्रोजेक्ट में करीब 800 टेंडर निकाले गए थे, जिसका अधिकार चीफ इंजीनियर को दे दिया गया था। मई 2017 में रिटायर्ड जज आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में इसकी न्यायिक जांच में कई खामियां उजागर हुईं। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर योगी आदित्यनाथ सरकार ने सीबीआइ जांच की सिफारिश की थी।

घोटाले के मामले में 19 जून 2017 को गौतमपल्ली थाने में आठ लोगों के खिलाफ अपराधिक केस दर्ज किया गया था। इसके बाद नवंबर 2017 में ईओडब्ल्यू उत्तर प्रदेश ने भी जांच शुरू कर दी थी। दिसंबर 2017 में मामले की जांच सीबीआइ के पास चली गई और जांच एजेंसी ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। दिसंबर 2017 में ही आइआइटी की टेक्निकल टीम ने भी जांच की। इसके बाद सीबीआइ की जांच को आधार बनाते हुए मामले में ईडी ने भी केस दर्ज कर लिया। 

गोमती रिवर की 1.2 किमी लंबाई में सिल्ट सफाई का काम सुनीता यादव की ग्लोबल कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया। इसकी अनुबंधित लागत 1.88 करोड़ रुपये थी। सुनीता का बिजिनेस उनके पति त्रुशन पाल सिंह यादव देखते हैं। इस टेंडर में दूसरी बिड मेसर्स मा अवंतिका बिल्डर्स ने डाली, जिसके प्रोपराइटर सुनीता के पति त्रुशन पाल ही थे। यानी, पति व पत्नी ही एक-दूसरे से एल-1 आने के लिए कॉम्प्टीशन कर रहे थे।

जांच में कहा गया कि परियोजना में कुल 673 कामों के लिए अलग-अलग अनुबंध किए गए। इनमें से 519 काम टेंडर से दिए गए। 115 काम कोटेशन, 29 काम सीधी आपूर्ति, 9 काम मिश्रित खर्च और एक काम एमओयू के आधार पर दिए गए। अधिकांश टेंडर नियमानुसार, राष्ट्रीय समाचार पत्रों में नहीं छपवाए गए। साठगांठ करके फर्जी लेटर सूचना विभाग को भेजे गए। आपूर्ति आदेश और चयन बांड संदिग्ध लाभार्थी फर्मों और कंपनियों को दिए गए।

सिल्ट सफाई का ही 1.89 करोड़ रुपये का काम मो. आसिफ खान की तराई कंस्ट्रक्शन को दिया गया। इसमें एल-2 व एल-3 (नीचे से दूसरे व तीसरे नंबर के रेट देने वाली) फर्म फर्जी ढंग से सिर्फ दिखाई भर गईं। इसी तरह से सीबीआई ने अधिकांश टेंडर को प्रकाशित कराने और काम आवंटित करने में फर्जीवाड़ा पकड़ा है। कई टेंडरों का प्रकाशन ही नहीं कराया गया। इसका एफआईआर में जिक्र है।

सीबीआई जांच शुरू हुई तो सिंचाई विभाग ने विकास कार्य भी पूरे नहीं कराए। रबर डैम से लेकर कई जगह डायफ्रॉम वॉल, ड्रेनेज सिस्टम के काम अधूरे छोड़ दिए गए। शासन के निर्देश पर एलडीए ने रिवरफ्रंट पर पार्कों का जरूर विकसित कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि करीब 8.5 किमी नदी के दोनों तरफ डायफ्रॉम वॉल बनाई गई। इसके बाद नदी क्षेत्र में बची जमीन को ग्रीनबेल्ट के रूप में विकसित करने का काम होना था। 

सिंचाई विभाग से इस काम को लेकर उद्यान से जुड़े काम एलडीए को दे दिए गए। सिविल वर्क और बिजली से जुड़े काम सिंचाई विभाग के पास अब भी हैं। पूरे प्रोजेक्ट की जांच जब शुरू हुई तो सिंचाई विभाग के काम करने पर रोक लग गई। ऐसे में इसके सौंदर्यीकरण के कई काम फंस गए। इनमें म्यूजिकल फाउंटेन, मैरिज लॉन, सीवर लाइन, पंपिंग स्टेशन, रबर डैम आदि शामिल हैं।

कोरोना को कुंद करने में कोविशील्ड कितनी कारगर?

लखनऊ / दिल्ली । भारत में कोरोना की संभावित तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों से जल्द से जल्द वैक्सीन लगवाने के लिए अपील कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने कहा है कि वैक्सीन करोना के गंभीर खतरे और मौत से बचाने में बेहद कारगर साबित हो सकती है। और वैक्सीनेशन को लेकर हाल ही में हुए एक अध्ययन में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। 

इंडियन काउंसलिंग ऑफ मेडिकल रिसर्च आईसीएमआर(ICMR) के वैज्ञानिकों ने अपने हालिया शोध में बताया है कि ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनिका की कोविशील्ड वैक्सीन ले चुके ज्यादातर लोगों में संक्रमण से सुरक्षा देने वाली एंटीबॉडीज ही नहीं पाई गई है।आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने वैक्सीन की एक और दो डोज ले चुके लोगों के ब्लड सिरम सैंपल की जांच की, लेकिन इसके परिणाम संतोषजनक नहीं पाए गए। इस अध्ययन का प्रीव्यू होना अभी बाकी है। 

इस रिपोर्ट में लोगों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है और लोगों के इस पर सवाल उठने लगे हैं आईसीएमआर के अध्ययन के माध्यम से वैज्ञानिकों ने कोविशील्ड वैक्सीन की केवल एक और डोज ले चुके लोगों पर अध्ययन किया। इससे वैज्ञानिकों ने पाया कि वैक्सीन की एक डोज ले चुके करीब 58 फीसदी जबकि दोनों खुराक ले चुके 16 फ़ीसदी लोगों में एंटीबॉडी ही नहीं देखी गई।

हालांकि इस संबंध में क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज विरोल में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पूर्व टी जैकब जॉन ने कहा है।शरीर में एंटीबॉडीज बनी ही नहीं है संभव है कि एंटीबॉडीज कम बनी हो जो फिलहाल अध्ययन में पता ना चली हो। 

वैज्ञानिकों ने अध्ययन में बताया है कि वायरस को विशेष रूप से लक्षित करके मारने और मानव कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोकने वाले न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज टाइटे्स भी डेल्टा वेरिएंट्स के खिलाफ कम पाए गए हैं। 

सीरम सैंपल के अध्ययन में पहली लहर का कारण बनने वाले भी वेरिएंट्स और डेल्टा वेरिएंट्स की बीच न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज टाइटे्स का अध्ययन किया गया। इसमें वैज्ञानिकों ने पाया कि वैक्सीन की केवल एक शॉट ले चुके लोगो मैं B1 की तुलना में डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज 78 फ़ीसदी जबकि 2 शॉट लेने वालों 69 फीसदी अभी तक कम पाई गई है।

वर्चुअल पढ़ाई VS ऐक्चुअल पईसा! किताब की फोटो खींच कर पढ़ाई करा रहे हैं तो रुपये की फोटो खींच कर फीस भर दो

लखनऊ (राज्य मुख्यालय) । कोरोना से उपजे हालत को देखते हुए शासन ने 2 मई 2021 को आदेश जारी कर कहा था कि इस वर्ष स्कूलों में फीस वृद्धि नहीं की जाएगी शुल्क मासिक आधार पर ही लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त परीक्षा शुल्क तब लिया जाएगा जब परीक्षा ऑफलाइन होंगी ऑनलाइन माध्यम से परीक्षाएं होने की दशा में परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है जो सर्विस वो नहीं दे रहे हैं  उसके बदले वो चार्ज नहीं ले सकते और ऑनलाइन क्लासेज के बदले रेगुलर क्लासेज जैसे फीस नहीं ले सकते। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी किसी से छुपी नहीं जैसे मनमाना फीस वसूलना, समय से पहले फीस मांगना, समय पर फीस न देने पर परेशान करना, बच्चों के रिजल्ट रोक देना, स्कूल से बच्चों के नाम नाम काट देना। ऐसे में भी कोई कंप्यूटर तो कोई एग्जामिनेशन के नाम पर फीस ले रहा है। 

ऑनलाइन क्लास के नाम पर भी मजाक चल रहा है सिर्फ व्हाट्सएप पर बच्चों को काम भेज दिया जाता है उसके बाद कोई पूछने वाला नहीं है। ऐसी शिकायतें देशभर से आती रहती हैं, देश का शायद ही कोई ऐसा राज्य हो। जहां से प्राइवेट स्कूलों की मनमानी की खबरें न आती हों।  लेकिन, इस बार सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधन को आइना दिखा दिया है और दो टूक कहा है कि स्कूल मुनाफाखोरी के लिए नहीं बने हैं। 

कोरोना की वजह से एक ओर जहां तमाम बच्चों के सिर से उनके माता पिता का साया उठ गया है तो दूसरी ओर स्कूलों ने शुल्क में छूट देने के बजाय सामान्य वर्षों की तरह फीस व अन्य मदों की वसूली जारी रखी है । अभिभावकों को फीस की रसीद तो मिली है पर अन्य मदों के लिए गए शुल्क को लिखित प्रमाण नहीं दिया जाता। मगर कुछ निजी स्कूलों ने कंपोजिट मासिक फीस का स्ट्रक्चर इस तरह तैयार किया है कि इसमें तमाम छिपे शुल्क को भी जोड़ लिया है। 

वहीं कुछ स्कूलों ने अलग मदों से शुल्क वसूलना जारी रखा मगर कोई रसीद नहीं दी। अलग-अलग अभिभावक एसोसिएशन ने इसकी शिकायत शिक्षा विभाग की जिम्मेदारों से भी की मगर इनकी मनमानी पर अंकुश लगाने की हिम्मत किसी स्तर पर नहीं जुटाई जा सकी।

राफेल : फ्रांस में जांच, भारत में उस जांच की आंच

लखनऊ / दिल्ली । भारत के साथ 59,000 करोड़ रुपये के राफेल जंगी विमानों के सौदे को लेकर अब फ्रांस में न्यायिक जांच शुरू हो गई है। फ्रांस की लोअर कोर्ट ने शिकायतों दम संज्ञान लेते हुए  एक जज को इस बेहद संवेदनशील सौदे की जांच का जिम्मा सौंपा है, जो सौदे में भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोपों की जांच करेंगे। फ्रांसीसी खोजी वेबसाइट मीडियापार्ट ने यह रिपोर्ट देते हुए कहा है कि इस मामले में देश की बड़ी हस्तियाें से पूछताछ की जा सकती है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में राफेल सौदे के समय राष्ट्रपति रहे फ्रांस्वा ओलांद और मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से भी पूछताछ की जा सकती है। मैक्रों सौदे के वक्त वित्त मंत्री थे, ऐसे में उनके कामकाज को लेकर सवाल किए जाएंगे। वहीं, तत्कालीन रक्षा मंत्री और अब फ्रांस के विदेशी मंत्री जीन-यवेस ले ड्रियान से भी पूछताछ हो सकती है। मीडियापार्ट के मुताबिक, इस न्यायिक जांच के आदेश फ्रांस की राष्ट्रीय वित्तीय अभियोजक (पीएनएफ) के दफ्तर ने दिए थे। 

जांच में 2016 में विमानन कंपनी दसॉल्ट एविएशन के 36 राफेल सौदे की जांच होगी। मीडियापार्ट ने कहा है कि 2016 में अंतर सरकारी सौदे की जांच की जाएगी, जिसे औपचारिक तौर पर इस साल 14 जून को शुरू किया गया था। इस जांच के आदेश फ्रांसीसी गैर सरकारी संगठन शेरपा की शिकायत और मीडियापार्ट की अप्रैल में सौदे में धांधली की रिपोर्टों के आधार पर दिए गए हैं। शेरपा को वित्तीय अपराध से जुडे़ मामलों में गहरी पैठ है।

मीडियापार्ट के पत्रकार यैन फिलिपपिन ने राफेल सौदे को लेकर एक के बाद एक कई रिपोर्ट दी थी। इसमें दावा किया गया था कि इस मामले में पहली शिकायत 2019 में दी गई थी, मगर तत्कालीन पीएनएफ प्रमुख एलियने हाउलेते ने इस शिकायत को दबा दिया था। 

यैन ने ट्वीट कर यह जानकारी देते हुए कहा, मीडियापार्ट की राफेल पेपर्स नाम से शुरू किए गए खुलासों के बाद आखिरकार न्यायिक जांच शुरू हो गई। अब पीएनएफ के नए प्रमुख जीन फ्रैंकोइस बोहर्ट ने जांच का समर्थन करने का फैसला किया है। 

गौरतलब है कि भारत की एनडीए सरकार ने 23 सितंबर, 2016 को 36 राफेल विमानों की खरीद के लिए फ्रांसीसी विमानन कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 59,000 करोड़ रुपये का करार किया था। 

संयुक्त मोर्चा ने कहा, मान लो मांग वरना संसद घेरेंगे किसान

लखनऊ / दिल्ली । केंद्र सरकार के कृषि कानून को लेकर दिल्ली के बॉर्डर पर पिछले कई महीनों से धरना दे रहे किसान अब मानसून सत्र में संसद का घेराव करने का इरादा बना लिया है। सिंघु बॉर्डर पर रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा की सभा के मंच पर किसानों की बैठक में फैसला लिया गया कि वे संसद का घेराव करेंगे। बता दे कि मॉनसून सत्र 19 जुलाई से शुरू होगा इसी दौरान किसान संसद का घेराव करेंगे। 

संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार वे तब तक धरना देंगे जब तक संसद सत्र खत्म नहीं हो जाता। धरने के दौरान कई आयोजन भी होंगे।

भारतीय किसान सभा के प्रधान बूटा सिंह बघेल ने बताया कि “17 जुलाई को वे विपक्ष दल के सांसद के घर पहुंचेंगे और उन्हें चेतावनी पत्र देंगे। हमारी उन से विनती है कि वह सांसद में कृषि कानून के खिलाफ या तो अपनी चुप्पी तोड़े या फिर अपनी सीट छोड़ दें। 5 दिन बाद किसानों का काफिला सिंघु बॉर्डर को छोड़कर सांसद की ओर कूच करेगा। विपक्षी दल के सांसद अंदर कार्यवाही में बाधा डाले और हम बाहरी बैठेंगे। 

संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया कि करीब 200 लोग प्रतिदिन संसद के बाहर 13 अगस्त तक जब तक संसद सत्र खत्म नहीं होगा धरना देंगे।

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि किसान शांति के साथ आंदोलन करना चाहते हैं और देश को कृषि कानून के खिलाफ एक अहम संदेश देना चाहते हैं। उत्तर प्रदेश और पंजाब के कई किसान भजुड़ेंग इस आंदोलन में जुड़ेंगे। एसकेएम ने यह भी बताया कि वे 8 जुलाई 10:00 से 12:00 तक पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेंगे। 

आपको बताते चलें कि संसद सत्र के दौरान देशभर से सांसद सामान्य तौर पर राजधानी दिल्ली में रहते हैं और उस वक्त में संसद का घेराव करने का इरादा किसानों ने किया है ताकि किसानी कानून केंद्र सरकार वापस ले सके।

ट्रैफिक नियम तोड़ कर अब लखनऊ में नहीं मुस्करा पायेंगे आप!

लखनऊ (राज्य मुख्यालय)। यातायात नियम तोड़ेने वाले अब बिल्कुल भी बच नहीं पाएंगे। शहर के 132 प्रमुख चौराहों पर करीब 700 कैमरे इंस्टॉल किए गए हैं। इनकी मदद से नियम का उल्लंघन करने वालों का ऑटोमैटिक चालान कट जाएगा। नियम तोड़ने के कुछ ही देर के भीतर गाड़ी मालिक के मोबाइल फोन पर चालान पहुंच जाएगा। चालान का भुगतान ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों की तरीकों से किया जा सकेगा। राजधानी लखनऊ में यह व्यवस्था स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत विकसित की गई है, जिसकी Monitorig Intigrated Traffic Management System (ITMS) के जरिए की जाएगी। 

लखनऊ के चौराहों पर पीटीजेड (पैन टिल्ट जूम), एएनपीआर (आटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) और हाईटेक फिक्स कैमरे लगाए गए हैं। जिससे कि अब रेड लाइट जंप करने, हेलेमेट न पहनने, सीट बेल्ट न लगाने, दो पहिया वाहन पर ट्रिपलिंग करने, रैस ड्राइविंग, आदि पर सिग्नल पर लगे कैमरों की मदद से अपने आप चालान कट जाएगा। यह ई-चालान गाड़ी मालिक के मोबाइल फोन पर एसएमएस के जरिए पहुंचेगा।

सूत्रों के मुताबिक इन चौराहों पर होगा ऑटोमैटिक चालान बंगला पुल से कैंट रोड, आईआईएम से दुबग्गा जाने वाली सड़क, लोहिया पथ, खुर्रम नगर से समता मूलक जाने वाली सड़क, 1090 चौराहा, जनेश्वर मिश्र पार्क वाली सड़क, अवध चौराहे से दुबग्गा जाने वाली सड़क ओवर स्पीड गाड़ियों का चालान करने के पायलट प्रॉजेक्ट के तौर चिह्नित की गई हैं।

कुछ माह पहले से ही हजरतगंज, कपूरथला और आइजीपी (इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान) चौराहे पर लगे ट्रैफिक सिग्नल को स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम और एनआइसी (नेशनल इंफार्मेटिक्स सेंटर) के डाटा से कनेक्ट करने के बाद ट्रायल चल रहा था। यह परीक्षण प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब देश की प्रत्येक गाड़ी का डाटा आइटीएमएस कंट्रोल रूम में है क्योंकि आइटीएमएस के सर्वर को एनआइसी से कनेक्ट कर दिया गया है।

लखनऊ के 132 चौराहों पर सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक आईटीएमएस का संचालन किया जाएगा। कई बड़े चौराहों पर रात 11 बजे तक निगरानी की जाएगी। सिग्नल पर लगे कैमरों की रेंज 150 से 200 मीटर तक है। 

स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिकारियों का कहना है लालबाग स्थित स्मार्ट सिटी के ऑफिस से 10 लोगों की टीम ट्रैफिक पर नजर रखेगी। इस दौरान कोई व्यक्ति नियम तोड़ता है तो उसकी गाड़ी की नंबर प्लेट की फोटो खींचकर नैशनल इनफरमेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के सर्वर पर भेजी जाएगी। वहां से ट्रैफिक पुलिस इसे एक्सेस करेगी और सत्यापन के बाद चालान पर मुहर लगाएगी। 

अब बेफिक्री से वाहन चलाते हुए चौराहा पार किया नहीं कि आपके मोबाइल पर तुरंत मैसेज आ जाएगा। तब पता चलेगा कि यातायात नियम तोड़ने की वजह से आपके वाहन का चालान हो गया है। इसके लिए राजधानी के 20 चौराहों पर अत्याधुनिक कैमरे लगाए गए हैं।

गाना सुनाते, खाना खिलाते, रेगिस्तान झरने पहाड़ों की सैर कराते आठ हजार रुपये में लखनऊ से लंदन पहुंचाती थी वो बस!

लखनऊ / कोलकाता। क्या आप जानते हैं कि संसार का सबसे लंबा बस रुट कलकत्ता से लंदन तक जाता था।  15 अप्रैल 1957 को इस रुट पर अंतरराष्ट्रीय बस सेवा शुरू हुई थी, अल्बर्ट ट्रेवल बस सर्विस के ब्रोशर के अनुसार बस बंगाल के कलकत्ता से चल कर बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर में प्रवेश करती थी, गाजीपुर से वाया बनारस ये बस लखनऊ पहुंचती थी। उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक राजधानी में त्रेता युग से लेकर आधुनिक भारत की तमाम धरोहरों का अवलोकन करने के लिए बस यहां कुछ देर तक रुकती थी। यहां से आगरा होते हुए दिल्ली और फिर अमृतसर वाघा बार्डर होते हुए पाकिस्तान के लाहौर में प्रवेश करती थी।  

पाकिस्तान से बस अफगानिस्तान की राजधानी काबुल, हैरात में रुकती थी वहां से बस ईरान की राजधानी तेहरान और तुर्की के इस्तानबुल होते हुये यूरोप में प्रवेश करती थी। यूरोपीय देशों बुल्गारिया, यूगोस्लाविया, आस्ट्रिया जर्मनी, फ्रांस बेल्जियम  होती हुई लगभग 7900 किलोमीटर का सफ़र तय करते हुए तकरीबन 50 दिनों में लंदन पहुंचती थी।

अलबर्ट ट्रेवल की बस सेवा का ब्रोशर बस में मौजूद सुविधाओं का भी जिक्र करता है। बस में पढऩे के लिए सुसज्जित लाइब्रेरी, व्यक्तिगत स्लीपिंग बंक्स, पार्टी या सेलिब्रेशन के लिए रेडियो टेप संगीत का इंतजाम किया गया था और तापमान नियंत्रित करने के लिए फैन हीटर उपलब्ध होने की बात भी बताई गई है । 

भइया अब पहियों पर आधी दुनिया घूमने का किराया कितना था। यह सवाल भी उठा तो ब्रोशर के मुताबिक 1957 में इसका किराया 85 पौंड यानी 8755 रुपये था और 1973 में बस सेवा बंद होने तक ये बढ़कर 145 पौंड यानी 14953 रुपये हो गया था। गौरतलब है कि अल्बर्ट ट्रैवेल की बस सेवा 1957 से शुरू हो कर 1973 तक चलती रही। 

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों पर तरह तरह की प्रतिक्रियााएं सामने आ रही हैैं । हमाारी रिपोर्टर  मुस्कान ने इस विषय पर लोगों से बातचीत की है  

लखनऊ यूनिवर्सिटी के टूरिज्म डिपार्टमेंट की छात्रा आलिया का कहना है कि  कोई बिना पासपोर्ट-वीसा के अंतर महाद्वीपीय यात्रा कैैसे कर सकता है तो वहीं लॉ डिपार्टमेंट के छात्र रोहित ने ऐसी यात्रा को महज़ कल्पना बता रहे है  कुछ लोग ऐसे भी मिले जिन्होंने ऐसी यात्रा करने की इच्छा जाहिर की, लखनऊ के ख्वाजा मुईनुददीन चिश्ती लैंग्वेज यूनिवर्सिटी के मीडिया की स्टूडेंट जुलेखा ने कहा कि वो बस से पूरी दुनिया की सैर करना चाहती हैं उन्होंने बॉलीवुड फिल्म दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे वाली स्टोरी को इस बस सर्विस से प्रेरित होने की तरफ इशारा किया हालांकि हमारी पड़ताल में उस दौर में इस बस सेवा का लाभ उठाने वाला एक भी  यात्री अब तक सामने नहीं आया है। 

न्यूज डॉन ने गूगल और अन्य सर्च इंजन के जरिये कोलकाता से लंदन  के मौजूदा सडक़ सम्पर्क के बारे में पूछे जाने पर कोई विकल्प नहीं होने का जवाब मिलता है। हो सकता है 70 के दशक में ऐसी बस चलती रही हो और लोग दर्जनों देशों, संस्कृतियों, खान पान के कलेवर का आनंद उठाते हुए पखवाड़े भर में लंदन से कोलकाता आते जाते रहे हों।

रिया ने अपने बर्थडे के दिन बच्ची के इलाज के लिए मदद मांगी तो ट्रोल हुईं

लखनऊ / मुंबई। रिया चक्रवर्ती एक ऐसी एक्ट्रेस हैं जो फिल्मों से ज्यादा विवादों की वजह से आए दिन सुर्खियों में छाई रहती हैबॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद से ही रिया चक्रवर्ती सोशल मीडिया पर काफी कम एक्टिव नजर आ रही हैं. एक्ट्रेस ने ‘जलेबी’ और ‘मेरे डैड की मारुति’ जैसी फिल्मों में अभिनय कर दर्शकों के दिल में जगह बनाई है, अब वह फोटोज और वीडियोज ज्यादा सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करती हैं. केवल पॉजिटिव नोट्स ही वह शेयर करना प्रिफर कर रही हैं।

पिछले 1 जुलाई को रिया चक्रवर्ती 29 साल की हुई हैं. फैन्स ने इन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए इनसे जल्द ही फिल्मों में नजर आने की गुजारिश की है. हालांकि, रिया ने अपने बर्थडे से जुड़ी कोई भी पोस्ट शेयर नहीं की और न ही फैन्स को यह जानकारी दी कि वह इसे किस तरह सेलिब्रेट कर रही हैं। एक्ट्रेस ने केवल उन्हें शुक्रिया कहा।

इस खास मौके पर एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर एक नेक पहल करने की कोशिश की है। लेकिन सुशांत के फैंस को यह बात रास नहीं आई और एक बार फिर रिया को जमकर ट्रोल करना शुरु कर दिया। इस वीडियो में रिया अपने फैंस से जानिश नाम के एक छोटे से बच्चे के लिए मदद मांगती हुई नजर आ रही हैं। 

बता दें कि जानिश को रेयर जेनेटिक डिसऑर्डर है जिसकी इलाज के लिए 16 करोड़ रुपये की जरूरत है। ऐसे में रिया ने लोगों से मदद की गुहार लगाई लेकिन शायद सुशांत के फैंस को रिया की ये नेक पहल रास नहीं और एक्ट्रेस को ट्रोल करने लगे।जी हां, इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोग लगातार रिया को ट्रोल कर रहे हैं।

किसी ने उन्हें सिंपेथी क्वीन बताया तो किसी ने एक्ट्रेस पर आरोप लगाया कि बच्ची का सपोर्ट लेकर रिया अच्छा बनना चाह रही हैं। लोग कमेंट कर एक्ट्रेस का लगातार मजाक बना रहे हैं। “वीडियो पोस्ट करते हुए रिया ने कैप्शन में बताया है कि उस बच्चे के लिए एक खास दवाई चाहिए जिसकी कीमत 16 करोड़ रुपये है। इसलिए उन्होंने इंस्टाग्राम पर डोनेशन लिंक शेयर कर लोगों से मदद करने की गुजारिश की है। 

साथ ही रिया ने वीडियो में ये बताया कि वह अपनी तरफ से उस बीमार बच्चे की मदद कर चुकी हैं। लेकिन यूजर्स को ये बात रास नहीं आई। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया का नाम सामने आया था, उसके बाद से ही सुशांत के फैंस रिया पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। रिया के इस पोस्ट पर सुशांत के फैंस उन्हें जमकर खरी खोटी सुना रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा- कितनी भी कोशिश कर लो, हमारी राय तुम्हारे लिए कभी नहीं बदलेगी। एक अन्य ने लिखा- तुम्हारे पास क्या कम पैसा है, तुम्ही मदद कर दो।एक अन्य यूजर ने लिखा-  ‘अपनी इमेज चेंज करने की कोशिश कर रही हो? कुछ फायदा नहीं होगा।’ एक और यूजर ने कहा, ‘ताई ने भी सोशल सर्विस स्टार्ट कर ली?’ एक ने लिखा, ‘आप किसी से मदद मांगने लायक नहीं हो।

बताते च कि रिया के लिए साल 2020 बहुत ही खराब रहा है. साल 2020 में रिया का प्यार सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) इस दुनिया को अलविदा कहकर चला गया था. सुशांत के निधन के बाद से रिया की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई है. वह अब खुद को संभालने में लगी हुई हैं. इस समय में वह अपने काम पर फोकस कर रही हैं और खुद को पॉजिटिव रखने के लिए पोस्ट शेयर करती रहती हैं। 

रिया चक्रवर्ती और सुशांत सिंह राजपूत की मुलाकात साल 2003 में हुई थी. उस समय रिया अपनी डेब्यू फिल्म मेरे डैड की मारुती की सक्सेस मना रही थीं वहीं सुशांत यश राज के साथ अपनी फिल्म शुद्ध देसी रोमांस पर काम कर रहे थे. कुछ समय पहले ही सुशांत की डेब्यू फिल्म रिलीज हुई थी और उनकी एक्टिंग की काफी तारीफ हो रही थी.उसके बाद दोनों इवेंट, पार्टी या स्टूडियो शूट में मिला करते थे।

रिया ने एक इंटरव्यू में बताया था कि इस दौरान तक दोनों अच्छे दोस्त बन चुके थे. वह साल में बेशक एक बार मिलते थे लेकिन जब भी मिलते थे एक दूसरे से हर मुद्दे पर बात करते थे.रिया ने बताया था कि जब भी सुशांत उनसे मिलते थे तो उनकी दोस्ती ऐसी थी कि वह अपनी खुशी, करियर, दुख सभी के बारे में बात करते थे. रिया उन्हें पसंद भी करने लगी थीं और सोचती थीं कि उनमें बाकियों से क्या अलग है।

साल 2019 अप्रैल में सुशांत और रिया की मुलाकात रोहिनी अय्यर की पार्टी में दोबारा हुई थी. जहां से दोनों के रिलेशनशिप की शुरुआत हुई थी. रिया ने बताया था कि सुशांत ने उनसे कहा था कि उन्हें रिया से उसी दिन प्यार हो गया था लेकिन मैंने 2-3 महीने इस बात को कहने में लिए थे.सुशांत और रिया यूरोप ट्रिप पर गए थे. रिया ने बताया था कि स्विजरलैंड में सुशांत ट्रिप पर बहुत खुश थे लेकिन इटली जाने के बाद वह अपने कमरे से बाहर ही नहीं आए थे. वह तीन दिन तक अपने कमरे में रहे थे।

रिया ने बताया था कि सुशांत ट्रिप से पहले बहुत खुश और एक्साइटिड थे. उन्होंने कहा था वह ट्रिप पर अपना ट्रू साइड रिया को दिखाएंगे. वह सड़कों पर घूमेंगे जो वह इंडिया में नहीं कर सकते हैं.ट्रिप से वापस आने के बाद दोनों साथ में शिफ्ट हो गए थे. दिसंबर 2019 से दोनों साथ में सुशांत के अपार्टमेंट में रह रहे थे। 

सुशांत डिप्रेशन में थे लॉकडाउन में उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी. उनकी और रिया की जून में कुछ बहस भी हो गई थी और एक्टर की बहन उनसे मिलने के लिए उनके घर आने वाली थी इसलिए सुशांत ने रिया को उनके घर भेज दिया. उसके कुछ दिन बाद सुशांत 14 जून को अपने घर में मृत पाए गए थे। 

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान और उनकी दूसरी पत्नी किरण राव ने तलाक लेने का किया ऐलान

लखनऊ / मुंबई। आमिर खान और किरण राव ने 15 साल पहले शादी कि थी। उन्होने कहा हमारे कारोबारी रिश्ते बने रहेंगे इसके अलावा हम अपने बच्चे का पालन पोषण करेंगे।बताया जा रहा है कि आमिर खान और उनकी पत्नी किरण राव तलाक ले रहे हैं।

उन्होने 28 दिसंबर 2005 को शादी की थी । शादी के बाद दोनों ने कई फिल्में साथ में बनाई ।वे किरण राव से फिल्म  लगान  की शूटिंग के दौरान मिले थे । आमिर खान ने साल 2002 में अपनी पहली पत्नी रीना दत्ता से तलाक लिया था, और फिर किरण राव उनकी ज़िंदगी में आई।

बताते चलें कि उनके फैंस के लिए ये बहुत शॉकिंग खबर हैं।ऐसे में सभी इस बात को जानने के लिए इच्छुक हैं कि उनके बेटे आजाद राव खान की कस्टडी किसके पास रहेगी ।

आमिर खान के करीबी बता रहे हैं कि इस वैलेंटाइन डे से पहले आमिर का अपना मोबाइल ऑफ करना उनके और किरण के रिश्ते के पहली गांठ हैं आमिर नहीं चाहते थे कि उस दिन मोहब्बत के ऐसे संदेशों का आदान प्रदान उनके मोबाइल पर हो , जिन्हें अब वो खुद नहीं बोलना चाहते हैं।

ये बात सामने आई हैं कि आमिर और किरण राव के बीच की दूरी वहां से शुरू हुई जब आमिर के घर पर सबके सामने एक त्योहार के दौरान एक अभिनेत्री की मौजूदगी को लेकर स्थति असहज हो गई थी , हालाकि आमिर और किरण राव के तलाक को लेकर उनके करीबी बीच में किसी तीसरे कि आने की खबर को बेबुनियाद बता रहे हैं। 

इसके साथ ही आपको बता दें कि आमिर खान और किरण राव अपनी तलाक को लेकर एक स्टेटमेंट शेयर किया है, उसमे लिखा हैं की ” इन 15 खूबसूरत सालो में हमने एक साथ अपने जीवन भर के अनुभव , आनन्द और खुशी शेयर किया है हमारे रिश्ता में सिर्फ विश्वास , सम्मान और प्यार बढ़ा है।अब हम अपने जीवन में नया अध्याय शुरू करना चाहेंगे , पति पत्नी के रूप में नहीं बल्कि एक सह माता पिता के रूप में हमने कुछ समय पहले अलग होने का निरणय किया था। अब इस व्यवस्था को औपचारिक रूप देने में सहज महसूस कर रहे हैं। 

उन्होने आगे लिखा, हम दोनों अलग अलग रहने के बावजूद अपने जीवन को एक बिस्तारित परिवार की तरह शेयर करेंगे।हम अपने बेटे आजाद के प्रति समर्पित माता पिता हैं,जिनका पालन पोषण हम मिलकर करेंगे ,हम फिल्मों, पानी फाउंडेशन और अन्य परियोजनाओं पर भी सहयोगी के रूप में काम करना जारी रखेंगे।

यूपी जिला पंचायत चुनाव : शिकवे शिकायतें धरना प्रदर्शन के बावजूद भाजपा ने 67 सीटें जीतीं सपा 6 पर सिमटी

लखनऊ (राज्य मुख्यालय) । प्रदेश के जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा ने रिकॉर्ड जीत हासिल की है। 75 में से 67 सीटों पर जीत का परचम लहराया है। भाजपा ने सपा के 63 सीटों के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है। संतकबीर नगर, बलिया, आजमगढ़ और एटा में सपा ने जीत दर्ज की है।जबकि बागपत में राष्ट्रीय लोकदल की प्रत्याशी ने भाजपा प्रत्याशी को हरा दिया है। अवध क्षेत्र में 13 में से 13, पश्चिम में 14 में से 13, ब्रज में 12 में 11,  कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र में 14 में से 13, काशी में 12 में 10 और गोरखपुर क्षेत्र में 10 में से 7 जिलों में भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव जीता है। 

लखनऊ में बीजेपी को जीत मिली है. बीजेपी प्रत्याशी आरती रावत को 14 वोट मिले जबकि सपा प्रत्याशी को 11. अभी जिला प्रशासन की तरफ से वोटों की पुष्टि होना बाकी है रायबरेली से भाजपा समर्थित रंजना चौधरी आगे चल रही हैं। 

प्रतापगढ़ के कुंडा से लगातार 25 वर्ष से निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह ने प्रतापगढ़ में अपना जलवा दिखा दिया। उनकी पार्टी जनसत्ता दल को कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष का समर्थन था। उनकी पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक की प्रत्याशी माधुरी पटेल ने 40 मत पाकर जीत दर्ज की। जिला पंचायत अध्यक्ष की महिला आरक्षित सीट के लिए कुल 57 मत पडऩे थे, इसमें से 51 मत पड़े। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक प्रत्याशी माधुरी पटेल को 40 मत मिले। सपा प्रत्याशी अमरावती देवी को छह और भाजपा प्रत्याशी क्षमा सिंह को तीन मत मिले। इसके अलावा दो मत अवैध घोषित कर दिए गए।

प्रतापगढ़ के जेठवारा थाने के बढ़नी मोड़ पर भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष प्रत्याशी क्षमा के काफिले को पुलिस ने चेकिंग के लिए रोक दिया। इससे क्षमा के पति अभय सिंह पप्पन का पारा हाई हो गया और पत्नी के साथ सड़क पर धरने पर बैठ गए। पप्पन का आरोप की राजा भइया की 70 गाड़ियों को जाने दिया और पुलिस हमारी 5 गाड़ियों में शस्त्र की तलाश कर रही थी। पूछने पर बताया गया कि एडीजी के आदेश पर रोका गया। ।

सोनभद्र में अपना दल-एस की राधिका पटेल जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। सपा के जयप्रकाश पांडेय को सात वोटों के अंतर से हराया। राधिका को 19 और जयप्रकाश को 12 वोट मिले। सीतापुर में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं। भाजपा प्रत्याशी श्रद्धा सागर 79 में से 56 वोट पाकर विजयी हुई हैं। निकटतम प्रतिद्वंदी सपा प्रत्याशी अनीता राजवंशी को 22 वोट मिले हैं। डीएम ने श्रद्धा सागर को जीत का प्रणाम पत्र दिया। 

बाराबंकी जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी राजरानी रावत 48 मत पाकर चुनाव जीत गईं। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी सपा की उम्मीदवार नेहा आनंद को सिर्फ 8 मत मिले। कुल पड़े 57 मतों में एक बैलट पेपर सादा पाया गया। यही नहीं पहली बार भाजपा का उम्मीदवार जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर चुना गया है। अयोध्या जिला पंचायत सीट पर भाजपा ने कब्जा जमाया है। भाजपा की प्रत्याशी रोली सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष बन गई हैं। भाजपा की रोली सिंह को 30 वोट मिले, जबकि सपा को केवल 10 वोट प्राप्त हुए। सपा के सदस्यों ने क्रॉस वोटिंग की। सपा सदस्यों ने भाजपा को वोट दिए। 

कानपुर नगर में भाजपा की स्वप्निल वरुण नई जिला पंचायत अध्यक्ष बन गई हैं। वहीं कानपुर देहात में नीरज रानी ने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव जीत लिया है। 31 मत पड़े। निर्दलीय नीरज रानी को 26 मत मिले। प्रतिद्वंद्वी सपा के राम सिंह को पांच वोट मिले हैं।  हरदोई में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रेमावती को विजयी घोषित किया गया है। भाजपा प्रत्याशी प्रेमावती को 65 वोट मिले। जबकि सपा प्रत्याशी मुन्नी देवी गौतम को 6 वोट मिले। जिला पंचायत के कुल 72 सदस्य हैं। इनमें से 71 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी मुन्नी देवी गौतम की समर्थक रहीं राधा कुशवाहा ने मतदान नहीं किया। भाजपा प्रत्याशी रेखा नागर हापुड़ जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं हैं। रेखा नागर को 13 वोट प्राप्त हुए हैं। जबकि सपा प्रत्याशी रुचि यादव को मात्र 6 वोट ही मिल स्की।

अलीगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर फिर भाजपा ने कब्जा किया है। भाजपा की विजय सिंह ने अपनी प्रतिद्वंदी सपा प्रत्याशी अर्चना यादव को पराजित कर विजयी हासिल की। मतदान के दौरान 46 जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशियों ने अपने मत का उपयोग किया। वहीं कोल्ड स्टोर में अवैध भंडारण के दो मामले में नामजद एवं जनपद में हुए जहरीली शराब कांड के मुख्य आरोपी अनिल चौधरी की वांछित जिला पंचायत सदस्य पत्नी ममता चौधरी अपना मतदान करने नहीं पहुंची। भाजपा की विजय सिंह को 38 और अर्चना यादव को 8 वोट मिले हैं। सपा प्रत्याशी अर्चना यादव ने चुनाव में घालमेल का आरोप लगाया है। 

बिजनौर में भाजपा के साकेंद्र चौधरी जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव जीत गए हैं। साकेंद्र को 30 वोट मिले हैं, सपा-रालोद गठबंधन की चरणजीत कौर को 25 वोट प्राप्त हुए। बदायूं जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा की वर्षा यादव ने 28 वोट लेकर जीत हासिल की। वह पूर्व एमएलसी जितेंद्र यादव की पत्नी हैं। उनके मुकाबले सपा प्रत्याशी सुनीता शाक्य को 23 वोट मिले हैं। कौशांबी जिले में भी भाजपा की कल्पना सोनकर निर्वाचित हुई हैं। 

शामली में कांटे के मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी विजयी। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा प्रत्याशी मधु को 10 वोट मिले हैं, जबकि सपा-रालोद प्रत्याशी अंजलि को 9 वोट मिले हैं। भाजपा प्रत्याशी एक वोट से विजयी घोषित हुई है।फतेहपुर जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अभय प्रताप सिंह 41 मत पाकर विजयी घोषित हुए हैं। सपा प्रत्याशी संगीत राज को 5 वोट मिले हैं। हमीरपुर में 17 जिला पंचायत सदस्यों में भाजपा की जयंती राजपूत को 11 और निषाद पार्टी के दुष्यंत सिंह परिहार को 6 वोट मिले। भाजपा की जयंती राजपूत अध्यक्ष बनीं।

बलिया में पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी के बेटे सपा उम्मीदवार आंनद चौधरी 33 वोट पाकर विजयी घोषित हए हैं। भाजपा उम्मीदवार को 24 वोट मिले हैं। आजमगढ़ में सपा के विजय यादव जीत गए हैं। चंदौली में भाजपा के दीनानाथ शर्मा ने जीत दर्ज की है। भदोही में भाजपा समर्थित अनिरुद्ध त्रिपाठी ने जीत का परचम लहराया है। 

गोरखपुर-बस्ती मंडल की सात जिला पंचायत अध्यक्ष की सीटों में छह पर भाजपा का कब्जा हो गया है। एक संतकबीरनगर में सपा के बलिराम यादव अध्यक्ष पद पर जीते हैं। बस्ती में भाजपा के संजय चौधरी, महराजगंज में भाजपा के रविकांत पटेल, देवरिया में भाजपा के गिरीश चंद्र तिवारी, सिद्धार्थनगर में भाजपा की शीतल सिंह व कुशीनगर में भाजपा की सावित्री देवी अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित घोषित की गईं हैं। गोरखपुर में भाजपा की साधना सिंह पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुकी हैं।

फिरोजाबाद से पूर्व मंत्री जयवीर सिंह की पुत्रवधू हर्षिता सिंह जीत गई हैं। 33 सदस्यों में से भाजपा को 19 वोट मिले। समाजवादी पार्टी की रुचि यादव को 11 मत प्राप्त हुए हैं। जबकि 3 वोट निरस्त कर दिए गए हैं।

देवरिया जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी गिरीश चंद तिवारी ने 42 मत प्राप्त कर सपा प्रत्याशी शैलजा यादव को पराजित कर दिया। चुनाव में कुल 56 सदस्यों ने मतदान किया था जिसमें गिरीश चंद तिवारी को 42 सपा उम्मीदवार शैलजा यादव को ग्यारह मत प्राप्त हुए। तीन मत अवैध घोषित कर दिए गए।

कुशीनगर से जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर भाजपा की सावित्री देवी जीत गई हैं। उनको 61 में से 46 वोट मिले हैं। समाजवादी पार्टी की रीता देवी को 15 वोट प्राप्त हुए। सावित्री देवी दूसरी बार अध्यक्ष चुनी गईं हैं। इससे पहले भी वह 2010 से 2015 तक जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं।

मुजफ्फरनगर में भाजपा के वीरपाल निरवाल ने जीत दर्ज की है। कुल 43 जिला पंचायत सदस्यों में से 34 में वोट डाले गए। जिनमें से भाजपा के वीरपाल निरवाल को 30 वोट और विपक्ष के सत्येंद्र बालियान को 4 वोट प्राप्त हुए। 

औरैया में 23 जिला पंचायत सदस्यों में 22 के पड़े वोट। भारतीय जनता पार्टी के कमल दोहरे को कुल 13 वोट मिले। वहीं समाजवादी प्रत्याशी रवि त्यागी को सिर्फ 9 वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी कमल ने जीत दर्ज की है।

संतकबीरनगर में सपा प्रत्याशी बलिराम यादव चुनाव जीते। सपा प्रत्याशी बलिराम यादव को 18 मत मिले। जबकि भाजपा प्रत्याशी कृष्ण कुमार चौरसिया को 12 मत मिले। छह मतों से सपा के बलिराम यादव चुनाव जीत गए।

महराजगंज में भाजपा प्रत्याशी रविकांत पटेल को 38 और सपा प्रत्याशी दुर्गा यादव को 9 मत मिले। मतदान में 38 मत पाकर भाजपा प्रत्याशी रविकांत पटेल विजयी घोषित किए गए। खास बात रही की सपा ने अपने नौ जिला पंचायत सदस्यों का वोट सहेजे रखा। इसमें भाजपा सेंधमारी नहीं कर पाई।

जौनपुर में बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह की पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष बन गई हैं। श्रीकला को अपना दल एस ने अंतिम समय में समर्थन दिया। मल्हनी विधानसभा उप चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी थे बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह।

गाजीपुर में जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए भाजपा की सपना सिंह की जीत हुई है। सपना को कुल 47 वोट मिले और सपा की कुसुमलता को कुल 20 वोट मिले। सपा की 30 साल से कब्जे वाली सीट पर पहली बार भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष को बड़ी जीत मिली है।

आंबेडकरनगर में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा के साधु वर्मा ने एकतरफा जीत दर्ज की है। उन्हें 30 सदस्यों का समर्थन मिला। जबकि सपा प्रत्याशी अजीत यादव 10 वोट तक ही सीमित रह गए। एक मत निरस्त हुआ है।

रायबरेली जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशी रंजना चौधरी ने जीत हासिल की है। उनको 30 वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस और सपा गठबंधन के प्रत्याशी पूर्व सांसद अशोक सिंह की बहू आरती सिंह को 22 वोट मिले हैं। जीत की उम्मीद लगाए कांग्रेस और सपा गठजोड़ को चुनाव में करारा झटका लगा है। एक बार फिर एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने अपनी ताकत का एहसास कराया है।

अमेठी जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा प्रत्याशी राजेश अग्रहरि ने जीत दर्ज की है। अमेठी पंचायत अध्यक्ष पद के लिए कुल 36 मत पड़े। भाजपा प्रत्याशी राजेश अग्रहरि को 31 मत मिले। राजेश अग्रहरी 27 वोटों से विजयी हुए। सपा की शीलम सिंह को कुल 04 मत मिले।

सिद्धार्थनगर में भाजपा प्रत्याशी शीतल सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। शीतल सिंह को 40 मत प्राप्त हुए, जबकि सपा प्रत्याशी पूजा यादव को पांच मत मिले। जिले में 45 जिला पंचायत सदस्यों ने मतदान किया। भाजपा समर्थित नौ सदस्य चुनाव जीते थे, जबकि सपा समर्थित 15 सदस्य चुनाव जीते थे। भाजपा ने कांग्रेस के तीन, बसपा के दो, अपना दल एस के एक सहित 15 निर्दलीय के साथ सपा के सदस्यों में भी सेंधमारी कर ली।

कन्नौज में भाजपा और सपा के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। हालांकि भाजपा प्रत्याशी ने यहां जीत दर्ज की। भाजपा की प्रिया शाक्य को 15 मत और सपा के श्याम सिंह यादव को 13 मत प्राप्त हुए। प्रिया शाक्य विजयी घोषित की गईं। 

फर्रुखाबाद में भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष निर्दलीय प्रत्याशी मोनिका यादव ने 18 वोट हासिल कर जीत दर्ज की है। वहीं सपा प्रत्याशी डॉ. सुबोध यादव को 12 वोट मिले है। मैनपुरी में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। कुल 30 सदस्यों में से 29 सदस्यों ने मताधिकार का प्रयोग किया। भाजपा प्रत्याशी अर्चना भदौरिया को 18 वोट मिले। वहीं सपा प्रत्याशी मनोज यादव को 11 वोट प्राप्त हुए। मिर्जापुर में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा प्रत्याशी राजू कन्नौजिया ने जीत दर्ज की है। 40 मत भाजपा प्रत्याशी को मिले तो वहीं सपा प्रत्याशी आशा देवी को महज चार वोट से ही संतोष करना पड़ा। 

इंस्टा रिचलिस्ट 2021 में देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा और विराट कोहली के भी नाम शामिल

लखनऊ / दिल्ली । हापर इंस्टाग्राम रिचलिस्त ईयर 2021 की लिस्ट में टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली और ऐक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा का नाम शामिल किया गया है। विराट कोहली का फोटो शेयरिंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा कमाई करने वाले सेलेब्रिटी लिस्ट में नाम हैं। 

हापर इंस्टाग्राम रीचलिस्ट के मुताबिक दुनिया भर में इंस्टाग्राम से सर्वाधिक कमाई करने के मामले में पुर्तगाल के फुटबाल के स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो (Cristiano ronaldo ) पहले नंबर पर हैं। युवेंट्स फुटबाल क्लब की ओर से खेलने वाले रोनाल्डो इंस्टा पर एक प्रमोशनल पोस्ट के बदले 11.9 करोड़ रुपए लेते हैं।इस लिस्ट में डवेन जॉनसन , एरियान ग्रेडे , कायली जेनर और टेलर स्विफ्ट का भी नाम शामिल हैं। 

इस बार इस लिस्ट में दो भारतीयों को जगह मिली हैं,लिस्ट में ऐक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और क्रिकेटर विराट कोहली का नाम हैं।इस लिस्ट में विराट को टॉप 30 में 19 वीं रैंक मिली हैं, जबकि प्रियंका चोपड़ा को 27वा रैंक पर हैं। प्रियंका चोपड़ा पिछले साल भी इस लिस्ट में थीं ।बता दें कि इंस्टा रिचलिस्ट वह लिस्ट हैं जिसे सेलेब्रिटी द्वारा प्रोमोशनल पोस्ट के लिए ली जाने वाली रकम के आधार पर तैयार किया जाता हैं।

रीचलिस्ट के मुताबिक 32 वर्षीय विराट कोहली इंस्टाग्राम पर हर प्रोमोशनल पोस्ट के जरिए 5 करोड़ रुपए कमाते हैं उनके इंस्टाग्राम पर 125 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स है।वहीं प्रियंका चोपड़ा के इंस्टाग्राम पर 64 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं उन्हें हर प्रोमोशनल पोस्ट के लिए 3 करोड़ रुपए मिलते हैं। 

उप्र पंचायत चुनाव : किसके सिर सजेगा सत्ता का ताज? होगा फैसला आज!

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के 53 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष का बहुप्रतिक्षित चुनाव आज होगा। 45 जिलों में भाजपा का सपा से सीधा मुकाबला है। वहीं दोनों प्रमुख दल 4 जिलों में त्रिकोणीय और 3 जिलों में चतुष्कोणीय मुकाबले के बीच फंसे हैं। भाजपा जहा बड़ी जीत का दावा कर रही है वहीं सपा सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगा रही है। 

मतदान के बाद दोपहर 3 बजे से मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान के दौरान कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के पुख्ता इंतजाम किए हैं।भारी पुलिस बल के साथ ही पुलिस-प्रशासन के बड़े अफसर मौजूद रहेंगे। मतदान की निष्पक्षता पर नजर रखने के लिए प्रेक्षक भी पहुंच गए हैं।

अधिकतर सीटों पर सीधी लड़ाई सत्तारुढ़ भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल सपा समर्थित उम्मीदवारों के बीच है। भाजपा जहां बड़ी जीत का दावा कर रही है, वहीं सपा सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगा रही है।

प्रतापगढ़, जौनपुर, भदोही में भाजपा की लड़ाई अपने बागी उम्मीदवारों से है। प्रतापगढ़ में जनसत्ता दल के संस्थापक रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भइया’ ने पूरी ताकत झोंक रखी है। बागपत में भी सपा-उम्मीदविशी यादव, भाजपा गठबंधन से अपना दल (एस) की रीता पटेल, पूर्व सांसद धनंजय सिंह की पत्‍नी भाजपा से टिकट न मिलने से नाराज हैं। 

कन्नौज में वॉर्ड 28 से जिला पंचायत सदस्य और आशा वर्कर सरोजनी देवी के खिलाफ सीएमओ ने फर्जीवाड़े की एफआईआर करवाई है। सरोजनी पर बिना इस्तीफा चुनाव लड़ने का आरोप है। भाजपा नेताओं ने जिला प्रशासन से इसकी शिकायत की थी। उन्नाव में भी सपा उम्मीदवार के भाजपा के खेमे में आने से लड़ाई दिलचस्प हो गई है। 

जिला परिषद अध्यक्ष के निष्पक्ष चुनाव के कड़े इंतजाम किए गए हैं। भारी पुलिस बल के साथ ही पुलिस-प्रशासन के बड़े अफसर मौजूद रहेंगे। मतदान की निष्पक्षता पर नजर रखने के लिए प्रेक्षक भी पहुंच गए हैं। पूरी मतदान प्रक्रिया वीडियो कैमरे की निगरानी में है 3 बजे से निर्वाचित किए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान के दौरान कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

कभी सपा का गढ़ रहे कन्नौज में जिला पंचायत अध्यक्ष के पद की लड़ाई निर्वाचन आयोग की चौखट पर पहुंच गई है। सपा का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार से मिला। उनके साथ कन्नौज से जिला पंचायत सदस्य भी थे।

सपा ने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन पार्टी प्रत्याशी और समर्थकों को प्रताड़ित कर रहा है। आयोग ने निष्पक्ष निर्वाचन के निर्देश दिए हैं। सपा कन्नौज और मैनपुरी किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहती है। प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल शनिवार को कन्नौज में ही डेरा डालेंगे।

सपा ने अपनी प्रत्याशी मालती को पार्टी से बाहर कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि सपा समर्थित सदस्य अरुण का हाथ मजबूत कर अपने पाले में करने की रणनीति में लगे हैं।पंचायत चुनाव को अपने पक्ष में करने के लिए भाजपा प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग करने पर तुली हुई है। सपा की सरकार बनने पर दोषी अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

सोनभद्र में सपा के जय प्रकाश पांडेय व अपना दल से राधिका पटेल के बीच कांटे की टक्‍कर मानी जा रही है। यहां के दो जिला पंचायत सदस्‍यों के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। बलिया में पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी के पुत्र आनंद चौधरी के मजबूत दावेदार होने से भाजपा नेताओं ने यहां तक कि सूबे के मंत्री उपेंद्र तिवारी ने कई सदस्‍यों को अपहृत किए जाने का आरोप लगाया है। पांच थानों में तहरीर भी पड़ी, लेकिन अगले ही दिन इन सदस्‍यों ने सोशल मीडिया के जरिए आरोपों को गलत बताया।

UP POLICE के नये मुखिया मुकुल गोयल

लखनऊ / दिल्ली । उत्तर प्रदेश सरकार ने डीजीपी पद के लिए 1987 बैच के आईपीएस ऑफिसर मुकुल गोयल के नाम पर मुहर लगाई है। हितेश चंद्र अवस्थी के बुधवार को रिटायरमेंट के बाद मुकुल गोयल की तैनाती के आदेश जारी हो गए हैं। हालांकि उनके जोइनिंग में एक-दो दिन का समय लग सकता है क्योंकि मुकुल गोयल इस समय केंद्र प्रतिनियुक्ति पर है और बीएसएफ में एडीजी ऑपरेशन के अहम पद पर चंडीगढ़ में तैनात है।

संघ लोक सेवा आयोग ने उत्तर प्रदेश पुलिस के अगले प्रमुख यानी डीजीपी के लिए तीन नामों का पैनल राज्य सरकार को भेजा था। यूपी डीजीपी पद के लिए तीन नामों की चर्चा चल रही थी। इस पैनल में आईपीएस नासिर कमाल , मुकुल गोयल के अलावा प्रदेश में बी जे पी ओ डब्ल्यू आर पी सिंह का नाम शामिल था । हालाकी मुकुल गोयल ने बाजी मार ली।

गोयल फरवरी 2024 में रिटायर होंगे। उनके पास काम करने के लिए अभी करीब ढाई साल का कार्यकाल है। 1987 बैच के आईपीएस ऑफिसर मुकुल गोयल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के निवासी हैं। मुकुल गोयल आईआईटी दिल्ली से बीटेक हैं।

यूपी के अपने कार्यकाल में आजमगढ़ के एसपी और वाराणसी, गोरखपुर, सहारनपुर, मेरठ में एसपी के पद पर तैनात रह चुके हैं। मुकुल गोयल कानपुर, आगरा, बरेली रेंज के डीआईजी और बरेली जोन के आईजी भी रह चुके हैं। इसके अलावा मुकुल गोयल केंद्र में आईटीबीपी, बीएसएफ, एनडीआरएफ में भी काम कर चुके हैं।

मुकुल गोयल उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के पद पर रहे। मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान अरुण कुमार को हटाकर मुकुल गोयल को ही डीजीपी लॉ एंड ऑर्डर बनाया गया था।

यूपी में 100 दिन बाद खुलेंगे परिषदीय स्कूलों के ताले , 20 मार्च से बंद पड़े थे स्कूल

लखनऊ / दिल्ली । उत्तर प्रदेश में 20 मार्च से बंद पड़े स्कूल आज से यानी 1 जुलाई बृहस्पिवार को खुलेंगे।हालाकि अभी कक्षा 1 से 8 तक स्कूल कोविड प्रोटोकॉल के साथ खुलेंगे लेकिन अभी बच्चे नहीं आएंगे सिर्फ शिक्षक और शिक्षा मित्र कार्यों जुड़े कर्मचारी ही स्कूल पहुचेंगे ।

कॉरोना के दूसरी लहर आने के बाद यूपी में सभी स्कूल बंद कर दिए गए थे।लेकिन अब कोरोना की दूसरी लहर भी सुस्त पड़ गई हैं, यूपी सरकार ने हालात देखते हुए ये आदेश दिया है कि बेसिक शिक्षा विभाग 1 जुलाई से शिक्षको के लिए खोल दिए जाए। क्लास 1 से 8 तक के स्कूलों में शिक्षक विभागीय काम और ऑनलाइन क्लासेज के लिए स्कूल खोलने की अनुमति दी हैं।इस दौरान अध्यापक ऑनलाइन क्लास के जरिए बच्चो की पढ़ाई जारी रखेंगे । 

पिछले काफी दिनों से बंद पड़े स्कूलों की साफ सफाई की जा रही हैं,साथ ही साथ सैनिटाइजेशन भी कराया जा रहा हैं ताकि स्कूल खुलने के बाद स्कूल आने वाले अध्यापकों और कर्मचारियों को किसी भी प्रकार का संकमृण ना होने पाए। लखनऊ मंडल एडी बेसिक प्रताप नारायण सिंह ने बताया कि शिक्षकों को स्कूल बुलाने की अनुमति दी गई हैं,लेकिन इसको स्कूल प्रबंधन पर छोड़ा गया है। जबरदस्ती किसी को आने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। 

इस दौरान स्कूलों में covid गाइडलाइंस का पालन करना अनिवार्य हैं। कक्षा 1 से 8 तक के परिषदीय स्कूलों को कई तरह के गतिविधियों को भी संचालित करने का निर्देश यूपी बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा किया गया है।

उनसे कहा गया है कि शत प्रतिशत बच्चो का नामांकन कराया जाए, मिड डे मील की परिवर्तन लागत धनराशि छात्र छात्राओं या अभिभावक के बैंक खाते में समय से भेजा जाए, छात्रों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें वितरित कराई जाए, परिषदीय विद्यलयों में ऑपरेशन कायाकल्प कि गतिविधियों को पूरा कराया जाए, मिशन प्रेरणा के तहत की पाठ्य शाला का संचालन कराया जाए। आज एक बार फिर स्कूलों कि रौनक वापस लौट रही हैं, पिछले 100 दिनों से बंद पड़े स्कूल फिर से गुलजार होंगे ।

वन नेशन वन राशन कार्ड के तहत राज्य, मजदूरों को मुफ्त राशन बांटें : सुप्रीम कोर्ट

लखनऊ / दिल्ली । कोरोना महामारी के चलते सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लिया है। वन नेशन वन राशन कार्ड की स्कीम 31 जुलाई तक लागू करें। सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों को राहत देने के लिए आदेश दिया है कि केंद्र सरकार और एनआईसी असंगठित मजदूरों के लिए एक राष्ट्रीय मोटिव तैयार करें । राज्य मजदूरों को मुफ्त राशन बाटे।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को आदेश दिया है कि प्रत्येक राज्य अनिवार्य तौर पर वन नेशन वन राशन कार्ड की स्कीम 31 जुलाई तक लागू करें ताकि प्रत्येक प्रवासी मजदूर देश के किसी भी हिस्से से राशन कार्ड के आधार पर सरकारी स्कीम का लाभ ले सके। इसके तहत अब आर्थिक तंगी से गुजर रहे लोगों को बहुत ही कम कीमत पर गेहूं व चावल जैसी जरूरी अनाज दी जा सकेगी। 

मौजूदा वक्त जब पूरी दुनिया संकट की मार झेल रही है | तब समस्याओं के समाधान के लिए नए नए उपायों पर बल दिया जा रहा है। इस मुश्किल वक्त में लॉकडाउन के दौरान देश में प्रवासी मजदूरों के भरण-पोषण की समस्या उभर के सामने आ रही है। इसकी वजह यह है कि जिन राज्यों में काम करने गए हैं उन राज्यों के राशन कार्ड नहीं होने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने’ वन नेशन वन राशन कार्ड योजना’ को राष्ट्रीय स्तर पर बनाने की कोशिश की है। 

भारत का सर्वोच्च न्यायालय

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों के वेलफेयर के लिए अन्य निर्देश भी जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह एनआईसी से संपर्क करें और असंगठित मजदूरों और प्रवासी मजदूरों के रजिस्ट्रेशन के लिए पोर्टल तैयार करें।सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को आदेश दिया है कि जब तक कोरोनावायरस का संकट जारी है तब तक कम्युनिटी किचन चलाएं और मजदूरों को मुफ्त में राशन मुहैया कराए जाएं।

India के बजाय UAE में खेला जायेगा T 20 का फाइनल

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लखनऊ / दिल्ली । आईसीसी टी-20 विश्व कप का आयोजन 17 अक्टूबर से UAE में खेला जाएगा. इस टूर्नामेंट में 16 टीमें हिस्सा लेंगी और इसका फाइनल मुकाबला 14 नवंबर को खेला जाएगा। इस टूर्नामेंट का आयोजन पहले भारत में प्रस्तावित था, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से आईसीसी ने इसका वेन्यू बदल दिया है. वैसे तो इस टूर्नामेंट का आयोजन यूएई में होगा, लेकिन इसकी मेजबानी भारत को मिल सकती है।  

पिछले दिनों कोरोना की दूसरी लहर के कारण भारत में चल रहे आईपीएल को बीच में ही रोकना पड़ा था. आईपीएल के बचे हुए मुकाबले भी सितंबर से यूएई में खेले जाएंगे. यानी आईपीएल के फाइनल मुकाबले के कुछ दिनों बाद ही आईसीसी का यह टूर्नामेंट यूएई में शुरू हो जाएगा. ऐसे में आने वाले कुछ महीने क्रिकेट प्रेमियों के लिए काफी बेहतरीन होने वाले हैं। 

शुरुआती कुछ मैच ओमान में खेले जाएंगे. ऐसे में जबकि निलंबित 2021 इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के शेष मैच 15 अक्टूबर को समाप्त हो रहे हैं, टी-20 विश्व कप दो दिन बाद आठ टीमों -बांग्लादेश, श्रीलंका, आयरलैंड, नीदरलैंडस, स्कॉटलैंड, नामीबिया, ओमान, पापुआ न्यू गिनी के साथ शुरू होगा।

इनमें से चार टीमें सुपर-4 में जगह बनाने के लिए संघर्ष करेंगी. राउंड 1 एलिमिनेशन मैच यूएई के साथ-साथ ओमान में भी आयोजित किए जाएंगे। शुक्रवार शाम को संपर्क किए जाने पर, एक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषदके प्रवक्ता ने कहा, कोई घोषणा आसन्न नहीं है. आईसीसी और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड, जिसे टूर्नामेंट आवंटित किया गया था, इसकी तारीखों और स्थानों के साथ 28 जून के बाद ही सामने आएंगे। 

सुपर 12 का चरण, जिसमें 30 मैच शामिल हैं, 24 अक्टूबर से शुरू होने वाले हैं। सुपर 12 में टीमों को छह-छह के दो समूहों में विभाजित किया जाएगा। जो यूएई में तीन स्थानों – दुबई, अबू धाबी और शारजाह में खेले जाएंगा। इसके बाद तीन प्लेऑफ मैच होंगे- दो सेमीफाइनल और फाइनल। यूएई और ओमान में राउंड-1 की सह-मेजबानी के साथ बीसीसीआई को भरोसा है कि सुपर 12 के लिए यूएई में मुख्य मैदानों में पिचों को तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।

दोस्त ने की दोस्ती की हत्या

लखनऊ / आगरा। आगरा से अपहरण और हत्या का दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। एक कोल्ड स्टोरेज के मालिक सुरेश चौहान के 23 वर्षीय इकलौते बेटे सचिन चौहान को अगवा करके हत्या कर दी गई। इतना ही नहीं हत्यारों ने उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया।

मृतक सचिन चौहान के पिता सुरेश चौहान सरकारी ठेकेदार और कोल्ड स्टोरेज के मालिक हैं। 21 जून को दिन में करीब 3:00 बजे उनका बेटा लोवर टीशर्ट में थोड़ी देर में लौटूंगा बोलकर बाहर गया था। देर रात जब बेटे के फोन से कॉल आती है तो मां फोन उठाती है। दूसरी तरफ कोई और युवक यह कह रहा होता है कि आपका बेटा इस समय काफी ज्यादा नशे में और ऐसे में हम सभी लोग नोएडा आ गए हैं।

जब मृतक की मां पूछती है कि आप कौन हो तो उधर से जवाब दिया जाता है कि आप अपने बेटे से ही पूछ लेना। उसके बाद अगले दिन भी जब उनका बेटा घर नहीं पहुंचता है तो सचिन के पिता थाना न्यू आगरा पुलिस को इस पूरी घटना की जानकारी देखकर रिपोर्ट लिखवाई ।

आगरा पुलिस के साथ उत्तर प्रदेश एसटीएफ किडनैपिंग की इस घटना में जुट गई पुलिस ने इस मामले में सचिन चौहान के दोस्त सुमित पासवान सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया। जिन्होंने 21 जून को ही सचिन की हत्या कर दी थी और इस घटना को दो करोड़ रुपए की फिरौती वसूलने के लिए अंजाम दिया था।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुनिराज ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि सुमित पासवान ने अपने दोस्तों के साथ सचिन को अपना जल संयंत्र पर ले गया ,और वहां उसे शराब पिलाई इसके बाद उसे मौत के घाट उतार दिया। किसी को शक ना हो इसके लिए सचिन के शव को PPE किट पहनाकर बलकेश्वर श्मशान घाट पहुंचे और कोरना संक्रमण का बहाना करके अन्य नाम बता के सचिन के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। 

मृतक के घर पर मातम का माहौल है। सचिन अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। मां-बाप का रो रो कर बुरा हाल है। पुलिस आरोपियों के खिलाफ जल्द ही सख्त से सख्त कार्रवाई करेगी और अदालत में उन्हें पेश करेगी ।

देश में पहली बार पेट्रोल ₹110 के पार

लखनऊ / दिल्ली । पेट्रोल- डीजल में बड़े दाम। पेट्रोल और डीजल में आज फिर इजाफा हो। गया है वही बात करें दिल्ली की तो दिल्ली में पेट्रोल 35 पैसे और डीजल 28 पैसे प्रति लीटर महंगा किया गया है। कीमत बढ़ने के बाद दिल्ली में पेट्रोल 98.81रूपये प्रति लीटर तक जा पहुंचा है।  

देश में पहली बार पेट्रोल करीब ₹110 प्रति लीटर हो गया है। राजस्थान के श्रीगंगानगर में पेट्रोल रूपये 110 लीटर के करीब है और मुंबई में पेट्रोल 104.90 रुपये और डीजल96.72 रूपये प्रति लीटर पर बिक रहा है लगातार बढ़ोतरी से ₹100 प्रति लीटर पेट्रोल वाले क्लब में हर रोज और नए शहर जूते जा रहे हैं।

महंगे पेट्रोल और डीजल की कीमत में आम आदमी को कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने आज दोनों ईंधन की कीमत में भारी दाम बढ़ा दिए हैं। खुदरा कीमत में 35 पैसे प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है और डीजल के दाम में भी 28 से 30 पैसे प्रति लीटर तक का इजाफा हो गया है।

ऑइल कंपनियों ने लगातार इंधन में बढ़ोतरी कर दी है । इससे पहले रविवार को पेट्रोल की कीमत में 35 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 25 पैसे प्रति लीटर बढ़ा दिया था।

बता दें कि पेट्रोल और डीजल की कीमत में हर रोज सुबह 6:00 बजे बदलाव होता है पेट्रोल डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी डीलर कमीशन और दूसरी चीजें को जोड़ने के बाद इसका दाम करीब 2 गुना ज्यादा हो जाता है। विदेश मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें क्या है इस आधार पर रोज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। 

चीन की चालाकियां… हम न तो किसी को छेड़ते हैं और अगर कोई हमें छेड़े तो उसे छोड़ते भी नहीं हैं

लखनऊ / दिल्ली । आत्मनिर्भर होना हर व्यक्ति समाज और राष्ट्र का स्वपन होता है। हमारी भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने भी कहा है। कि एक राष्ट्र की शक्ति उसकी आत्मनिर्भरता में है। दूसरों से उधार लेकर काम चलाने में नहीं। आत्मनिर्भर राष्ट्र ही अपने राष्ट्र को सर्वोपरि बना सकता है। क्योंकि जो राष्ट्र आत्मनिर्भर होता है। अपने पैरों पर खड़ा खड़ा होता है। वही अपने आप में सबसे अच्छा होता है।

सीमा पर चीनी चालाकियों को देखते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्वी लद्दाख से चीन को कड़ा संदेश देते हुए सोमवार को कहा कि भारत ‘गलवान वीरों’ के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा और देश के सशस्त्र बल हर चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं। वालों की संख्या अधिक थी। भारतीय सेना किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। *भारत वसुधैव कुटुंबकम्* में विश्वास रखता है। भारत ऐसे किसी भी कार्यवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा जिससे उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचती हो।

रक्षा मंत्री लद्दाख के तीन दिवसीय दौरे पर रविवार को पहुंचे थे। सोमवार को उन्होंने लेह से 88 किलोमीटर दूर क्यूनगम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा बनाए गए पुल देश को समर्पित किए। इनमें लेह-लोमा मार्ग पर 50 मीटर लंबा पुल भी शामिल है। सैन्य दृष्टि से यह पुल काफी अहम है। इस पुल से सुरक्षा बलों और सेना के ट्रक आदि गुजरने में आसानी होगी। 

लद्दाख के तीन दिवसीय दौरे के दूसरे दिन सोमवार (28 जून) को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारू मिलिट्री स्टेशन में जवानों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिली है। जम्मू कश्मीर में आतंकवाद की घटनाओं में कमी आई है तो लद्दाख में निवेश और ढांचागत सुविधाएं बढ़ी हैं। रक्षा मंत्री लद्दाख में के कारू मिलिट्री स्टेशन भी गए उन्होंने कहा कि लद्दाख में कई वीर कहानियां है, उन्होंने कहा की मैं आश्वासन दिलाना चाहता हूं कि सशस्त्र बलों की सभी जरूरतों को पूरा किया जाएगा। 

इन राज्यों को मिले पुल: बीआरओ द्वारा बनाए गए 63 पुलों के निर्माण की संयुक्त लागत 240 करोड़ रुपये है इन पुलों में लद्दाख के 11 जम्मू कश्मीर के चार हिमाचल प्रदेश के तीन उत्तराखंड के छह सिक्किम के आठ नागालैंड और मणिपुर का एक-एक और अरुणाचल प्रदेश के 29 पुल शामिल हैं।आत्मनिर्भर राष्ट्र ही अपने राष्ट्र को सर्वोपरि बना सकता है। क्योंकि जो राष्ट्र आत्मनिर्भर होता है। अपने पैरों पर खड़ा खड़ा होता है। वही अपने आप में सबसे अच्छा होता है।

चीन की चालाकियों के चिथड़े उड़ाने सीमा पर 2 लाख जवान तैनात

लखनऊ / दिल्ली । चीन पर कड़ी नजर बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत ने चीनी सीमा पर करीब 2 लाख सैनिक तैनात कर दिए हैं, जो बीते साल की तुलना में 40 फीसदी ज्यादा हैं। भारत और चीन के बॉर्डर पर हालात अभी भी सामान्य नहीं हैं। इसका ताजा उदाहरण ये है कि भारत ने कम से कम 50 हजार सैनिकों को चीनी बॉर्डर के पास भेजा है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग ने ये जानकारी दी है। 

न्यूज एजेंसी ने भारत के इस कदम को ऐतिहासिक बताया है और सूत्रों के हवाले से कहा है कि भारत ने बीते कुछ महीनों में 3 अलग-अलग इलाकों में सैन्य टुकड़ियां और विमानों को तैनात किया है। ये तीनों इलाके चीनी बॉर्डर से सटे हुए हैं।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन (India China Dispute) पर कड़ी नजर बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत ने चीनी सीमा पर करीब 2 लाख सैनिक तैनात कर दिए हैं, जो बीते साल की तुलना में 40 फीसदी ज्यादा हैं। 

हालांकि, भारतीय सेना और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से इस जानकारी की पुष्टि नहीं की गई है। बता दें कि बीते साल 15 जून को चीनी सैनिकों ने पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर धोखे से हमला कर दिया था, इसके बाद से ही भारत आक्रामक रुख अपनाया हुआ है। 

खबर ये भी है कि भारत, चीन के खिलाफ offensive defence की strategy अपना रहा है। हालांकि अभी तक इस बात की पुख्ता जानकारी नहीं है कि चीन ने अपनी तरफ कितने सैनिकों की तैनाती कर रखी है।

बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों में भारत ने चीन से लगती अपनी सीमा के साथ तीन अलग – अलग क्षेत्रों पर अपने सैनिकों और लड़ाकू जेट्स स्क्वाड्रनों को तैनात कर दिया है। कुल मिलकर भारत ने अब लगभग 2,00,000 जवान को बॉर्डर पर तैनात कर दिया है। पिछले साल से 40 फीसदी अधिक जवान बॉर्डर पर तैनात हैं। 

रविवार को भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, army chief, general M.M naravane सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारी बॉर्डर पर सैन्य तैयारियों की समीक्षा करने के लिए लद्दाख में थे।

जानकारी के अनुसार, Indian Air force ने अरुणाचल प्रदेश में लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस फ्रांस से मंगाए गए Rafale fighter “राफेल फाइटर” जेट्स को सपोर्ट के लिए तैनात किया हुआ है. इसके साथ ही, चीन से तनाव के बीच भारतीय नौसेना भी पूरी तरह मदद के लिए आगे आई हुई है. वह ज्यादा युद्धपोतों को लंबे समय के लिए प्रमुख समुद्री मार्गों पर रख रही है। 

हालाकि, अभी यह साफ नहीं हुआ है कि बॉर्डर पर चीन के कितने सैनिक हैं, लेकिन भारत ने पाया है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (चीनी सेना) ने हाल ही में तिब्बत से अतिरिक्त बलों को शिनजियांग सैन्य कमांड में ट्रांसफर कर दिया है।

इसी कमांड की जिम्मेदारी इस क्षेत्र में गश्त करने की है. दो लोगों ने बताया कि चीन तिब्बत में विवादित सीमा पर नए run-way बम प्रूफ बंकर हाउस, fighter jett और नए airfield जोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बीजिंग ने पिछले कुछ महीनों में लंबी दूरी की तोपें, टैंक, रॉकेट और दो इंजन वाले लड़ाकू विमान भी तैनात किए हैं। 

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता wang wenbin वांग ने सेना की तैनाती के बारे में एक सवाल के जवाब में सोमवार को बीजिंग में नियमित press conference में बताया, “चीन और भारत के बीच सीमा पर वर्तमान स्थिति स्थिर बनी हुई है. दोनों पक्ष सीमा मुद्दों को हल करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। 

एक लड़की ऐनी… दूध मुंहे बच्चे के साथ पति ने घर से निकाल दिया तो सड़क पर नींबू पानी बेचा फिर पुलिस अधिकारी बन कर लौटी

लखनऊ / तिरुवनंतपुरम। कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता! एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। इस शेर को केरल की ऐनी शिवा ने चरितार्थ कर दिखाया है कभी केरल की सड़कों पर मजबूरी में नींबू पानी और आइसक्रीम बेच कर अपना गुजारा करने वाली लड़की अब पुलिस इंस्पेक्टर के रूप में तैनात है 31 वर्षीय एनी शिवा ने अपने सपने में भी कभी नहीं सोचा होगा कि जिस जगह वो पर्यटकों को नींबू पानी पिला रही है एक दिन वो उसी एरिया की पुलिस इंस्पेक्टर बन जाएगी। 

केरला पुलिस ने उन्हें उनकी सफलता के लिए बधाई देते हुए ट्वीट किया है कि ‘वह इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास का एक मॉडल है, एक 18 वर्षीय लड़की जो अपने 6 महीने के बच्चे के साथ अपने पति और परिवार के छोड़े जाने के बाद सड़कों पर छोड़ दी गई अब 31 साल की उम्र में वर्क रुला पुलिस स्टेशन में सब इंस्पेक्टर बन गई है।

एएनआई से बातचीत के दौरान ऐनी शिवा ने बताया कि जब मुझे पता चला कि मेरी पोस्टिंग कुछ दिन पहले ही वरकुला पुलिस स्टेशन में हुई है। यह एक ऐसी जगह है जहां मैंने अपने छोटे बच्चे के साथ आंसू बहाए और तब मेरा साथ देने वाला कोई नहीं था। वर्कुला शिवगिरी आश्रम के स्कूलों में मैंने कई छोटे व्यवसायों को करने की कोशिश की जैसे नींबू पानी, आइसक्रीम से लेकर हस्तनिर्मित निर्मित शिल्प बेचना, सबकुछ फ्लॉप हो गया तब एक व्यक्ति ने मुझे सुझाव दिया और मुझे सब इंस्पेक्टर टेस्ट के लिए तैयारी करने के लिए पैसे से मदद की।

नी ने बताया कि वह हमेशा से आईपीएस ऑफिसर बनना चाहती थी, साथ ही बताया कि एफबी पर अपनी आपबीती बताने पर लोगों से जो समर्थन उन्हें मिल रहा उससे वह गर्व महसूस कर रही है और भावुक भी हैं। ऐनी ने साथ ही यह भी कहा कि तमाम बाधाओं से लड़ते हुए मैं यहां पहुंचने में सफल रही हूं, अगर अन्य महिलाओं को अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए मुझ से प्रेरणा मिलती है, तो मैं खुश हूँ ।

आपको बताते चलें कि, 18 साल की ऐनी शिवा जिसकी गोद में 6 महीने का बच्चा था..एक दिन अचानक उसके पति ने उसे अपने बच्चे के साथ सड़क पर छोड़ दिया, नींबू पानी बेचा, आइसक्रीम बेची और अपने हिम्मत हौसले से सब इन्स्पेक्टर बन कर शिवा केरल के वर्कला वापस लौटीं आपको बता दें कि वर्कला वही जगह जहाँ उन्होंने दर-दर की ठोकरें खाई थीं। 

एनी शिवा ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, दस साल पहले मैं वर्कला शिवगिरी आने वाले लोगों को नींबू पानी और आइसक्रीम बेचा करती थी। आज मैं उसी जगह एक पुलिस उपनिरीक्षक के रूप लौटी हूं। मैं अपने अतीत से इससे अच्छा बदला कैसे ले सकती हूँ? 

ट्विटर ने कश्मीर और लद्दाख को भारत के नक्शे से अलग किया

लखनऊ / दिल्ली । सरकार के जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि ट्विटर कि वेबसाइट पर जम्मू कश्मीर और लद्दाख को अलग देश दिखाया गया है, ट्विटर ने भारत के नक्शे से कश्मीर और लद्दाख को अलग कर दिया। ट्विटर और केंद्र सरकार के बीच चल रहे तनाव और बढ़ सकते हैं।इस बार भारत के नक्शे के साथ छेड़छाड़ करने को लेकर तनातनी हो सकती हैं।.

ट्विटर के करियर पेज पर ट्वीप लाइफ सेक्शन Tweep life section) में वर्ल्ड मैप हैं, यहां से कम्पनी ये दर्शाती है कि दुनिया भर में ट्विटर का टीम है।  इस मैप में इंडिया भी है,लेकिन भारत का नक्शा विवादित दिखाया गया है। इससे पहले भी लद्दाख को भारत का हिस्सा नहीं दिखाया गया था, हालाकि बाद में इसे सही कर लिया गया था। 

वहीं भारत सरकार ने इस मुद्दे पर संज्ञान ले लिया है ।सरकार सूत्रों के माने तो सरकार इसे लेकर कई तथ्य जुटा रही हैं, जैसे नक्शे में कब बदलाव किए गए यह नक्शा कब website पर डाला गया ,वे कौन लोग हैं जिसने ट्विटर पर ये नक्शा अपलोड किया आखिर नक्शे के बदलाव के पीछे की मंशा क्या है ? 

अब चुकीं सरकार खुले तौर पर ट्विटर के विरोध में चुकी हैं।और रविशंकर प्रसाद ने यह साफ किया कि ट्विटर भारत को लेकर दोहरा रवैया रखता है, इसलिए ये विवाद एक बार फिर से तूल पकड़ सकता हैं। इससे पहले भी लद्दाख के हिस्से को भारत का हिस्सा नहीं दिखाया गया था। हालाकि बाद में इसे ठीक कर लिया गया था। 

रविशंकर प्रसाद इस मामले पर बार बार कहते हैं कि ये ट्विटर के दोहरे मापदंड को दर्शाता है, उन्होने कहा था की ट्विटर कि मंशा ठीक नहीं लग रही है। ट्विटर ने कैरियर पेज पर जो भारत का नक्शा हैं,इसमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख नहीं हैं यानी बॉर्डर के बाहर दिखाया गया है। सोशल मीडिया पर लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं। लेकिन अभी तक ट्विटर कि ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया हैं ।

राष्ट्रपति लखनऊ में, जानें कहाँ से गुजरें कहाँ रुकें

लखनऊ / कानपुर। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द सोमवार को कानपुर से लखनऊ आएंगे। लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर प्रेसिडेंशियल एक्सप्रेस से पहुंचने के बाद वह सड़क मार्ग से सीधे गवर्नर हाउस जाएंगे। इस दौरान राष्ट्रपति का काफिला लखनऊ के चारबाग हजरतगंज से होते हुए राजभवन पहुंचेगा। यहां न्यायाधीशों के साथ हाई टी का कार्यक्रम है। सूत्रों के मुताबिक इस कार्यक्रम में cheif justice of India भी मौजूद रहेंगे। 

मंगलवार को लोकभवन से राष्ट्रपति डॉ. आंबेडकर सांस्कृतिक केंद्र का वर्चुअल शिलान्यास भी करेंगे। लोकभवन में करीब एक घंटे का कार्यक्रम प्रस्तावित है। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद मंगलवार शाम को राष्ट्रपति राजभवन से प्रस्थान करेंगे और दिल्ली के लिए रवाना होंगे।

सुरक्षा के लिहाज से एयरपोर्ट के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। शहर में सड़कों पर कई जगह रूट डाइवर्जन रहेगा। विभिन्न मार्गों पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी, जबकि कार्यक्रम के दौरान छोटे वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।

कानपुर से आने वाले भारी वाहन पर रोक लगा दिया गया है इसी प्रकार बुद्धेश्वर चौराहे की ओर आने वाले भारी वाहन बाराबिरवा चौराहे की तरफ नहीं आ सकेंगे। रायबरेली रोड की तरफ से आने वाले भारी वाहन मोहनलालगंज कस्बा तिराहे से पीजीआई, उतरेटिया, शहीद पथ की तरफ नहीं जा सकेंगे, जबकि सुल्तानपुर रोड की ओर से आने वाले भारी वाहन गोसाईंगंज कस्बा तिराहा से अहिमामऊ शहीद पथ पुल की तरफ नहीं जा सकेंगे। कमता शहीद पथ तिराहा फैजाबाद रोड से भारी वाहन अहिमामऊ शहीद पथ की ओर नहीं जा सकेंगे। फैजाबाद/बाराबंकी से आने वाले भारी वाहन कमता शहीद पथ की तरफ नहीं जा सकेंगे। बाराबंकी कुर्सी रोड तिराहा से टेढ़ी पुलिया की ओर से भारी वाहनों पर रोक रहेगी।

लखनऊ पुलिस ने ट्रैफिक जाम में फंसने पर ऐंबुलेंस और अन्य वाहनों के लिए इमरजेंसी नंबर जारी किया है। जाम में फंसने पर 6389304141, 6389304242, 9454405155 पर कॉल करके मदद ले सकते हैं। डीसीपी ट्रैफिक रईस अख्तर ने बताया कि राष्ट्रपति के आगमन पर सोमवार और मंगलवार को कार्यक्रम समाप्त होने तक राजधानी में कई रास्तों का ट्रैफिक डायवर्ट रहेगा

चारबाग स्थित रविन्द्रालय तिराहे से चारबाग रेलवे स्टेशन की ओर सामान्य यातायात नहीं जा सकेगा, बल्कि  चारबाग छोटी लाइन तिराहे से बाएं होकर निकला जा सकेगा। चारबाग रेलवे स्टेशन आरक्षण केंद्र तिराहे से चारबाग रेलवे स्टेशन वीआइपी पोर्टिको की ओर सामान्य यातायात नहीं जा सकेगा। चारबाग रेलवे स्टेशन टैक्सी स्टैंड तिराहे से यातायात चारबाग रेलवे स्टेशन वीआइपी पोर्टिको को ओर नहीं जा सकेगा, बल्कि यह चारबाग लाटूश रोड तिराहा होकर जाया जा सकेगा। 

चारबाग रेलवे स्टेशन उत्तर रेलवे कैब वे तिराहे से सामान्य यातायात चारबाग रेलवे स्टेशन वीआइपी पोर्टिको को ओर नहीं जा सकेगा, बल्कि यह छोटी लाइन तिराहा होकर अपने गंतव्य के लिए जाया जा सकेगा। बंदरियाबाग चौराहे से सामान्य यातायात राजभवन की ओर नहीं जा सकेगा, बल्कि यह गोल्फ क्लब चौराहा या लालबहादुर शास्त्री तिराहा होकर अपने गंतव्य को जा सकेगा। डीएसओ चौराहे से सामान्य यातायात राजभवन की ओर नहीं जा सकेगा। 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का राजाजीपुरम् में आना जाना रहा है। राष्ट्रपति व राज्यपाल बनने से पहले जब वह लखनऊ आते थे तो अक्सर राजाजीपुरम् आते थे। यहां वह अपनी भतीजी सपना के एलआईजी स्थित मकान में भी ठहर चुके हैं। राज्यपाल रहते हुए भी वह राजाजीपुरम में भतीजी से मिलने आ चुके हैं।

कानपुर में पैतृक गांव के दौरे के बाद दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ आ रहे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने के लिए उनकी भतीजी बृजकिशोरी वर्मा उर्फ धुन्नी भी आतुर हैं। राजाजीपुरम की डाक एवं तार कॉलोनी में रह रहीं धुन्नी राष्ट्रपति के सबसे बड़े भाई की बड़ी बेटी हैं। यहां वह अपने पति व बच्चों संग रहती हैं।

राष्ट्रपति के दामाद राजकिशोर वर्मा ने बताया कि उनके परिवार को गांव के दौरे के दौरान घर आने का भी न्योता आया था, लेकिन कुछ व्यस्तताओं के कारण वह वहां नहीं जा पा रहे। इधर लखनऊ में 28, 29 तारीख के दौरे में ही उनका परिवार उनसे मिलेगा। 

बृजकिशोरी वर्मा उर्फ धुन्नी के दो बेटों में एक प्राइवेट नौकरी करने वाले सौरभ वर्मा व बैंक ऑफ बड़ौदा में मैनेजर गौरव के साथ ही बेटी आरुषी वर्मा को भी अपने नाना का इंतजार है। आरुषी महाराष्ट्र में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और इन दिनों लखनऊ आई हुई हैं। 

उत्तर रेलवे के सीनियर डीसीएम अजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था के कारण स्टेशन पर करंट बुकिंग काउंटर भी रविवार शाम छह बजे से सोमवार दोपहर दो बजे तक बंद रहेगा। इस दौरान यात्रियों को सेकंड एंट्री पर टिकट उपलब्ध करवाए जाएंगे।

चारबाग आरक्षण केंद्र की ओर से सोमवार सुबह 8 से दोपहर 12 बजे तक एंट्री पूरी तरह बंद रहेगी। यात्री मेट्रो स्टेशन के सामने से पार्सल घर और एनईआर के कैब-वे जा सकेंगे। इस दौरान कैब-वे में ही पार्किंग की सुविधा मिलेगी। स्टेशन के प्लैटफॉर्म-1 पर प्रवेश पूरह तरह प्रतिबंधित रहेगा । 

सीनियर डीसीएम ने बताया कि जिन यात्रियों की ट्रेनें प्लैटफॉर्म 2, 3, 4 और 5 से होंगी, उन्हें सब-वे होकर जाने की अनुमति मिलेगी। प्लैटफॉर्म 6 और 7 पर जाने वाले यात्री प्लैटफॉर्म-5 के फुट ओवरब्रिज के जरिए जा सकता है। 

बिहार में रार… मद्धम होती लालटेन और बुझते हुए चिराग को एक दूसरे का सहारा!

लखनऊ / पटना। बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। शनिवार को लोजपा नेता चिराग पासवान ने कहा है कि मेरे पिताजी (स्वर्गीय रामविलास पासवान) और लालू यादव काफी घनिष्ठ मित्र रहे हैं। मैं और तेजस्वी यादव एक दूसरे को बचपन से ही जानते हैं और हम लोग काफी अच्छे दोस्त हैं। तेजस्वी मेरे छोटे भाई के समान हैं। बिहार में जब चुनाव का समय आएगा तब पार्टी RJD के साथ गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला लेगी।

ANI के साथ बातचीत में चिराग पासवान ने कहा है कि CAA NRC समेत हर कदम पर मैं भाजपा के साथ खड़ा रहा हूं। वहीं नीतीश कुमार इससे असहमत थे। अब BJP को तय करना है कि आने वाले दिनों में वे मेरा समर्थन करेंगे या नीतीश कुमार का। इसके अलावा चिराग ने कहा है कि,

मैंने हनुमान की तरह प्रधानमंत्री जी का हर मुश्किल दौर में साथ दिया और आज जब हनुमान का राजनीतिक वध करने का प्रयास किया जा रहा है, मैं ये विश्वास करता हूं कि ऐसे में राम खामोशी से नहीं देखेंगे

गौरतलब है कि RJD नेता तेजस्वी यादव ने चिराग पासवान की तरफ एक बार फिर से दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। तेजस्वी ने पहले चिराग को साथ आने का ऑफर दिया और अब उनकी पार्टी 5 जुलाई को रामविलास पासवान की जयंती मनाएगी। इस मौके पर पार्टी दफ्तर में उनकी फोटो पर पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता माल्यार्पण करेंगे। दिलचस्प बात ये है कि उसी दिन राजद का स्थापना दिवस भी है तो उससे संबंधित कार्यक्रम उसके बाद होंगे। 

 

जाहिर है पीएम मोदी को राम बताकर चिराग अपनी पार्टी में ही राजनीतिक हैसियत बचाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि बीजेपी से वो नाराज भी हैं. शायद यही वजह है कि वह तेजस्वी यादव को अपना छोटा भाई बता रहे हैं और भविष्य के चिराग पासवान की राजनीतिक हैसियत बनाने की रणनीति पर काम करना शुरू भी कर दिया है। 

LJP में टूट के बाद से RJD अलग-थलग पड़े चिराग पासवान को अपने साथ लाने की कवायद में जुट गई है. आरजेडी ने तय किया है कि 5 जुलाई को उनकी पार्टी रामविलास पासवान की जयंती मनाएगी. 5 जुलाई की तारीख आरजेडी के लिए भी खास है. वो इसलिए क्योंकि इस दिन आरजेडी का 25वां स्थापना दिवस है. इसी दिन रामविलास पासवान का भी जन्मदिन है, इसलिए आरजेडी ने फैसला किया है कि स्थापना दिवस के कार्यक्रम से पहले रामविलास पासवान की जयंती का कार्यक्रम बनाया जाएगा. सूत्रों की मानें तो आरजेडी रामविलास पासवान की जयंती मनाकर चिराग को अपने खेमे में लाने की कोशिश कर रही है। 

लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) में चल रहा सियासी संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बुधवार को पटना पहुंचे। राजधानी पहुंचते ही उन्होंने चिराग पासवान को साथ आने का ऑफर देते हुए याद दिलाया कि कैसे लालू प्रसाद ने 2010 में रामविलास पासवान को राज्यसभा के लिए नामांकित होने में मदद की थी, जब लोजपा के पास कोई सांसद या विधायक नहीं था।

तेजस्वी ने चिराग को ऐसे समय पर यह ऑफर दिया है जब चिराग पांच जुलाई से हाजीपुर से अपनी बिहार यात्रा शुरू कर खोई हुई राजनीतिक जमीन फिर से हासिल करने की तैयारी कर रहे हैं। उनके चाचा पशुपति पारस के गुट का लोजपा पर कब्जा हो गया है। पटना पहुंचते ही तेजस्वी ने कहा, ‘चिराग भाई तय करें कि उन्हें आरएसएस के बंच ऑफ थॉट्स के साथ रहना है या संविधान निर्माता बाबा साहब ने जो लिखा है, उसका साथ देंगे।’

जदयू का नाम लिए बिना तेजस्वी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए उन्हें लोजपा में मचे घमासान के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो षड्यंत्र रचने में माहिर होते हैं। इसके बाद ये लोग राज्य में राजनीतिक घटनाओं के बारे में अनभिज्ञता भी जताते हैं।’ तेजस्वी नीतीश के उस बयान का जिक्र कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें लोजपा में जारी घमासान की जानकारी नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘इसी अज्ञानता के कारण ही बिहार इस तरह की स्थिति में आ गया है। यहां बेरोजगारी और भुखमरी हो गई है। आरजेडी ने 2010 में पासवान जी को राज्यसभा के लिए मनोनीत करने में मदद की थी जब लोजपा के पास कोई सांसद या विधायक नहीं था।’ चिराग ने जहां तेजस्वी की टिप्पणी पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, वहीं लोजपा नेता ने भाजपा से अपने मोहभंग के स्पष्ट संकेत दिए हैं। 

चिराग ने अपनी पार्टी को तोड़ने के लिए नीतीश कुमार को दोषी ठहराया था। उन्होंने भाजपा की चुप्पी पर हैरानी जताई है। तेजस्वी यादव के करीबी नेता ने कहा कि ‘तुरंत नहीं’ लेकिन दोनों के एक साथ आने का राजनीतिक तर्क तो है। पूर्व में भी रामविलास जी ने 2002 के बाद मोदी के साथ मतभेदों के कारण अटल बिहारी वाजपेयी कैबिनेट को छोड़ दिया था। 

कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमला, आतंकवादियों के हमले में एक जवान शहीद

लखनऊ / दिल्ली । जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले में अचानक हुई बढ़ोतरी से दूसरी बार सुरक्षा बलों को निशाना बनाया गया है। जम्मू कश्मीर में पिछले कुछ समय में आतंकी घटनाओं मैं तेजी आई है। कुछ दिन पहले ही शोपिया में आतंकियों ने एक पुलिसकर्मी को निशाना बनाया था। 

जम्मू कश्मीर में एक बार फिर से हलचल तेजी से हुई है आतंकवादियों द्वारा सुरक्षाबलों को निशाना बनाया जा रहा है पिछले दिन ही शोपिया में एक पुलिस इंस्पेक्टर को गोली मारकर हत्या कर दी। और इस बार ही नहीं इससे पहले भी आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों के दस्ते पर हमला किया था। मंगलवार को दक्षिणी कश्मीर के शोपियां जिले में आतंकवादियों ने एक पुलिस इंस्पेक्टर को गोली मारकर हत्या कर दी गई। 

कनीपुरा इलाके में परवेज अहमद नमाज पढ़कर वापस आ रहे थे उसी वक्त पीछे से कुछ आतंकवादी आए और प्रवेश पर गोलियां बरसाने लगे थे। इंस्पेक्टर प्रवेश को 3 गोलियां लगी तभी प्रवेश को अस्पताल ले जाया गया अस्पताल जाने के बाद परवेज अहमद को मृत घोषित कर दिया गया। यह भी बता दें कि परवेज अहमद सीआईडी(CID) के साथ काम करते थे।

शोपिया जिले के बाबा पुरा इलाके में आतंकियों ने सीआरपीएफ (CRPF) की नाका पार्टी पर हमला किया, अच्छी बात तो यह रही कि उस हमले में किसी को कोई भी नुकसान और चोट नहीं पहुंची थी क्योंकि आतंकवादियों ने जब नाका पर हमला किया तो सुरक्षाबलों ने बराबर से जवाबी फायरिंग की सभी आतंकवादी वहां से तुरंत भाग निकले थे। 

पिछले शुक्रवार को भी आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों की एक पार्टी पर हमला किया था जैनापोरा में आतंकियों द्वारा सुरक्षाबलों पर फायरिंग की थी लेकिन किसी को भी किसी प्रकार का नुकसान या चोट नहीं पहुंची थी। 

अहम बात यह है कि पिछले कुछ दिनों में आतंकी घटनाओं में अचानक बढ़ोतरी इसलिए हुई है जब यह सब हो रहा था जबही जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक हलचल बढ़ने लगी है जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए हुए पूरे 2 साल होने वाले हैं इस बीच केंद्र सरकार ने राज्य के नेताओं से चर्चा के लिए 24 जून को बैठक बुलाई है जानकारी के मुताबिक बता दें कि आतंकवादी हुर्रियत के संगठन का लगातार किसी भी प्रकार की बातचीत का विरोध करते आए हैं।

अयोध्या मास्टर प्लान : पीएम नरेंद्र मोदी ने की समीक्षा बैठक, विकास कार्यों को लेकर हुई चर्चा।

लखनऊ / दिल्ली । पीएम नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए मंदिर निर्माण को लेकर समीक्षा बैठक की। जिसमें यूपी के मुख्यमंत्री योगी और दोनों मुख्यमंत्री केशव मौर्य व दिनेश शर्मा मौजूद थे। अयोध्या राम जन्मभूमि पर सुप्रीकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब राम मंदिर निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा हैं । इसके साथ ही अयोध्या शहर के विकास को लेकर भी केंद्र वा राज्य सरकार कई अहम फैसले ले रही हैं।

इसी क्रम में शनिवार को बैठक हुई जिसमें मोदी जी के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ ,दोनों मुख्यमंत्री केशव मौर्य और दिनेश शर्मा की मीटिंग खत्म हुई । वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से हो रही इस बैठक में योगी सरकार के अयोध्या बिजन का प्रस्तुति करण किया गया । डिजिटल माडल के साथ अयोध्या के सारे प्रोजेक्टों को पीएम के समक्ष रखा गया  पीएम मोदी ने मंत्रियों और अधिकारियों से सुझाव मांगे। 

 

मीटिंग में अयोध्या के विकास में योगदान देने वाले विभागों मसलन ऊर्जा, बित्त, नगर विकास, परिवहन, पर्यटन व नागरिक उडडयन विभाग के मंत्री भी मौजूद थे। डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा कि पीएम मोदी ने बैठक में मार्गदर्शन दिया। उन्होने कहा कि विकास कार्यों को लेकर पीएम ने व्यापक बिजन दिया।

वहीं राम मंदिर के प्रधान पूजारी आचार्य सत्यंद्र दास ने अयोध्या मास्टर प्लान पर पीएम और यूपी के सीएम योगी की मीटिंग पर खुशी व्यक्त किया। अयोध्या विकास योजना की बैठक के सरकारी सूत्रों ने बताया कि , पीएम मोदी ने अयोध्या को प्रगति की दिशा में ले जाने पर जोर दिया । उन्होंने कहा कि यह अयोध्या कि असली पहचान की , खुशी मनाने और विभिन्न सांस्कृतिक पहलुवो को जीवित रखने का हमारा सामूहिक प्रयास हैं। 

पीएम ने आगे कहा कि जिस तरह भगवान राम में लोगो को एक साथ लाने की क्षमता थी, उसी प्रकार अयोध्या के विकास कार्यों को सकारात्मक जनभागीदारी की भावना से निर्देशित किया जाना चाहिए । पीएम मोदी ने अयोध्या के इस विकास कार्य में प्रतिभाशाली युवाओं को कौशल का लाभ उठाने का भी सुझाव दिया । सूत्रों के मुताबिक बताया जा रहा है कि मंदिर निर्माण को लेकर फिर हाई लेवल बैठक होगी।

23 जून International Olympics Day : गया वो जमाना जब कहा जाता था, खेलोगे कूदोगे होगे खराब पढ़ोगे लिखोगे होगे नवाब! अब तो कहा जाता है, खेलो इंडिया खेलो

लखनऊ / दिल्ली । दुनिया  भर में हर साल 23 जून का दिन इंटरनेशनल ओलिंपिक डे के तौर पर मनाया जाता है। क्या एक तरह से खेलकूद की गतिविधियों को मनाने का दिन है। जिसे दुनिया भर के युवा और बुजुर्ग सेलिब्रेट करते हैं कुल। खोलना काल में विश्व ओलंपिक दिवस की थीम :स्वस्थ रहें, मजबूत रहें और सक्रिय रहें(stay healthy,stay strong and stay active) रखी गई है, जो वर्तमान परिस्थितियों में उचित है।

दरअसल 1894 में इसी दिन इंटरनेशनल ओलंपिक समिति का गठन किया गया था। इसका लक्ष्य दुनिया भर के लोगों को अपना सर्वश्रेष्ठ बनने के लिए प्रेरित करना है। पुर्तगाल ,ग्रीस, ऑस्ट्रिया, कनाडा ,स्विजरलैंड , यूनाइटेड किंगडम , वीनूजूला और बेल्जियम सभी ने अपने अपने देशों में एक ओलंपिक दिवस आयोजित किया, और उस समय आईओसी के अध्यक्ष जैक्स रोगे ने दुनिया के युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक संदेश भेजा। उन्हें खेलों में भाग लेने को प्रेरित किया गया। इंटरनेशनल ओलिंपिक डे मनाने की शुरुआत हुई है।

खेल व फिटनेस को समर्पित इस दिन विश्व के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिसमें हर वर्ग के लोग व खिलाड़ी शामिल होते हैं लेकिन कोविड संक्रमण को देखते हुए इस साल कोई आयोजन देखने को नहीं मिला।

ओलंपिक खेल जापान की राजधानी टोक्यो में 23 जुलाई से 8 अगस्त के बीच होने हैं। इनके बाद पैरालंपिक खेलों का आयोजन होगा जो 24 अगस्त से 5 सितंबर के बीच होंगे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओलंपिक दिवस के अवसर पर ट्वीट करके एथलीट को सलामी दी है। साथ ही सबको ओलंपिक में भाग लेने की गुजारिश की है।

बता दे कि भारत की ओर से टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेने की पात्रता  हासिल कर चुके हैं। भारतीय ओलंपिक संघ को उम्मीद है कि अभी कुछ और खिलाड़ी टोक्यो का टिकट हासिल कर लेंगे। भारतीय एथलीट ने अब तक 12 खेलों में हिस्सा लेने की पात्रता हासिल की है बैडमिंटन कोमा मुक्केबाजी हॉकी कुश्ती नौकायन एथलेटिक तीरंदाजी घुड़सवारी तलवारबाजी रोइंग निशानेबाजी और टेबल टेनिस शामिल है। वैसे भारत की ओर से टोक्यो ओलंपिक में शामिल होने वाले सभी खिलाड़ियों और अधिकारियों को टोकियो रवाना होने से पहले ही कोरोना वैक्सीन की खुराक दी जाएगी।

फिल्म का टाइटल सत्यनाराण की कथा पर बवाल … फैंस ने पूछा, हिंदू परंपरा और प्रतीकों का मखौल क्यों?

लखनऊ / मुंबई। कार्तिक आर्यन के नए फिल्म के टाइटल पर फैंस बवाल कर रहे हैंओ फिल्म मेकर्स से मांग कर रहे हैं कि आखिर हमेशा हिन्दू धर्म के  इतिहास के आधार पर ही फिल्मों के टाइटल या कहानी क्यों रखा जाता हैं ? 

बॉलीवुड के तेजी से उभरते कलाकार कार्तिक आर्यन पिछले कुछ समय से चर्चा में थे क्योंकि उन्हें करण जोहर की फिल्म  दोस्ताना 2 से निकाल दिया गया था।अब कार्तिक आर्यन फिल्म छोड़ने नहीं बल्कि साइन करने को लेकर सुर्खयों में हैं । कार्तिक आर्यन पिछली बार फिल्म लव आज कल में नजर आए थे । जल्द की उनकी फिल्म धमाका रिलीज होगी।इसके अलावा कार्तिक आर्यन  भूल भुलैया 2 में भी काम कर रहें हैं।

अब कार्तिक आर्यन की नई फिल्म सत्यनाराण की कथा का अनाउंसमेंट हो गया हैं। एक वीडियो शेयर करते हुए मेकर्स ने लिखा  साजिद नाडियाडवाला ला रहें हैं एक म्यूजिक महाकथा। ऐसे में फैंस फिल्ममेकर्स से सवाल कर रहे हैं  क्यों हमेशा हिन्दू धर्म और इतिहास के आधार पर ही फिल्मों के टाइटल या कहानी रखनी होती हैं । 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लवरात्रि (loveratri) लक्ष्मी बॉम्ब (luxmi bomb), पद्मावती (padmavati) और इस तरह की कई फिल्में रहीं हैं जिनके टाइटल बाद में मेकर्स को बदलने पड़े हैं । 

अब यह देखना होगा कि क्या मेकर्स इस फिल्म को बिना किसी विवाद के भारतीय ऑडियंस के बीच रिलीज कर पाएंगे या नहीं। कार्तिक आर्यन ने अपनी फिल्म का टीजर सोशल मीडिया पर शेयर किया और लिखा , मेरे दिल के करीब एक कहानी, सत्यनाराण की कथा खास लोगों के साथ एक खास फिल्म, देखें टीजर । 

फिल्ममेकर्स साजिद नाडियाडवाला के साथ फिल्म का डायरेक्शन समीर विद्वंस करने जा रहें हैं। समीर विद्वंस को मराठी फिल्म  आनंदी गोपाल  के लिए नेशनल अवार्ड भी मिल चुका है । अभी तक ये बात सामने नहीं आयी हैं कि इस फिल्म में कार्तिक आर्यन के साथ कौन सी ऐक्ट्रेस होंगी। 

लड़की से छेड़छाड़ करने पर बाप ने रोका तो बदमाश ने बेटे की हत्या कर दी

लखनऊ / फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में एक 10 साल के मासूम की गला दबाकर हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस ने हत्या के मुख्य आरोपी के समेत उसके एक साथी को भी गिरफ्तार कर लिया है। दोनों ने अपना जुर्म भी कबूल कर लिया है। बच्चे की जान छेड़खानी का विरोध करने की वजह से ली गई। 

फिरोजाबाद के थाना बसई मोहम्मदपुर इलाके में वारदात को अंजाम दिया गया। गांव तोतलपुर निवासी 10 वर्षीय रोहित पुत्र मुन्ना लाल की एक हफ्ते पहले हत्या कर दी गई थी। बच्चे की लाश गांव के पास के ही खेत में मिली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि गला घोंटकर हत्या की गई। मामले में पुलिस ने गांव के ही एक नाबालिग और भरत लाल पुत्र राजवीर निवासी फाटपुर, हसनपुर जिला पलवल हरियाणा को गिरफ्तार किया गया है। नाबालिग को बाल सुधार गृह भेज दिया गया है।

7 साल के मासूम रोहित से हत्यारे को कोई परेशानी नही थी. लेकिन रोहित के पिता से बदला लेने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया गया, बताया गया है कि भरत लाल नाम के इस आरोपी का रोहित की एक रिश्तेदार के साथ प्रेम संबंध था. जिसका विरोध रोहित का पिता मुन्नी लाल शुरू से करता आ रहा था। 

.इस मामले में कई बार रोहित के पिता ने भरत लाल की पिटाई भी की थी, जब तब भी रोहित नहीं माना तो गांव में पंचायत बैठाकर भऱत लाल को गांव से बाहर कर दिया गया. कुछ दिनों बाद भरत लाल शादी कर गांव लौट आया. इसके बाद बदला लेने के लिए उसने रोहित के साथ थोड़ी दोस्ती  का नाटक किया और एक दिन मौका पाते ही उसने मासूम की हत्या कर दी। 

एसएसपी के मुताबिक आरोपी भरत पाल ने रोहित के पिता मुन्नालाल की रिश्तेदार एक लड़की के साथ गलत हरकत की थी. जिसका रोहित के पिता मुन्ना लाल ने विरोध किया था. इसी बात को लेकर भरतपाल उनसे रंजिश मानने लगा था. इसी का बदला लेने के लिए भरत पाल ने रोहित की हत्या कर दी।

पुलिस के पूछने पर शुरु में तो आरोपी पुलिस को उलाझाते रहे लेकिन पुलिस का शक गहरा होने का बाद जब आरोपियों से सख्त पूछताछ की गई तो उन्होंने अपराध कबूल कर लिया.मुख्य आरोपी भरत लाल ने पुलिस को बताया कि वो कई दिनों से मुन्नी लाल से बदला लेने चाहता था।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार शुक्ला ने  बताया कि नाबालिग आरोपी ही रोहित को पतंग उड़ाने के बहाने घर से बुलाकर खेत में ले गया था. जहां भरत पाल ने बच्चे की गला दबाकर हत्या कर दी थी और उसकी लाश को एक गड्ढे में डालकर भाग गए थे।

एसएसपी के मुताबिक आरोपी भरत पाल ने रोहित के पिता मुन्नालाल की रिश्तेदार एक लड़की के साथ गलत हरकत की थी. जिसका रोहित के पिता मुन्ना लाल ने विरोध किया था. इसी बात को लेकर भरतपाल उनसे रंजिश मानने लगा था. इसी का बदला लेने के लिए भरत पाल ने रोहित की हत्या कर दी। 

बताया जा रहा है कि आरोपी बदला लेने के लिए ही वो गांव वापस आया था. भरत लाल ने बताया कि गांव को दो लोगों को उसने पैसे देकर अपने साथ मिला लिया. फिर एख दिन मौका पाकर रोहित को पतंग उडाने के नाम पर बुलाया और उसकी गला दबाकर हत्या कर दी, पुलिस ने सभी आरोपियों के जुर्म कबूल करने के बाद  को जेल भेजले की तैयारी कर ली है। 

पहचान छुपा कर प्यार किया प्यार के नाम पर सेक्स किया और निकाह के लिए निस्बत छुड़ा दिया

लखनऊ / दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में बीते दिनों पहचान छुपा कर प्यार करने फिर जबरन धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया है। जब मामला सामने आया तो बरेली के एसएसपी (SSP) रोहित सिंह सजवान ने बताया कि महिला की लिखित शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। बरेली में पीलीभीत के युवक ने पहचान छिपाकर के दोस्ती की और उसके साथ दुष्कर्म किया फिर उसके बाद जबरन धर्म परिवर्तन करवा के निकाह किया। 

इतना ही नहीं आरोपी युवक ने युवती कि कुछ दिनों बाद मारा पीटा और घर से निकाल दिया। एडीजी के हिंदी देश पर बरेली के इज्जतनगर थाने में पीलीभीत के युवक समेत चार 4और लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। सूचना के अनुसार बरेली(Bareilly) में एक बार और धर्म परिवर्तन(Converion) का मामला सामने आया था।

इज्जतनगर थाना क्षेत्र की निवासी युवती ने पुलिस को बताया कि 5 साल पहले पीलीभीत के रहने वाला एक युवक ने फेसबुक पर अपनी पहचान छुपा कर युवती से दोस्ती की फिर उस युवक ने युवती को शादी का झांसा देकर पीलीभीत अपने घर में ले गया। वहां उसने युवती को घर में बंद कर उसका रेप किया और उसका वीडियो बना लिया। आरोपी अफजल ने युवती का अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी दी और फिर उसके साथ निकाह करके युवती ने का धर्म परिवर्तन करा दिया।

युवती ने बताया कि आरोपी अफजल ने फेसबुक से उसका नंबर निकाल लिया था और उसे उसके नंबर पर फोन करके अपने प्रेम जाल में फंसा लिया। इज्जतनगर थाने में पीड़िता की सारी बात सुनकर आरोपी अफजल और उसके परिवार के 3 सदस्यों पर एफआईआर दर्ज की है और युवती की लिखित शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली है फिलहाल मामले की पूरी जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

फुटबॉलर रोनाल्डो ने कोकाकोला को किया किनारे, कहा पानी पीयो हेल्दी रहो…. पूछिये अपने स्टार्स से उन्हें शर्म कब आयेगी?

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लखनऊ / दिल्ली । पुर्तगाल के दिग्गज फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने यूरोपीय चैंपियनशिप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपने सामने रखी दो कोकाकोला की बोतलों को अपने सामने से हटा दिया जिसकी वजह से जनता में कोल्ड ड्रिंक के लिए उत्साह में कमी देखने को मिल रही है जिससे  कोका कोला बनाने वाली कंपनियों को 30000 करोड़ का झटका लग गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यूरो 2020 के आधिकारिक आयोजकों में से एक कोका कोला के शेयर की कीमत इसके तुरंत बाद 30 सिक्स पॉइंट $10 से 55.22 घट गई।

दरअसल क्रिस्टीयानो रोनाल्डो ने यूरो 2020 की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कोको कोला की दो बोतल को हटाकर कैमरे के सामने पानी की बोतल को पकड़कर या कहा कि पानी पियो हालांकि कोका कोला पूरे टूर्नामेंट का ऑप्शन स्पॉन्सर था लेकिन इस बात की परवाह किए बिना रोनाल्डो ने अपने फैंस को सही संदेश दिया और ऐसा करके अपने फैंस के दिलों में अपना विश्वास और मजबूत किया। 

रोनाल्डो की इस घटना की भारत में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि क्या भारत के किसी भी स्पोर्ट्समैन की इतनी हिम्मत हो सकती है कि वह इस तरह से किसी कंपनी को दूर कर सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोल्ड-ड्रिंक के सेवन से शरीर में एसिड की मात्रा बढ़ जाती है मेरा इस में शुगर की मात्रा अधिक होती है, जो ना सिर्फ फैट को बढ़ाती है  बल्कि दूसरे नुकसान भी पहुंचाती है। 1 कैन कोल्ड ड्रिंक 400 कैलोरी इनक्रीस करती है। जो शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक होती है। नियमित रूप से कोल्ड ड्रिंक पीने से फैटी लीवर नाम की बीमारी बढ़ने लगती है। लेकिन इसके बावजूद भारतीय सेलिब्रिटी पैसों के लिए ऐसे प्रोडक्ट का प्रचार करते हैं।

इस विवाद के बाद कोकोकोला को काफी नुकसान पहुंचा है कोका कोला ने बयान दिया कि हर कोई अपने स्वाद और जरूरत के हिसाब से अपनी ड्रिंक छोड़ने का हकदार है।

बता दे कि रोनाल्डो का नाता फुटबॉल से है और यह काफी मशहूर फुटबॉल खिलाड़ी है जो एक गरीब परिवार में जन्मे है। रोनाल्डो ने 11 वर्ष की उम्र से ही फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया और इनका चयनित अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल टीम में महज 18 वर्ष में ही हो गया था। काफी कम समय में रोनाल्डो ने लोगों के दिलों में अपने लिए जगह बना ली। वर्तमान में रोनाल्डो पुर्तगाल फुटबॉल टीम के कैप्टन है। दुनिया के अमीर खिलाड़ियों में से रोनाल्डो का भी नाम गिना जाता है। 

Covid 19 से मरने वाले व्यक्तियों के परिवार को 4 लाख मुआवज़े की मांग

लखनऊ / दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल और रीपक कंसल ने दाखिल की है. याचिका में कहा गया कि नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा-12 में आपदा से मरने वाले लोगों के लिए सरकारी मुआवजे का प्रावधान है. याचिकाकर्ताओं ने कहा कि पिछले साल केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से मृतकों के परिजनों को 4 लाख का मुआवजा देने को कहा था, लेकिन इस साल ऐसा नहीं हुआ। 

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में कहा कि कोरोना वायरस से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 4-4 लाख रूपये का मुआवजा नहीं दिया सकता है। कोरोनो बीमारी (Covid-19) से मरने वालों के परिवार के सदस्यों को 4-4 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग वाली याचिकाओं के जवाब में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह हलफनामा दायर किया।

कोरोना संक्रमण के चलते मरने वाले लोगों के परिजनों को मुआवजा देने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। इसके बाद केंद्र ने हलफनामा दायर कर कहा कि वह मृतक के परिजनों को मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं कर सकता, क्योंकि यह एक बड़ी वित्तीय देनदारी होगी।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि करोना से मरने वालों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए मुआवजा नहीं दे सकते। केंद्र ने अपने जवाब में कहा कि हर कोरोना संक्रमित मरीज की मौत पर मुआवजा राज्यों के वित्तीय सामर्थ्य से बाहर है। 

सरकार ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो कोरोना महामारी से निपटने के इंतजाम करने के लिए पैसा नहीं बचेगा। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके कोरोना महामारी से मरने वाले लोगों के परिजनों के लिए 4-4 लाख रुपये मुआवजे की मांग की गई है। 

केंद्र सरकार ने कहा है कि अभी तक देश में कोरोना से 3,85,000 मौतें हो चुकी हैं और यह संख्या बढ़ भी सकती है ऐसे में प्रत्येक परिवार को मुआवजा के 4-4 लाख देना संभव नहीं होगा। केंद्र ने कहा कि मुआवजा देने के लिए संसाधनों का उपयोग महामारी के खिलाफ कार्यवाही और स्वास्थ्य व्यय को प्रभावित कर सकता है। 

हलफनामे में सरकार ने महामारी में लोगों को दी गई वित्तीय और बाकी मदद का भी विस्तार से हवाला दिया है। साथ ही महामारी के दौरान ऑक्सीजन आदि के इंतजाम का भी ब्योरा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना से मरने वालों को मुआवजे की मांग पर केंद्र को नोटिस जारी किया है। 

याचिकाकर्ताओं ने साथ में यह भी कहा कि मरने वालों को अस्पताल से सीधे अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा है. उनका न पोस्टमॉर्टम होता और न डेथ सर्टिफिकेट में लिखा जाता है कि मृत्यु का कारण कोरोना था. याचिका में कहा गया कि अगर ऐसे में मुआवजा दिया भी जाए तो लोग उसका लाभ नहीं ले पाएंगे. याचिका में मांग की गई कि कोर्ट सभी राज्यों को यह निर्देश दे कि वह मरने वाले लोगों के डेथ सर्टिफिकेट पर मौत की सही वजह दर्ज करें, जिससे की उनके परिवार को मुआवजा मिल सके। 

याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अशोक भूषण और एमआर शाह की बेंच ने पूछा कि क्या किसी राज्य ने अपनी तरफ से मुआवजा दिया है? जिस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि ऐसा किसी राज्य ने नहीं किया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने याचिका को अहम बताते हुए केंद्र से जवाब देने के लिए कहा है. साथ में सुप्रीम कोर्ट ने मृत्यु प्रमाणपत्र में कोरोना को मौत की वजह लिखने को लेकर सरकार की नीति और ICMR के निर्देशों के बारे में भी जानकारी मांगी है। 

पैग़म्बर मुहम्मद के वंशज इस्लामिक रिपब्लिक आफ ईरान के राष्ट्रपति चुने गये

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लखनऊ / दिल्ली । इस्लामिक रिपब्लिक आफ ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के कट्टर समर्थक एवं कट्टरपंथी न्यायपालिका प्रमुख इब्राहिम रईसी ने शनिवार को राष्ट्रपति पद के चुनाव में बड़े अंतर से जीत हासिल की। 

ईरान के न्यायपालिका के प्रमुख रहे रईसी का जन्म 14 दिसंबर 1960 को देश के उत्तर पूर्वी मशहद मे हुआ था हुज्जत अल इस्लाम के नाम से मशहूर सैयद इब्राहिम रईसी को कट्टरपंथी विचारधारा को मानने वाला माना जाता है। इब्राहिम रईसी को ईरान के सबसे समृद्धि सामाजिक संस्था और 8 वे शिया इमाम रेंइजा के पवित्र दरगाह असतान के संरक्षक रह चुके हैं। 

जानकारी के मुताबिक  रईसी हमेशा काली पगड़ी बांधते हैं जो इस बात का प्रतीक है। वह सैयद यानी मुसलमानों के पैगंबर मोहम्मद साहब के वंशज हैं।  BBC मॉनेटरी की सूचना के अनुसार यह बताया जा रहा है कि रईसी को अयातुल्लाह अली खमेनेई के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में भी माना जाता हैै। 

राष्ट्रपति के चुनाव होने से पहले ही गार्डियन काउंसलिंग ने सभी उम्मीदवारों के लिए सख्ती के साथ नियम लागू किया था उसी को मद्देनजर रखते हुए केवल 7 उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में नजर आए जिसमें तीन कट्टरपंथी और दो उदारवादी माने जाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीत के लिए इब्राहिम रईसी को बधाई दी है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई देते हुए ट्विटर पर लिखा कि भारत और ईरान के संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए मिलकर साथ काम करेंगे । 

ईरान में इस बार राष्ट्रपति चुनाव में सबसे कम मतदान का इतिहास बनाया है और शुरुआती नतीजे के हिसाब के मुताबिक इब्राहिम रईसी ने एक करोड़ 78 लाख मतदान से जीत हासिल की।

अगर भारत और ईरान के संबंध की बात करें तो फिलहाल अभी ईरान और भारत दोनों देश एक दूसरे के करीब हैं पर कुछ समय पहले भारत ने जम्मू कश्मीर के आर्टिकल 370 को हटाया था जिसका ईरान सरकार ने विरोध किया था इसके साथ-साथ ईरान चीन के करीब भी जाता दिखाई दिया।

ग़ाज़ीपुर का संदेश योग बनाये निरोग

लखनऊ / गाजीपुर । अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस पर सोमवार को 7वें योग दिवस का आयोजन जंगीपुर विधानसभा के बिरनों मंडल के एम.एन. बालिका महाविद्यालय सरदरपुर, कयामपुर बिरनों गाज़ीपुर में भाजपा के पूर्व सह मीडिया प्रमुख के द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम में योग प्रशिक्षक श्री बृजेंद्र कुशवाहा के द्वारा उपस्थित प्रतिभागियों को योग प्रशिक्षण एवं योगा कराया गया। 

कार्यक्रम संयोजक सुधाकर सिंह कुशवाहा द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों को अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस का Logo लगा हुआ टीशर्ट देकर एक गणवेश में महाविद्यालय प्रांगण में योग प्रशिक्षण कराकर उसके लाभ एवं स्वस्थ व सुखी जीवन के बारे में प्रेरित किया। 

सुधाकर सिंह ने योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए प्रधानमंत्री की कोशिशों की सराहना करते हुए कहा कि हम सबको योग बनाये निरोग के लक्ष्य को पूरा करने की मुहिम में जुट जाना चाहिए। 

कार्यक्रम में भाजपा बिरनों मंडल अध्यक्ष मन्नू राजभर , वरिष्ठ नेता लहजू कुशवाहा, पिरथीपुर ग्राम प्रधान नागेंद्र कुशवाहा जी,भड़सर ग्राम प्रधान श्री विनोद गुप्ता, भैरोपुर ग्राम प्रधान कार्तिक जी, प्रबंधक सुनील कुशवाहा, अखिलेश कुशवाहा शामिल थे। 

आसपास के सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के साथ साथ क्षेत्र पंचायत सदस्यगण बिरनों से राजू कुशवाहा , दिदोहर से  शैलेंद्र कुशवाहा, पारा से प्रदीप मौर्य , व्यापार प्रकोष्ठ के जिला महामंत्री  अच्छेलाल कुशवाहा , प्रमोद सिंह ,अखिलेश चौबे , अश्विनी पांडेय , प्रेमचंद जायसवाल , सूरज कुशवाहा , राजकुमार मौर्य , हिमांशु , रामअवध , दीनदयाल , चंद्रशेखर , मोनू कुशवाहा , डॉ शिवकुमार क्षेत्रीय सम्मानितजनों ने बढ़ चढ़कर प्रतिभाग किया। 

सुधाकर सिंह कुशवाहा जी ने सभी प्रतिभागियों का कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए  आभार व्यक्त किया कार्यक्रम का संचालन अखिलेश कुशवाहा ने किया। 

जानिये उस बेटी को, जिसने सात समंदर पार अमेरिका में जीता प्रेसिडेंट अवार्ड

लखनऊ / दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की बेटी मनस्वी राजेंद्र को अमेरिका में ‘प्रेजिडेंट एजुकेशन अवॉर्ड’ 2021 (President’s Education Awards) से नवाजा गया। मनस्वी राजेंद्र को न्यूयॉर्क में अवॉर्ड फॉर एजुकेशनल एक्सीलेंस से सम्मानित किया गया।यह बात न केवल एक राज्य के लिए बल्कि हमारे पूरे देश के लिए गौरव की बात है। 

व्हाइट हाउस से जारी पत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बहराइच की रहने वाली मनस्वी की “लीडर्स ऑफ द फ्यूचर” कहकर यूपी की बेटी की काफी तारीफ भी की। मनस्वी राजेंद्र को अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने ‘प्रेजिडेंट एजुकेशन अवॉर्ड’ 2021 से सम्मानित किया है। 

मनस्वी को ‘कोर्स ऑफ स्टडीज’ की पढ़ाई में शानदार शैक्षिक रिकॉर्ड के लिए “अवॉर्ड फॉर एजुकेशनल द्वारा जारी किए गए एक पत्र में मनस्वी को अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘लीडर्स ऑफ द फ्यूचर’ कहा है। मनस्वी के पिता अप्रितम राजेंद्र न्यूयार्क की एक सिटी में बैंक के प्रेसिडेंट हैं और उनकी मां अमिता सिंह न्यूयार्क में ही बार्कलेज बैंक में वाइस प्रेसिडेंट हैं। 

मनस्वी की मां अमिता सिंह बहराइच में मशहूर किसान पीजी कॉलेज की प्रबंध समिति के सचिव मेजर डॉ. एस पी. सिंह व समाजशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर मालती सिंह की बेटी हैं। एक बार फिर से एक बेटी ने हमारे देश का नाम रोशन किया। 

हमारे देश में अभी भी कईं राज्य ऐसे है जहां के समाज में बेटियों के पढ़ने लिखने पर रोक है। अभी भी कुछ लोगो की सोच वही पुरानी है जहां बेटियां केवल घर परिवार संभालने तक ही काम कर सकती है। लेकिन ऐसा नहीं है, यह सिर्फ एक सोच है जिसे हमें बदलना है। और एक सोच ये भी है की जब भी मनस्वी जैसी बेटियां देश का नाम रोशन करती है, तो हम कहते है की हमारी बेटियां बेटों से कम नहीं, सवाल यह है की यहां कम या ज्यादा करना ही क्यों? 

बेटा हो या बेटी, दोनों में जान है और दोनों ही इंसान हैं ,दोनों में ही क्षमता है दोनों में ही आसमानों को छूने की आशा है। इसलिए अच्छी शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर दोनो का बराबर हक़ है।

स्टूडेंट्स के इंतजार हुए खत्म, CBSE के रिज़ल्ट आयेंगे जल्द

लखनऊ / दिल्ली । CBSE ने 10 वीं , 12 वीं क्लास के कोरोना वायरस से रद्द परीक्षाओं के परिणाम घोषित करने का फार्मूला जारी कर दिया हैं। छात्रों को बेसब्री से अपने बोर्ड रिजल्ट जारी होने का इंतजार था जो अब जल्द खत्म होने वाला हैं। इस वर्ष कोरोना संक्रमण को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी जी ने 01 जून को बोर्ड की परक्षा रद्द करने की घोषणा की थी। और छात्रों को उनके पिछले रिकॉर्ड के आधार पर पास किए जाने का आदेश दिया था। सीबीएसई ने 17 जून 2021 को सुप्रीकोर्ट में 10 वीं और 12 वीं क्लास के लिए एवल्यूशन क्राईटेरिया जारी किया था । 

सीबीएसई जुलाई में दोनों 10वीं और 12वीं क्लास के परिणाम घोषित कर सकता हैं। सीबीएसई परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने न्यूज एजेंसी NNI से बात करते हुए जानकारी दी कि हमारी कोशिश है कि 10वीं के रिजल्ट 20 जुलाई तक और 12वीं की रिजल्ट 30 जुलाई तक कर दी जाए,ताकि जो छात्र पढ़ाई के लिए बाहर विदेश जाने वाले हैं उन्हें कोई परेशानी ना हो । इसमें बोर्ड ने 30:30:40 का फार्मूला अपनाया है जिसमें 10 वीं के 30%, 11वीं के 30% और 12वीं के 40% मार्क्स होंगे। इसके अलावा , 12वीं के यूनिट टेस्ट , मिड टर्म और प्री बोर्ड एग्जाम की परफॉर्मेंस को भी देखा जाएगा।

10वीं क्लास के नतीजे जारी करने के लिए (CBSE 10th marking scheme) board ne 10+30+40+20 का फारमूला दिया है। नई इंटरनल असेसमेंट मार्किंग को तीन भागों में बाटा गया है यूनिट टेस्ट,मिड टर्म और प्रीबोर्ड । नई मार्किंग स्कीम के 80 नंबर के पेपर में 20 अंक और मिड टर्म 30 अंक और प्रीबोर्ड 40 अंक का होगा । यह सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा 2021 के लिए छात्रों द्वारा चुने गए 5 मुख्य विषयों के मार्किंग के लिए हैं। जबकि 20%अंक सीबीएसई की पुरानी मार्किंग स्कीम यानी इंटरनल असेसमेंट के आधार पर होंगे।।

योगी के अधिकारियों पर दबंगों की दबंगई भारी, महराज! ऐसे कैसे आयेगी रामराज की बारी?

लखनऊ / मऊ । योगी के अधिकारी ही योगी सरकार को पलीता लगाने की तैयारी में हैं, ताजा मामला मऊ जिला के दोहरीघाट में गेहूँ क्रय केन्द्र पर किसानों के गेहूँ की खरीद से जुड़ा है क्षेत्र के किसान गेहूं खरीद में अव्यवस्था के चलते काफी आक्रोशित हैं। हमारी रिपोर्टर मुस्कान ने इस पूरे मामले में ग्राउण्ड जीरो से रिपोर्ट की है। 

उनकी समस्या पूछे जाने पर क्षेत्र के किसानों मधुसूदन उपाध्याय, जयप्रकाश राय, बिरजा यादव, जितेन्दर सिंह रामप्रवेश राय , शिव बदन, राजेन्द्र ने बताया कि उनका टोकन नम्बर आने के बाद भी 15 दिनों तक गेहूँ लदी ट्राली के साथ इन्तजार करने के बाद भी गेहूँ नहीं खरीदा गया, जब किसानों ने क्रय केन्द्र प्रभारी से पूछा तो उन्होनें कहा कि अब खरीद नहीं की जायेगी क्यों की गेहूं खरीद की आखिरी तिथि 15 जून थी जो बीत चुकी है इसलिए हम खरीद नहीं कर पाएंगे। 

किसानों ने न्यूज डॉन से बात करते हुए कहा कि जब उन्होंने  इस विषय पर जानना चाहा कि जब उनका टोकन एक जून तो किसी का 26 मई का था फिर  उनके फसल की खरीद 15 जून तक क्यों नहीं किया गया? इस सवाल पर दोहरीघाट क्रय केन्द्र प्रभारी व जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने फोन पर बात की वो पहले तो खराब मौसम व बारिश का बहाना बना कर गेहूं खरीद को टालते रहे  लेकिन बार बार सवाल करने पर उन्होंने बताया कि दबंगो के दबाव के चलते आपकी खरीदारी नहीं हो सकी क्यों कि दबंगों का टोकन नम्बर बाद में होते हुए भी उनकी खरीददारी पहले हुई जिसके कारण यह अव्यवस्था हुई। 

अब हालत यह है कि पिछले 7-8 दिनों से लगातार बारिश की वजह से किसानों के तमाम इन्तजाम के बावजूद उनके गेहूँ में अच्छी खासी नमी आ गई है जिसको अब आढ़तिया और निजी खरीदार भी खरीदने से इनकार कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि क्रय केन्द्र पर वह अपने टोकन में दिए गए नियत समय से पहुंच गए थे क्रय केन्द्र प्रभारी  ने कहा था कि ट्राली यहीं रहेगी तभी खरीद हो पाएगी । जिसकी वजह से  किसान बारिश में भी तिरपाल प्लास्टिक से अच्छी तरह ढंक कर टोकन की नियत तिथि से खबर लिखे जाने तक सुबह से शाम और रात में भी इन्तजार करते रहे लेकिन खरीद की आखिरी तिथि भी समाप्त हो गई और इन किसानों के गेहूँ की खरीद नहीं हुई। 

न्यूज डॉन से किसानों का यह भी कहना है कि क्रय केन्द्र प्रभारी कभी भी क्रय केन्द्र पर समय से नहीं आते थे वह रोज दोपहर एक बजे के बाद ही पंहुचते थे किसानों का कहना है कि अगर नियमानुसार खरीद हुई होती तो उन्हें इतना नुकसान नहीं उठाना पड़ता जब वह अपनी फसल यहां लाए थे उसके 7-8 दिनों बाद तक मौसम सही था। अब किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह उनके साल भर की कमाई थी अब वह आगे की फसल कैसे उगाएंगे जुताई, बीज और खाद कहाँ से खरीदेंगे, बच्चों के स्कूल की पढ़ाई और बुजुर्ग मॉ बाप की दवाई कैसे आ पायेगी। 

आपको बताते चलें कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आनलाइन व्यवस्था के जरिये पारदर्शी प्रक्रिया की ओर पहल की थी लेकिन अधिकारियों की लापरवाही और दंबगों की दादागिरी के आगे यह व्यवस्था भी दम तोड़ती नजर आ रही है वहीं दबे मुंह अधिकारी  स्वीकार कर रहे हैं कि दबंगो के आगे वो आज भी  बेबस हैं और प्रशासन बौना। 

गोरखपुर के गॉव वाले भयभीत, रोहिणी ऊपर जबकि राप्ती नदी खतरे के निशान से सिर्फ एक मीटर दूर

लखनऊ / गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मस्थली गोरखपुर बााढ़ की विभीषिका से भयभीत हैै। कैंमपियरगंज में लोगों की सुविधा के लिए नाव लगाई गई है प्रशासन ने तकरीबन 1000 नौकाओं को आपातकालीन परिस्थितिियों से निपटने के लिए प्रबंध कर रखा है।

आपको बताते चलें कि रोहिणी नदी खतरे के निशान से करीब 1 मीटर ऊपर है, इधर राप्ती नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर के करीब पहुंच गया है, यानी खतरे के बिंदु से लगभग 1 मीटर नीचे राप्ती बह रही है और जल स्तर में लगातार वृद्धि जारी है। 

आने वाले 24 से 48 घंटों में यहां भी जलस्तर में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। जिला प्रशासन की ओर से जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है, सभी 86 बाढ़ चौकियों को सतर्क कर दिया गया है। बाढ़ पीड़ितों में राशन सामग्री एवं कोरोना से बचाव का किट बांटने के लिए टेंडर भी खोला जाएगा।  

गोरखपुर के मंडलायुक्त रवि कुमार एनजी शनिवार को देवरिया जाएंगे, और वहां बाढ़ बचाव तथा टीकाकरण कार्ड की समीक्षा करेंगे। रविवार को गोरखपुर में विभाग के मुख्य अभियंता एवं जिला अधिकारियों के साथ बैठकर स्थिति का जायजा लेंगे, और लोगों की सहायता के लिए जरूरी दिशा निर्देश होगा। 

नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ ही बड़े अधिकारियों की ओर से मानिटरिंग की जा रही है। तहसील क्षेत्र में कुछ स्थानों पर रेट हॉल मिले वही यहां कुछ दिन पहले ही बंदधे के गैप को बोरे से भरा गया था, लेकिन शुक्रवार को एक बार फिर वहां मिट्टी धंसने लगी ।  

आपको बता दें कि जिले की सभी बाढ़ चौकियों पर जरूरी सामान उपलब्ध करा कर वहां बैनर पर चौकी प्रभारी सहित सभी कर्मियों का नाम, पदनाम व मोबाइल नंबर दर्ज करने को बोला गया , रोहिणी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है, उधर जिला प्रशासन को बाढ़ पीड़ितों के लिए खाद्य सामग्री एवं जुटा आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को बोला गया है।

दौड़ते दौड़ते बहुत दूर निकल गये मिल्खा सिंह

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लखनऊ / दिल्ली । फ्लाइंग सिख’के नाम से मशहूर धावक ‘मीका सिंह’ का बीती रात निधन हो गया। 91 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह कोरोनावायरस से संक्रमित और चंडीगढ़ स्थित पीजीआई में उनका इलाज चल रहा था। कल रात 11:30 बजे मीका सिंह ने अंतिम सांस ली थी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और ट्वीट करते हुए श्रद्धांजलि दी। 

करोड़ों लोगों के लिए मीका सिंह प्रेरणा सोत्र रहे हैं। ऐसी बता दे कि एशिया खेलों में चार स्वर्ण पदक और कॉमनवेल्थ गेम में एक गोल्ड जीतने वाले मीका सिंह की रफ्तार की दुनिया दीवानी थी। उन्हें पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ‘फ्लाइंग सीख ‘ की उपाधि से नवाजा था। इसके बाद में दुनिया भर में फ्लाइंग सिख के नाम से जाने जाने लगे। वही खेलों में उनके अतुल्य योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था।

मीका सिंह का जन्म अविभाजित भारत के गोविंदपुर 20 जून सन 1910 में एक सिख राठौर परिवार में हुआ था। अपने मां-बाप के कुल 15 संतानों में से एक थे। भारत के विभाजन के बाद हुए दंगों में मिका सिंह ने अपने मां बाप और भाई बहन को दिया। अंतत आवेश शरणार्थी बनकर ट्रेन से पाकिस्तान से दिल्ली आए।

अपने भाई मलखान के कहने पर उन्होंने सेना में भर्ती होने का निर्णय लिया और चौथी कोशिश के बाद 1951 में सेना में भर्ती हो गए। सेना में उन्होंने कड़ी मेहनत की और 200 मीटर और 400 मीटर में अपने आप को स्थापित किया और कई प्रतियोगिता में सफल हुए। सन 1956 के मेल में रेडबोन ओलंपिक खेलों में 200 और 400 मीटर की प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया लेकिन सफल नहीं हो पाए। 400 मीटर प्रतियोगिता के विजेता चार्ल्स डिकेंस के साथ हुई मुलाकात ने ना सिर्फ प्रेरित किया बल्कि ट्रेनिंग के नए तरीके से अवगत भी कराया। 

उसके बाद 1958 में कटक में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में उन्होंने 200 मीटर और 400 मीटर प्रतियोगिता में राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया और एशियन खेलों में भी इन दोनों प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। सन 1958 में भी उन्होंने ब्रिटिश राष्ट्रमंडल खेलों में 400 मीटर प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके चलते स्वतंत्र व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक वह भारत के पहले खिलाड़ी बन गए।

इन्होंने रोम किए 1960 ग्रीष्म ओलंपिक और टोक्यो के 1964 ग्रीष्म ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया था, इसी दौरान उन्हें उड़न सीख का उपमान दिया गया था। 1960 के रोम ओलंपिक खेलों में उन्होंने पूर्व ओलंपिक कीर्तिमान को ध्वस्त किया लेकिन पदक से वंचित रह गए। इस दौड़ के दौरान उन्होंने ऐसा राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया जो लगभग 40 साल बाद जाकर टूटा। https://sverige-ed.com/kopa-receptf…-levitra/

मिल्खा सिंह ने भारतीय महिला वॉलीबॉल के पूर्व कप्तान विमल कौर से सन 1962 में विवाह किया। वर्ष 2013 में मीका सिंह ने अपनी बेटी सोनिया सांवलका के साथ मिलकर अपनी आत्मकथा ‘द रेस ऑफ माय लाइफ ‘लिखी। इसी पुस्तक से प्रेरित होकर हिंदी फिल्मों के मशहूर निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने’ भाग मिका भाग’ नामक फिल्म बनाई जिसमें फरहान अख्तर ने मीका सिंह का किरदार निभाया था।

किस किस से करें दंगल! कोरोना के बाद अब काला फंगल

लखनऊ / दिल्ली । पूरे देश में फैली कोरोना बीमारी के बाद का समय अब लोगों के लिए खतरनाक और मुश्किल घड़ी बनती जा रही है अभी कोरोना वयरस पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ कि ब्लैक फंगस नाम की एक नई बीमारी आ गई। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(AIIMS) के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया और मशहूर अस्पताल मेदांता के चेयरमैन डॉक्टर नरेश त्रेहान ब्लैक फंगस यानी (mucormycosis) के बारे में जरूरी जानकारी दी है। 

उन्होंने बताया कि दरअसल ब्लैक फंगस उन लोगों को ही हुई है जो लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं कोरोना के मरीजों को दी गई एस्ट्रॉयड की ज्यादा मात्रा से मरीजों की शुगर लेवल बढ़ जाने से ब्लैक फंगस का होना बताया जा रहा है। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि बच्चों के कोरोना वायरस ठीक होने के कुछ दिनों बाद ही बच्चों में नया वायरस पोस्ट कोविड वायरस पाया जा रहा है। जो बच्चों के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है। सही समय पर इलाज ना होने के कारण जो बच्चों के दिमाग, दिल,फेफडो आदि को हानि पहुंचा सकता है।

सूत्रों के अनुसार Health Experts और स्वास्थ्य कर्मचारी बताते हैं कि कोरोना वायरस पैनक्रिया पर अपना हमला करता है जो अंदर बनाने वाली इंसुलिन कोशिकाओं को नष्ट कर देता है और कोविड मरीज को दी जाने वाली एस्ट्रॉयड से शुगर लेवल बढ़ा देता है जिसके कारण मरीजों को डायबिटीज की दिक्कत हो रही है।

वही महाराष्ट्र के बारे में चेतावनी दी गई है कि अगर कोरोना वायरस के नियमों का पालन नहीं किया गया तो महाराष्ट्र में इसकी तीसरी लहर एक से 2 महीनों में इसका प्रभाव पड़ सकता है राज्य की टॉसपोरस ने बैठक किया और बताया कि क्रोना वायरस की खतरनाक वेरिएंट् डेल्टा प्लस की वजह से यह लहर आ सकती है।

देश में 24 घंटे में मिले हैं करीब 67,208 नए पॉजीटिव केसेस देश में 1 लाख 3 हजार 570 मरीज ठीक हुए 24 घंटे में 23,30 लोगों की कोरोना से मौत हुई। और अब तक कुछ 2 करोड़ 97 लाख से भी ज्यादा के केसेस सामने आ चुके हैं। 2 करोड़ 84 लाख से ज्यादा मरीज ठीक हो चुके हैं। देश में अब तक 3 लाख 81 हजार 903 मरीजों की मौत हो चुकी है।और अभी के एक्टिव केसेस है। 8 लाख 26 हजार 740 और अब तक 25 करोड 55 लाख से ज्यादा लोगों को कोरोना वैक्सीन लग चुकी है। 

उत्तर प्रदेश : विश्वविद्यालयों की फ़िज़ूलख़र्ची पर मैडम चांसलर सख़्त

लखनऊ  ।  उत्तर प्रदेश की गवर्नर और विश्वविद्यालयों की चांसलर श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने शुुुक्रवार कोो जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय तथा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की समीक्षा बैठक में कहा कि विश्वविद्यालय ऑडिट आपत्तियों का नियमानुसार समयबद्ध निस्तारण करें साथ ही वित्तीय नियमों का भी अक्षरशः पालन किया जाये । उन्होंने ये निर्देश दिए कि  अनउपयोगी खातों को बंद करते हुए विश्वविद्यालय में वित्तीय जरूरतों के लिये न्यूनतम खाते रखे जायें साथ ही कैश बुक तथा बैलन्स सीट अनिवार्य रूप से तैयार की जाये। 

मैडम चांसलर ने जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय एवं संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केन्द्रो पर चर्चा करते हुये निर्देश दिये कि महिला सशक्तीकरण के लिये शिक्षा, स्वास्थ्य स्वाभिमान, सुरक्षित मातृत्व, कुपोषण तथा आर्थिक स्वावलबंन के कार्यक्रम चलाये जायें, इसमें नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं तथा विशिष्ट महिलाओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों आदि को शामिल करते हुये विश्वविद्यालय तथा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाये।

जिसमें केंद्र तथा राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं सामाजिक कुरीतियों तथा रोजगार कार्यक्रमों की जानकारी दी जाये एक करने से नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान सरकारी योजनाओं का लाभ अपनी ग्राम सभा में दे सकेंगे। विश्वविद्यालय की छात्राओं को बाल-सदन, नारी निकेतन, वृद्धाश्रम, जच्चा-बच्चा अस्पताल आदि का भ्रमण करायें ताकि वे अपने जीवन में सही और गलत के उत्तर को जान सकें तथा बच्चों की ऐसी टीम तैयार करे जो ग्रामीण महिलाओं का अपने अनुभव बांटने के साथ व्याख्यान भी दे सकें।

श्रीदेवी के बाद बॉलीवुड की शेरनी, विद्या बालन!

लखनऊ / मुंबई। Bollywood actress विद्या बालन की फिल्म शेरनी 18 जून को अमेज़ॉन प्राइम वीडियो पर रिलीज होने जा रही हैं जिसका फैंस को बेसब्री से इंतजार हैं विद्या बालन फिल्म “शेरनी” में एक दमदार लुक में नजर आएंगी।इस फिल्म में विद्या बालन वन्य विभाग की ऑफिसर की भूमिका निभा रही हैं। ये दिलचस्प है कि एक बहुत ही मजबूत, आसामान्य और एक महत्वपूर्ण फिल्म के साथ, विद्या बालन के सफल महिला प्रधान , फिल्मों पर पकड़ बनाए रखना जारी रखा हैं ।

अपने सफर और अपने द्वारा चुने गए विकल्पों के बारे में बात करते हुए, विद्या बालन ने मीडिया से अपने अनुभव साझा किये , “ईमानदारी से कहूं ऐसा नहीं हैं की मै इसे करने की योजना बना रही हूं , लेकिन हमेशा ऐसा काम करना चाहती हूं जो मेरे विश्वास का एक विस्तार हो काम जो मुझे उत्साहित करे और मुझे संतुष्टि दे और इसलिए मैंने बढ़कर उन विकल्पों को चुना जो मैंने किये थे। 

विद्या बालन ने आगे कहा मुझे लगता हैं की मै सही समय पर सही जगह पर थी। और इसलिए यह ना केवल मेरे लिए सही साबित हुआ बल्कि इसके साथ हिंदी सिनेमा में भी बदलाव की शुरूवात हुई लेकिन,मै इसका श्रेय नहीं ले सकती हूं, लेकिन हां यह अब तक का एक रोमांचक सफर रहा हैं,और मुझे उम्मीद है कि यह यहां से और बेहतर होगा। 

आपको बताते चलें कि नब्बे के दशक में श्रीदेवी अभिनीत फिल्म शेरनी आई थी जिसमें श्रीदेवी ने समाज के जुल्म ओ सितम के खिलाफ हथियार उठाया था वहीं अभिनेत्री विद्या बालन अपनी फिल्म “शरनी” में एक ईमानदार वन्य अधिकारी के रूप में आदमखोर बाघिन के तलाश में अभिनेत्री को फिल्म में नर पशु संघर्ष के घने रूप में दिखाया जाएगा।

Amazon prime video पर “शेरनी” का सॉन्ग “मै शेरनी” yutube पर 15 जून को रिलीज किया हैं । जिसमें लाखो ब्यूज मिल चुके हैं। विद्या बालन के साथ साथ शरत सक्सेना , मुकुल चड्ढा , इला अरुण , विर्जेंद्र जैसे नाम आपका मनोरंजन करने के लिए तैयार हैं।

सियासत में चाचाओं का जलवा! अखिलेश, अजित और चिराग को पछाड़ कर चाचा 3-0 से आगे

लखनऊ / पटना । उत्तर प्रदेश के ‘मुलायम परिवार’ की तरह इन दिनों बिहार के ‘पासवान कुनबे’ में सियासी वर्चस्व को लेकर चाचा-भतीजे के बीच सियासी जंग छिड़ी हुई है। अपने पिता रामविलास पासवान की बनाई पार्टी एलजेपी (LJP) में ही चिराग पासवान के खिलाफ मोर्चा खुल गया है। 

मामला यह है कि चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस अपने खुद के भतीजे के विरोधी के रूप में खड़े हो गए हैं। इन्ही कुछ कारणों की वजह चिराग पासवान को पार्टी के अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया है। लोक जनशक्ति पार्टी को टूटने से बचाने के लिए चिराग पासवान हरसंभव कोशिश करने में लगे है। जिससे उनके परिवार में जो मतभेद हो रहे है वो ना हों। 

लेकिन मामले ने एक अलग ही रूप ले लिया है। वह अपने चाचा को मनाने उनके घर भी गए। लेकिन घर पर आए अपने ही भतीजे से मिलने से भी चाचा पशुपति पारस ने इनकार कर दिया। चिराग दरवाजे पर खड़े रहे लेकिन दरवाजा नहीं खुला और चिराग को खाली हाथ घर वापस लौटना पड़ा। अब चिराग पासवान और पशुपति पारस दोनों का एक दूसरे की ओर से हमला जारी हैं।

बता दें कि चिराग से पहले अखिलेश यादव की अपने चाचा शिवपाल से और अजित की अपने चाचा शरद पवार से भिड़ंत हो चुकी है। अखिलेश परिवार की यह लड़ाई चर्चा का विषय बन चुकी थी। जिससे अखिलेश परिवार की काफ़ी बदनामी भी हुई थी। 2016 में अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल के बीच जोरदार झगड़ा हुआ था। अखिलेश ने अपने चाचा को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

अखिलेश और शिवपाल का तो आलम ये था कि एक बार मंच पर ही दोनों भिड़ गए और एक दूसरे से माइक छीनते भी देखे गए।इस पारिवारिक कलह के बाद जब चुनाव हुए तो उसमें अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को तगड़ा झटका लगा और उन्हें सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। 

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

फिलहाल अब शिवपाल यादव ने अपनी अलग पार्टी बना ली है।वहीं बिहार के चाचा – भतीजा मामले में अब पशुपति पारस ने पार्टी के छह में से पांच सांसदों को अपने साथ मिलाकर चिराग पासवान से संसदीय दल के पद और पार्टी की कमान दोनों ही छीन ली है।और अब चिराग अपने पिता की इस विरासत को वापस पाने के लिए बहुत मेहनत कर रहे हैं।

राम मंदिर : संजय सिंह के वार पर भाजपा का पलटवार, कहा पवित्र काम में विघ्न डालने वाले हैं

लखनऊ / दिल्ली । Ram Temple Land Purchase Financial Fraud प्रभु श्रीराम के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आया है। मंदिर के नाम पर हजारों करोड़ रुपए चंदा वसूलने वाले श्री रामजन्‍मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्‍ट (Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra Trust ) में जमीन खरीद के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला किया गया है। चंपत राय ने करोड़ों रुपए चंपत कर दिए हैं। आम आदमी पार्टी से राज्‍यसभा सांसद व यूपी प्रभारी संजय सिंह ने ये आरोप ही नहीं लगाए, बल्कि इसके प्रमाण भी मीडिया के आगे रखे। वह रविवार को गोमतीनगर स्थित पार्टी कार्यालय पर प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे। 

संजय सिंह ने कहाकि, यह करोड़ों लोगों की आस्‍था से जुड़ा मामला है। देश के बहुसंख्‍यक हिंदुओं की इससे आस्‍था जुड़ी हुई है। इसीलिए राममंदिर निर्माण के नाम पर देश भर से लोगों ने हजारों करोड़ रुपए ट्रस्‍ट को चंदे में दिए। अब उसी ट्रस्‍ट में उनके चंदे की धनराशि भ्रष्‍टाचार की भेंट चढ़ रही है।  

ऐसा माना जा रहा है कि कि अयोध्‍या में गाटा संख्‍या 243, 244, 246 की जमीन जिसकी मालियत पांच करोड़ अस्‍सी लाख रुपये है, उसको दो करोड़ रुपए में कुसुम पाठक और हरीश पाठक से सुल्‍तान अंसारी (Sultan Ansari ) और रवि मोहन तिवारी ने खरीदा। इस जमीन खरीद में दो गवाह बने, एक अनिल मिश्र (Anil Kumar Mishra) और दूसरे रिषिकेश उपाध्‍याय (Rishikesh Upadhyay ) जो अयोध्‍या के मेयर हैं। पांच मिनट बाद ये जमीन रामजन्‍मभूमि ट्रस्‍ट ने 18.50 करोड़ में खरीद ली। 17 करोड़ रुपए आरटी‍जीएस कर दिया गया। लगभग साढ़े पांच लाख रुपए प्रति सेकेंड की दर से जमीन का दाम बढ़ गया। 

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि, प्रभु श्रीराम के नाम पर जिस तरह तेजी से जमीन की कीमत बढ़ी वह अपने आप में रिकार्ड है। जो अनिल रिषिकेश तिवारी सुल्‍तान और रवि मोहन तिवारी की खरीद में गवाह थे, वही ट्रस्‍ट के बैनामे में भी गवाह बन गए। मैं समझता हूं आज उन करोड़ों भक्‍तों को ठेस लगी होगी, जिन लोगों ने भगवान राम के मंदिर के निर्माण पर चंदा दिया। मंदिर निर्माण के नाम पर ट्रस्‍ट के पदाधिकारी करोड़ों का भ्रष्‍टाचार कर रहे हैं। 

इस रिपोर्ट में जो नयी बात सामने आयी है उसमें यह पता चला है कि उसी दिन ट्रस्ट ने एक और प्लाट खरीदा है जो सीधे हरीश और कुसुम पाठक से खरीदा गया है जो 1.037 हेक्टेयर का है जिसकी कीमत 8 करोड़ रुपये है .इस मामले की इंडियन एक्सप्रेस ने जांच की तो पता चला सितंबर 2019 में हरीश पाठक और कुसुम पाठक और सुल्तान अंसारी सहित नौ अन्य व्यक्तियों के बीच हस्ताक्षरित समझौते किया था जिसके लिए 2 करोड़ रुपये तय की राशि तय की गयी थी।

इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एक सरकारी अधिकारी ने दावा किया है कि पाठक ने ट्रस्ट को सीधे जमीन बेचा है उन्होंने बताया कि 2019 का समझौता रद्द होने के बाद, कुसुम और हरीश पाठक तकनीकी रूप से ट्रस्ट को सीधे जमीन बेचने के लिए स्वतंत्र थे।

राजस्व विभाग से जुड़े एक बड़े अफसर की माने कि किसी भी जमीन को अगर सरकार लेती है तो शहरी क्षेत्र में सर्किल रेट से दोगुना और ग्रामीण क्षेत्र में 4 गुना से ज्यादा मुआवजा नहीं दिया जा सकता है, लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट के द्वारा अयोध्या नगर क्षेत्र में जो जमीन खरीदी गई वो सर्किल रेट से तीन गुना रेट पर ली गई है।

अमूमन जब कोई निजी व्यक्ति, संस्था या ट्रस्ट जमीन खरीदती है तो वह कम से कम कीमत देने की कोशिश करती है, ताकि पैसा बचाया जा सके, लेकिन 1.208 हेक्टेयर जमीन खरीद के मामले में राम मंदिर ट्रस्ट पर सर्किल रेट से तीन गुना पैसा देने का आरोप लग रहा है। 

भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय में मीडिया से बात करते हुए राम मंदिर मुद्दे पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा. कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस ब्राण्ड के साधु-संत इस मुद्दे को उठा रहे हैं. जमीन बेचने वाला मुस्लिम है. कहीं किसी को परेशानी नहीं है. बाजार मूल्य से कम कीमत पर जमीन खरीदी हैं. लोग परेशान हैं कि रामजन्म भूमि के कारण भाजपा को लाभ मिल रहा है. इसलिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह जैसे लोग सवाल उठा रहे हैं. आप जानते हैं कि संजय सिंह गलतबयानी को लेकर कई बार हाईकोर्ट में माफी मांग चुके हैं ये लोग सिर्फ एक षड्यंत्र करते हैं। 

पत्नी गई मायके, पति झूल गया फंदे से… और तीन दिन तक बच्चे भूखे प्यासे तड़पते रहे

लखनऊ / बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में दो मासूम बच्चे तकरीबन 3 दिनों तक अपने पिता की लाश के साथ रह रहे जब उन्हें भूख बर्दाश्त नहीं हुई तो बच्चे पड़ोसी के घर कुछ खाने को मांगने गए तब लोगों को पता चला कि उनके पिता की मौत हो चुकी है, इससे पहले  पत्नी और पति से झगड़े के बाद पत्नी नाराज होकर मायके चली गई। आपको बताते चलें कि मृतक नोएडा में काम करता था वो  लॉकडाउन के दौरान घर पर ही था, वही पत्नी से झगड़ा हुआ तो वो मायके चली गई। 

सहमें मासूम बच्चों ने किसी को हालात नहीं बताया, भूख लगी तो घर में खाना ना मिलने पर बच्चे अपने आपको संभाल ना पाए और बच्चों ने पड़ोसियों को आवाज लगाई। पड़ोसियों ने पहले तो दरवाजा खटखटाया, जब कोई जवाब नहीं मिला तो खिड़की से झांक कर देखा, की शव कुंडे से लटका हुआ है, वही दुर्गंध भी आ रही थी। मौके पर पुलिस को सूचना दी गई वहीं पुलिस ने शव को उतार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। 

बच्चों ने बताया कि उनके पिता कुंडे से लटक रहे हैं। घर पर मम्मी भी नहीं है, उन्हें बहुत तेज भूख लगी है। मनोज का शव कुंडे से लटकता देख उनके होश उड़ गए, पड़ोसियों ने तत्काल पुलिस को फोन किया वही शव को उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। 

पुलिस ने शव को कब्जे मे लेकर तलाशी ली तो उसके पास से कोई भी सुसाइड नोट भी नहीं मिला, पुलिस का कहना है, कि पत्नी से नाराजगी के चलते फांसी लगा लेने का मामला लग रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है, वही एसएसपी रोहित का कहना है कि अगर कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच की जाएगी।

लखनऊ की लड़की, मॉ ने डांटा तो घर छोड़ दिया टेंपो वाले ने पुचकारा तो साथ चल दिया… और फिर!

लखनऊ  । उत्तर प्रदेश की राजधानी  लखनऊ के इटौंजा थाने के अंतर्गत बीते दिनों एक 14 साल की बच्ची के साथ 6 लोगों ने गैंग रेप किया लखनऊ पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है घटना लखनऊ के ग्रामीण थाना इटौंजा क्षेत्र की है वहां रहने वाली 14 साल की किशोरी को उसकी मां ने पढाई को लेकर डांटा तो वह नाराज होकर घर से निकल गई  किशोरी के पिता ने इसकी रिपोर्ट इटौंजा थाना पर दर्ज कराई थी और पुलिस इस पूरे मामले की छानबीन कर रही थी।

बताया जा रहा है कि मेन रोड पर नाबालिग किशोरी को अकेला देख कर एक ई-रिक्शा चालक इकरामुद्दीन ने उसे नौकरी दिलाने का झांसा दे कर अपने साथ ले गया। इकरामुद्दीन उस नाबालिग बच्ची को खाना खिलाने के बहाने अपने कमरे पर ले गया और अपने अन्य पांच दोस्तों को फोन कर के कमरे में बुला लिया और उस  बच्ची के साथ सभी 6 हैवानों ने एक-एक करके उसके साथ रेप किया और सभी लोग उस नाबालिग किशोरी को वही तड़पती हालत में छोड़कर फरार हो गये। 

आपको याद दिलाते चलें कि किशोरी जब अपने घर से निकली थी तो वह बहुत परेशान और दुखी थी ई-रिक्शा चालक ने उसकी भूख और परेशानी का फायदा उठा कर अपने सभी मित्रों के साथ उसका रेप किया उस दौरान नाबालिग किशोर चीखती रही चिल्लाती रही लेकिन हैवानो ने उस मासूम बच्ची पर रहम ना किया और वह सभी 6 हैवान उसका रेप करते रहे। 

इटौंजा ग्रामीण के एसपी हृदेश कुमार के मुताबिक इकरामुद्दीन के साथ शकील, उत्तम शर्मा ,मोहम्मद नफीस ,नूर मोहम्मद और रितेश यादव ने किशोरी का गैंगरेप किया लखनऊ पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ धारा 363, 342, 376d, पोक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है उन्होंने बताया कि आरोपियों के खिलाफ आगे कार्रवाई की जा रही है। 

ढ़ाबा वाले बाबा…बाबा जी, क्या कहें! लौट के बुद्धू घर को आये या जब जागें तभी सवेरा!

लखनऊ / दिल्ली। कोरोना काल   ने बहुतों को रुलाया तो कईयों को हंसाया भी। लोगों के जमे जमाये बिजनेस में काफी नुकसान हुआ। लेकिन कुछ लोगों का बिजनेस खड़ा हो गया। बाबा का ढ़ाबा एक बार फिर सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग टॉपिक बन गया है। आपको बताते चलें कि आज के दौर में सोशल मीडिया कितना पावरफुल है वह पल भर में आपको आंखों का तारा बना  सकता है तो दूसरे ही पल आंखों की किरकिरी भी बना सकता है। सोशल मीडिया आज एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन गया है, जहां कोई भी इंसान अपनी क्षमताओं का सही इस्तेमाल कर के बुलंदियों तक पहुंच सकता है। 

आइए हम आपको बताते हैं ‘बाबा का ढ़ाबा’ वाले कांता प्रसाद के बारे में, कांता प्रसाद 80 वर्षीय बुजुर्ग हैं। दरअसल, गौरव वासन (Gaurav Wasan) नाम के एक यूट्यूबर भोजन की तलाश में कांता प्नसाद के ढाबे पर पहुंचे वहां उन्होंने बाबा की व्यथा सुनी गौरव ने  उनका वीडियो रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। गौरव वासन यूट्यूबर हैं फूड ब्लॉगर हैं और ट्रैवलर भी हैं। वीडियो में बाबा अपने घर की परिस्थिति बताते हैं कि लॉकडाउन में उन्हें घर चलाने में कितनी समस्या हो रही है, जो वीडियो गौरव ने लोगों को दिखाई उसे देखकर लोगों में सहानुभूति पैदा हुई लोग मदद के लिए आगे आए। बाबा की स्टोरी सुनकर लोगों की आंखें भर आई और सोशल मीडिया पर यह दिल को छू लेने वाली वीडियो खूब वायरल हुई।

बाबा का नाम कांता प्रसाद और उनकी पत्नी बदामी देवी इनकी जोड़ी जो एक साथ ढाबे पर काम कर रही थी लोग उसे देखकर काफी भावुक हो गए जिससे सोशल मीडिया पर उनकी वीडियो तेजी से वायरल हुई लोगों ने इतना ही नहीं वीडियो देखकर कई बड़े लोग उनकी मदद के लिए आगे आए। देश के कई हिस्सों से उनके लिए सहायता राशि भेजी गई। बॉलीवुड सेलेब्स से लेकर क्रिकेटर्स तक उनकी मदद के लिए आगे आए। खूब प्यार दिखाया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए काफी सहारा भी दिया। 

बाबा की इस उन्नति में गौरव की बड़ी भूमिका थी जिसे बाबा समझ नहीं पाए और बाबा ने गौरव के ऊपर आरोप लगाया कि उसने उनके पैसे रख लिए। करीब एक महीने बाद ढ़ाबा मालिक कांता प्रसाद ने गौरव वासन के खिलाफ पैसों की हेराफेरी की शिकायत की थी। जिससे उन्हें काफी ट्रोल भी किया गया तभी बाबा के कुछ मीडिया कॉन्फ्लिक्ट भी हो गए थे। कई लोगों ने उनकी आलोचना की, तो किसी ने गौरव को गलत बताया। बाबा के द्वारा गौरव पर लगाए गए आरोपों को सुन कर लोगों में बाबा के लिए गुस्सा पनपने लगा, चूंकि हमारा देश एक इमोशनल देश है जब लोगों को लगने लगा कि बाबा तो गलत कर रहे हैं फिर क्या था बाबा की इमेज एक स्वार्थी बुड्ढ के रूप में परिवर्तित होने लगी। 

हाल ही में गौरव वासन बाबा से मिलने पहुंचे तो कांता प्रसाद फूट-फूट कर रोने लगे और कहने लगे कि गौरव ना होता तो आज मुझे कोई ना जानता उसकी वजह से आज मेरा ढ़ाबा चल रहा है उसके लिए मैं अपनी जान भी दे सकता हूं और सिर पर हाथ रखकर दुआएं देने लगे। उन्होंने कहा लोग मुझे आज गौरव की वजह से जानते हैं। बाबा ने गौरव से हाथ जोड़कर माफी मांगी यह सुनकर गौरव ने बाबा को गले से लगाया और कहा आप बड़े हैं माफी कैसी? और साथ ही कहा कि आज लोगों को पता चल गया होगा कि सच क्या है गौरव वासन ने तस्वीर शेयर करते हुए कहा, अंत भला तो सब भला। 

एक दो तीन चार, युवा कब तक रहे बेरोजगार!

लखनऊ / दिल्ली । बेरोजगारी की समस्या एक अभिशाप की तरह युवाओं के दिलों दिमाग को खोखला कर रही है । युवाओं के सामने सिर्फ यही सवाल है कि पढ़ाई के बाद नौकरी कैसे हासिल की जाए?  संयुक्त राष्ट्र की 2014 की एक एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। यहां 35.6 करोड़ आबादी युवाओं की है। किसी भी देश की तरक्की काफी हद तक वहां के युवाओं को मिलने वाले रोजगार पर निर्भर करती है, लेकिन अगर युवाओं को पर्याप्त रोजगार ना मिले तो उनके ना सिर्फ सपने टूटते हैं बल्कि अवसाद के कारण उनके कदम गलत रास्ते की ओर बढ़ने की संभावना भी रहती है। 

बता दें कि भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के लेबर ब्यूरो के वार्षिक रोजगार बेरोजगार सर्वे के मुताबिक पिछले 5 सालों में सबसे अधिक विरोध गाड़ी बड़ी है पूर्व सर्वे के मुताबिक 2011- 2012 बेरोजगारी की दर 3.8 फ़ीसदी थी जो बढ़कर 2012 -13 में 4.7 फीसदी दी और 2013 से 14 में 4.9 फ़ीसदी हो गई थी। मोदी सरकार के सत्ता में आने का वर्ष 2014-2015 में मंत्रालय ने सर्वे नहीं किया उसके अगले 2015 -2016 में यह दर घटी नहीं बल्कि और बढ़ गई। दर बढ़कर पांच फ़ीसदी हो गई।

वहीं इस साल बेरोजगारी दर घटकर फिर से पहले स्तर पर आ गई है। फरवरी 2021 में देश में बेरोजगारी दर 6.9% रही, जबकि फरवरी 2020 में यह 7.8% रही थी। यह जानकारी सेंटर ऑफ मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी( सीएमआईई) के वीकली एनालिसिस से सामने आई है। लेकिन यह खुशी मनाने वाली बात नहीं है इसकी एक वजह है।

सीएमआईई के अनुसार की प्री लॉकडाउन लेवल पर बेरोजगारी दल की गिनती में गिरावट की तुलना में कम होती लेबर फोर्स अधिक दिखा रही है। दरअसल सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2021 में लेबर पार्टिसिपेशन रेट 40.5% था। जनवरी 2021 में यह 40.6% और फरवरी 2020 में यह 42.6% था।

वहीं भारत में रोजगार दर फरवरी 2021 में घटकर 37.7% रह गई, जबकि 2019 से 20 में या 39.4 % पर कहा गया कि पिछले 3 वर्षों में रोजगार दर में गिरावट जारी है। हालांकि, यह दर वित्त वर्ष 2020 से 21 में पहले की गिरावट से उबर गई है। 

युवाओं को 2014 आम चुनाव में प्रमुख मुद्दा बनाने वाली भाजपा सरकार चाहे लाख दावे करें लेकिन रोजगार के मुद्दे पर वह पूरी तरह असफल और बेबस नजर आ रही है। नरेंद्र मोदी ने प्रतिवर्ष दो करोड़ लोगों को नौकरी देने का वादा किया था। युवाओं को दो करोड़ रोजगार मिलने की बात तो दूर देश में आर्थिक मंदी आने से लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ रहा है। वही विश्वव्यापी महामारी कोरोनावायरस के कई लोग बेरोजगार हुए, और आज का युवा अभी भी इस उम्मीद में बैठा है कि आज नहीं तो कल रोजगार तो मिलेगा ही। https://sverige-ed.com/kopa-receptf…-levitra/

विश्वास नहीं हो रहा कि, मुश्किल में अडानी!

लखनऊ / दिल्ली । पिछले साल से गौतम अडानी काफी चर्चा में रहे है। लेकिन अब कुछ ऐसा हुआ है जिससे उनके ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया है। और वह मुश्किल में पढ़ गए है। उनकी मुश्किलों का कारण नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) द्वारा उनके 43,500 करोड़ के खतों को फ्रीज करना है। 

अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में सोमवार की सुबह भारी गिरावट देखने को मिली है।गिरावट इतनी तेज थी कि कुछ मिनट के अंदर ही इन शेयरों में लोअर सर्किट लग गया। दरअसल, इस गिरावट की वजह बनी ऐसी रिपोर्ट्स जिनमें कहा गया था कि नेशनल सिक्टोरिटीज़ डिपॉजिटरी लिमिडेट यानी (NSDL) ने ग्रुप की कंपनियों में भारी भरकम निवेश करने वाले तीन फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) के एकाउंट फ्रीज़ कर दिए हैं।

इन रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि इन तीनों खातों के जरिए अडाणी समूह की कंपनियों में हजारों करोड़ रुपयों का निवेश किया गया है। यह खबर आने के साथ ही अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट शुरू हो गई।  जिसके बाद अडाणी ग्रुप ने इन खबरों को गलत ठहराना शुरू किया।  ग्रुप की कंपनियों ने स्टॉक्स एक्सचेंजों में लिखकर दिया कि उनके विदेशी निवेशकों के खाते फ्रीज नहीं हुए हैं। लेकिन PTI के मुताबिक NSDL की वेबसाइट पर तीनों FPI के एकाउंट्स को फ्रीज ही बताया गया है। 


इसके बाद सोमवार शाम को अडानी ग्रुप ने इसकी सफाई में अपना एक बयान जारी ​किया। जिसमे अडानी ग्रुप ने बताया कि अकाउंट फ्रीज किए जाने की खबर बिलकुल गलत है ये बस निवेशकों को गुमराह करने की एक साजिश की जा रही है । ग्रुप ने कहा कि जानबूझकर निवेशकों को यह बताया जा रहा है ताकि आगे से वे हमारी कंपनी में निवेश ना करे। अडानी ग्रुप ने यह भी कहा की इस ख़बर को किसी के द्वारा प्लांट किया गया है । ग्रुप ने कहा कि 14 जून तक किसी भी विदेशी निवेशक के डीमैट अकाउंट को फ्रीज नहीं किया गया है। 


यही नहीं, अडानी ग्रुप ने बताया कि जिन तीन विदेशी निवेशकों पर कार्रवाई की बात की जा रही है, उनमें से किसी पर ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस खबर ने निवेशकों के नुकसान के साथ ग्रुप की भी प्रतिष्ठा पर भी आंच पहुंचाई है। फ़िलहाल इस खबर की वजह से कंपनी का नाम खराब हुआ है।अडानी ग्रुप ने कहा कि हम माइनॉरिटी शेयर धारकों के हित में यह खुलासा कर रहे हैं कि ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

सुशांत सिंह के बड़े भाई ने केस की कार्यवाही पर सवाल खड़े किये

लखनऊ / दिल्ली /  मुंबई। महेंद्र सिंह धोनी के किरदार को बड़े परदे पर जिंदा करने वाले बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने मुंबई स्थिति अपने फ्लैट पर सुसाइड कर लिया था। यह खबर सुनते ही उनके फैंस को काफ़ी दुख हुआ था ।आज सुशांत के निधन को पूरा एक साल हो गया है। उनकी पुण्यतिथि पर अभिनेता के बड़े भाई बिहार के मंत्री नीरज बबलू और उनके फैंस ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। 

सुशांत की पुण्यतिथि पर भावुक हुए उनके भाई नीरज बबलू ने CBI जांच की कार्यवाही पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सुशांत के गुनाहगारो को जल्दी से जल्द सजा दिलाने की मांग की है। सुशांत को याद करते हुए उनके बड़े भाई ने यह भी कहा- सुशांत सिंह राजपूत हमारे बिहार के आईकॉन थे। 

शत्रुघन सिन्हा और मनोज बाजपेयी के बाद सुशांत एक ऐसी शख्सियत थे, जिन्होने छोटे से शहर से निकलकर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई थी। बिहार के युवाओं की धड़कन थे। यहां से उनकी बहुत सारी यादें जुड़ी हुई हैं। आज भी सुशांत का परिवार उनके साथ बिताए गए पलो को याद करके भावुक हो जाता है। 

एक छोटे से शहर से आया एक आम इंसान सुशांत सिंह राजपूत ने फिल्म इंडस्ट्री में अपना बहुत अच्छा नाम बनाया लोग उन्हें और उनकी फिल्मों को काफ़ी पसंद भी करते थे। सुशांत की फिल्म छिछोरे काफी प्रेरणादायक रही थी लोगों के लिए, मगर इसके बावजूद उन्होन कुछ ऐसा कर लिया जो ना ही सुशांत के लिए सही था, और ना ही उनके घर वालों के लिए। 

जांच में पता चला था की सुशांत डिप्रेशन से पीड़ित हैं। जिसका इलाज भी हो रहा था । कभी ना कभी हम सब के जीवन में कुछ ऐसी बातें हो जाती है जिसे लेकर हम बहुत परेशान हो जाते हैं। और किसी को बताते भी नहीं हैं। हम सब की जिंदगी में बहुत सी ऐसी प्रॉब्लम्स होती है, लेकिन कई बार हम उनसे लड़ने के बजाए कुछ ऐसा कर लेते हैं जो न हमारे लिए सही होता है और ना ही हमारे अपनों के लिए।

सुशांत सिंह केस में शायद ही ऐसा कुछ हुआ हो। बहुत लोगों पर शक किया गया लेकिन कुछ नतीजा नहीं निकला। सुशांत के भाई मंत्री नीरज बबलू इस केस में हुई जांच से नाखुश हैं।और केस में की गई कार्यवाही पर सावल उठाए हैं। मंत्री नीरज बबलू की यह मांग है कि उनके भाई की मौत के दोषियों को जल्दी से जल्दी सजा मिले। 

Court ने कहा, क्या होगा अगर सीरम इंस्टीट्यूट वाले पूनावाला कह दें कि उन्हें किसी प्रकार की सुरक्षा नहीं चाहिए!

लखनऊ / दिल्ली / मुंबई। सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (SII) के CEO अदार पूनावाला ने अपनी सुरक्षा की मांग की थी। याचिका शुक्रवार को मुंबई कोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई है। कोर्ट का कहना था कि कोर्ट किसी और की मांग पर कोई आदेश नहीं दे सकता। CEO अदार पूनावाला ने कथित रूप से यह बयान भी दिया था कि टीकों की आपूर्ति को लेकर उनको काफी धमकियां मिल रही हैं। 

कोविशील्ड वैक्सीन की निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के CEO अदार पूनावाला के कथित रूप से दिए गए बयान के बाद कि उन्हें टीकों की आपूर्ति को लेकर आए दिन धमकियां मिल रही हैं, अधिवक्ता दत्ता माने ने याचिका दायर करते हुए अदार पूनावाला की कड़ी सुरक्षा की मांग की, उसके साथ यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को पूनावाला की ‘जेड-प्लस’ सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया जाए। 

महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि यदि पूनावाला के जरिए सुरक्षा की मांग की जाए तो उन्हें कड़ी सुरक्षा प्रदान की जाएगी। सरकार के इस बयान के बाद, पुणे में रहने वाले, कोविशील्ड वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के CEO अदार पूनावाला की बेहतर सुरक्षा की मांग को लेकर दर्जी याचिका का निपटारा कर दिया गया है। अदार पूनावाला को पहले ही केंद्र सरकार की ओर से सीआरपीएफ की ‘वाई श्रेणी’ की सुरक्षा प्रदान की जा चुकी है।

इस मामले पर खंडपीठ का कहना था कि याचिकाकर्ता ने एक दूसरे व्यक्ति के लिए सुरक्षा याचिका दर्ज की है और हो सकता है जिसके लिए की गई है उसे इसके बारे में पता भी ना हो। कोर्ट का बयान था ‘ क्या होगा अगर पूनावाला कह दें कि उन्हें किसी प्रकार की सुरक्षा नहीं चाहिए। हम सिर्फ लोगों की बातों पर किसी प्रकार का आदेश नहीं दे सकते।

कोरोना की कहानी… वो जीना चाहती थीं वो सिर्फ इतना चाहती थीं कि कोई उन्हें बचा ले!

लखनऊ । चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस संक्रमण लगभग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुका है। हर रोज़ मौत के आंकड़े सैकड़ों की संख्या में बढ़ जाते हैं और हज़ारों की संख्या में संक्रमितों की तादाद भी बढती जा रही है पूरी दुनिया में इस वायरस के कारण डर का माहौल है लेकिन इन सबके बीच उम्मीद की बात सिर्फ़ इतनी है कि बहुत से मामलों में लोग ठीक भी हुए हैं। 

हैलो, हॉ मैं मुस्कान बोल रही हूँ …. उधर से सुबकती हुई आवाज़ कानो में पड़ी तो लगा जैसे किसी ने दिल पर भारी पत्थर रख दिया हो! मैं नबीला हूँ मुस्कान, मम्मी.. नहीं रहीं। ये सुनते ही मेरे कदम लड़खड़ाये और मैं बेड पर गिर गयी ये देख कर मम्मी दौड़ कर मेरे पास आईं। मुस्कान क्या हुआ बच्चा ? मॉ! वो नबीला है ना, हॉ हॉ, नबीला तुम्हारी दोस्त । हॉ मॉ, उसकी मम्मी नहीं रहीं। हे भगवान! ये कह कर मम्मी भी रोने लगीं। 

आंटी ( नबीला की मम्मी) यही कोई 45-50 साल की होंगी उनके पति का पहले ही देहांत हो गया था वो लखनऊ के हनुमान मंदिर सेतु के पीछे वाले मुहल्ले में रहती थीं नबीला के भैय्या की मुहल्ले में ही किराने की दुकान है जिससे मुश्किल से घर का खर्च चलता है दो भाईयों में नबीला सबसे छोटी है। घर का खर्च चलाने के लिए आंटी भी काम करती थीं नबीला बताती है कि उन्हें पूरा यकीन था कि उन्हें काम के सिलसिले में इधर-उधर जाने से Covid 19 infection हुआ होगा। 

वो कहती है कि मम्मी सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करती थीं मास्क लगाती थीं लेकिन उस रोज़ गुरुवार को जब वो काम से वापस लौटीं तो बता रही थीं कि जाते वक्त बस में भीड़ कुछ ज़्यादा थी बस में कुछ ऐसे लोग भी थे जो बार बार खांस रहे थे उनमें फ़्लू के लक्षण लग रहे थे।  

इस घटना के दस दिन बाद आंटी की हालत ख़राब होने लगी, नबीला ने बताया कि पहले इसका असर बहुत कम मालूम पड़ रहा था लेकिन बाद में मम्मी सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत महसूस करने लगीं ऐसे सांस लेने लगीं जैसे कोई बहुत बुजुर्ग हों कुछ दिन बाद उन्हें चलने फिरने में तक़लीफ़ होने लगी अब ऐसा लगने लगा कि कोरोना वायरस ने उनके फेफड़े पर हमला किया हो।

आंटी की बिगड़ती जा रही हालत को देख कर नबीला ने अपने रिश्तेदारों को फोन किया सोशल एक्टिविस्ट, पुलिस और प्रशासन को सोशल मीडिया पर टैग किया कुछ लोगों ने उसके पोस्ट को शेयर किया उसके ट्वीट को री ट्वीट किया, सोशल मीडिया के अलग अलग प्लेटफार्म के जरिये उसने मदद मांगी जिसके बाद बड़ी मुश्किल से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जा सका। 

अस्पताल ले जाने के बाद मम्मी के कई टेस्ट किये गए और स्वैब टेस्ट भी किया गया। डॉक्टरों को लगा कि उन्हें कोरोना वायरस संक्रमण है जिसके बाद उन्हें ऑक्सीजन पर रखने की जरूरत हुई लेकिन अस्पताल में आक्सीजन नहीं था, बिचारी नबीला रोती बिलखती इधर-उधर आक्सीजन सिलेंडर के लिए गिड़गिड़ाते हुए मम्मी के जान बचाने की गुहार करती रही उसके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वो ब्लैक में सिलेंडर खरीद सके जैसे तैसे सिलेंडर का जुगाड़ हुआ।

नबीला बताती है कि है कि मम्मी को अकेले अंधेरे कमरे में रखा गया था मम्मी कहती थीं कि “मुझे यहां से निकालो यहां मैं मर जाऊंगी मेरा जीवन ख़त्म हो जायेगा नबीला! प्लीज़ मुझे यहां से निकालो लेकिन मम्मी जीना चाहती थी। मैं उनके भीतर चल रही लड़ाई को महसूस कर सकती थी। मम्मी धीरे धीरे ठीक होने लगीं। 

नबीला ने फोन पर रोते रोते मेरी मॉ को बताया, आंटी कुछ दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई लेकिन घर पहुंचते ही उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी उनकी सांसे उखड़ती जा रही थी उनकी बेचैनी बढती जा रही थी हम उनके सीने को पंप करने लगे तभी मम्मी ने इशारे से भैय्या को पास बुलाया और मुझे देखते हुए लड़खड़ाती आवाज़ में कहा, बेटा इसका ख्याल रखना, ये कह कर नबीला चुप हो गयी लेकिन उसके आंसूओं के शोर ने मुझे आज तक बेचैन कर रखा है। 

हाय रे सियासत… पहले सोनेलाल पटेल की पत्नी और बेटी में लड़ाई और अब बड़ी बेटी, छोटी बेटी आमने-सामने आई

लखनऊ / दिल्ली ।  अस्मिता की राजनीति के रहबर सोनेेेलाल पटेल ने दो दशक पहले अपना दल नाम की राजनीतिक पार्टी बनाई थी उनके निधन के बाद उनकी विरासत की जंग उनकी पत्नी और उनकी बड़ी बेटी के बीच चली पार्टी में टूट फूट हुई लेकिन लगता है अब सोनेलाल पटेल की विरासत को लेकर उन्हीं की दोनों बेटियां आमने-सामने हैैं।

सूत्रों के अनुसार, अपना दल (सोनेलाल) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल ने गुुुरुवार को दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की तो वहीं शुक्रवार को उनकी छोटी बहन पल्लवी पटेल ने लखनऊ में पूर्व CM अखिलेश यादव से मुलाकात की। 

अनुप्रिया पटेल ने यूपी में कैबिनेट और गठबंधन पर विस्तार से चर्चा की है जिसमें अनुप्रिया पटेल यह चाहती हैं कि उनकी पार्टी से दो चेहरे कैबिनेट में शामिल किये जायें और केंद्र सरकार में भी वो खुद की हिस्सेदारी चाहती हैं। 

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर तमाम रजनीतिक दांव-पेंच चल रहे हैं। सियासी अनुमानों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सांसद अनुप्रिया पटेल और संजय निषाद ने मुलाकत की इस मुलकात के बाद बीजेपी की सहयोगी पार्टी अपना दल (एस) आजकल राजनीतिक गलियारो की चर्चाओं में है।

सूत्रों की मानें तो अनुप्रिया ने केंद्र के साथ उत्तर प्रदेश में भी संभावित मंत्रीमंडल विस्तार में अपना दल के प्रतिनिधित्व को लेकर अमित शाह से बात की। यूपी में जिला पंचायत अध्यक्ष और प्रदेश के निगमों और आयोगों में पार्टी नेताओं को शामिल करने के लिए कहा है ।

उधर, अपना दल (कमेरावादी) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पल्लवी पटेल अचानक से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलने पहुंच गईं। अनुप्रिया और पल्लवी दोनों सगी बहनें हैं। उनके पिता सोनेलाल ने अपना दल पार्टी बनाई थी पिता के निधन के बाद पार्टी की कमान मां के हाथ में आई थी और इसके बाद 2014 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद अनुप्रिया ने पार्टी के खिलाफ बगावत कर दी थी, जिसके कारण अनुप्रिया और उनके पति आशीष को पार्टी से निकाल दिया गया था। 

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में पल्लवी पटेल समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर लड़ना चाहती हैं और सपा भी इसे सकारात्मक मानकर चल रही है हालांकि पल्लवी ने अखिलेश से मुलाकात से इनकार नहीं किया और न ही इकरार किया है । फिलहाल स्थिति यह हो गई कि पार्टी दो हिस्सों में बंटती नजर आ रही है जिससे उनके समर्थक दुविधा में नजर आ रहे हैं। 

BSF ने बंगाल में चीनी घुसपैठिये को पकड़ा, चड्ढी बनियान मे छुपा कर मोबाइल सिम बेचता था UP ATS भी पूछताछ करने पहुंची

लखनऊ /  कोलकाता । बंगाल के मालदा जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा के पास से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा गुरुवार को घुसपैठ करते गिरफ्तार किए गए संदिग्ध चीनी नागरिक से पूछताछ में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।बीएसएफ ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि पूछताछ के दौरान उसने बताया कि पिछले दो सालों में फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल करके अब तक कम से कम 1,300 भारतीय सिम कार्ड चीन भेजे गए। 

इस बीच, उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) की चार सदस्यीय टीम भी शुक्रवार सुबह मालदा में आरोपित से पूछताछ करने और केस का चार्ज लेने के लिए पहुंची।अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को भी विभिन्न एजेंसियों ने चीन के हुबई निवासी हान जुनवेई (36) से काफी पूछताछ की और इस दौरान यूपी एटीएस की टीम भी मौजूद रहीं। 

प्रारंभिक पूछताछ के बाद बीएसएफ ने जुनवेई को जब्त सामानों के साथ आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए शुक्रवार को पुलिस स्टेशन गुलाबगंज, कालियाचक को सौंप दिया। दरअसल, गिरफ्तारी के बाद गुरुवार को ही पूछताछ में हान जुनवेई (36) ने खुलासा किया कि उसके एक बिजनेस पार्टनर सन जियांग को यूपी एटीएस ने कुछ दिनों पहले कई आरोपों में गिरफ्तार किया था। जियांग ने ही एटीएस के समक्ष जुनवेई और उसकी पत्नी की अवैध गतिविधियों व उन्हें भारतीय सिम भेजे जाने के संबंध में खुलासा किया था। 

इसके बाद एटीएस ने जुनवेई और उनकी पत्नी के खिलाफ लखनऊ में मामला दर्ज किया‌ था, जिस वजह से उन्हें भारतीय वीजा नहीं मिला। उसके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी। जुनवेई ने फिर नेपाल और बांग्लादेश से वीजा लिया और भारत में अवैध रूप से प्रवेश करते पकड़ा गया। इस संबंध में यूपी एटीएस की टीम उससे पूछताछ के लिए रिमांड पर लेगी।

इधर, बीएसएफ के दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के प्रवक्ता व डीआइजी सुरजीत सिंह गुलेरिया ने बताया, ‘जांच अभी जारी है। हान जुनवेई एक वांछित अपराधी है। वह 2010 से चार बार भारत आ चुका है। उससे पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। 

उसने खुलासा किया कि वह अपने एसोसिएट्स के जरिए भारतीय सिम को अंडर गारमेंट्स में छुपा कर चीन में भेजता था। इन सिम का इस्तेमाल अकाउंट हैक करने तथा अन्य गलत कार्य करने के लिए किया जाता था। सिम का इस्तेमाल कर लोगों से ठगी करना, उनका पैसा मनी ट्रांजैक्शन मशीन से निकालना इनका उद्देश्य था।

बीएसएफ डीआइजी ने बताया कि हम ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या वह किसी खुफिया एजेंसी या किसी संगठन के लिए भी काम कर रहा था, जो भारत के खिलाफ काम करता है। अधिकारियों ने उसके पास से कई संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जिसमें एक लैपटॉप, दो आईफोन, एक बांग्लादेशी सिम कार्ड, दो पेन ड्राइव समेत एटीएम कार्ड, अमेरिकी डॉलर के साथ कुछ बांग्लादेशी और इंडियन करेंसी भी जब्त की है। 

पूछताछ के दौरान उसने कहा कि वह गुरुग्राम में स्टार स्प्रिंग नाम से एक होटल का भी मालिक है। बीएसएफ अधिकारी ने बताया हम उसके बयानों की जांच कर रहे हैं।जांच जारी है और दूसरी खुफिया एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया गया है। उनके लैपटॉप को स्कैन किया जा रहा है। बताते चलें कि चीनी नागरिक जब बांग्लादेश से भारतीय सीमा में दाखिल हो रहा था तो बीएसएफ जवानों ने जब उसे रूकने की चुनौती दी तो उसने भागने की भी कोशिश की। लेकिन बीएसएफ ने उसे दबोच लिया।

मायानगरी में मानसून की दस्तक के साथ ही मुंबई वालों की दिक्कत!

लखनऊ / मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में दक्षिण पश्चिम मॉनसून ने बुधवार को दस्तक दे दी है। भारी बारिश के चलते अंधेरी सबवे, कुर्ला, सांताक्रुज, में पानी भर गया है। जलभराव से आने-जाने में लोगों को दिक्कत हो रही हैै। 

मौसम विभाग ने महाराष्ट्र के मुंबई में रत्नागिरी और रायगढ़ जिलों में 13 जून को भारी बारिश होने का रेड अलर्ट जारी किया है।एहतियात के तौर पर नेवी कोस्ट गार्ड और एनडीआरएफ को भी सतर्क रहने को कहा गया है। मौसम विभाग के अनुसार 24 घंटे के भीतर भारी बारिश होने की संभावना है। 204.55mm से ज्यादा बारिश को अत्यंत भारी बारिश माना जाता है। 

मुबई में हर साल तेज बारिश के कारण जलभराव हो जाता है। बुधवार को पहली बारिश के चलते बेहद बुरे हालात हो गए और इसके कारण यातायात पुलिस को चार सबवे बंद करने पड़े। वहीं कई चालकों को अपने वाहन सड़कों पर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, लोकल ट्रेन भी बाधित हुई जो केवल स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक कर्मियों के लिए चल रही थी।

आईएमडी के मुताबिक महाराष्ट्र के उप नगरों में 13 से 14 जून के बीच भारी बारिश होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में बीएमसी के आपदा प्रबंधन विभाग ने चेतावनी दी है कि वे समुद्र तट से दूर रहे।

वैक्सीनेशन टीम पर हमला… कौन है महामारी का शिकार शरीर या दिमाग? शरीर नहीं सोच को नपुंसक बनाती अफवाहें

लखनऊ / दिल्ली । लम्बे समय से चलाए गए अभियान के बाद दुनिया के लगभग सारे देश पोलियो जैसी महामारी से मुक्त हो गए हैं। इस समय केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान ही ऐसे दो देश हैं जहां से पोलियो के मामले सामने आ रहे हैं। एक तरफ दोनों देशों में पोलियो के केस सामने आ रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ पोलियो की खुराक पिलाने जा रहे स्वास्थ्यकर्मियों और उनकी सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों पर न देशो में लगातार हमले की खबरें आती रहती हैं। 

इसी कड़ी में बीते बुद्धवार को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनवा में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा में लगे दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई। सूत्रों के मुताबिक हमलावर बाइक पर सवार होकर बन्दूक के साथ आए और पुलिसकर्मियों को गोली मार कर फरार हो गए। गौरतलब है कि दोनों अधिकारी उन स्वास्थ्य कर्मचारी के साथ खैबर पख्तूनवा के इलाको में गए थे जो बच्चों को पोलियो की खुराक देते। पोलियो की खुराक देकर लौटते वक्त दो व्यक्तियों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। सोमवार को ही पोलियो मुक्त अभियान को शुरू किया गया था। 

इसी तरह अफगानिस्तान के जलाल शहर में भी मार्च में हमलावरों ने पोलियो वैक्सीनेशन की टीम को रोकने के लिए उनके वाहन पर गोलियां चलाई थी, जिसमें तीन महिला कर्मियों की मौत हो गई थी। 

पूरी दुनिया को पोलियो मुक्त करने के लिए ग्लोबल पोलियो इरेडिकेशन इनीशिएटिव के नाम पर इंटरनेशनल लेवल पर अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अन्तर्गत दुनिया के प्रत्येक देश को वर्ष 2026 तक पोलियो से मुक्त करना है। इसके लिए कुल 5.1 अरब डॉलर खर्च किया जा रहा है। इसमें सरकारें और हेल्थ ग्रुप मिलकर काम करेंगे। 

इसी इनिशीएटिव के तहत पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पोलियो मुक्त अभियान चलाया जा रहा है। परन्तु जब भी पोलियो वैक्सीनेशन की टीम इस अभियान पर किसी इलाके में जाती है तो उन पर हमले किए जाते हैं। ऐसे ही हमलों में कई पुलिसकर्मियों और स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो चुकी है। 

माना जा रहा है कि इन हमलों के पीछे का कारण लोगों में फैला भ्रम है। लोगों का मानना है कि पोलियो की वैक्सीन लगने के बाद बच्चे नपुंसक हो जाते हैं। वैक्सीन लगने के बाद बच्चों के शरीर की वृद्धि सही तरह से नहीं हो पाती है। 

इन हमलों के पीछे का एक कारण यह भी माना जाता है कि अमेरिका ने अल कायदा के मुखिया ओसामा बिन लादेन को पकड़ने के लिए एबटाबाद के क्षेत्र में ऐसा ही एक मुहिम चलाया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक लादेन को मारने के लिए अमेरिका ने 2011 में उस क्षेत्र मे फर्जी हेपेटाइटिस टीके का अभियान को चलाया था। उसके बाद से ही पाकिस्तान और अफगानिस्तान में हमलों की संख्या ज्यादा बढ़ गई। अब तक इस तरह के हमलों में कुल 105 लोग मारे जा चुके हैं। 

पाकिस्तान की अगर बात करें तो 2019 में वहां पर कुल 147 केस सामने आए थे। पाकिस्तान में 1994 से ही पोलियो मुक्त अभियान चलाया जा रहा है। अफगानिस्तान में हाल यह है कि हेल्थ वर्कर्स 5 साल के कम बच्चों को पोलियो की खुराक नहीं पिला पा रहे हैं, इसका कारण तालिबान का अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर पोलियो वैक्सीन लेने पर बैन लगाना बताया जा रहा है। 2020 में सबसे अधिक मामले इन्हीं इलाकों से रजिस्टर हुए। 

आपको बता दें कि 2014 में तीन साल तक पोलियो का कोई मामला सामने ना आने पर भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित कर दिया गया था। 2018 में पोलियो के केवल 18 केस थे जबकि पिछले साल यह संख्या बढ़कर 1226 हो गए। कोरोना महामारी के कारण पोलियो मुक्त अभियान में बाधा आई है जिस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन भी चिंता व्यक्त कर चुका है। 

कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों की मदद को आगे आई योगी सरकार

लखनऊ / दिल्ली । जिनके माता-पिता की कोविड-19 से आकस्मिक में मृत्यु हो गई है, ऐसे में बच्चों के लिए राज्य शासन ने मुख्यमंत्री को “बाल कल्याण योजना” के आदेश जारी कर तत्काल प्रभाव से योजना को प्रदेश में लागू कर दिया है।

राज्य सरकार की तरफ से अनाथ हुए बच्चों का संरक्षण व देखभाल के लिए विशेष योजना संचालित होगी। उन बच्चों को रुपए 5000 प्रति माह आर्थिक सहायता राशि उनके गार्जियन तथा केयरटेकर को दी जाएगी।

आदेश में कहा गया है कि 10 साल तक के बच्चों को नजदीकी स्कूल में मुफ्त शिक्षा दिया जायेेगा 11 से 18 वर्ष के बच्चों को केंद्र के स्कूल में निशुल्क शिक्षा का प्रारावधा रहेगा जबकि 18 साल की उम्र तक ₹5000 का स्वास्थ्य बीमा एवं 23 साल का होने पर एफडी की एक राशि उनकी व्यक्तिगत खाते में दी जाएगी।

मुख्यमंत्री कोविड-19 “बाल कल्याण योजना” में सभी आवेदन दस्तवेजों सहित योजना के लिए निर्मित पोर्टल covidbalkalyan.mp.gov.in पर ही प्राप्त किए जाएंगे। आवेदन की प्रक्रिया नि:शुल्क होगी। 

प्रेम मे भागना क्यों? निबाहना होता है, जानिये 11 साल तक कहाँ था प्रेमी जोड़ा!

लखनऊ / दिल्ली । ये कहानी सुनने में पूरी फिल्मी लग सकती है, लेकिन हैं एकदम असली. एक लड़की 11 साल पहले अपने घर से गायब हो गई. और जब वो मिली तो वहीं कहावत हो गई ‘बगल में बच्चा नगर में ढिंढोरा’. केरल के पलक्कड़ में एक छोटा सा गांव आयालुर से 11 साल पहले एक 18 साल की लड़की गायब हो गई थी. उसके मां बाप उसके मिलने की उम्मीद तक खो चुके थे। 

अब 11 साल बाद लड़की अपने घर से महज़ 500 मीटर की दूरी पर मिली. लड़की पिछले एक दशक से एक कमरे में उस आदमी के साथ रह रही थी जिसे वो प्यार करती है. खास बात ये हैं कि जिस कमरे में उस लड़की ने अपनी जिंदगी के दस साल गुज़ार दिए, वो उसके मां बाप के घर का ही हिस्सा था, जिसे उस आदमी को रहने के लिए दिया गया था और वहां एक औरत रह रही है इससे वो पूरी तरह से वंचित है। 

दोनों से पूछताछ के बाद नेनमारा के एसएचओ दीपा कुमार ने कहा है कि सजीता और रहमान ने अपनी रिलेशनशिप सबसे इसीलिए छिपा कर रखी थी कि उन दोनों का धर्म अलग है और इससे बवाल मच सकता है। उन्होंने कहा है, ‘इनकी कहानी असमान्य लगती है, लेकिन हम दोनों को रहमान के घर ले गए और उन्होंने हमें बताया कि कैसे सजीता इतने साल तक एक कमरे में सबकी नजरों से बचकर रहती रही।’ कुमार के मुताबिक तब रहमान 24 साल का था और घर वालो ने उसपर कभी शक नहीं किया।  

उन्होंने कहा, ‘उनके रिश्ते के बारे में किसी को नहीं पता था। जब कोई प्रेम में पड़कर इस तरह से भागता है तो दोनों एक साथ गायब होते हैं।’ बशीर का कहना है कि उसका भाई अलग कमरे में रहता था और हमेशा उसे बंद करके रखता था। किसी को उसमें जाने नहीं देता था। बशीर तो अलग रहता है, लेकिन माता-पिता ने कभी अपने गुस्सैल बेटे रहमान से इस बात पर उलझना मुनासिब नहीं समझा। घर के सारे लोग काम पर चले जाते थे तो पेशे से पेंटर रहमान खाना लेकर भी अपने कमरे में ही चला जाता था। 

पुलिस के मुताबिक करीब करीब पूरा गांव उसे भूल चुका था, सबको लगता था कि वो किसी के साथ भाग गई है. तीन महीने पहले पता नहीं क्यों लेकिन सजीथा ने अपने घर को छोड़ दिया और रहमान के साथ दूसरे गांव में रहने चली गई ये वही जगह है जहां रहमान को उसके भाई ने देखा था. रहमान का कहना था कि उसे डर था कि उसके घर वाले उन दोनों के रिश्ते को कबूल नहीं करेंगे इसलिए उन्होंने एक कमरें बंद रहकर रहने का फैसला किया। 

हाल में रहमान के परिवार ने उसके लिए लड़की खोजनी शुरू की थी। बशीर के मुताबिक उसने इसका विरोध तो नहीं किया, लेकिन इस मुद्दे पर ज्यादा बात नहीं करना चाहता था। रहमान के पड़ोसी और स्थानीय पंचायत के मेंबर पुषपकरण के मुताबिक उसके बर्ताव से लगता था कि उसके साथ कुछ मानसिक दिक्कत है।

उन्होंने बताया, ‘हमको लगता है कि उसने अपने कमरे की खिड़की के कुछ रॉड निकाल दिए थे। कमरे में अटैच टॉयलेट नहीं था तो शायद रात में सजीता खिड़की से ही बाहर निकलती थी या फिर जब रहमान के माता-पिता काम पर जाते थे, तब चली जाती होगी।’ बशीर का कहना है कि उन्होंने बताया है कि लड़की अपने कपड़े भी कमरे में ही धोकर सुखा लेती थी।

मामले का खुलासा तब हुआ जब साजिता ने घर छोड़ा लेकिन यह साफ नहीं है कि आखिर तीन महीने पहले सजिता ने घर क्यों छोड़ा। उसी दिन, रहमान ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ झगड़ा किया और बाहर निकल गया। इसके बाद दोनों दूसरे गांव में रहने लगे। संयोग से रहमान के भाई ने सजिता और रहमान को देख लिया जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ। रहमान ने अदालत को बताया कि वह सजिता पर अपने परिवार के विरोध से डरता है। वहीं सजिता ने भी कहा कि वह रहमान के साथ रहना चाहती है जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें साथ रहने की अनुमति दी। 

पाकिस्तानी संसद ने जाधव को हाईकोर्ट में अपील की इजाजत दी

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लखनऊ / दिल्ली । पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव के मामले में भारत को थोड़ी राहत मिली है। 4 साल पहले जासूसी के आरोप में पाकिस्तान सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव को सजा-ए-मौत सुनाई थी। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने इंटरनेशनल न्यायालय के फैसले( समीक्षा और पुनर्विचार )अध्यादेश 2020 को स्वीकृति दे दी है। गुरुवार को पाकिस्तान नेशनल असेंबली से कुलभूषण जाधव को अपनी सजा के खिलाफ किसी भी हाईकोर्ट में अपील देने की इजाजत मिल गई है। 

बता दें कि भारत ने कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा को रोकने के लिए इंटरनेशनल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिसके बाद इंटरनेशनल कोर्ट ने सजा पर रोक लगाते हुए एक बार फिर प्रवाभी समीक्षा और पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि भारतीय नौसेना के रिटायर्ड अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने 2016 में बलूचिस्तान से अगवा कर लिया था। भारत का दावा है कि कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना के रिटायर्ड अधिकारी हैं और बलूचिस्तान में एक बिजनेस डील के लिए गए हुए थे। यहीं से उनका अपहरण हुआ था और फिर उन्हें पाकिस्तान आर्मी के हवाले कर दिया गया था । सन् 2017 में एक सैन्य अदालत ने जासूसी और आतंकवाद के आरोप पर कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाई थी।

इसके बाद भारत में इंटरनेशनल कोर्ट का रुख किया था और पाकिस्तान द्वारा राजनीतिक पहुंच नहीं दिए जाने और मौत की सजा को चुनौती दी थी। तब से यह मामला अदालत में पड़ा है। इंटरनेशनल कोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी थी साथ ही उन्हें काउंसलर एक्सेस देने को भी कहा था।

मनुष्य को सबसे नजदीकी तारे तक पहुंचने के लिए सबसे तेज अंतरिक्ष यान को बनाने में अभी हजारों साल लगेंगे।

लखनऊ / दिल्ली । मनुष्य को सबसे नजदीकी तारे तक पहुंचने के लिए सबसे तेज अंतरिक्ष यान को बनाने में अभी हजारों साल लगेंगे। जनरल ऑफ द ऑप्टिकल सोसाइटी ऑफ अमेरिका बी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान टेक्नोलॉजी से बाहर की सोच ही हमारे स्पेस ट्रैवल के समय को कम कर सकती है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक जितना बड़ा यान होगा उसे गति देना उतना ही कठिन होगा। विशेष रूप में जब आप प्रकाश की गति के करीब पहुंचते हैं तो यह स्वयं के ईंधन को ले जाने वाले किसी भी अंतरिक्ष यान के लिए एक बड़ी समस्या बन सकता है।

हमारी पृथ्वी के सबसे नजदीक अगर कोई तारा है तो वह अल्फा सेंचुरी है। अल्फा सेंचुरी पृथ्वी से 4.37 प्रकाश वर्ष दूर है। अगर वर्तमान टेक्नोलॉजी की मदद से इंसान इस जगह तक जाने की कोशिश करें तो उसे कम से कम 6000 वर्ष लगेंगे।

ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में अप्लाइड मेट्रोलॉजी के पोस्ट डॉक्टोरल फैलोशिप चतुर बंडूतुंगा ने बताया की अल्फा सेंचुरी तक पहुंचने के लिए हमें आउट ऑफ द बॉक्स सोचना होगा। वर्तमान की युक्ति काम नहीं आएगी। हल्के वजन वाले अंतरिक्ष यान जा सकते हैं लेकिन उनमें बहुत ज्यादा ताकत की जरूरत होगी। दिक्कत यह है कि वह स्पेसक्राफ्ट अकेले इतनी लंबी यात्रा कर पाएगा या नहीं।

बीच में वैज्ञानिकों ने विचार किया धक्का मार कर किसी अंतरिक्ष यान को तेजी से किसी भी तरह पहुंचाया जा सकता है। लेकिन इससे खतरा है, क्योंकि लेजर की गर्मी और धक्के की वजह से यान कभी भी फट जाने की संभावना है।

हालांकि डॉ चतुर बंडूदुंगा ने बताया कि यह लेजर तकनीकी काम नहीं करेगी, क्योंकि इसमें धरती के वायुमंडल का काफी ज्यादा प्रभाव पड़ता है यह लेजर यान को अल्फख तक पहुंचाने से पहले ही कमजोर कर देगी।

डॉक्टर चतुर ने यह भी बताया कि टेलीस्कोप वायुमंडलीय बाधाओं को पार करने के लिए अडॉप्टिव ऑप्टिक्स नाम की प्रणाली का उपयोग करते हैं। अगर इसे पलट दिया जाए तो छोटा सा सेटेलाइट जो धरती की ओर करके वायुमंडल की बाधाओं का रियल टाइम नाप सकते हैं। इससे धरती पर मौजूद लेजर लाइट वायुमंडल के कमजोर हिस्से को चीरता हुआ स्पेसक्राफ्ट तक जा सकता है। 

इतने ताकतवर लेजर को 100 GW ऊर्जा की आवश्यकता होगी। जबकि पूरा संयुक्त राज्य अमेरिका एक समय में 450 GW बिजली का उपयोग करता है। डॉक्टर चतुर और उनके सहयोगी डॉ पॉल शिवली ने कहा कि इतनी ऊर्जा की जरूरत सिर्फ 10 मिनट के लिए पड़ेगी। अगर पूरी ताकत से 10 मिनट के लिए लेजर लाइट से यान को धक्का दिया जाए तो यान बहुत दूरी तक का सफर कर सकता है।

लेजर लाइट से बचने के लिए ऐसे मिरर की आवश्यकता होगी जो 99.99% गर्मी सोखले और सिर्फ ऊर्जा को यान तक पहुंचाए, ताकि यान तेज गति से उड़ सके। यदि लांच सिस्टम विकसित हो जाएगा तो अंतरिक्ष के किसी भी हिस्से में जल्द ही पहुंचा जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो पृथ्वी के समान ग्रहों को खोजना भी आसान होगा। 

उत्तर प्रदेश की राजनीति में उबाल , कांग्रेस के जितिन प्रसाद बीजेपी में शामिल

लखनऊ / दिल्ली । ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद बुधवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। इसको लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने ट्विटर के जरिए तंज कसा है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने ट्विटर पर लिखा है -“जितिन प्रसाद जी का कांग्रेस पार्टी छोड़ने के लिए धन्यवाद।” 

पार्टी ने उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता पर सवाल खड़ा किया है। पार्टी ने कहा है कि जितिन प्रसाद विचारहीन, सिद्धांतविहीन और सहूलियत की राजनीति करते हुए उन लोगों के साथ चले। जितिन यूपी में कोरोना वायरस के दौरान मिस मैनेजमेंट के जिम्मेदार हैं। 

बता दें कि दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जितिन प्रसाद को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इससे पहले जितिन प्रसाद ने गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात भी की थी। उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले या बड़ा सियासी उलटफेर माना जा रहा है।

भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा आज जितिन प्रसाद हमारे बीच में है। यह उत्तर प्रदेश के नेता है। बीजेपी की नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर हमारी पार्टी में आए हैं। यह कांग्रेस संगठन के कई पदों पर काम कर चुके हैं और मंत्री भी रहे हैं। जितिन प्रसाद ने बहुत छोटी आयु से उत्तर प्रदेश की सेवा में अपना पूरा जीवन झोंक दिया था। शाहजहांपुर से सांसद रहे जितिन प्रसाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में जो भूमिका निभाई, वह हम सब ने देखी है। om dette

वही जितेंद्र प्रसाद ने कहा कि मैंने 7-8 साल में अनुभव किया है असल में कोई राजनीतिक संस्थागत है, वह भारतीय जनता पार्टी है, बाकी दल तो व्यक्ति विशेष और क्षेत्र के हो गए है।

महाभारत की द्रोपदी के रूप में नजर आयेंगी रिया चक्रवर्ती

लखनऊ / दिल्ली / मुंबई। बॉलीवुड फिल्म अदाकारा और दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) के तारे गर्दिश से बाहर निकलने लगे हैं। हाल ही में अदाकारा फिल्म अभिनेत्री Rhea chakraborty को टाइम्स मोस्ट डिजायरेबल वुमेन 2020 की लिस्ट में पहला स्थान मिला है ।  

आखिरकार, पिछले साल वह जिस दौर से गुज़री, रिया चक्रवर्ती धीरे-धीरे और लगातार खुद को वापस उठा रही है और एक सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रही है जैसे उन्होंने इस बड़े तूफान के आने से पहले किया था. वह हर उस दरवाजे पर दस्तक दे रही हैं। 

जहां वह दस्तक दे सकती हैं और लोगों से काम मांग रही है जो उन्हें हर उस चीज से उबरने और जीवन में आगे बढ़ने में मदद करेगा. इस साल पिछले कुछ महीनों से एक्ट्रेस अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करती आ रही हैं. उन्होंने अपने आखिरी पोस्ट में लिखा था- ‘कैसे बड़ी पीड़ा से बड़ी ताकत मिलती है, उन्हें नेटिजंस से बहुत प्यार मिला।

अब सुनने में आ रहा है कि एक्ट्रेस के हाथों में एक दिलचस्प प्रोजेक्ट लगा है। जिसमें अदाकारा द्रौपदी के किरदार में नजर आ सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एक्ट्रेस इन दिनों फिल्मी दुनिया में वापसी के लिए जद्दोजहद कर रही है। उन्होंने फिर से खुद को move on कर लिया है वो इस दौरान कई फिल्म निर्माताओं से मिली है और काम की तलाश कर रही है। अब उनके हाथ एक ऐसा प्रोजेक्ट लगा है जिसमें महाभारत (Mahabharata) की कहानी को आज के समय के हिसाब से दिखाने की तैयारी है।

रिया ने तेलुगु फिल्म से 2012 में अपने कैरियर की शुरुआत की थी. हिन्दी फिल्मों में उसके खाते में सिर्फ कुछ ही फिल्में शामिल हैं. बैंक चोर उनकी पहली हिन्दी फिल्म थी. इसके बाद उसने हाफ गर्लफ्रेंड, “मेरे डैड की मारूति” और “जलेबी” में भी काम किया है। 

सुशांत मामले से बाहर आने के बाद रिया आजकल इंस्टाग्राम पर मोटीवेशनल कोट लिखती है. हाल ही में एक पोस्ट में उन्होंने लिखा था, दुख जब साथ में आती है तो इससे ताकत मिलती है इसके लिए आफको मुझपर भरोसा करना होगा.।आपको यह भी बताते चले कि रिया चक्रवर्ती को इस महाभारत की कहानी में द्रौपदी का रोल ऑफर किया गया है अभी वो इस पर विचार कर रही है।

वैसे तो समय-समय पर माहाभारत और रामायण को लेकर फिल्म प्रोजेक्ट्स की खबरे सामने आती रहीं है पर ये रोल रिया के लिए बड़ी गुड़ न्यूज है। सूत्रों के मुताबिक यह महाभारत बिल्कुल अलग और हट कर दिखाई जाएगी खबर है कि इस कहानी को मॉडर्न वर्ल्ड और आज के समाज में गढा जाएगा। 

डॉक्टर के चैंबर में नर्स के साथ बलात्कार

लखनऊ / दिल्ली । कहने को तो डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप होते है लेकिन ऐसी हैवानियत देख कर लोग डॉक्टर पर भी भरोसा करना छोड़ देंगे अभी बिहार रेप केस मामला सुलझा भी नहीं था कि एक और मामला जयपुर से आ गया । 

 
जयपुर के मैक्सिमा हॉस्पिटल में एक नर्स के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है. पीड़िता सुभाष नगर शॉपिंग सेंटर स्थित मैक्सिमा हॉस्पिटल में काम करती है. 6 जून की रात अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टर ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। 

इस घटना के बाद 7 जून को देर शाम पीड़िता ने अपने परिजनों के साथ जाकर शास्त्री नगर थाने में केस दर्ज कराया हालांकि जब तक पुलिस आरोपी को पकड़ने पहुंचती. इसके पहले ही अपराधी फरार हो गए। 

इस मामले में यह भी जानकारी मिली है कि देर रात करीब डेढ़- दो बजे अस्पताल का ही एक स्टाफ ड्यूटी करते हुए पहली मंजिल पर डॉक्टर के चैंबर में पहुंचा। तब वहां पीड़िता और आरोपी मुरारी को आपत्तिजनक हालत में देखा। उसने युवती को बदहवास देखकर माजरा भांप लिया। इधर पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि अस्पताल की पांचवी मंजिल पर घटना रात को ही मुरारी ने अपने साथी स्टाफ के साथ शराब पी थी।

पीड़िता झोटवाड़ा की रहने वाली है. वो पिछले डेढ़ महीने से मैक्सिमा हॉस्पिटल में जॉब कर रही थी. वह हॉस्पिटल में नर्सिंग स्टाफ थी. इसी हॉस्पिटल में आरोपी मुरारी भी पिछले करीब डेढ़ साल से जॉब कर रहा है. पीड़िता ने अपनी एफआईआर में कहा है कि मुरारी हॉस्पिटल में डॉक्टर है।

जबकि हॉस्पिटल प्रबंधन का कहना है कि मुरारी नर्सिंग सुपरवाइजर था. हॉस्पिटल में स्टाफ की ड्यूटी लगवाना और ज्यादातर प्रबंधन का काम मुरारी ही करता था. ऐसे में यह पता लगाना पुलिस के लिए अब भारी हो गया है कि आखिर मुरारी अस्पताल में करता क्या था? 

पीड़िता ने अपने बयान और एफआईआर में बताया है कि मुरारी हॉस्पिटल में ही डॉक्टर है। जबकि हॉस्पिटल प्रबंधन का कहना है कि मुरारी नर्सिंग सुपरवाइजर था। हॉस्पिटल में स्टाफ की ड्यूटी लगवाना और ज्यादातर प्रबंधन का काम मुरारी ही करता था। पुलिस का कहना है युवती के अनुसार 6 जून को रात 12 बजे वह डीलक्स वार्ड में ड्यूटी पर थी। तभी देर रात को मुरारी वहां आया। 

वह शराब के नशे में था। उसने पीड़िता को बहाना बनाकर वार्ड से बाहर बुलवाया। फिर उसे पहली मंजिल पर स्थित एक डॉक्टर के चैंबर में ले गया। जहां उसने जबरन नर्सिंगकर्मी युवती के साथ दुष्कर्म किया। युवती का यह भी आरोप है कि ड्यूटी के दौरान भी आरोपी मुरारी उसे परेशान करता था बताया जा रहा है कि रेप करने के बाद मुरारी ने उसे काफी डराया धमकाया भी था और उसके बाद वहां से फरार हो गया फिलहाल पुलिस उसकी तलाश कर रही है। 

मांजरेकर बोले, मुझसे उम्मीद करते हो कि मैं तुम्हारे खिलाड़ियों की पूजा करुं? मैं एक एनालिस्ट हूँ कोई फैन नहीं

लखनऊ / दिल्ली । पूर्व भारतीय बल्लेबाज और मौजूदा कमेंटेटर संजय मांजरेकर टीम इंडिया के खिलाड़ियों पर बयान देकर अक्सर सुर्खियों में बने रहते हैं। इन दिनों वो गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन पर तंज कसने को लेकर सुर्खियों में थे। इसी बीच उनकी एक चैट लीक हो गई है जो कि सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है।

दरअसल मांजरेकर ने हाल ही में ऑल टाइम बेस्ट प्लेयर्स की लिस्ट बनाई थी, जिसमें उन्होंने रविचंद्रन अश्विन को शामिल नहीं किया था। जिसको लेकर यह लिस्ट आजकल चर्चा में है।  इस बीच उनकी एक चैट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस चैट में उन्होंने टीम इंडिया के स्टार ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा का मजाक उड़ाया है।

सूर्य नारायण नाम के एक यूजर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इस चैट को पोस्ट किया है। दरअसल सूर्य नारायण ने रविचंद्रन अश्विन और मांजरेकर के बीच चल रहे तंज के बारे में ट्वीट कर लिखा था कि संजय मांजरेकर सिर्फ बकवास बातों के लिए सुर्खियों में रहना चाहते हैं। साथ ही यह भी लिखा कि संजय मांजरेकर अश्विन के 10% भी नहीं है और एक बेकार खिलाड़ी हैं। 

यूजर का दावा है कि मांजरेकर ने उसे पर्सनल मैसेज करके लिखा कि तुम्हें भी मुझे कुछ कहने का हक नहीं क्योंकि तुम मेरे 1% भी नहीं हो। यूजर ने जवाब में ऑल राउंडर रविंद्र जडेजा का उदाहरण देते हुए उन्हें उस दिन की याद दिलाई जब रविंद्र जडेजा ने उन्हें लताड़ लगाई थी। 

इस पर मांजरेकर ने जवाब में लिखा की मुझसे उम्मीद करते हो कि मैं तुम्हारी तरह खिलाड़ियों की पूजा करूं, मैं एक एनालिस्ट्स हूं कोई फैन नहीं। उन्होंने साथ ही यह भी लिखा कि रविंद्र जडेजा को इंग्लिश नहीं आती और उन्हें वर्बल डायरिया का मतलब भी किसी ने बताया ही होगा। इसके बाद यूजर ने यह मैसेज का स्क्रीनशॉट लेकर ट्वीट कर दिया।

दो मासूम बच्चों समेत पति-पत्नी ने आत्महत्या की

लखनऊ / शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में बीते दिनों एक ही परिवार के 4 लोगों ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली परिवार के चार सदस्यों के शव फांसी पर लटके हुए मिले मरने वालों में एक 12 साल का बेटा और 6 साल की बच्ची भी शामिल है।

पुलिस का कहना है कि आत्महत्या के पीछे आर्थिक तंगी और कर्ज का मामला सामने आ रहा पुलिस ने कहा कि कमरे से सुसाइड नोट भी बरामद हुआ हैं  पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरु कर दी हैं घटना कोतवाली क्षेत्र कटरा इलाके की है।.

बताया जा रहा है कि अखिलेश गुप्ता मेडिकल संबंधित काम करते थे  काम के सिलसिले में अखिलेश रोजाना बाहर जाते थे सोमवार को मोहल्ले के लोगों ने जब किसी भी सदस्य को निकलते नही देखा तो उन्होने अखिलेश के घर बहार जाकर आवाज लगाई जब कोई प्रतिक्रिया नही मिली तो कुछ लोगों ने घर के अंदर जाकर देखा फिर अखिलेश के परिचितो ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। 

घर की छत पर परिवार के मुखिया अखिलेश गुप्ता मकान के जाल से लटके हुए मिले. उनकी पत्नी रेशु ग्रिल से फांसी पर लटकी हुई मिलीं. इसके अलावा 12 साल का बेटा शिवांक खिड़की की ग्रिल से लटका हुआ मिला, वहीं 6 साल की बच्ची अर्चिता भी खिड़की की ग्रिल से लटकी हुई मिली।

बताया जा रहा की यह प्री प्लान था क्योंकि सभी के सुसाइड का एक जैसा होना ये दर्शाता है की किसी प्लान के तहत घटना को अंजाम दिया गया है वही फोरेंसिक टीम मामले की जांच में कर रही हैं पोस्टमॉर्टम के बाद मौतों की असल वजह सामने आएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी । फिलहाल पुलिस ने सभी शवों को जांच के लिए भेज दिया है और मामले की जॉच शुरु कर दी गई है। 

क्या लॉकडाउन की वजह से बेरोजगारी बढ़ी और उसकी वजह से अपराध?

लखनऊ / दिल्ली । पिछले साल मार्च में लॉकडाउन लगा था तो आपराधिक मामलों में गिरावट आई थी, लेकिन इस बार माना जा रहा कि पंचायत चुनाव और पिछले लॉकडाउन के चलते बढ़ी बेरोजगारी से लूट और डकैती की वारदात में इजाफा हुआ है। 

लॉकडाउन में पिछले साल के मुकाबले इस साल अपराध के आंकड़ों पर नजर डालें तो दूसरी लहर में 1 मई से  फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में 63.64 फीसदी का इजाफ़ हुहुआ वहीं लॉकडाउन के दौरान रेप के मामलों में 9.76% की वृद्धि दर्ज की गई। 

कोरोना की पहले लहर में जब पिछले साल लॉकडाउन लगा था तो अपराध के मामले में कमी आई थी ,परंतु दूसरी लहर के कहर के साथ ही कुछ आपराधिक मामलों रेप , अपहरण, डकैती, लूट में इजाफा हुआ है।

माना यह जा रहा है कि कोरोना जैसी महमारी के चलते लॉकडाउन लगने के कारण बढ़ी बेरोजगारी के बाद ही रेप, डकैती जैसे मामलों में इज़ाफा हुआ है।

हालांकि इस लॉकडाउन के दौरान हत्या, बलवा, गृहभेदन, दहेज मृत्यु के मामलों में कमी आई है. जबकि तीन साल के दौरान प्रदेश में रोड होल्ड अप की एक भी वारदात नहीं दर्ज की गई है. एक जनवरी से 15 मई तक की अवधि के दौरान वर्ष 2019 में 1,19,029 मुकदमे, वर्ष 2020 में 1,20,492 मुकदमे और वर्ष 2021 में 1,18,135 मुकदमे दर्ज हुए हैं। 

ISBS से AIR का सफर… लियोनल फिल्डन ने वायसराय से कहा, इंडियंस बहुत भद्दे तरीके से ब्रॉडकास्टिंग बोलते हैं इसीलिए इसका नाम कुछ आसान होना चाहिए

लखनऊ  / दिल्ली । 8 जून का ऑल इंडिया रेडियो के इतिहास में  बड़ा महत्व है 8 जून  1936 को भारत मे सरकारी प्रसारण व्यवस्था यानी भारत के लोक प्रसारक का नाम ऑल इंडिया रेडियो दिया गया। 

इस नाम के नामकरण की कहानी बहुत रोचक है , इस विषय पर जानकारी लेने के लिए हमारी संवाददाता मुस्कान ने आकाशवाणी के लखनऊ केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी एवं एफ एम रेनबो इंचार्ज अवधेश प्रताप सिंह से बात की, 

अवधेश प्रताप सिंह, कार्यक्रम अधिशासी, आल इंडिया रेडियो, लखनऊ

मुस्कान : सर सबसे पहले तो आल इंडिया रेडियो के नामकरण की बधाई, ये तो हम जानते हैं कि ISBS से AIR की कहानी बड़ी दिलचस्प है लेकिन कितनी रोचक है ये हमारे दर्शक जरूर जानना चाहते हैं। 

अवधेश प्रताप सिंह : बहुत शुक्रिया मुस्कान, आपको भी बधाई और शुभकामनाएं । दरअसल भारत के लोक प्रसारक आकाशवाणी यानी आल इंडिया रेडियो के सफर की कहानी वाकई दिलचस्प है। 30 अगस्त 1935 को भारत के प्रथम रेडियो नियंत्रक Lionel Fielden ने लंदन से भारत आकर  अपना कार्यभार संभाला। उस समय भारत मे प्रसारण व्यवस्था का नाम इंडियन स्टेट ब्राडकास्टिंग सर्विस था। 1 जनवरी 1936 से इस प्रसारण सेवा के दिल्ली केंद्र ने अपना प्रसारण शुरू किया। 

Fielden ने अपनी आत्मकथा में लिखा मुझे Indian State Broadcasting Service (ISBS) नाम पसंद नही था। इसकी वजह ये थी कि इसमें विस्तार नही था सुर लय ताल नहीं था विशुद्ध सरकारी सा लगता था। मैं यह भी जानता था कि All India Radio को सहजता से स्वीकार नही किया जायेगा। 

लेकिन मुझे इसके आद्याक्षर AIR अच्छे लगे। मैंने इसका मोनोग्राम बनाया जिसमें भारत के मानचित्र पर AIR अंकित किया। मैं जानता था कि सचिवालय से यह बिंदु विरोध कर दिया जायेगा इसलिए मैंने वायसराय के एक समारोह में लार्ड लिंलिथगो से किनारे ले जाकर बात की। 

सर, मैं एक बड़ी उलझन में हूँ क्योंकि मुझे ISBS नाम भद्दा सा लग रहा है, आप सुझाएँ क्या होना चाहिए? मैंने कहा ब्राडकास्टिंग शब्द भारतीय लोग बहुत बुरे ढंग से कहते हैं। मैंने कहा कि 1935 के कानून में Indian State शब्द भी है। तब उन्होंने कहा All India? मैंने कहा आगे क्या? ब्राडकास्टिंग….? नही, कुछ सोचने के बाद बोले Radio. 

मैने सोचा मेरे मन की मुराद पूरी हो गई। वायसराय ने कहा मैंने एक नए नाम की खोज कर ली- All Inddia Radio यह नाम 8 जून 1936 को  रेडियो पर पहली बार बोला गया था। इस मायने में यह आल इंडिया रेडियो का नामकरण दिवस भी है। 

पहलवान के पीछे पड़े गैंगस्टर्स, सुशील कुमार सीसीटीवी की निगरानी में

लखनऊ / दिल्ली । पहलवान सागर धनखड़ हत्याकांड में गिरफ्तार ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार दिल्ली की मंडोली जेल में बन्द हैं। सुशील कुमार की सुरक्षा को लेकर तिहाड़ जेल प्रशासन हरकत में आया है। मंडोली के जेल में ही बंद सुशील के विरोध गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को मंडोली जेल से तिहाड़ जेल के नंबर एक के हाई सुरक्षा वार्ड में शिफ्ट किया गया है। जेल प्रशासन ने सुशील कुमार के एक अन्य विरोधी गैंगस्टर संपत नेहरा, जो फिलहाल मंडोली जेल नंबर 15 के वार्ड नंबर 4 में बंद है, को भी सोमवार को तिहाड़ जेल में शिफ्ट किया।

तिहाड़ जेल प्रशासन ने सुशील कुमार की सुरक्षा को देखते हुए यह निर्णय लिया है कि सुशील कुमार 24 घंटे सीसीटीवी कैमरा की निगरानी में रहेगा, साथ ही पैरामिलिट्री फोर्स के जवान भी 24 घंटे सुशील के वार्ड के पास तैनात रहेंगे। 

दरअसल मकोका में बंद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और संपत नेहरा को हाल ही में मंडोली जेल के नंबर 15 के वार्ड नंबर 4 में शिफ्ट किया गया था। इसी मंडोली जेल के नंबर 15 के सेल नंबर 1 में सुशील कुमार बंद है। 

बता दें कि सुशील कुमार ने सागर धनखड़ को पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया था। जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हो गई थी। सागर धनखड़ की मौत के बाद लॉरेंस बिश्नोई ,संपन्न नेहरा ,काला जठेरी जैसे खतरनाक गैंगस्टर सुशील कुमार की जान के पीछे पड़े हैं।

मै कानून का पालन करने वाला व्यक्ति हूँ कहीं नहीं भागूंगा : मेहुल चोकसी

लखनऊ / दिल्ली । भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी ने डोमिनिका हाई कोर्ट के समक्ष एक हलफनामा दाखिल करते हुए दावा किया है कि वह कानून का पालन करने वाला नागरिक है और वह कहीं नहीं भागेगा। उसने केवल अमेरिका में मेडिकल ट्रीटमेंट लेने के लिए भारत छोड़ा था।

चोकसी ने यह भी कहा कि उसने भारतीय अधिकारियों को इंटरव्यू के लिए आमंत्रित भी किया था, और उसके खिलाफ चल रही जांच से जुड़े किसी भी तरह के प्रश्न पूछने के लिए कहा था।  मेहुल चोकसी का यह बयान पहली बार सामने नहीं आया है। पंजाब नेशनल बैंक के घोटाले में आरोपी ने साल 2019 में भी मुंबई हाईकोर्ट में एक हलफनामे में ऐसा ही बयान दिया था।

इस बीच चोकसी अभी भी अस्पताल में है। अदालत से चुप रहने का आदेश भी लागू है। चोकसी को अब 8 जून को अदालत में पेश किया जाएगा। उसे राजधानी रोमियो में उनके मुख्य अस्पताल में रिमांड पर लिया जाएगा । 

दूसरी ओर चोकसी के वकीलों ने डोमिनिका उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई बृहस्पतिवार को स्थगित कर दी गई। चोकसी 23 मई को रहस्यमय परिस्थितियों में एंटीगुआ एवं बारबुदा में लापता हो गया था। बाद में उसे डोमिनिका में अवैध प्रवेश करने पर पकड़ा गया था। 

दूसरी तरफ भगोड़े मेहुल चौकसी को भारत लाने का कानूनी दंगल लड़ने के लिए भारत की तरफ से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वकीलों में से एक हरीश साल्वे अदालती अखाड़े में उतरने जा रहे हैं। हरीश साल्वे सम्भवतः परसों डोमिनिका रवाना हो जाएंगे। सबसे बड़ी बात यह कि कुलभूषण जाधव केस की भांति यह केस भी हरीश साल्वे पैसों के लिए नहीं देश के लिये लड़ने जा रहे हैं।

मॉडल ने कहा, काम दिलाने के बहाने मेरे साथ बलात्कार किया जाता रहा

लखनऊ /  दिल्ली / मुंबई ।  मुंबई की एक मॉडल ने अभिनेता जैकी भगनानी सहित 9 लोगों पर शारीरिक शोषण का आरोप लगाया है। फोटोग्राफर जूलियन, जैकी भगनानी समेत कुल नौ लोगों के खिलाफ बांद्रा पुलिस स्टेशन में छेड़छाड़, रेप और यौन शोषण का केस दर्ज कराया है। 

 

मॉडल की उम्र 28 वर्ष बताई जा रही है उसका आरोप है कि काम दिलाने के बहाने उसका शारीरिक शोषण किया गया  उसने कहा कि कॉलस्टन युलियन ने मॉडलिंग में बड़ा चांस दिलाने के नाम पर साल 2014 से 2018 के बीच पर उसके साथ कई बार रेप किया। 

मॉडल का आरोप है कि एक्टर जैकी भगवानी ने उसके साथ बांद्रा में, निखिल कामत ने सैंटाक्रुज के 1 फाइव स्टार होटल मे, शील गुप्ता नाम के एक शख्स ने साल 2015 में अंधेरी एक इमारत में उसके साथ छेड़छाड़ किया। इसके साथ ही मॉडल का आरोप है कि अजीत ठाकुर ने साल 2018 में उसके साथ विलेपार्ले की एक बिल्डिंग में रेप किया था।

मॉडल की शिकायत के बाद सभी आरोपियों पर आईपीसी धारा 378, 354, 356 और 34 के तहत केस दर्ज किया है।इस मामले में फोटोग्राफर कॉलस्टन जूलियन के अलावा अभिनेता जैकी भगवानी और एक एंटरटेनमेंट कंपनी के संस्थापक अनिबर्न का नाम भी आरोपी के तौर पर सामने आया है।

क्या यूपी भाजपा में तूफान उठने के पहले की शांति है?

लखनऊ / दिल्ली । बीते 5 जून को सीएम योगी का जन्‍मदिन था राजनीति से लेकर लगभग हर क्षेत्र की हस्‍तियों ने उन्‍हें जन्‍मदिन की मुबारकबाद दी। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी  ने सीएम आदित्यनाथ योगी को बर्थडे विश नहीं किया।

क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच सब ठीक है पूरा दिन निकल गया, लेकिन पीएम मोदी ने ट्विटर पर उन्हें विश नहीं किया। सिर्फ पीएम मोदी ही नहीं उनके साथ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से बधाई ना दिए जाने को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम हो रहा है इसी के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के कयास लगने शुरू हो गए।

लोग अपने-अपने तरीके से इसका अलग-अलग अर्थ निकालने लगे। ट्विटर के लोग इस बात से अचंभित थे कि पीएम मोदी जो न केवल भारत में नेताओं को बल्कि अपने विदेशी समकक्षों को बधाई संदेश देने से नहीं चूकते, उन्होंने इस बार योगी आदित्यनाथ को बधाई क्यों नहीं दी। जबकि कल ही मोदी जी ने ट्विटर पर 6 ट्वीट किए वहीं अमित शाह ने 3 और जेपी नड्डा ने 12 ट्वीट किए लेकिन उसमें बधाई देने का कहीं भी जिक्र नहीं था।  

जन्मदिन की शुभकामनाएं’ न देने से उन अफवाहों को भी हवा मिली कि योगी आदित्यनाथ और पार्टी  हाई कमान के बीच तनाव है। हाल ही में ये काफी चर्चा का विषय रहा। राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने भी लखनऊ में मंत्रियों और पार्टी नेताओं के साथ योगी सरकार पर प्रतिक्रिया लेने और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राज्य इकाई की तैयारियों का आकलन करने के लिए कई बैठकें कीं।

इस दौरान उन्होंने प्रदेश सरकार के दोनों उपमुख्यमंत्रियों और तकरीबन डेढ़ दर्जन मंत्रियों से अलग-अलग मिलकर फीडबैक लिया है। तीन दिन तक महामंथन चला। इस फीडबैक का परिणाम क्या होगा इसके लिए लोगों की निगाहें दिल्ली पर टिकी हैं। 

पीएम के सीएम को ट्वीट कर बधाई न देने के बाद सियासी गलियारों में अटकलें तेज हो गईं कि आखिर मोदी ने योगी को टि्वटर पर बधाई संदेश क्यों नहीं दिया? क्या यूपी में सब ठीक है? टि्वटर पर भी लोगों के बीच इस तरह की चर्चा देखने को मिली। 

हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में सूत्रों के हवाले से कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने बताया कि पीएम ने शनिवार को सीएम योगी से फोन पर बात की थी और उसी दौरान उन्हें जन्मदिन का बधाई दी। सूत्र ने आगे बताया- कोरोना की दूसरी लहर के दौरान पीएम ने किसी और को टि्वटर पर जन्मदिन की बधाई नहीं दी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्‍यनाथ के 50वें जन्मदिन पर राष्ट्रपति समेत कई प्रमुख नेताओं ने बधाई दी। गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ अपना जन्मदिन नहीं मनाते हैं।

पेड़ पूजने को पाखंड बोलते हो! अरे मूर्खों, ये पाखंड नहीं प्रेम है क्योंकि जब पेड़ बचेंगे तभी प्राण बचेंगे

लखनऊ । हर परंपरा को पाखंड बोलने की हमारी आदत हो गई है पेड़ की पूजा को हम पाखंड बोल देते हैं जबकि ये पाखंड नहीं बल्कि मानव जाति से प्रेम की पहचान है ताकि पेड़ संरक्षित रहें उन पर कुल्हाड़ी ना चले इसलिए उसे धार्मिक कर्म कांड से जोड़ दिया गया है। क्या ये जरूरी नहीं कि भय-भूख, बेकरारी-बीमारी, शुगर-ब्लड प्रेशर, लंग्स-लीवर और किडनी एवं कोरोना  की समस्या से जूझ रही दुनिया के लिए अपनी परंपराओं का निर्वहन करते हुए पेड़ प्रकृति और पर्यावरण से प्रेम किया जाये । 
 
 
 
हमारी संस्कृति में प्रकृति एवं पर्यावरण को पूजने की परंपरा रही है लेकिन प्रदूषण का बढ़ता स्तर महामारी का खतरा खान पान में मिलावट बाढ़ सूखा और लोगों की घटती प्रतिरोधक क्षमता ने हमें पर्यावरण के प्रति सजग रहने और पेड़ पौधों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए सीख दी है। ऐसे में तीज त्योहारों पर पेड़ पौधों की पूजा का खास महत्व स्वाभाविक ही है। पूजा के रूप में ही सही लेकिन पेड़ों को सफेद या लाल धागे से घेर कर बांधने की प्रक्रिया पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने का संदेश देता है। 
 
 
मानव के प्रकृति को बचाये रखने के लिए प्रकृति का संरक्षण जरूरी हो गया है क्योंकि मानव के सुरक्षित रखने के लिए पर्यावरण का सुरक्षित रहना जरूरी है। हमारे देश में प्राचीन काल से ही धर्म और प्रकृत्ति का अंतर्संबंधों देखा गया है। भारतीय संस्कृति में वट वृक्ष, पीपल, आंवला, बेल, कदम, पलाश, नीम और तुलसी को पवित्र मान कर इनकी पूजा की परंपरा रही है यही नहीं हर घर के आंगन में तुलसी का होना स्त्री सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। 
 
हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है इस दिन विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में या बौद्धिक सेमिनारों में पर्यावरण संरक्षण पर कुछ विचार विमर्श एवं सलाह सुझाव दे कर अपने उत्तरदायित्वों की इतिश्री कर ली जाती है लेकिन पिछले दो सालों से कोविड प्रोटोकोल की वजह से सेमिनारों की जगह वेबीनारों ने ले ली है। क्योंकि दो गज की दूरी और मास्क है जरूरी, वाला नियम भी तो मानना है लेकिन इन विषम परिस्थितियों में भी न्यूज डॉन की रिपोर्टर मुस्कान ने हार नहीं मानी और निकल पड़ीं पर्यावरण को बेहतर बनाने मे देश के राष्ट्रीय पेड़ बरगद की पड़ताल करने। 
 
बरगद के पेड़ के बारे में तो आप जानते ही होंगे इसका वैज्ञानिक नाम फाइकस बेंगालेंसिस Ficus Benghalensis है ये पेड़ हिन्दू धर्म में हमेशा से पूजनीय रहा है तो दूसरी ओर इसको हमारे राष्ट्रीय वृक्ष के रूप में भी मान्यता मिली हुई है इसके साथ ही ये भारत के इतिहास और लोक कथाओं का हिस्सा भी रहा है। 
 
 
लेकिन इसकी ख़ास बात ये भी है कि ये पेड़ कई सारे औषधीय गुणों से भरपूर है इसमें मौजूद तत्वों की बात करें तो इसमें एंथोसाइनिडिन, कीटोंस, फिनोल, टैनिन्स, सैपोनिंस, स्टेरोल्स और फ्लेवोनॉयड जैसे तत्व पाए जाते हैं. विशेषकर बरगद की पत्तियों में जो पोषक तत्व मौजूद रहते हैं उनमें प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और फास्फोरस जैसे तत्व शामिल हैं. आइए जानते हैं ये पेड़ किस तरह से सेहत को फायदे पहुंचाता है।
 
आयुर्वेद में बरगद को अत्यंत लाभकारी माना गया है। इसके पंचांग (जड़, तना, पत्ते, फूल एवं फल) चिकित्सकीय उपचार में काम आते हैं। ये फोड़े-फुंसी, दर्द-निवारण, मधुमेह, डायरिया, यौन एवं चर्म रोगों में विशेष लाभदायक बताए गए हैं। वटवृक्ष वातावरण को शीतलता एवं शुद्धता प्रदान करता है। 
 
 
बरगद का पेड़ दांतों में सड़न और मसूड़ों में सूजन की समस्या को कम करने में मदद करता है. पेड़ की जड़ को चबाकर मुलायम करने के बाद इसको मंजन या दातून की तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है. पेड़ में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं जो दांतों और मसूड़ों की दिक्कत को कम करने में सहायता करते हैं।
 
 
कई बार स्किन पर फोड़े-फुंसी और दाने निकलने लगते हैं. इसको दूर करने के लिए बरगद की जड़ को इस्तेमाल में लाया जा सकता है।इसके लिए आप इसकी जड़ को पीसकर इसका लेप बनाकर त्वचा पर लगा सकते हैं. पेड़ में मौजूद एंटी-माइक्रोबियल तत्व बैक्टीरिया को नष्ट करने में मदद करते हैं और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को रोकने में सहायता करते हैं। 
 
 
जोड़ों का दर्द दूर करने में सहायक बरगद का पेड़ जोड़ों के दर्द की समस्या को दूर करने में भी सहायता करता है. इस तकलीफ से राहत पाने के लिए बरगद के पेड़ की पत्तियों का अर्क निकाल कर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. इस अर्क को दर्द वाली जगह पर लगाकर कुछ देर हल्के हाथों से मालिश करने से राहत मिलती है इसमें मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को कम करने में मदद करते हैं और दर्द से राहत देते हैं। 
 
बरगद को भारत का राष्ट्रीय पेड़ माना जाता है. इसका निरंतर विस्तार को शाश्वत जीवन का प्रतीक माना जाता है, ख़ास तौर पर हिंदू धर्म में.समय के साथ यह पेड़ उर्वरता, जीवन, और पुनरुत्थान का विश्व-प्रसिद्ध प्रतीक बन गया है पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में उगने वाले बरगद की शाखाओं पर हिंदू, बौद्ध और अन्य धर्मों के लोग अक्सर रिबन बांधते हैं.इसकी जड़ों के पास देवी-देवताओं की मूर्तियां रखकर छोटा मंदिर बना दिया जाता है.भागवद्गीता में बरगद की जड़ों के ऊपर की ओर और शाखाओं के नीचे बढ़ने का जिक्र है। 
 

बलात्कारी भी पुलिस में भर्ती हो सकता है… जिस पर सुरक्षा की जिम्मेदारी थी उसी ने नाबालिग लड़की का बलात्कार किया

लखनऊ  /  पटना  । बिहार (Bihar) में एक आईपीएस अफसर (IPS officer) पर 4 साल पहले एक नाबालिग लड़की से रेप के आरोप में ( allegedly raping a minor girl) केस दर्ज किया गया है. यह मामला तब का है जब 4 साल पहले कमलाकांत प्रसाद डिप्‍टी एसपी के पद पर तैनात थे। 

लड़की ने पटना पहुंचकर आपबीती DSP की पत्नी आनंद तनुजा को बताई तो उन्होंने FIR दर्ज कराई। तनुजा ने कहा कि जब भी उन्होंने आवाज उठाने की कोशिश की है, उनके पति और ससुराल वालों ने चुप करा दिया है तनुजा कुछ समय पहले DSP प्रसाद से अलग हो चुकी हैं।

लड़की 18 साल की हो चुकी है और अब शादीशुदा है उसके भाई ने बताया , DSP ने मेरी बहन के साथ जो किया, उसकी सजा मिलनी चाहिये। स्टेशन इंचार्ज रवि रंजना ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, हमने DSP प्रसाद के खिलाफ CID (कमजोर वर्गों) के निर्देश पर रेप केस दर्ज किया है. पीड़ित और उसके भाई का बयान रिकॉर्ड किया गया है। 

बताया जा रहा है कि पीड़िता घटना के वक़्त नाबालिग थी. पॉक्सो के विशेष लोक अभियोजक कैसर सरफुद्दीन ने बताया कि उनके विरूद्ध 2017 में दशहरा के समय इमामगंज थाना क्षेत्र के एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म का आरोप है। इस मामले को लेकर मंगलवार को पॉक्सो के विशेष जज नीरज कुमार के निर्देश पर पीड़िता का बयान दर्ज किया गया। 

न्यायिक दंडाधिकारी स्वाति सिंह के न्यायालय में पुलिस ने पीड़िता को प्रस्तुत किया जहां उसका बयान दर्ज किया गया घटना के समय वह पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय गया में कार्यरत थे  उनको मानव तस्करी के रोकने का जिम्मा भी दिया गया था. पीड़िता उनके द्वारा डराने धमकाने एवं लोकलाज को लेकर घटना के संबंध में परिवार को नहीं बताई थी। 

वैक्सीनेशन के बावजूद कोरोना का संक्रमण पाया गया लेकिन किसी की मौत नहीं हुई : AIIMS

लखनऊ / दिल्ली । कोविड 19 महामारी पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की पहली स्टडी रिलीज कर दी गई है, कोरोना वैक्सीन पर दुनिया भर में स्टडी की जा रही  आल इंडिया इंंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की भारत में जिनोम सीक्वेंस पर की गई पहली स्टोरी के नतीजे सामने आ गए हैैं। 

यह स्टडी अप्रैल-मई 2021 में कंडक्ट की गई थी इस स्टडी में ये पता लगाया गया है कि टीकाकरण के बावजूद जिनको करोना संक्रमण हुआ  क्या उनमें एंटी बॉॉडी मौजूद थी और टीकाकरण के बावजूद इनमें से किसी की कोविड  से मौत  हुई? 

रिपोर्ट में बताया गया है कि सभी मरीजों की एंटीबॉडी चेक की गई तो पाया गया कि सब में एंटी बॉडी मौजूद थी इसके बावजूद उन्हें संक्रमित होना पड़ा लेकिन किसी की भी कोरोना संक्रमण से मौत नहीं हुई इस मायने में एम्स की नई रिपोर्ट कई मामलों में अनोखी है।

रिपोर्ट में मे भी खुलासा हुुुआ कि 5 से 7 दिनों तक लगातार बुखार रहने के बावजूद वैक्सीन लेने वाले व्यक्ति ज्यादा गंभीर रूप से संक्रमित नहीं पाए गए, स्टडी में मरीजों की उम्र 21 साल सेे 37 साल के बीच  थी, सैंपल के तौर पर 41 पुरुष और 22 महिलाएं ली गई थी इनमें से किसी  को कोई बीमारी नहीं थी।

संक्रमण के मामलों में से 10 मरीजों में इम्यूनोग्लोबुलिन एंटीबॉडी थी, जिस का मूल्यांकन केमिलुमिनसेंट इम्यूनोसे द्वारा किया गया था वही, इनमें से 6 मरीजों के महीने पहले IgG एंटीबॉडी थी जबकि 4 लोगों में संक्रमण के बाद एंटीबॉडी पाई गई।

इधर मोदी उधर ममता… टीका मिले ना मिले लेकिन फोटो हमारी ही होगी

लखनऊ / कोलकाता  / दिल्ली । पश्चिम बंगाल सरकार ने एक अजीब ओ गरीब फैसला लेते हुए ये कहा है कि पश्चिम बंगाल में करोना वैक्सीन सर्टिफिकेट पर पीएम मोदी की तस्वीर की जगह सीएम ममता बनर्जी की तस्वीर होगी। माना जा रहा है कि ममता बनर्जी सरकार के इस निर्णय से केंद्र औ राज्य के बीच रार ज्यादा होगीं। 

आपको बताते चलें कि विधानसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी और भारतीय जनता पार्टी में टकराव बढ़ा है हाल ही में मुख्य सचिव के मसले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच जम कर आरोप प्रत्यारोप लगाये गये थे।

अब ममता सरकार ने कोरोना सर्टिफिकेट को लेकर एक बड़ा फैसला किया है राज्य में जारी किए जा रहे कोरोना वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटा कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीर जारी की जायेगी। 

इस फैसले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के बीच टकराव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। बीजेपी ने इस पर एतराज जताया है, ममता सरकार ने कहा कि कोरोना वायरस के तीसरे चरण में लोगों को वैक्सीन लगने के बाद ममता बनर्जी की तस्वीर सर्टिफिकेट पर नजर आएगी। 

कोरोना वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट को लेकर बंगाल विधानसभा चुनाव में काफी हंगामा हुआ था वही कोरोना सर्टिफिकेट पर पीएम मोदी की तस्वीर को लेकर प्रधानमंत्री और भाजपा दोनों की आलोचना की गई थी । 

आपको बताते चलें कि तीसरे चरण में 18 से 45 साल के उम्र वाले लोगों को वैक्सीनेशन कराने के बाद ममता बनर्जी की तस्वीर लगी हुई सर्टिफिकेट दी जाायेगी ये वैक्सीन निःःशुल्क होगी। 

मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा कि प्रत्येक वैक्सीन के लिए 600 से 1200 रुपए खर्च हो रहे हैं, 1.4 करोड़ लोगों को वैक्सीन दिया गया है, वही सी ममता बनर्जी के विभिन्न अौघोगिक चेंबरो से आग्रह किया था कि वो राज्य सरकार के आपदा विभाग को ज्यादा से ज्यादा फंड दें जिससे राज्य सरकार राज्य को  निःशुल्क वैक्सीन देने में आसानी हो सके। 

यूपी भाजपा… रार और तकरार के बाद थोड़ा सा चैन ओ करार!


लखनऊ / दिल्ली । उत्तर प्रदेश में अगले साल विधान सभा चुनाव होने वाला हैं, जिसे लेकर प्रदेश की प्रत्येक पार्टी में हलचल तेज हो गई है। खबर है कि भारतीय जनता पार्टी सरकार और संगठन में  रस्साकशी बढ़ गई थीं जिसकी गूंज लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सुनाई देने लगी थी जनता के बीच खराब होती छवि को थामने के लिए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष ने पिछले दिनों लखनऊ में तीन दिनों तक मीटिंग की थी । 

अब तक कयास लगाए जा रहे थे कि शीर्ष नेतृत्व संगठन  में बड़ा बदलाव करने वाला है। परन्तु तीन दिनों तक चली मीटिंग के बाद यह खबर आई है कि पार्टी में कोई खास बदलाव नहीं किए जाएंगे। पार्टी अगले विधान सभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के नेतृत्व में ही विधानसभा चुनाव लड़ेगी।


इसके साथ ही माना जा रहा था कि एके शर्मा को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। कहा जा रहा था कि बीजेपी पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष को बदला जा सकता है। हालांकि अब इस अफवाह पर पूरी तरह पूर्ण विराम लग गया है। चुनाव से पहले बीजेपी पूरी तरह से अपनी कमर कस लेना चाहती है, किसी भी तरह से पार्टी कोई लापरवाही नहीं बरतना चाहती। विधानसभा चुनाव से पहले सरकार और संगठन लगातार समन्वय बैठक करेंगी। 


संगठन की तरफ से बीएल संतोष को उत्तर प्रदेश में समीक्षा के लिए भेजा गया था, जहां पर उन्होनें तीन दिनों तक पार्टी के कई नेताओं के साथ लगातार बैठक की। इसके साथ ही पार्टी के कई बड़े नेताओं से भी मुलाकात की। इस दौरान कयास लगाया जा रहा था कि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या को स्वतंत्र देव सिंह की जगह पर प्रदेश अध्यक्ष की जगह पर बैठाया जा सकता है।


तीन दिनों तक चली बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय एके शर्मा रहे, जिनको पार्टी में एक उच्च स्थान दिया जा सकता है। उन्हें प्रदेश मंत्रीमंडल में कोई अहम भूमिका दी जाएगी। चर्चा है कि उन्हें ब्यूरोक्रेसी की जिम्मेदारी जा सकती है। 

जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और एके शर्मा के बीच कुछ खास अच्छा रिश्ता नहीं है। एके शर्मा की पार्टी में आने से योगी आदित्यनाथ नाराज हैं। एके शर्मा के पार्टी में आने से लोगों के बीच पार्टी में दो पावर सेंटर होने के संकेत जाएंगे, जो पार्टी के लिए सही नहीं है। 

कमर दर्द, सर्वाइकल और गॉव की चारपाई

लखनऊ / गाजीपुर । क्या हमारे पूर्वज वैज्ञानिक थेेे ? क्या सोने के लिए खाट हमारे पूर्वजों की सर्वोत्तम खोज है? क्या  हमारे पूर्वज लकड़ी को चीरना नहीं जानते थे? इन सभी सवालों के जवाब हैं, नहीं नहीं नहीं। हमारे पूर्वज भी लकड़ी चीरकर उसकी पट्टियाँ बनाकर डबल बेड बना सकते थे।  

डबल बेड बनाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। लकड़ी की पट्टियों में कीलें ही ठोंकनी होती हैं। चारपाई भी भले कोई सायंस नहीं है  लेकिन एक समझदारी तो है कि कैसे शरीर को अधिक आराम मिल सके। चारपाई बनाना एक कला है। उसे रस्सी से बुनना पड़ता है और उसमें दिमाग और श्रम लगता है। 

हमें याद है जब  हम गर्मियों की छुट्टियों में अपनी नानी के घर जाते थे तो वहां हम सब बच्चों के लिए चारपाई पर बिछौना बिछाया जाता था हमने कई बार नानी से पूछा कि नानी आपके यहां डबल बेड नहीं है? तो नानी बस मुस्करा के रह जाती थीं लेकिन बाद में जब हमने थोड़ा थोड़ा पढ़ना शुरू किया तो पता चला कि जब हम सोते हैं तब सिर और पांव के मुकाबले पेट को अधिक खून की जरूरत होती है क्योंकि रात हो या दोपहर में लोग अक्सर खाने के बाद ही सोते हैं। पेट को पाचनक्रिया के लिए अधिक खून की जरूरत होती है। इसलिए सोते समय चारपाई की जोली ही इस स्वास्थ का लाभ पहुंचा सकती है।

दुनिया में जितनी भी आरामदायक कुर्सियां देख लें, सभी में चारपाई की तरह जोली बनाई जाती है। बच्चों का पुराना पालना सिर्फ कपडे की जोली का था, लकडी का सपाट बनाकर उसे भी बिगाड़ दिया गया है। चारपाई पर सोने से कमर और पीठ का दर्द का दर्द कभी नही होता है। दर्द होने पर चारपाई पर सोने की सलाह दी जाती है। 

डबलबेड के नीचे अंधेरा होता है, उसमें रोग के कीटाणु पनपते हैं , वजन में भारी होता है तो रोज-रोज सफाई नहीं हो सकती। चारपाई को रोज सुबह खड़ा कर दिया जाता है और सफाई भी हो जाती है, सूरज का प्रकाश बहुत बढ़िया कीटनाशक है। खटिये को धूप में रखने से खटमल इत्यादि भी नहीं लगते हैं। 

अगर किसी को डॉक्टर Bed Rest लिख देता है तो दो तीन दिन में उसको English Bed पर लेटने से Bed -Soar शुरू हो जाता है । भारतीय चारपाई ऐसे मरीजों के बहुत काम की होती है । चारपाई पर Bed Soar नहीं होता क्योकि इसमें से हवा आर पार होती रहती है। 

गर्मियों में इंग्लिश Bed गर्म हो जाता है इसलिए AC की अधिक जरुरत पड़ती है जबकि सनातन चारपाई पर नीचे से हवा लगने के कारण गर्मी बहुत कम लगती है ।बान की चारपाई पर सोने से सारी रात Automatically सारे शारीर का Acupressure होता रहता है । 

गर्मी में छत पर चारपाई डालकर सोने का आनद ही और है। ताज़ी हवा , बदलता मौसम , तारों की छाव ,चन्द्रमा की शीतलता जीवन में उमंग भर देती है । हर घर में एक स्वदेशी बाण की बुनी हुई (प्लास्टिक की नहीं) चारपाई होनी चाहिए। 

सस्ते प्लास्टिक की रस्सी और पट्टी आ गयी है, लेकिन वह सही नही है। स्वदेशी चारपाई के बदले हजारों रुपये की दवा और डॉक्टर का खर्च बचाया जा सकता है।l अगर दाब या कांस की बुनी हुए तो सर्वोत्तम होती है।

मिल्खा सिंह अस्पताल में, देश कर रहा दुआयें

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लखनऊ / नई दिल्ली। फ्लाइंग सिख’ के नाम से फेमस डिग्गज धावक मिल्खा सिंह को दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया है 91 वर्षीय मिल्खा सिंह के साथ साथ उनकी पत्नी निर्मल कौर को भी  आईसीयू मे एडमिट कराया गया है। मिल्खा सिंह को 19 मई कोविड पॉजिटिव पाए जाने के बाद 24 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 

बताते चलें कि ऑक्सीजन लेवल गिरने की वजह से पूर्व कॉमनवेल्थ गेम्स के चैंपियन को गुरुवार को चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन रिसर्च के आईसीयू वार्ड में भर्ती किया गया है। 

मिल्खा सिंह के बेटे  मिलकर सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, हां, मेरे पिता को आज पीजीआईएमईआर में भर्ती कराया गया है। सोशल मीडिया पर लोग मिलकर सिंह के जल्द स्वस्थ और ठीक होने की दुआएं कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह के जल्द ठीक होने की कामना की है। 

आपको बताते चलें कि चार दिन पहले ही मिल्खा सिंह की करोना रिपोर्ट नेगेटिव आई थी लेकिन सांस लेने में तकलीफ होने की वजह से मिल्खा सिंह को दुबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

पाकिस्तानी बच्चे को भले ही पाकिस्तान में ट्रोल किया जाता है लेकिन भारत में उसे पसंद किया जाता है

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लखनऊ / दिल्ली । मासूम गोल मटोल पाकिस्तानी बच्चा अहमद शाह  भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली का फैन है जबकि विराट कोहली भी खुद को बच्चे का फैन बताते हैं! अहमद शाह के सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोवर्स हैं उन्हें  पाकिस्तान के घर घर में जाना जाता है जबकि उसके दोोस्त और उसे कॉल करने वाले कहते हैं कि उसमें कोई टैलेंट नहीं है। 

अहमद शाह के यूट्यूब चैनल का नाम Meme Ahmad shah Pakistani internetrolls RE है, उनके यूट्यूब चैनल के तकरीबन साढ़े चौदह लाख सब्सक्राइबर्स हैं सोशल मीडिया के दूसरे पॉपुलर प्लेटफार्म इंस्टाग्राम पर भी अहमद शाह के के तीस हजार से ज्यादा फॉलोअर्स है। 


अहमद शाह को जहां पाकिस्तान के हर घर में जाना जाता है, वही उसे ट्रोल करने वाले कहते हैं कि उसमें कोई टैलेंट नहीं है और वह फेक और एक सेल आउट है, ऐसा कहने वाले यह भी भूल जाते हैं कि अहमद शाह एक बच्चा है, वही अहमद शाह को पसंद करने वाले कहते हैं कि ट्रोल करने वाले यह भूल जाते हैं कि वह एक बच्चे के लिए ऐसी बातें कर रहे हैं, ऐसी बातें करने वाले अपनी गंदी सोच का ही परिचय देते हैं। 


आपको बतााते चलेें कि भले ही अहमद शाह के अपने मुल्क पाकिस्तान में उसे ट्अ्रो कििया जाता हो लेकिन भारत में अहमद शाह की बहुत ही क्यूट हरकतों को पसंद करने वालों की कमी नहीं है उनको पसंद करने वालों में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली समेत कई सेलिब्रिटी शामिल हैैं।

बनायेंगे अगर आकाशवाणी को अपना मीत, तो यकीनन जंग जायेंगे जिंदगी की जीत

लखनऊआकाशवाणी अपने सूत्र वाक्य “बहुजन हिताय बहुजन सुखाय” के लक्ष्य को सामने रखते हुए आम और खास लोगों को सूचना, शिक्षा और मनोरंजन के साथ साथ जागरूकता परक कार्यक्रम अपने श्रोताओं के लिए प्रस्तुत करता रहता है। 

ऐसे वक्त में जब वैश्विक महामारी कोरोना ने बीमार बनाने के साथ लोगों को घरों में कैद कर दिया है ऐसे में वैज्ञानिक एवं विश्वसनीय जानकारी के अभाव में लोगों में भय और भ्रम की परिस्थितियां पैदा हो गई हैं।

ऐसी भयावह परिस्थिति में समाज को जागरूक करने के लिए आकाशवाणी का लखनऊ केंद्र बुधवार को दोपहर एक बज कर पंद्रह मिनट से कोरोना एवं काला फंगस विषय पर कार्यक्रम का प्रसारण करेगा जिसका पुनः प्रसारण शाम बजे से आकाशवाणी के प्राइमरी चैनल से होगा जिसे 747 किलो हर्टज या फिर AIR App पर सुना जा सकता है इस कार्यक्रम के प्रस्तुत कर्ता, एफ एम रेनबो के कार्यक्रम अधिकारी एपी सिंह हैं। 

आकाशवाणी लखनऊ के हवाले से बताया गया है कोविड 19 प्रबंधन और उत्तर प्रदेश सरकार की लोक हितकारी योजनाएं तथा ब्लैक फंगस जानकारी एवं सावधानी विषय पर कार्यक्रम प्रस्तुत किया जायेगा इसके उपरांत कवि प्रदीप तिवारी कोरोना जागरूकता काव्य पाठ प्रस्तुत करेंगे।  

बताया गया है कि कोरोना प्रबंधन पर उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों एवं योजनाओं के बारे जल शक्ति मंत्री डॉ महेंद्र सिंह जानकारी देंगे जबकि ब्लैक फंगस के बारे में नेत्र विशेषज्ञ डॉ संजय बिश्नोई बात करेंगे कार्यक्रम का समापन कोरोना कविता पाठ से होगा। 

इस कार्यक्रम को आकाशवाणी लखनऊ के वरिष्ठ अधिकारी अवधेश प्रताप सिंह प्रस्तुत करेंगे।  

कभी एक दूजे का हाथ थामे रहने वाले आज एक दूसरे पर हाथ उठा रहे हैं!

लखनऊ / दिल्ली ।  करण मेहरा और निशा रावल के बीच अब सब कुछ पहले जैसा नहीं रह गया है, तलाक के बाद तो हालात इतने बदल गये हैं कि कभी एक दूजे का हाथ थामे रहने वाले आज एक दूसरे पर हाथ उठाने से बाज नहीं आ रहेे।

एक्टर करण ने बताया ” यह बहुत दुख की बात है कि, इतने साल की मेहनत इतने साल की आपकी शादी में यह सब हो यह बहुत दुखद है।

पिछले 1 महीने से डिस्कशन चल रहा है क्योंकि कुछ समय से हमारी बीच चीजें ठीक नहीं चल रही थी, तो हम सोच रहे थे कि हमें अलग हो जाना चाहिए या हम क्या करें, इसलिए हम चीजों को ठीक करने की भी कोशिश कर रहे थे। 

बच्चे की कस्टडी के लिए हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है, इलाहाबाद हाई कोर्ट का कहना है कि बच्चे का भविष्य मां के हाथ में ही सुरक्षित रह सकता है। पिता और अभिभावक उसका ख्याल रख सकते हैं, लेकिन मां के साथ रहकर ही बच्चा सुरक्षित होता हैं।

करण मेहरा और निशा रावल कभी एक दूजे का हाथ हमेशा थामें रहते थे आज वो रिश्ता ही टूट जाने के कगार पर है।निशा ने पत्रकारों से बात करते वक्त कहा कि बच्चे की सारी जिम्मेदारी मैं लूंगी। 

निशा ने कहा कि मैंने जब करण से पूछा की अगर काविश तुम्हारे पास रहता है तो क्या करोगे, तो उन्होंने साफ बोला कि मैं शूटिंग के वक्त इसे पापा मम्मी के पास दिल्ली छोड़कर आऊंगा। आप ही बताइए हमारी तो बच्चे की कस्टडी को लेकर कोई बहस ही नहीं हुई थी पर करण चाहते ही नहीं कि वह काविश को साथ रखें।

क्या लेकर लखनऊ आये थे और क्या लेकर दिल्ली गये हैं भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महासचिव!

लखनऊ / दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष का 2 दिन का दौरा योगी सरकार में फेरबदल की ओर इशारा कर रहा है। सोमवार सुबह बीएल संतोष बीजेपी मुख्यालय पहुंचेI पार्टी के यूपी प्रभारी राधामोहन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल , क्षेत्रीय अध्यक्ष और पार्टी के महामंत्री के साथ बैठक की। 

2017 में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनी तब से यह पहली बैठक है जो सीनियर लीडर की अध्यक्षता में बैठक हुई बीएल संतोष ने नेताओं के साथ एक-एक करके बैठक की इसके बाद वे सीएम आवास में योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात करने गए। 

पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री ने सभी महा मंत्रियों से कोरोना काल में बीजेपी द्वारा किए गए काम का फीडबैक लिया बैठक में तय किया गया कि अब गांव में ज्यादा संकट है और ग्रामीणों में वैक्सीनेशन को लेकर जागरूकता भी नहीं है, इसलिए हर गांव में एक युवा और महिला कार्यकर्ताओं को पहले से ट्रेनिंग देकर तैनात किया जाएगा।

ताकि वह ग्रामीणों की सहायता कर सकें और जो अधिकारी अपना काम सही से नहीं कर रहा है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाए तथा घर घर जाकर जो कोरोना वायरस में परेशान है उन्हें सुविधा प्राप्त कराई जाए। 

जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख चुनाव बीजेपी के लिए नाक का सवाल बना है क्योंकि साल 2022 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने को है, पार्टी के पास ऐसे में अब समय काफी कम बचा है, ऐसे में सरकार या संगठन में फेरबदल करना भी पड़ा तो पार्टी करेगी क्योंकि प्राथमिक ता विधानसभा चुनाव जीतना है।  

दूसरी तरफ बीजेपी का कहना है कि नेताओं का दौरा कोरोना वायरस जनप्रतिनिधि जनता के लिए और बेहतर ढंग से काम कर पाए इसके लिए रेडवैप तैयार कर रहे हैं I

Corona impact… बिना परीक्षा दिये पास होंगे बारहवीं के बच्चे

लखनऊ / दिल्ली । कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के घातक परिणाम को देखते हुए पिछले कुछ दिनों में हजारों छात्रों ने कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा रद्द करने की मांग की है। बता दें कि 23 मई को हुई हाई लेवल मीटिंग में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा था कि 12वीं की परीक्षा की तारीखों पर 1 जून को फैसला लिया जायेगा। 

मंगलवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं रद्द करने का फैसला किया गया। यह फैसला देशभर में कोरोना की परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। सीबीएसई और सीआईएससीई की परीक्षाएं रद्द होने से देशभर के करीब 16 लाख छात्रों को बड़ी राहत मिली है।

बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रेल मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, सीबीएसई के चेयरमैन और शिक्षा मंत्रालय के सचिव और सीबीएसई सचिव भी भी मौजूद रहे। प्रधान मंत्री के प्रधान सचिव, कैबिनेट सचिव और स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा विभागों के सचिव और अन्य अधिकारियों ने भी भाग लिया। 

पीएम ने कहा कि देश भर में कोविड-19 महामरी की स्थिति लगातर बदल रही है। हालांकि, देश में नए मामलों की संख्या कम हो रही है और कुछ राज्य प्रभावी सूक्ष्म-नियंत्रण के माध्यम से स्थिति का प्रबंधन कर रहे हैं, कुछ राज्यों ने अभी भी तालाबंदी का विकल्प चुना है। ऐसे में छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर छात्र, अभिभावक और शिक्षक स्वाभाविक रूप से चिंतित हैं। 

आपको बताते चले कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सीबीएसई की 12वीं परीक्षा को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र लिखकर परीक्षा कैंसिल करने की मांग उठाई थी। सिर्फ प्रियंका गांधी ही नहीं बल्क‍ि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी एग्जाम कैंसिल करने की मांग उठाई थी. अरविंद केजरीवाल ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।

12वीं परीक्षा को लेकर अन्य स्टेट बोर्डों की बात करें तो अभी एमपी बोर्ड (MPBSE), महाराष्ट्र बोर्ड (Mahahsscboard), झारखंड बोर्ड (JAC) और राजस्थान बोर्ड को 12वीं परीक्षाओं को बारे में फैसला करना है। खास बात यह है कि बोर्ड परीक्षाओं को रद्द किए जाने का लगातर समर्थन करने वाली झारखंड सरकार ने अभी तक 10वीं की परीक्षा रद्द नहीं की और न ही 12वीं परीक्षा पर कोई फैसला किया है। लेकिन सीबीएसई परीक्षा पर फैसला आने के बाद उम्मीद है कि अगले एक-दो दिन में झारखंड सरकार भी अपना फैसला बता सकती है।

मपी बोर्ड ने 12वीं परीक्षाओं को लेकर सूचना थी कि परीक्षाएं कब और कैसे होंगी, इस पर जून के पहले सप्ताह में फैसला कर लिया जाएगा। सीबीएसई के बाद जिस तरह तेजी से एमपी बोर्ड ने 10वीं की परीक्षाएं रद्द की थीं उससे उम्मीद है कि सरकार और एमपी बोर्ड 12वीं की परीक्षाएं भी रद्द करने पर विचार कर सकता है। 

वहीं राजस्थान बोर्ड (RBSE Class 10, 12 Exam 2021) की बात करें तो यहां भी सरकार अब 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को रद्द कर सकती है। कुछ दिन पहले शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा था कि वे सीबीएसई के फैसले के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से चर्चा कर 10वीं, 12वीं की परीक्षाओं के बारे में निर्णय लेंगे। 

लेकिन अब जिस तरह से सीबीएसई की परीक्षाओं को रद्द किए जाने का फैसला हुआ है उससे प्रभावित होकर राजस्थान सरकार भी कक्षा 10, 12 की परीक्षाओं को रद्द करने पर विचार कर सकती है। उम्मीद है कि राजस्थान बोर्ड 10वीं, 12वीं परीक्षाओं को लेकर ऐलान एक-दो दिन में ही हो जाएगा। इसके अलावा महाराष्ट्र बोर्ड ने भी 10वीं की परीक्षाएं रद्द कर चुका है। यहां भी अभी 12वीं की परीक्षाओं पर फैसला लिया जाना बाकी है जो कि अब जल्द ही तय किया जा सकता है। 

सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने के निर्णय लेने के बाद से ही प्रतिक्रियाओं का दौर थम नहीं रहा है। कुछ शिक्षकों द्वारा फैसले का स्वागत किया गया है। वहीं कुछ ने इसका विरोध भी किया है। भोपाल के एक निजी विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजेश शर्मा ने अमर उजाला से खास बातचीत की है। इसमें उन्होंने कहा है कि मेरी राय में बारहवीं बोर्ड परीक्षा रद्द करने का निर्णय अकादमिक से अधिक राजनीतिक है। 

कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा के अध्यक्ष का बयान निंदनीय एवं अस्वीकार्य

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लखनऊ / दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कन बोज्किर के पाकिस्तान दौरे के दौरान कश्मीर मुद्दे पर दिए गए बयान से खफा भारत को संयुक्त राष्ट्र महासभा की तरफ से सफाई दी गई है। कश्मीर मुद्दे पर दिए बयान पर वोल्कन बोज्किर के प्रवक्ता ने सफाई पेश की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष की उप प्रवक्ता एमी कांत्रिल ने बयान जारी कर कहा कि वोल्कन बोज्किर के बयान को गलत तरह से देखा गया है। 

एमी कांत्रिल ने कहा कि जब महासभा के अध्यक्ष पाकिस्तान के दौरे पर गए थे तो उन्होनें अपने बयान में कहा था कि दक्षिण एशियाई देशों की शांति भारत और पाकिस्तान के कश्मीर मुद्दे पर शांति, स्थिरता एवं समृद्धि के आधार पर टिकी है। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर शांति समाधान से ही रिश्ते सामान्य होंगे। 

अपने प्रेस-कांफ्रेंस में उप प्रवक्ता ने बताया कि अध्यक्ष बोज्किर भारतीय विदेश मंत्रालय के इस व्यवहार से आहत हैं। महासभा अध्यक्ष बातचीत को ही शांति बनाए रखने का सबसे सही माध्यम मानते हैं। उन्हें दुख है कि उनके बयान को इस तरह से देखा गया। अध्यक्ष बोज्किर शांतिपूर्ण तरीके से ही किसी मुद्दे को हल करने का समर्थन करते हैं। इसके साथ ही उन्होनें भारत पाकिस्तान के बीच शिमला समझौते का भी जिक्र किया।  

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कन बोज्किर बांग्लादेश और पाकिस्तान के दो दिवसीय दौरे पर गए थे। जहां पर उन्होनें पाकिस्तान में पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के साथ एक प्रेस-कॉंफ्रेंस में बयान दिया था कि पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे को अंतराष्ट्रीय स्तर पर जोर शोर से उठाना चाहिए।  

27 मई को अपने बयान में महासभा अध्यक्ष ने कहा कि अंतराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर मुद्दे को मजबूती से उठाना पाकिस्तान का दायित्व है। इसके साथ ही उन्होनें इसकी तुलना फिलीपिंस से की। उन्होनें बताया कि फिलीपिंस की तरह ही कश्मीर विवाद के समाधान के लिए मजबूत इच्छाशक्ति की बहुत ही कमी है। मैनें हमेशा से ही कश्मीर की स्थिति बदलने का विरोध किया है। 

महासभा अध्यक्ष के इस बयान के बाद भारत के विदेश मंत्री एस रविशंकर के प्रवक्ता की तरफ से बयान जारी किया गया। उनके प्रवक्ता अंद्रिम बाग्ची ने कहा कि वोल्कन बोज्किर का ऐसा बयान देना उनके स्थान को अपमानित करता है। जिस जगह पर वो हैं उनका इस तरीके का बयान देना अशोभनीय है। भारत सरकार इस बयान को स्वीकार नहीं करता है और इसकी निंदा करता है। अध्यक्ष बोज्किर का बयान गुमराह करने वाला है और उनके दर्जे को घटाता है। 

वैज्ञानिक बोले, Scientific research पर वायरस का नाम रखा जाता है इसलिए कोरोना का इंडियन वैरीएंट कहना शरारतपूर्ण

विश्वव्यापी महामारी कोरोना वायरस से दुनिया के अधिकतर देश चपेट में आ गए हैं। भारत में कोरोना की दूसरी लहर का कहर थमता नजर आ रहा है, लेकिन उसके असर से जिस तरह की तस्वीरें दिखाई देती है वह दिल को झकझोर देती हैं।वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस तेजी से अपना रूप बदलता है इस रूप बदलने के कारण यह कई नामों से जाना जा रहा है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत में सबसे पहले मिले B.1.617.2 G/452.RV3 मिले वैरिएंट का नाम सोमवार को डेल्टा वैरीअंट रखा है। भारत में 12 मई को इस वेरिएंट की पहचान B.1.617.2 से की गई थी जिसे भारत का वैरीअंट कहां जा रहा था और डबल म्युटेंट भी कहा गया।  meine firma

वहीं भारत में दूसरे वेरिएंट B.1.617.1का नाम कप्पा रखा गया।कोरोना का यह वैरीएंट B.1.617 अब तक 53 देशों में पाया जा चुका है और 7 अन्य देशों में इसकी अनआधिकारिक तौर पर पहचान हुई है। हालांकि, इसकी संक्रामक क्षमता को लेकर दुनिया भर में रिसर्च चल रही है। 

ब्रिटेन के साल 2020 के सितंबर महीने में मिले वैरीएंट का नाम अल्फा रखा गया है। साउथ अफ्रीका में मिले वैरीअंट का नाम बीटा रखा गया।

डब्ल्यूएचओ ने ब्राजील में बीते साल नवंबर के महीने में मिले strain का नाम गामा रखा, यूएस में मिले स्ट्रेन का नाम एप्सिलॉन रखा गया है। डब्ल्यूएचयू में कोविड-19 के टेक्निकल लीड में लीड डॉक्टर मारिया वांकेखोवे ने कहा है कि इस नए नामकरण से कोरोना वायरस की मौजूदा स्ट्रेन का वैज्ञानिक नाम नहीं बदलेगा।

उन्होंने कहा यह वैज्ञानिक तथ्यों और रिसर्च पर आधारित नाम होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी स्ट्रेन या वैरीएंट को लेकर किसी भी देश को दागदार बनाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। 

भारत सरकार ने 12 मई को B.1.617 वैरिएंट को मीडिया वर्गों द्वारा इंडियन वेरियंट नाम दिए जाने पर आपत्ति जताई थी। भारत सरकार ने अपने एक बयान में कहा है कि कई मीडिया रिपोर्ट में कोरोना वायरस को इंडियन वैरीएंट कहां है यह बिना किसी आधार के कहां गया है। 

सरकार ने सोशल मीडिया कंपनीज से कहा था कि वे अपने प्लेटफार्म से किसी भी ऐसे कंटेंट को तुरंत हटा दें जिसमें कोरोना वायरस वैरीएंट को इंडियन वैरीअंट बताया गया है।

मस्जिद है, इमाम है, सामने कुरआन है फिर भी बच्ची पर नीयत बेईमान है!

लखनऊ /दिल्ली। हमारे देश में आए दिन ऐसे मामले आते रहते हैं जहां महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार की घटनाएं सामने आती हैं यहां तक कि छोटी छोटी बच्चियों के साथ ऐसी हैवानियत होती है कि शर्म भी शर्मिंदा हो जाये लेकिन ऐसे हैवान भी हैं कि उन्हें शर्म नहीं आती ये सब शायद ही आसानी से ख़त्म हो लेकिन  हमें  बच्चियों को सिखाना और समझाना होगा की कैसे वो अच्छे और बुरे लोगों की पहचान कर सकें को और अपने आप को सुरक्षित रख सकें ।

बीते दिनों दिल्ली के हर्ष विहार कॉलोनी की मस्जिद के इमाम की बेहद शर्मनाक करतूत सामने आई है। मस्जिद के इमाम पर आरोप है की उसने एक मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया है। बच्ची के परिवार वालों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने इमाम को गिरफ्तार कर लिया है। इमाम के खिलाफ़ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्यवाही की जा रही है। 

बच्ची के परिवार वालों का कहना है की बच्ची, इमाम इलियास (48वर्ष) के पास कुरान पढ़ने के लिए जाती थी उस दिन भी वह पढ़ने के लिए ही गई थी l लेकिन उस इमाम ने उस मासूम बच्ची(10वर्ष) के साथ ऐसी हैवानियत की जो बेहद शर्मनाक है। 

जब वह बच्ची घर पहुंची तो उसने अपनी मां को उस इमाम की शर्मनाक करतूत के बारे मे बताया , जिसके बाद परिजनों ने पुलिस थाने में इमाम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई पुलिस ने बच्ची का मेडिकल करवाया, आरोपी इमाम को गिरफ्तार किया गया है । आरोपी इमाम पर पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। 

बंगाल : मुख्य सचिव को मुक्त करने से ममता का इंकार

 

 

लखनऊ / कोलकाता। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अलपन बंधोपाध्याय को लेकर ममता बनर्जी और केंद्र के बीच तनातनी  बढ़ती ही जा रही है। ममता बनर्जी ने राज्य के मुख्य सचिव को रिलीज करने से इनकार करते हुए अलपन बंधोपाध्याय को अपना मुख्य सलाहकार बनाने का ऐलान करके नई लड़ाई छेड़ दी है। 

जानकारी के मुताबिक कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को रिपोर्ट करने में विफल रहने के लिए अल्पन बंधोपाध्याय को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। डीओपीटी मंत्रालय ने पूछा है कि आप के खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए ? साथ ही उन्हें मंगलवार को 10:00 बजे तक रिपोर्ट करने को कहा था।

बता दें कि, केंद्र सरकार ने 28 तारीख को उन्हें दिल्ली अटैच करने का आदेश दिया था, उसी दिन प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक को लेकर विवाद सामने आया। सोमवार सुबह 10:00 बजे उन्हें दिल्ली में रिपोर्ट करना था। 

सुबह 10:00 बजे तक मुख्य सचिव अरविंद ने रिपोर्ट नहीं किया। इसके बजाए सुबह 11:00 बजे वह कोलकाता में राज्य सचिवालय पहुंचे जहां पर उन्होंने ममता बनर्जी के साथ यास तूफान और कोरोना से जुड़ी बैठक में हिस्सा लिया। 

5 पन्नों की लंबी चिट्ठी में ममता बनर्जी ने केंद्र के फैसले पर एक खास वजह से हैरानी जताई, ममता ने लिखा कि जिस केंद्र सरकार को मुख्य सचिव अलपन की नौकरी को इस कारण 3 महीने बढ़ाने पर सहमति जता दी गई थी कि पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस के कारण स्थिति ठीक नहीं है, उसी ने 28 मई को उन्हें दिल्ली अटैच करने का आदेश आखिर क्यों जारी किया?

ऐसे में ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा है कि क्या इसका 28 मई की कलाइकुंडा में आपके साथ हुई मेरी मुलाकात से कोई लेना-देना है? उम्मीद करती हूं इस आदेश का उस बैठक से कोई लेना देना नहीं है। वहीं, बंगाल की मुख्यमंत्री ने यह साफ कर दिया है कि वह मुख्य सचिव अलपन को रिलीव नहीं कर सकती हैं।

बंधोपाध्याय सोमवार को ही रिटायर होने वाले थे लेकिन कोरोना वायरस से निपटने के उनके अनुभव के नाम पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोदी सरकार से कहकर उनका कार्यकाल 3 महीने के लिए बढ़ाया था।

लेकिन इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार में ऐसी तल्खी बढ़ गई कि केंद्र ने उन्हें सेवा विस्तार तो दिया लेकिन सोमवार को सुबह 11:00 बजे तक दिल्ली में रिपोर्ट करने का फरमान भी सुना दिया इसके बाद अल्पन के पास दो ही विकल्प हैं या तो केंद्रीय प्रति युक्ति पर दिल्ली में योगदान दें या फिर अपने तय समय पर इस्तीफा देकर रिटायरमेंट ले ले| शायद बंधोपाध्याय को दूसरा विकल्प सही लगा |

कोरोना का कसूरवार कौन? चमगादड़ या चीन!

लखनऊ / दिल्ली । कोरोना वायरस जो कि ऐसा माना जाता है कि इसकी शुरुआत पिछले साल चीन के वुहान प्रांत के सीफ़ूड और पोल्ट्री बाजार मे हुई  है, आज दुनिया भर के लिए एक घंभीर मामला  बन गयी है। कोरोना वायरस के लक्षण एक मामूली ज़ुखाम से लेकर ज़्यादा गंभीर रोगों कि वजह हो सकती है जैसे कि मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (Middle East Respiratory Syndrome: MERS-CoV) और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (Severe Acute Respiratory Syndrome: SARS-CoV । 

कोरोना वायरस ज़ूनोटिक (zoonotic) है जिसका अर्थ है पशुजन्य रोग | यह वायरस से इंसान और जानवर दोनों भुगत सकते है। इस वायरस के बारे में सबसे पहले चीन के वुहान प्रांत में पता चला है जिसके बाद इसकि पहुंच करीबन 70 देशों में पायी जा रही है। 23 जनवरी को, चीन कि गवर्नमेंट अधिकारियो ने बाकी देश और दुनिया से वुहान को, जिसकी जनता संख्या करीबन 1 करोड कि है, काट डाला और वहा से आने जाने वाले  सभी ट्रांसपोर्ट को बंद करवा दिया गया।

नवरी 30 ,2020 WHO(world health organisatio) ने इस वायरस आउटब्रेक को सामाजिक स्वास्थ्य इमरजेंसी घोषित कर दिया जो की यह एक अंतर्राष्ट्रीय चिंता का कारण बन चुका हैकोरोना संक्रमण की शुरुआत से ही इसकी उत्पत्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। दुनिया के कई देशों ने चीन पर इसे लैब में तैयार करने के आरोप लगाए हैं।

अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो इसे ‘चीनी वायरस’ करार दिया था। अब अमेरिका और ब्रिटेन कोविड-19 की संभावित उत्पत्ति की गहराई से जांच करने को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पर लगातार दबाव बना रहे हैं।दोनों देशों का मानना है कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए WHO की टीम को चीन का नए सिरे से दौरा करना चाहिए।

WHO  और चीनी विशेषज्ञों ने बीते मार्च में एक रिपोर्ट जारी करके इस महामारी के उत्पन्न होने की चार संभावनाओं के बारे में जानकारी दी थी। टीम का मानना है कि कोरोना वायरस चमगादड़ से किसी अन्य जानवर में प्रवेश कर गया है वहीं दूसरी ओर ऐसा भी माना जाता है कि यह वायरस किसी लैब में तैयार किया गया है।

जिनेवा में अमेरिकी मिशन ने अपने एक बयान जारी कर कहा था कि कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर संयुक्त टीम की ओर से की गई पहले चरण की जांच अपर्याप्त और अनिर्णायक है इसके लिए दोबारा चीन का दौरा किया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची का भी यही कहना है कि ‘डब्ल्यूएचओ द्वारा कोविड-19 की उत्पत्ति के बारे में वैश्विक अध्ययन पहला महत्वपूर्ण कदम है । यह इस बारे में ठोस निष्कर्ष तक पहुंचने एवं आगे और आंकड़े जुटाने के लिये अगले चरण के अध्ययन की जरूरत को रेखांकित करता है। 

डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई तथा आगे अध्ययन में सभी के सहयोग एवं समझ की जरूरत है।”लेकिन इस बीच जो ताज़ा स्टडी आई है उसमें साफ-साफ कहा गया है कि कोरोना वायरस का जन्म एक लैब में हुआ है, ये कोई प्राकृतिक तरह से पैदा हुआ वायरस नहीं है. वुहान लैब की पूरी कुंडली दिखाने का दावा ये स्टडी पूरे 22 पेज की है, जिसमें वुहान लैब की पूरी कुंडली है। 

दावे के मुताबिक, साल 2002 से 2019 के बीच वुहान लैब में क्या-क्या हुआ, उसकी पूरी स्टडी इस रिपोर्ट में तैयार की गई है जो कोरोना वायरस को लेकर बड़े खुलासे कर सकती है.  गौरतलब है कि कोरोना वायरस दुनिया के सामने दिसंबर 2019 में आया था, उसी के बाद से अबतक दुनिया में इसके कारण तबाही मची है. लाखों लोगों की जान जा चुकी है और अभी भी लाखों लोग बीमार हैं।

दुनिया ने कई बार वुहान के पीछे चीन का हाथ बताया, लेकिन चीन हर बार इससे इनकार करता रहा है. WHO ने भी कोरोना के ओरिजिन को लेकर जांच शुरू की थी, लेकिन चीन गई टीम को वहां कुछ सहयोग नहीं मिल पाया, ऐसे में जांच लगातार सवालों के घेरे में रही।

कोरोना कर्फ्यू मे ही रहना होगा लखनऊ समेत UP के बीस जिलों को

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटे में 1908 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। अपर मुख्य स्वास्थ्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि यह आंकड़ा 24 अप्रैल को आए 38055 मामलों की तुलना में लगभग 5 फ़ीसदी रह गया है। कल दैनिक पॉजिटिविटी की दर 0.6% थी। उन्होंने बताया कि शुरू से अब तक प्रदेश की कुल पॉजिटिविटी रेट 3.4% है। 

उत्तर प्रदेश के मेरठ, लखनऊ, सहारनपुर, वाराणसी, गाजियाबाद, गोरखपुर, मुजफ्फरनगर, बरेली, गौतम बुद्ध, जौनपुर, बागपत, मुरादाबाद, गाजीपुर, बिजनौर और देवरिया जिलों में फिलहाल लॉकडाउन कोई छूट नहीं दिया गया है।

उत्तर प्रदेश अनलॉक की प्रक्रिया 1 जून से आगे की ओर बढ़ेगा। योगी सरकार के नई गाइडलाइन के अनुसार 1 जून से 20 जिलों को छोड़कर सभी जनपदों मे सुबह 7 से शाम 7 बजे तक कुछ शर्तों के साथ ढील दी जाएगी। 600 से अधिक करोना केस वाले जिलों को फिलहाल अभी कोई छूट नहीं दी जाएगी।

प्रदेश में कोरोना संक्रमण लगातार कम हो रहा है, ऐसे में सरकार ने अब आंशिक रूप में कोरोना कर्फ्यू से प्रदेश वासियों राहत देने का फैसला किया है। सरकारी कार्यालय अधिकतम 50 पर्शेंट उपस्थिति के साथ खुलेगी और उसमें 50 पर्शेंट कर्मी ही काम पर आएंगे। 

निजी कंपनियों के कार्यालय भी 50% अनिवार्यता के साथ खोले जा सकेंगे, सब्जी मंडी पहले की तरह खुली रहेंगी। प्रत्येक सब्जी मंडल स्थल में कोविड-19 की स्थापना की अनिवार्यता होगी, वहीं स्कूल कॉलेज तथा शिक्षा संस्थान शिक्षण कार्य हेतु बंद रहेंगे। कोचिंग संस्थान, सिनेमा, जिम, स्विमिंग पूल, क्लब एवं शॉपिंग मॉल पूर्णत: बंद रहेंगे। 

महाराष्ट्र में अब 15 जून तक लॉकडाउन जारी रहेगा, दिल्ली में 7 जून तक लॉकडाउन की अवधि बढ़ाई गई है, पंजाब में इसे 10 जून तक के लिए बढ़ा दिया गया है। दूसरी ओर हिमाचल, हरियाणा में 7 जून तक कोरोना कर्फ्यू रहेगा, पश्चिम बंगाल में 15 जून तक कोरोना संबंधी प्रतिबंध लागू रहेगा जो कि 30 मई को खत्म होने वाला था लेकिन अब इसे बढ़ा दिया गया है। राजस्थान और झारखंड में 8 जून और 3 जून तक लॉकडाउन लागू रहेगा।

मुन्ना भाई करना चाहते थे बडा़ खेल लेकिन एक गलती से पहुंच गये जेल

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लखनऊ / पिंपरी चिंचवाड़ । एक तरफ कोरोना जैसी घातक बीमारी से पूरा देश पहले से ही लड़ रहा है वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसका गलत तरीके से फायदा उठा रहे हैं मामला महाराष्ट्र का है जहां पिपडी – चिंचवड़ में पुलिस ने एक फर्जी  डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। 

पिंपरी चिंचवड शहर के पुलिस कमिश्नर कृष्णप्रकाश ने बताया कि खुद को डॉक्टर बताने वाले व्यक्ति का नाम अक्षय नेहरकर है. उसके पास अस्पतालों में नौकरी करने के लिए ना तो कोई मेडिकल की डिग्री है और ना तो कोई शैक्षिक योग्यता। 

सकी फर्जी डॉक्टर होने की पोल तब खुली जब उसने एक बड़े निजी मेडिकल इंश्योरेंस कंपनी में कंसल्टेंट के पद पर नौकरी प्राप्त करने के लिए अपने जरूरी कागजात उस कंपनी को पेश किए।

इंश्योरेंस कंपनी ने जांच में पाया कि अक्षय के सारे कागजात फर्जी हैं. इस मामले को लेकर कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी विशाल काटकर ने आपत्ति जताते हुए पुलिस में अक्षय के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

वहीं पुलिस ने बताया कि इस दौरान उसकी वजह से किसी की मौत हुई होगी तो मुन्नाभाई अक्षय के खिलाफ और गंभीर रूप की धाराएं दर्ज कराई जाएंगी। फिलहाल पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और साक्ष्य जुटा रही है

जितना ज्यादा हम पढ़े हैं उतना ज्यादा हम बेईमान बने हैं!

लखनऊ / गाजीपुर । ये  तस्वीर महज़ वो दो भाइयों के बीच बंटवारे की तस्वीर नहीं है बल्कि बाप -दादा के घर की देहरी को जिस तरह बांटा गया है उससे पहले दिल के बंटवारे की दर्दनाक दास्तान बयान कर रहा है , अब हर गांव हर घर की ये सच्चाई है ये तस्वीर उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में स्थित गाजीपुर जिले के गॉव चोचकपुर की है।

दरअसल गांव के लोग जितने खुशहाल दिखते हैं उतने नहीं हैं, जमीनों का मुकदमा, पानी का मसला, खेत-मेढ के केस, रास्ते के केस, मुआवजे के केस, व्याह शादी के झगड़े, दीवार के केस,आपसी मनमुटाव और चुनावी रंजिशों ने समाज को खोखला कर दिया है। 

अब गांव वो नहीं रहे कि गॉव की भीड़ भरी बस में गांव की लडकी को देखते ही सीट खाली कर देते थे, गॉव के बच्चे गॉव के स्वाभिमान माने जाते थे उनकी गलती पर दो चार थप्पड  किसी बुजुर्ग या ताऊ ने टेक दिए तो इश्यू नहीं बनता था। अब गॉव पूरी तरह बंटे हुए लोग हैं। गांव में अब एक दूसरे के उपलब्धियों का सम्मान करने वाले, प्यार से सिर पर हाथ रखने वाले लोग संभवत अब मिलने मुश्किल हो गये हैं।

हालात इस कदर खराब है कि अगर पडोसी फलां व्यक्ति को वोट देगा तो हम नहीं देंगे। गॉव के लोगों में इतनी नफरत कहां से आई है ये सोचने और चिंतन का विषय है। गांवों में कितने मर्डर होते हैं, कितने झगडे होते हैं और कितने केस अदालतों व संवैधानिक संस्थाओं में लंबित है इसकी कल्पना भी भयावह है। 

गांवों में अब एकल परिवार का चलन बढ़ रहा है एक आध ही संयुक्त परिवार बचे हैं, लस्सी-दूध जगह वहां भी डयू कोका पेप्सी पिलाई जाने लगी है। 1947 म बंटवारा केवल भारत का नहीं हुआ था, आजादी के बाद हमारा समाज भी बंटा है और शायद अब हम भरपाई की सीमाओं से भी अब दूर आ गए हैं। अब तो वक्त ही तय करेगा कि हम और कितना बंटेंगे।

एक दिन यूं ही गॉव के चौपाल में बातों बातों में एक मित्र ने कहा कि जितना हम पढे हैं दरअसल हम उतने ही बेईमान बने हैं। गहराई से सोचें तो ये बात सही लगती है कि पढे लिखे लोग हर चीज को मुनाफे से तोलते हैं और ये बात समाज को अंदर ही अंदर तोड रही है।

कोरोना तो कोरोना, कोरोना का कचरा भी कुतर रहा फेफड़ा!

लखनऊ / दिल्ली । कोविड-19 के दूसरे लहर के बाद अब देश पर कोरोना से जुड़ा दूसरा खतरा मंडरा रहा है। कोरोना की दूसरी की लहर से ना केवल देश में जान माल का भारी नुकसान हुआ है, बल्कि बायोमेडिकल कचरे में भी जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है। सरकार और नागरिकों के लिए बड़ी चुनौती मुंह खोले खड़ी है यह चुनौती कोविड-19 कारण इकट्ठा हो रहे कचरे की है। 

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक बायोमेडिकल कचरे का सही मैनेजमेंट इंफेक्शन को फैलने से रोकना है और कोरोना काल में ये और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। बायो मेडिकल कचरे में कैप्स, मास्क, प्लेसेंटा, पैथोलॉजिकल कचरा, प्लास्टर ऑफ पेरिस, ऑपरेट करने के बाद निकाले गए अंग, एक्सपायर हो चुकी दवाई, रेडियोएक्टिव कचड़ा, ब्लड बैंक, डायलिसिस किड्स, आईवी सेट्स, यूरिन बैगस, केमिकल कचरा जैसी कई चीजें शामिल हैं। 

साइंटिफिक तरीके से डिस्पोज ना करने पर यह पर्यावरण के साथ ही इंसानों के लिए भी खतरनाक हो सकता है। गौरतलब है कि भारत के सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने देशभर में कोविड कचरे को डिस्पोज करने के लिए गाइडलाइंस बनाई है। 

CPCB के मुताबिक, फिलहाल भारत में 198 कॉमन बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी कोविड कचरे को डिस्पोज करने में लगी है। भारत में 50 लाख सैनिटाइजेशन वर्कर्स है जिनमें से 50 प्रतिशत महिलाएं हैं। इसके अलावा कई गांवों, शहरों में डोर टू डोर कचरा ना उठाने की सुविधा ने भी इंफेक्शन के खतरे को बढ़ाया है।

इनमें इस्तेमाल होने वाले सिंगल यूज़ प्लास्टिकस माइक्रो प्लास्टिक मे तब्दील हो जाते हैं जिन्हें रिसाइकिल करना लगभग नामुमकिन होता है।यह माइक्रोप्लास्टिक्स खेतों से लेकर नदियों में पहुंचते हैं इसके बाद हवा और खाने का हिस्सा बन जाते हैं। 

भारत में पिछले कुछ समय से अस्पतालों का इंफ्रास्ट्रक्चर भी बेहतर हुआ है, इसके चलते बायोमेडिकल और प्लास्टिक कचरा भी बढ़ रहा है। ऐसे में मौजूदा समय में कोरोना से जुड़े और अन्य बायोमेडिकल कचरे को डिस्पोज करने के लिए खास सतर्कता बरतने की जरूरत है।

ऐसा लगता है आप गुजरात की कंपनी का बचाव कर रहे हैं!

लखनऊ / दिल्ली । मुंबई हाई कोर्ट औरंगाबाद बेंच ने खराब वेंटीलेटर्स के मामले में सामने आने पर केंद्र सरकार से नाराजगी जाहिर की है बेंच दरअसल बेंच का कहना है कि केंद्र सरकार को लोगों की जान के बजाए ऐसे खराब एंटी लेटेस्ट बनाने वाली कंपनियों की ज्यादा चिंता है। 

दरअसल कुछ अस्पतालों की तरफ से कोर्ट में यह बताया गया है कि पीएम केयर्स फंड के तहत केंद्रीय से मिले 150 से 113 बंटी लेटर नहीं चल रहे हैं इसी को लेकर हाईकोर्ट ने बीते मंगलवार केंद्र को फटकार लगाते हुए पूछा खराब वेंटीलेटर्स के लिए केंद्र के पास क्या उपाय है?  

इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से इरिटेंट सॉलीसीटर जनरल अजय तनहार ने शुक्रवार को कोर्ट को बताया कि 150 वेंटिलेटर की सप्लाई पीएम केयर्स फंड के तहत नहीं की गई थी। 

इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि इन वेंटीलेटर्स की गुजरात की ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन लिमिटेड कंपनी ने बनाया था औरंगाबाद के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल जीएमसीएच के डॉक्टरों और पैरामेडिकल उसको वेंटिलेटर ऑपरेट करने के लिए सही ट्रेनिंग नहीं दी गई हुई। 

इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा था कि इन वेंटीलेटर्स को जीएमसीएच के डीन की ओर से तय प्रक्रिया के बाद ही बताया गया था और अब तो वह कह रहे हैं कि मशीनें खराब है। 

वहीं दूसरी तरफ जस्टिस आरवी और जस्टिस बीओ देवदार ने वेंटीलेटर के बचाव में दी गई केंद्र की दलील को खारिज कर दिया। केंद्र से नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार ब्रेन गेम में ना पड़ती तो ज्यादा बेहतर होता।

उन्होंने कहा एक एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ने की बजाय केंद्र को मरीजों के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी किसी भी सरकार के लिए जरूरी है कि वह अपने नागरिकों के स्वास्थ्य की देखभाल करें। 

अफगानिस्तान पाकिस्तान और बांग्लादेश के ग़ैर मुस्लिम शरणार्थी अप्लाई करें, भारत की नागरिकता मिलेगी

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लखनऊ / दिल्ली । केंद्र सरकार ने अफगानिस्तान बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए गैर मुस्लिम शरण नाथ शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने के लिए आवेदन मंगाए हैं इसके लिए गृह मंत्रालय पहले ही नोटिफिकेशन जारी कर चुका है।

भारत सरकार के गृहमंत्री अमित शाह

अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों गुजरात राजस्थान छत्तीसगढ़ हरियाणा और पंजाब के 13 जिलों में रह रहे हिंदू, सिख, जैन,ईसाई और बौद्ध जैसे गैर मुस्लिमों को शुक्रवार को भारतीय नागरिकता के आवेदन मंगाए हैं। 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता कानून 1955 के तहत आदेश जारी किया है इस आदेश पर सरकार ने फौरन अमल करने के आदेश दिए हैं।

साल 2019 में लागू सी ए के तहत नियम अभी तैयार नहीं है गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि नागरिकता कानून 1925 की धारा 16 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार ने कानून धारा 5 के तहत यह कदम उठाया है।

इसके तहत राज्यों और जिलों में रह रहे अफगानिस्तान पाकिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदाय हिंदू सिख ईसाई बौद्ध पारसी और जैन जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ गए थे भारतीय नागरिकता के तौर पर पंजीकृत करने के लिए आदेश दिया गया है।  

साल 2019 में जब सीए लागू हुआ तो देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और इन्हीं विरोध प्रदर्शनों के बीच 2020 की शुरुआत में दिल्ली में दंगे हुए थे। 


फरीदाबाद (हरियाण) , वडोदरा (गुजरात )सिरोही( राजस्थान), बलोदाबाजार (छत्तीसगढ़), जालंधर( पंजाब) मोरबी ,उदयपुर, राजकोट, पाटन, दुर्ग ,जालौर, पाली और बाड़मेर में रह रहे पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के गैर मुस्लिम ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।  


गृह मंत्रालय ने बताया कि इन देशों के शरणार्थियों के आवेदन का सत्यापन राज्य के सचिव या जिले के डीएम द्वारा किया जाएगा। 

कोरोना ने कर दी हैं कठिन, डगर पनघट की!

लखनऊ  /  दिल्ली । कोरोना वायरस के दूसरी लहर के चलते जिस तरह की खबरे उत्तर प्रदेश से आई हैं उससे बीजेपी की चिंताएं और बढ़ गई हैं, कोरोना की वजह से यूपी में कई विधायकों की मौत भी हो गई है । कई नेताओ ने अपनी ही सरकार को लेकर नाराजगी भी जाहिर की है। 


योगी सरकार के मंत्री ब्रृजेश पाठक से लेकर केंद्र सरकार के मंत्री संतोष गंगावर तक ने अपनी नाराज़गी जताई जिसके चलते विपछी दल खासकर सपा और कांग्रेस ने कोरोना प्रबंधन सुचारू रूप से ना होने के आरोप भी लगाये। 

भाजपा ने विधानसभा चुनाव की प्रारंभिक तैयारियों के लिए तीन सदस्यीय कोर कमेटी गठित की है। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और महामंत्री संगठन सुनील बंसल को शामिल किया गया है। कमेटी हर महीने विधानसभा क्षेत्रों के प्रभारियों के साथ समीक्षा करेगी। प्रभारियों से मिले फीडबैक के आधार पर विधानसभा क्षेत्रों का रोडमैप तैयार किया जायेगा। 

उन्होंने कहा कि शहर से लेकर गांवों तक कोरोना वायरस की रोकथाम की दिशा में प्रदेश सरकार तेजी से कार्य कर रही है। इसमें गांव-गांव में गठित निगरानी समितियों और ग्राम प्रधानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधान व निगरानी समिति के सदस्य अपने गांव को कोरोना से मुक्त गांव बनाने का संकल्प लें। इसे प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने ‘मेरा गांव, कोरोना मुक्त गांव’ अभियान की शुरुआत की है।

एक सरकारी बयान के अनुसार मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने कहा है कि प्रदेश में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में ‘ट्रैस, टेस्ट और ट्रीट’ का जो अभियान युद्धस्तर पर चल रहा है, उसमें निगरानी समितियों का बड़ा योगदान है। गांव में लक्षण वाले व्यक्ति की समय से पहचान हो जाए तो जांच, इलाज व मेडिकल किट जैसे उपायों से संक्रमण का फैलाव नहीं होने पाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य है। यह प्रदेश प्रभावी भूमिका के साथ महामारी के विरुद्ध कार्य कर रहा है, जिसके अपेक्षित परिणाम भी मिल रहे हैं। साथ ही उन्होंने गावों को कोरोनावायरस (Coronavirus) से मुक्त बनाने के लिए एक विशेष अभियान की घोषणा की। 

गौरतलब है कि इस बार संक्रमण का प्रकोप देश के ग्रामीण इलाकों पर ज्यादा है। विशेष अभियान, “मेरा गांव-कोरोना मुक्त गांव” की घोषणा को मुख्यमंत्री द्वारा की गई थी, जब वह लखीमपुर जिले में Covid-19 रोकथाम उपायों की समीक्षा करने के लिए थे। 

शहरी क्षेत्रों में वार्ड स्तर पर भी इसी तरह का अभियान चलाया जाएगा जबकि सख्त स्क्रीनिंग, इलाज और वैक्सीनेशन पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य में Covid-19 टैली को नीचे लाने के लिए स्थानीय भागीदारी को आकर्षित करना है और इसे ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के साथ चलाया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर की जा रही टेस्टिंग के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने नियंत्रण रणनीति की भी सराहना की और कहा कि इसे एक “मिशन” में बनाया जाना चाहिये। 

कुछ कर नहीं सकते तो स्वागत कीजिये, Welcome Yaas… बंगाल ओडिशा के बाद अब झारखंड में

लखनऊ / रांची। बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवर्ती तूफान यास ने बंगाल में भारी तबाही मचाई है। इससे पश्चिम बंगाल मे तीन व्यक्ति की मौत हुई वही ओडिशा मे एक व्यक्ति की मौत हो गई। 

यास के तांडव से सैकड़ों तटीय गावों में पानी भर गया, और लाखों घर उजड़ गए वही लगातार बारिश से ओडिशा बंगाल के कई जिले जलमग्न हो गए हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ गया और राहत एवं बचाव दल के लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने में जुटे हुए हैं। 

 

ओडिशा और बंगाल बुधवार देर रात 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार की और भारी बारिश के साथ झारखंड की सीमा में पहुंच गया। रिपोर्ट के मुताबिक 3 घंटे मे यहां पर भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, इतना ही नहीं इस तूफान का असर बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में देखने को मिल रहा है ।

दर्द से तड़पती रही बेटी लेकिन नहीं जाने दिया अस्पताल… बेरहम बाबूओं ने कहा मुख्यमंत्री दौरे पर हैं

लखनऊ / मिर्जापुर।  यूपी के मिर्जापुर में एक बीमार दिव्यांग लड़की ई रिक्शा में दर्द से कह रहा थी रहे अस्पताल नहीं जाने दिया गया क्योंकि, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के चलते इलाके में सुरक्षा बेहद सख्त थी, ये सखती उस लड़की के लिए बड़ी मुसीबत बन गई। जैसे ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिला अस्पताल पहुंचे वहीं सड़क पर लगे बैरियर को पुलिस वालों ने गिराकर पहरा लगा दिया।

बोलने और सुनने में असमर्थ इस मासूम बच्ची को दिल की भी बीमारी थी, वही उसको इतना तड़पते देखने के बावजूद, पुलिस वालों वे सीधे रोक दिया और कहा कि मुख्यमंत्री के जाने के बाद ही आप अस्पताल जा सकती है, जबकि मरीज की स्थिति देख कर परिजन काफी परेशान हो गए। 

उस लड़की के पिता कृष्णकांत गुप्ता कहते हैं कि मेरी बेटी दर्द में परेशान है, उसके दिल के दोनों वॉलव भी खराब है यह लोग कह रहे हैं ,कि मुख्यमंत्री चले जाए तब जाना , उनको मासूम बच्ची को दर्द में जूझते हुए देखकर और पुलिस वालों का सख्त दिल और उनकी लापरवाही देखकर बहुत ही तकलीफ हुई।

सीएम योगी आदित्यनाथ 2 दिन से पूर्वांचल दौरे पे थे, सोमवार को सीएम योगी गोंडा, आजमगढ़ अौर वाराणसी गए, उन्होंने सभी जिला अस्पताल ने पोस्ट कोविड वार्ड पर निरीक्षण किया फिर इसके बाद मंगलवार को सीएम योगी मिर्जापुर दौरे पर पहुंचे थे।

यास, तू बता क्या करें क्या छोड़ दें जीने की आस!

लखनऊ / कोलकाता। बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान यास मंगलवार को बेहद गंभीर तूफान में तब्दील हो गया चक्रवात यास तेजी से उड़ीसा के दक्षिण बालासोर के पास बढ़ रहा है चटपटी तूफान व्यास ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के तटीय इलाकों से टकराने से पहले ही दोनों राज्यों में जोरदार बारिश होने लगी है। बंगाल के मेदिनीपुर, बांकुड़ा ,झाड़ग्राम ,दक्षिण परगना, कोलकाता और नादिया वहीं उड़ीसा के भुवनेश्वर चंडीपुर में लगातार बारिश हो रही है।  

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार यास उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ते हुए अगले कुछ घंटों के दौरान एक बहुत विकराल चक्रवर्ती तूफान में बदल सकता है मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि चक्रवर्ती तूफान पश्चिम उत्तर पश्चिमी की तरफ बढ़ेगा और फिर तेज गति से आज यानी बुधवार को सुबह उत्तरी उड़ीसा और पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक पहुंचेगा बुधवार की दोपहर तक चक्रवाती तूफान के रूप में पारादीप और सागर दीपों के बीच उत्तर उड़ीसा पश्चिम बंगाल के तत्वों को पार करने का अनुमान है। 

मौसम विभाग के प्रवक्ता महापात्रा ने कहा उत्तर पश्चिम और बंगाल की खाड़ी में गंभीर चक्रवाती तूफान व्यास भीषण चक्रवाती तूफान में तब्दील होगा यह उत्तर पश्चिम की तरफ मोड़ सकता है तथा इसकी तीव्रता और अधिक हो सकती है|
चक्रवाती तूफान यास की उड़ीसाा के धर्मा बंदरगाह के पास दस्तक देने की संभावना है।

जिसका असर बंगाल से लेकर बिहार- झारखंड तक देखने को मिलेगा। इसीलिए झारखंड और बिहार में भी हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। मौसम विभाग के सुबह दिए गए आखिरी अपडेट के मुताबिक चक्रवात उड़ीसा के तट से दोपहर में गुजर जाएगा इस दौरान हवाओं की गति 130 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे होने की संभावना है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि उनके प्रशासन ने 9 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है वही उड़ीसा सरकार का कहना है कि उसने सुरक्षा को देखते हुए तटीय जिलों से 2लाख से अधिक लोगों को निकाला है। 

उड़ीसा में सबसे अधिक 52 और पश्चिम बंगाल में 45 एनडीआरएफ टीमों को सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है जरूरत पड़ने पर टीमों की संख्या और बढ़ा सकते हैं। 

पहले बलात्कार किया जब महिला बेहोश हो गयी तो बिजली के खंभे में बांध दिया

लखनऊ / पटना ।  आये दिन लड़कियों से छेड़छाड़, धमकी और दुस्कर्म के मामले आते रहते हैं जब जब सरकार कहती है की महिलाओं पर अपराध कम हो रहे हैं ठीक उसी समय समाज में असामाजिक तत्व कोई न कोई गंभीर घटना को अंजाम दे कर सरकारी कानून व्यवस्था के दावे को चुनौती दे देते हैं।

बिहार के समस्तीपुर जिले से एक दिल दहलना वाला मामला सामने आया है विभूतिपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में घर से शौच के लिए निकली एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया इतने पर भी बलात्कारियों की हैवानियत शांत नहीं हुई तो दुष्कर्मियों ने महिला को बेहोशी की हालत में नग्न अवस्था में बिजली के खंभे से फंदा लगाकर छोड़ दिया।

घटना की जानकारी मिलने पर पहुंची पुलिस ने महिला को गंभीर हालत में सदर अस्पताल में भर्ती कराया है  फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसे कब तक खुले आम अपराधी घूमते रहेंगे और हर रोज़  महिलाएं दुष्कर्म का शिकार होती रहेंगी।

हालत यह है कि आज भी महिलाएं घर से बाहर जाने में असुरक्षित  महसूस करती हैं जहां सरकार महिलाओं के सुरक्षा के लिए बड़े बड़े दावे करती हैं वहीं असल जिंदगी महिलाओं के साथ लगातार ये अपराध हो रहे हैं। 

ना जूता मेरा जापानी, ना पतलून इंग्लिशतानी पर वैक्सीन है रुसी… फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी

लखनऊ / दिल्ली । देश में यह तीसरी वैक्सीन है जिसे  ड्रग रेगुलेटर से करोना टीकाकरण के लिए इमरजेंसी यूज की मंजूरी मिली है। हिमाचल प्रदेश के बड्डी में बना वैक्सीन का पहला बैच क्वालिटी कंट्रोल जांच के लिए मॉस्को भेजा जाएगा। भारत में कोरोना वैक्सीनेशन के लिए एक और वैक्सीन का उत्पादन कार्य शुरू हुआ है।

24 मई को एक संयुक्त बयान में रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड और भारतीय दवा उत्पादन कंपनी पैनासिया बायोटेक ने इसकी जानकारी दी। संयुक्त बयान में भारत में कोरोना टीकाकरण के लिए तीसरी वैक्सीन के रूप में इमरजेंसी यूज़ की मंजूरी हासिल करने वाली स्पूतनिक वी वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर दिया गया है।

इस बयान में आगे कहा गया है की हिमाचल प्रदेश के बड्डी मे बना वैक्सीन का पहला बैच क्वालिटी कंट्रोल जांच के लिए मास्को स्थित गमालिया सेंटर भेजा जाएगा। गर्मियो में ही वैक्सीन का फुल स्केल प्रोडक्शन शुरू होगा।

पैनासिया बायोटेक की उत्पादन इकाईयां जीएमपी मानको का पालन करती है, उन्होंने डब्ल्यू एच ओ की पूर्व मंजूरी प्राप्त की है। प्रोडक्शन की शुरुआत कोरोना के खिलाफ भारत की लड़ाई का अहम कदम है।

12 अप्रैल 2021 को भारत में स्पूतनिक वी वैक्सीन के इमरजेंसी यूज करने की मंजूरी मिली थी। कंपनी 110 करोड़ वैक्सीन डोज का उत्पादन करेगी।

हालांकि, विशाल आबादी को देखते हुए यह वैक्सीन काफी नहीं है, क्योंकि वैक्सीन की जरूरत महसूस हो रही है, पर अब तक 18 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन कि डोज लग चुकी है। कोरोना के खिलाफ देश में चल रही लड़ाई मैं वैक्सीन स्पूतनिक-वी का उत्पादन कोरोना के खिलाफ हथियार मिलने जैसा है।

CBI के अगले DIRECTOR?

लखनऊ / दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के नए निदेशक का चयन करने वाली समिति ने कुल 3 नामों की सूची तैयार की है। इस समिति में प्रधानमंत्री के अलावा विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एंड वी रमन भी मौजूद रहे।

निदेशक पद की दौड़ में कई अधिकारियों का नाम शामिल है, इनमें यूपी के पुलिस महानिदेशक कुमार राजेश चंद्र और केंद्रीय गृह मंत्रालय में विशेष सचिव VS कौमुदी और महाराष्ट्र के डीजेपी रहे सुबोध जयसवाल का नाम भी शामिल है।सीबीआई के नए बॉस के लिए जल्द ही उनमें से किसी के नाम पर मुहर लग सकती है।

गौरतलब है कि इसी साल फरवरी में ऋषि कुमार शुक्ला सीबीआई डायरेक्टर पद से रिटायर हो गए, इसके बाद से यह पद अब तक खाली है। 

आपको बताते चलें कि सीबीआई डायरेक्टर के चयन के लिए 1984 से लेकर 1987 की बैच के आईपीएस ऑफिसर के नाम पर विचार होना था।यूं तो, इस दौड़ में करीब 100 आईपीएस ऑफिसर के नाम है लेकिन आखिरी दौर इनकी तीन नामों पर चर्चा हुई। सरकार इन में से किसी एक को भी सीबीआई का नया डायरेक्टर चुन सकती है।

अधिकारियों के संक्षिप्त परिचय के बारे में बात करें तो वीकेएस कौमुदी आंध्र प्रदेश के 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं जो होम मिनिस्टरी में स्पेशल सेक्रेट्री इंटरनल सिक्योरिटी के पद पर तैनात हैं। वहीं आरके चंद्रा 1985 बैच के बिहार आर्डर के आईपीएस अधिकारी है और अभी एसएसबी के डीजी के पद पर तैनात है। सुबोध जयसवाल 1985 बैच के आईपीएस ऑफिसर हैं और इस वक्त डीजीपी आई एस एफ हैं।

नियमों के मुताबिक सीबीआई निदेशक का चयन कमेटी वरिष्ठ और भ्रष्टाचार विरोधी मामलों की जांच में अनुभव के आधार पर करेगी।

दमा, अस्थमा, हार्ट अटैक और मोतियाबिन्द का समुच्चय है ब्लैक फंगस

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लखनऊ । कोरोना महामारी ने देश-विदेश सभी जगह बहुत ही भारी हड़कंप मचाया हुआ है। इसकी दूसरी लहर भी आई, जिसमें काफी लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे। ना सिर्फ मामूली इंसान, बल्कि कई बड़ी हस्तियां भी हमने खोई है। यह बीमारी लोगों के मन में बहुत ही बड़ा घर बना चुकी है। स्थिति काफी गंभीर नजर आ रही है। अब बात सामने आ रही है ब्लैक फंगस की जिसे हम म्यूकरमाइकोसिस के नाम से भी जानते हैं।

कोरोना के जैसे ही ब्लैक फंगस ने भी अपने महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा पांव पसारे हैं। अब महाराष्ट्र के बाद ब्लैक फंगस ने अन्य देशों जैसे दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान व मध्य प्रदेश में भारी संख्या में केस सामने आ रहे हैं। राजस्थान सरकार ने लोगों में नजर आ रही ब्लैक फंगस नामक बीमारी को महामारी घोषित कर दिया है।

राजस्थान महामारी अधिनियम 2020 की धारा तीन की सहपठित धारा चार के तहत म्यूकोरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस को संपूर्ण राज्य में महामारी व अधिसूचनीय रोग अधिसूचित किया जा चुका है। देश में करीब 5,500 कुल मामले सामने आए हैं जिनमें से 126 को मृत घोषित किया गया है। 

अगर हम बात करें यूपी की, तो यूपी सरकार ने ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों को देखकर नई गाइडलाइन भी जारी की है। कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच या लेफ्ट फंगस का आना काफी चिंताजनक हो गया है। राज्यों में लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली के एम्स और मैक्स जैसे बड़े अस्पतालों ने भी ब्लैक फंगस के मरीजों की पुष्टि की है। इसी बीच या भी बड़ी खबर सामने आई कि हरियाणा का गुरुग्राम शहर ब्लैक फंगस का हॉटस्पॉट बनकर सामने आया है। 

कवक संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखकर उत्तर प्रदेश सरकार ने ब्लैक फंगस के मामले में नई गाइडलाइन जारी करने का फैसला लिया। गाइडलाइन के तहत लोगों ब्लैक फंगस के लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टरी सलाह लेने को कहा गया है। 

साथ ही इसमें, यह भी कहा गया है कि ब्लैक फंगस के लक्षण नजर आने पर तुरंत ईएनटी(ENT) स्पेशलिस्ट यानी आंख चेस्ट या प्लास्टिक सर्जरी विशेषज्ञ को दिखाएं। इसके अलावा बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी प्रकार के स्टेरॉइड का उपयोग ना करें।

ICMR के मुताबिक, ब्लैक फंगस कोरोना वायरस से लड़ चुके मरीजों पर अधिक वार कर रहा हैं। कमजोर इम्यूनिटी वालों को खास ध्यान रखने की जरूरत है। कोरोना वायरस से ठीक हो चुके मरीजों को अपना खास ख्याल रखने को कहा गया है। इसके अलावा, जो व्यक्ति शुगर पेशेंट है उनका अगर शुगर लेवल बढ़ जाए तो यह जानलेवा हो सकता है। 

ब्लैक फंगस में तेज बुखार हो सकता है सिर में दर्द हो सकता है उल्टी, खांसी के साथ साथ  नाक से खून का निकलने की समस्या भी हो सकती है, आंख या नाक के पास दर्द या लाल निशान का होना, धुंधला दिखाई देनाा, गाल की हड्डी में दर्द या फिर चेहरे पर एक तरफ सूजन हो सकता है, मसूड़ों में दर्द, छाती में दर्द उठना या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।  इस प्रकार के लक्षण नजर आने पर फौरन डॉक्टर की सलाह लें। अपनी मर्जी से दवाओं का सेवन बिल्कुल भी ना करें। यह आपके लिए हानिकारक हो सकता है। 

WTC Final : अश्विन से देर से मिलेंगे लेकिन दुरुस्त मिलेंगे, अश्विन का सामना करने के लिए न्यूजीलैंड के बल्लेबाज ने ऐसे की तैयारी

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लखनऊ / दिल्ली । 18 जून से साउथैम्पटन मेड में डब्ल्यूटीसी फाइनल खेला जाएगा। इस पर कॉन्वे ने कहा है कि- स्वदेश में ड्यूक गेंदों से तैयारियों का फायदा मिलेगा। भारत के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल में हमारी टीम को बहुत फायदा मिलेगा। 

न्यूजीलैंड के बल्लेबाज डेविन कॉन्वे का मानना है कि ड्यूक गेंदों से अभ्यास करने का इंग्लैंड के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप(WTC) के दो टेस्ट मैचों में बहुत फायदा भी पहुंचेगा। गौरतलब है कि इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच दो टेस्ट मैच 2 जून से शुरू होने वाले हैं। उसके बाद में भारत और न्यूजीलैंड के बीच 18 जून से साउथैम्पटन में डब्ल्यूटीसी फाइनल खेला जाएगा। 


कॉन्वे ने ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, यह हमारे लिए बेहद फायदेमंद रहा, हमें नई गेंदों से खेलने और उसे जानने का मौका मिला हैं। इससे हमें अपनी रणनीति तैयार करने में सहायता मिली। न्यूजीलैंड स्वदेश में कूका बुरा गेंद से खेलता है। उनका मानना है कि इस दौड़ से पहले लिंकन में अभ्यास शिविर से काफी मदद मिलेगी। 

न्यूजीलैंड की 20 सदस्यीय टीम में कॉन्वे उन तीन खिलाड़ियों में शामिल है जिन्होंने अभी तक टेस्ट मैच नहीं खेला है। दक्षिण अफ्रीका में जन्मे इस खिलाड़ी को सीमित ओवरो के क्रिकेट में प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद न्यूजीलैंड टेस्ट टीम में चुना गया है। कॉन्वे के होने से न्यूजीलैंड को डब्लयूटीसी फाइनल में रविचंद्रन अश्विन जैसे गेंदबाजों का सामना करने में मदद मिलेगी। 

पहले टेस्ट दौरे में यह 29 साल का खिलाड़ी टॉम लाथम और रॉस टेलर जैसे स्थापित बल्लेबाजों से काफी कुछ जानना और सीखना चाहते हैं। उन्होंने कहा, यह मेरे लिए सीखने का बहुत ही सुनहरा मौका है, मैं संझ पाऊंगा कि कैसे रणनीति तय करनी है और उसी पर अमल करना है। उसके साथ ही कई खिलाड़ी टेस्ट टीम में बहुत समय से खेल रहे हैं और उनके अनुभवों से कुछ सीखना बहुत उत्साह की बात है। 

सेना के डॉक्टर ने AIIMS के निदेशक को चिट्ठी लिखकर पूछा,आखिर कोरोना के इलाज में इतना कंफ्यूजन क्यों?

लखनऊ / दिल्ली । देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का कहर काफी घातक साबित हुआ है। हालांकि, नए मरीजों की संख्या में अब गिरावट आ रही है, लेकिन मौतों का बढ़ता आंकड़ा चिंता को बढ़ा रहा है। कोरोना उपचार के लिए केंद्रीय सरकार और एम्स की ओर से राज्यों को कुछ दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं। इनकी बदलती गाइडलाइंस ने लोगों को काफी गुमराह किया है। कई लोगों के जान और माल दोनों को हानि पहुंची है। क्योंकि शुरुआत में एम्स की तरफ से जो दिशा-निर्देश लागू किए गए थे उसे बाद में यह कहते हुए खत्म कर दिया गया कि इससे मरीजों की संख्या पर बहुत प्रभाव नहीं पड़ा है।

कुल मिलाकर देखें तो देशभर में पिछले कुछ दिनों से अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड्स की किल्लत रही है। उनकी कमी के कारण कई लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। वहीं बाजार में रेमडेसिविर जैसी दवाइयों की भी कालाबाजारी देखने को मिली। ऐसे में मरीजों की जान तो गई साथ ही आर्थिक नुकसान भी काफी हुआ। 

सैन्य सेवा में डॉक्टर जनरल वीके सिन्हा ने एम्स के निर्देशक डॉ रणदीप गुलेरिया से कड़ी नाराजगी जताई है। डॉक्टर गुलेरिया को इस मामले में खुला पत्र लिखकर स्पष्टीकरण देने को कहा है। जनरल डॉ वीके सिन्हा ने रणदीप गुलेरिया को लिखा है कि मैं अपना परिचय मेडिकल क्षेत्र से जुड़े ऐसे तर्कशील व्यक्ति के रूप में कराना चाहूंगा। आप घर -घर जाने जाते हैं, आपका पद बहुत प्रतिष्ठित है आप इसके हकदार है क्योंकि आप देश को मेडिकल इमरजेंसी में रास्ता दिखा रहे हैं। लोग डॉक्टरों की ओर देखते हैं और डॉक्टर उत्कृष्ट संस्थानों की ओर, आप एम्स के निर्देशक हैं जो बड़ा ही प्रतिष्ठित पद है और इसका अपना अलग आभामंडल है। कोई शक नहीं कि आपके शब्दों को ना केवल देश के आम लोग बल्कि पूरी चिकित्सा जगत देववाणी की तरह लेती है। इसलिए आपकी जिम्मेदारी बहुत अधिक है। 

हालांकि 7 अप्रैल को जारी निर्देश में होम आइसोलेशन में रहने वाले के इलाज के लिए इनके इस्तेमाल की सिफारिश की गई थी। हालांकि ,कुछ दिनों बाद नोटिस में कहा गया कि दवा प्रभावी नहीं थी। 

मार्च में , WHO ने कहा कि दवा को प्रभावी नहीं दिखाया गया है। लेकिन हमने इस पर ध्यान नहीं दिया देश के सबसे महान न्यायाधीश के रूप में आप चिकित्सा में क्या सही है और क्या गलत ,यह तय करने में आप ऐसी गलती नहीं कर सकते। दवा में कुछ भी गलत नहीं है। 

हालांकि सुझाव की कुछ ही दिनों में दवा बाजार से गायब हो गई। जमाखोरी और कालाबाजारी बढ़ती गई, मांगें तेज होती गईं, दलालों ने खूब कमाया। उसके बाद रेमडेसिविर और यही बात अन्य दवाओं के साथ हुई। यह गलत है। जनरल वीके सिन्हा ने अपने पत्र में ऐसे कई मुद्दों को उठाया है।

DM के थप्पड़ Action पर क्या है CM का Reaction 

लखनऊ / रायपुर। छत्तीसगढ के सूरजपुर ज़िले के कलेक्टर रणबीर शर्मा को लाकडाउन के बहाने बीच चौराहे पर अपनी दादागीरी मंहगी पड़ गई हैं। एक युवक को थप्पड़ मारने की कीमत उन्होंने अपने पद से हाथ धोकर चुकायी ।

बीते शनिवार को lockdown के दौरान अमन मित्तल नामक एक युवक अपनी दादी के लिए दवा लेने जा रहा था , उस समय सूरजपुर के कलेक्टर रणबीर शर्मा अपनी टीम के साथ चेकिंग कर रहे थे उन्होंने युवक को जाते देखा और उसको पास बुलाकर ज़ोर का थप्पड़ जड़ दिया।

युवक अपनी सफाई देता रहा लेकिन कलेक्टर साहब ने एक ना सुनी उसका मोबाईल फोन भी तोड़ दिया। युवक ने अपनी जेब से दवा की पर्ची भी निकाल कर दिखाई मगर वह फिर भी नहीं माने और अपने सिपाहियों से उसकी डंडो से पिटाई कराई ।

इस घटना की आलोचना तब शुरू हुई जब इसका वीडिओ सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक पत्रकार ने छत्तीसगढ के मुख्यमन्त्री भूपेश बघेल को टैग करते हुए घटना की जानकारी दी ।

बघेल ने मामले को संज्ञान मे लिया और डीएम को दोषी पाकर उनको ससपेंड करने का आदेश दिया और घटना पर दुःख व्यक्त करते हुए युवक तथा उसके परिवार से माफ़ी मांगी साथ ही उसे नया मोबाइल फ़ोन उपलब्ध कराने को कहा । 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घटना की कड़े शब्दों में निंदा की और कहा किसी भी अधिकारी द्वारा ऐसा अमानवीय व्यव्हार बर्दाश्त नहीं किया जायगा ।

फ़ाइज़र वैक्सीन की शर्तें… मीठा मीठा गप कड़वा कड़वा थूः

लखनऊ / दिल्ली । दुनिया में सबसे पहले कोरोना वैक्सीन बनाने वाली दवा कंपनियों में शामिल अमेरिका की फाइजर कंपनी और भारत सरकार कोरोना वायरस वैक्सीन के इस्तेमाल में कानूनी सुरक्षा की मांग को लेकर आमने-सामने हैं। 

भारत ने अब तक किसी भी टीका कंपनी को गंभीर साइड इफेक्ट पर मुआवजा की सुरक्षा नहीं दी है। असल में फाइजर ने कई देशों में शर्त रखी है कि जहां पर उसके टीके पहले से ही लगाए जा रहे हैं, इसमें ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई देश शामिल है। 

फाइजर के टीके को लेकर के केंद्र सरकार ने बताया कि फाइजर के साथ पूरी समस्या इंडिमनिटी बॉन्ड को लेकर है और हम इस पर दस्तखत क्यों करें? माना जा रहा है कि कानूनी सुरक्षा के मामले को लेकर ही भारत में फाइजर की वैक्सीन को मंजूरी देने का मामला लटका हुआ है| 

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक यह शर्त मानने का मतलब है कि अगर किसी भी मरीज की मौत हो जाती है तो फाइजर कंपनी से सवाल नहीं कर सकते, अगर कोई भी इसे अदालत में चुनौती देगा तो केंद्र सरकार हर बात के लिए जिम्मेदार होगी, ना कि कंपनी। हालांकि,  फाइजर और स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मुद्दे को लेकर अभी कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। 

वहीं अन्य सूत्रों से मिली जानकारी जानकारी के अनुसार भारत और फाइजर वैक्सीन के सौदे को लेकर कानूनी सुरक्षा के मामले पर अब भी बातचीत कर रहे हैं। फाइजर को अंतिम रूप दिए जाने की पूरी उम्मीद है। 

सूत्रों के मुताबिक भारत के विदेश मंत्री ने फाइजर की चिंताओं को कम करने के लिए आने वाले हफ्तों में अमेरिका दौरा करने की योजना बना रहे है। मिली जानकारी से पता चला है कि भारतीय विदेश मंत्री फाइजर को मुकदमे से किसी प्रकार की सुरक्षा की पेशकश कर सकते हैं। बदले में कंपनी भारत में अपने टीके को वितरित करने के लिए अतिरिक्त मदद मुहैया करा सकती है। 

भारत में कोरोना की तीसरी लहर के आने के संकेत मिल रहे हैं जो कि बच्चों के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकती है। ऐसे में भारत के बच्चों के लिए कोई युक्ति निजात नहीं की है। 

गौरतलब है कि फाइजर के साथ समझौते को ठोस रूप दिया जाय और कोई भी लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। भारत को कोविड-19 वैक्सीन की खुराक की आवश्यकता है। ऐसे में फाइजर वैक्सीन बच्चों के लिए काफी असरदार साबित हो सकती है। 

धूर्त है बहुरुपिया है ये कोरोना तो बड़ा ही छलिया है

लखनऊ / दिल्ली । देश भर में कोरोना का खतरा आए दिन बढ़ता ही जा रहा है। रोजाना लाखों की संख्या में मरीजों की वृद्धि हो रही है। जिंदा तो जिंदा, मुर्दे भी अब लाइन में देखने को मिल रहे हैं। कोरोना वैक्सीन से लोगों को थोड़ी सी राहत जरूर मिली पर अब कोरोना के डबल म्युटेंट वैरीअंट का खतरा मंडरा रहा है। कोरोना की दूसरी लहर का कहर अभी तबाही मचा ही रहा था, इस पर यह नए वायरस की दस्तक चिंता का विषय बन गया है।

यह म्यूटेंट पहले के मुकाबले काफी संक्रामक बताई जा रही है। इस म्यूटेंट के बारे में निश्चित तौर पर कुछ भी कहना बहुत ही मुश्किल है। इस बात की अभी सही जानकारी प्राप्त नहीं हो पाई है। नए म्यूटेंट के बारे में एक्सपर्ट का यह कहना है कि यह वायरस पहले के मुकाबले काफी संक्रामक है।

न्यूज़ चैनल एनडीटीवी को दिए गए एक इंटरव्यू में डॉक्टर मधुकर पई ने कहा , “यह अन्य के मुकाबले तेजी से फैलने वाला वैरीअंट है। यह लोगों को जल्दी बीमार बना रहा है।”अगर हम अभी इस वक्त की बात करें तो देशवासियों के मन में कोरोना के डबल म्युटेंट और ब्राजील, ब्रिटेन समेत कई अन्य देशों से आए वैरीअंट चिंता का विषय बने हुए हैं। 

इस नए वैरीअंट “डबल म्युटेंट” की जानकारी कुछ महीने पहले नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल द्वारा दी गई थी। इस नए वैरीअंट को वैज्ञानिक तौर पर B.1.617 नाम दिया गया है। जिसमें दो तरह के म्यूटेशन पाए जाते हैं। पहला – E484Q और दूसरा -L452R म्यूटेशन। 

यह वायरस का वह रूप है जिसमें दो बार बदलाव हो चुका है। यह वायरस खुद के प्रभाव को लंबे समय तक बनाने के लिए अपनी जेनेटिक संरचना में लगातार बदलाव करते रहते हैं, जिससे कि उन्हें आसानी से खत्म ना किया जा सके। 

दो तरह के म्यूटेशन पाए जाने के कारण ही यह अत्यधिक खतरनाक बताया जा रहा है। अब ट्रिपल न्यूटन की भी बात सामने आ रही है। देश में बढ़ते कोरोना मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने कहा है कि वो इसके लिए सतर्क हैं।

ई का कर दियो पहलवान!

लखनऊ / दिल्ली । ओलंपिक मेडल विजेता पहलवान सुशील कुमार अब भी फरार हैं, पहले खबर आई थी कि आरोपी पहलवान सुशील कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, हालांकि बाद में पुलिस सूत्रों ने इसका खंडन किया है। सुशील पर अपने जूनियर पहलवान सागर की हत्या का आरोप है।

ओलंपिक में दो बार भारत के लिए ओलंपिक में मेडल जीत चुके हत्या के आरोपी सुशील को दिल्ली के बाद रोहिणी कोर्ट ने मंगलवार को खारिज कर दी थी। इसके बाद से दिल्ली पुलिस गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह दबिश दे रही है। पहले यह खबर आई कि सुशील कुमार की गिरफ्तारी हो चुकी है परन्तु थोड़ी देर बाद मीडिया की यह खबर झूठी साबित हुई। 

कुछ ही दिन पहले दिल्ली पुलिस ने उन पर 1 लाख और सहयोगी अजय पर 50,000 रुपए का इनाम रखा है। छत्रसाल स्टेडियम में 4 से 5 मई के बीच हुई दो गुटों की झड़प में सागर की मौत के बाद सुशील कुमार भी फरार चल रहे हैं।

मेरठ टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज में सुशील कार की फ्रंट सीट पर बैठे दिखाई दिए जबकि कार में एक और लंबा तगड़ा इंसान कार को चलाते हुए दिखाई दिया। पुलिस को कार और युवक की तलाश है। पता चला है कि सुशील हरिद्वार स्थित एक बाबा के आश्रम में रह रहा है।

बता दें कि पहलवान सागर की मौत सिर फटने से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक सागर की मौत सिर पर किसी भारी चीज पड़ने से हुई है जैसे कि किसी लोहे की रॉड या लकड़ी के डंडे से सागर के सिर पर चोट किया गया था। दूसरी तरफ सागर के शरीर में कई जगह चोट के निशान भी पाए गए हैं। तफ्तीश में सामने आया है कि सागर की फावड़े से पिटाई की गई थी। जांच में पता चला है कि दहशत फैलाने के लिए घटना स्थल पर फायरिंग भी की गई थी।

अजय दिल्ली सरकार में फिजिकल एजुकेशन के टीचर हैं। दिल्ली पुलिस ने सुशील के अलावा इस हत्याकांड में सिर्फ अजय कुमार सहरावत की गिरफ्तारी पर ₹50000 का इनाम रखा है। बक्करवाला गांव के मूल निवासी अजय के पिता सुरेश दिल्ली पुलिस में रहे हैं। पहलवान सुशील कुमार की सुरक्षा को लेकर उनकी फैमिली टेंशन में हैं।

उफ्फ कैसे बचें, पहले में बुजुर्ग दूसरे में जवान और तीसरे में बच्चे!

लखनऊ / जयपुर। विश्वव्यापी महामारी कोरोना से देश भर में हाहाकार मचा हुआ है अभी दूसरी लहर काबू में नहीं आ रही है वहीं तीसरी लहर के संकेत मिल रहे हैं| राजस्थान के दौसा जिले में कोरोना की तीसरी लहर की दस्तक के संकेत मिलते दिखाई दे रहे हैं दौसा में 341 बच्चों में कोरोना संक्रमण का प्रकोप अब तक देखा गया है।

बता दें कि 1 मई से 21 मई के बीच 341 बच्चे कोरोनावायरस संक्रमित मिल चुके हैं कोरोना संक्रमित बच्चों की उम्र 1 से 18 वर्ष के बीच की है, जिले के डीएम ने बताया है कि 341 बच्चे संक्रमित है लेकिन इनमें से किसी की हालत गंभीर नहीं है ऐसे में तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए राजस्थान सरकार काफी सक्रिय हो गई है और घर-घर सर्वे शुरू कर दिया है।

राजस्थान सरकार ने कोरोनावायरस की रोक थाम के लिए राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में तैयारी में जुट गई है स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव और घर-घर लोगों का कोविड- टेस्ट करेगी गांव में ही कोविड सेंटर बनाया जाएगा और संक्रमित मरीजों का इलाज किया जाएगा। 

ये जानना बड़ा दिलचस्प है कि 2020 में पहली लहर में अधिकतर 50 साल से ऊपर के लोग संक्रमण का शिकार हुए थे वहीं 2021 में दूसरी लहर में 31 से 50 साल की उम्र के लोग कोरोनावायरस का निशाना बने इसलिए अब विशेषज्ञ व सरकार आगाह कर चुके हैं कि तीसरी लहर में बच्चे संक्रमण का शिकार बन सकते हैं। 

Health experts और Nutritionist का मानना है कि बच्चों के लिए कोरोनावायरस की तीसरी लहर खतरनाक साबित हो सकती है और इस बड़ी समस्या का समाधान यह हो सकता है कि हम बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाएं जिससे बच्चे कोरोना से लड़ सके। 

फीलिस्तीनियों की जान, उनके जख्म और उनकी जिंदगी की कीमत पर जीत का जश्न मना रहा हमास!

लखनऊ । इजराइल हार गया! इजराइल ने हमारे आगे घुटने टेक दिये! इसलिए इजराइल ने बिना शर्त युद्ध बंदी की घोषणा कर दी! ये फीलिस्तीन के आतंकवादी संगठन हमारी का कहना है और इसी नैरेटिव पर दुनिया के हमास समर्थक जीत के जश्न में डूबे हुए हैं। 

संयुक्त राष्ट्र संघ ने हमास को आतंकवादी संगठनों की लिस्ट में शामिल कर रखा है इसलिए उसकी विचारधारा उसकी कार्यनीति और उसकी रणनीति के बारे में बात करना बेमानी है लेकिन उसके समर्थकों को सोचना चाहिए कि निरपराध फिलिस्तीनियों की किस कीमत पर उन्हें अन्तरराष्ट्रीय योद्धा संगठन की पहचान मिली है?

अगर लोकतांत्रिक सरकारों-समाजों पर आतंकवादी संगठनों की विजय ऐसे ही सेलीब्रेट होती रही तो आगे चलकर यूरोप, अमेरिका और भारत की लोकतांत्रिक सरकारों-समाजों में आतंकवादी-साम्प्रदायिक द्वेष के आधार पर अलगाववादी संगठन भारी उत्पात करेंगे ।

रिपोर्ट्स के अनुसार हमास ने मात्र 5-6 करोड रुपयों के लोकल राकेट दाग कर इजराइल को अरबों रूपयों का व्यय प्रतिरक्षा मे खर्च करने को बाध्य किये , संभव है कि इजराइल का व्यय और भी हुआ हो क्योंकि यह आगणन तो रॉकेटों मिसाइलों के आधार पर है । पर इस गणना में शांति से जीवन यापन कर रही फिलिस्तीनी समाज का कितना नुकसान हुआ है ?

यूनाइटेड नेशन्स के अनुसार उनके शरण-शिविरों में 65000 फिलिस्तीनी आश्रय ले रहे हैं । इजराइली बमबारी से फिलिस्तीनियों के 1000 घर ध्वस्त हो गये हैं, 14000 घर रहने लायक नहीं बचे । बडे स्काईक्रैपर्स को बमों से हम सबने ध्वस्त होते और आग लगते देखा है। यानी फलता-फूलता फिलिस्तीन हमास की आतंकवादी कार्रवाई के कारण खण्डहर में बदल गया है ।

रिपोर्ट यह भी है कि अस्पतालों में घायलों की भारी संख्या आ रही है । अब फिर से फिलिस्तीन को पहले जैसा फलता-फूलता खडा करने में कितना समय लगेगा कोई नहीं कह सकता। अनुमान कि 100 बिलियन डॉलर का खर्च फिलिस्तीन को पुनः खडा करने में लगेगा। यह तब सम्भव होगा जब हमास दुबारा उकसावे की कार्रवाई ना करे ।

हमास का रिमोट कन्ट्रोल किसके पास है यह चीन  ही जानता होगा। उसने पाकिस्तान में पल रहे भारत-अफगानिस्तान विरोधी आतंकवादियों की भी रक्षा की है । बहरहाल पूरी दुनिया भर के वे लोग जिन्होंने आतंकवादी हमास की तरफदारी फिलिस्तीनी जनता के बहाने की है और लोकतान्त्रिक इजराइल के विरोध में छातियों ठोंकी हैं , उन्हे बेचारे फिलिस्तीनियों की पीडा , नुकसान के बारे में भी एक नजर डालने की जरूरत है जो शांति से जीवन जी रहे थे और जीना चाहते हैं।

सुपर स्टार धनुष का शरीर उस पर आस्ट्रेलियन क्रिकेटर वॉर्नर का सिर… और राउडी राउडी, राउडी बेबी

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लखनऊ / हैदराबाद। ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर का हिंदी फिल्मों से काफी लगाव है इसका इजहार उन्होंने कई बार अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए किया है भारतीय टीम के साथ मुकाबला करने तो वह कई बार भारत आ चुके हैं किंतु आईपीएल से जुडने के बाद तो उनकी दिलचस्पी भारत को लेकर काफी बढ़ गई है।

34 वर्षीय डेविड वॉर्नर सनराइज हैदराबाद के पूर्व कप्तान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है इस वीडियो में वॉर्नर साउथ के पॉपुलर गाने पर डांस करते नजर आ रहे हैं। कोविड-19 संकट के कारण इंडियन प्रीमियर लीग का 14वां सीजन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद विदेशी क्रिकेटर वतन वापस लौट गये लेकिन डेविड वॉर्नर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं।

वॉर्नर का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है जिसमें एडिटिंग ऐप का इस्तेमाल करके साउथ के सुपरस्टार धनुष के वीडियो क्लिप पर अपना चेहरा लगाकर थिरकते दिख रहे हैं।इस बार वह साउथ के सुपरस्टार धनुष और कोई स्टार साई पल्लवी की फिल्म” मारी 2″ के गीत “राउडी बेबी” पर डांस करते हुए नजर आ रहे हैं राउडी बेबी सॉन्ग यूट्यूब पर काफी ट्रेंड कर रहा है। 

दरअसल वॉर्नर पहले भी कई साउथ इंडियन गाने पर डांस करते हुए नजर आए टिक टॉक वीडियो में वॉर्नर अपनी पत्नी के के डिनर के साथ एक लोकप्रिय दक्षिण भारतीय गीत “बुट्टा बोम्मा” पर डांस करते दिखे थे वंडर के वीडियो को उनके प्रशंसकों से बहुत प्यार मिला है। 

हैलो, मैं मुख्यमंत्री का OSD बोल रहा हूँ आपके खिलाफ जांच चल रही है!

लखनऊ । राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के स्पेशल टास्क फोर्स की टीम ने सचिवालय के पास से चार लोगों को गिरफ्तार किया है पता चला है कि यह मुख्यमंत्री योगी का विशेष कार्य अधिकारी बनकर शासन के विभिन्न विभागों में अधिकारी के तौर पर पड़ी जांच प्रकरण की धमकी देते थे बर्खास्तगी का डर दिखाकर सरकारी अफसरों से वसूली करते थे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह गिरोह अब तक सरकारी अफसरों से दो करोड़ रुपए ऐंठ चुका है। 

दरअसल आरोपी पहले अधिकारियों से मुलाकात करते फिर धौंस जमा कर ठगी करते थे इस मामले में पुलिस ने 4 लोगों को धर दबोचा है आरोपियों के नाम पर प्रमोद कुमार, अतुल शर्मा, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव और राधेश्याम कश्यप है। गिरफ्तार आरोपियों में अतुल शर्मा जो बर्खास्त समीक्षा अधिकारी है पता चला है कि अतुल शर्मा ठगी के आरोप में पहले भी जेल जा चुका है जेल से छूटने पर उसने गिरोह बनाकर फिर ठगी शुरू कर दी। 

इस संबंध में पहले भी शिकायतें मिली थी अपर मुख्य सचिव गृह एवं गोपन अवनीश अवस्थी ने जांच के आदेश दिए थे पूरे मामले की जांच स्पेशल टास्क फोर्स कर रही थी सूत्रों से जानकारी मिली है कि इस गिरोह ने फरीदपुर बरेली के प्रधानाध्यापक मुन्ने अली से ₹100000 की मांग की थी। 

एसटीएफ ने ठगों के पास से 14 मोबाइल फोन सचिवालय अफसरों की फर्जी परिचय पत्र बरामद किए हैं यही नहीं विभिन्न विभागों के अधिकारियों कर्मचारियों की लिस्ट भी बरामद की है पता चला है कि जिन अफसरों के खिलाफ शिकायत होती थी उनका पता लगा कर उन्हें अपना निशाना बनाते थे जो अफसर झांसे में आ जाता था उसे यह सचिवालय के पास बुलाते थे यहां प्रदीप और राधेश्याम के माध्यम से वसूली होती थी यही नहीं यह फर्जी जांच का आदेश भी अपने पास रखते थे। 

दो क़ातिल सात क़त्ल… क्यों शबनम बनी शोला!

लखनऊ / अमरोहा। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले की बावन खेड़ी हत्याकांड की दोषी शबनम एक बार फिर चर्चा में है उसे फांसी कब होगी यह सवाल अभी भी बना हुआ है शबनम और उसके प्रेमी सलीम पर आरोप था यह दोनों ने मिलकर 7 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।

मीडिया में शबनम की फांसी का मुद्दा उछलता रहता है लेकिन अब इस केस को लेकर बड़ा मोड़ सामने आया है की दरअसल शबनम को फांसी के फंदे तक पहुंचाने की मांग करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता दानिश खान का मन बदल गया है।

जनपद रामपुर निवासी दानिश खान सोशल एक्टिविस्ट के साथ ही आरटीआई कार्यकर्ता भी हैं यह अक्सर सूचना के अधिकार के तहत स्थानीय अधिकारियों के कार्यालयों से जुड़ी सूचनाओं के साथ ही पीएमओ राष्ट्रपति कार्यालय और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के आदेशों को लेकर भी सूचनाएं मांगते रहते हैं। 

पिछले दिनों  दानिश खान ने दोषी शबनम को शीघ्र फांसी दिए जाने की मांग की थी उसको फांसी दिए जाने को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई थी पर मीडिया का फोकस पूरी तरह से रामपुर की जेल पर रहता था कानूनी दांवपेच के चलते उसकी फांसी की तारीख टल गई थी। clicca qui

शबनम जब रामपुर की जेल में बंद थी तो शबनम का बेटा जेल में उससे मिलने आता था अपनी मां शबनम की फांसी रुकवाने के लिए राष्ट्रपति से मीडिया के माध्यम से दया की गुहार लगाई उसके बाद सोशल एक्टिविस्ट दानिश खान का मन बदल गया और  वे रिट के जरिए शबनम की फांसी की सजा को बदलने की मांग लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग पहुंचे।

दानिश खान ने 21 फरवरी को आयोग में रिट फाइल किया जिसके बाद 20 मई को उनकी रिट दर्ज कर ली गई पर महज़ 24 घंटे में ही उनकी रिट को आयोग ने यह कह कर खारिज कर दिया की यह मामला न्यायालय से जुड़ा हुआ है।

सोशल एक्टिविस्ट दानिश खान ने कहा कि वे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को भी एक पत्र लिखेंगे और यूनाइटेड नेशन को भी एक पत्र फांसी की माफी के लिए भेजा जाएगा। 

लगता है मुसीबतें लाइन लगा कर दरवाजे पर खड़ी हैं , कोरोना तो था ही अब इन्हें भी झेलिये!

लखनऊ / दिल्ली । देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर से पीछा भी नहीं छूटा था कि एक नये वायरस ने दस्तक दे दी है। बीते कुछ दिनों से फंगस नाम की बीमारी ने एक बार फिर लोगों को डराना शुरू कर दिया है हालांकि पिछले दिनों  प्रदेश में कोरोना के नए मामलों की संख्या में कमी आई है लेकिन इस बीच ब्लैक फंगस की बीमारी ने राज्य सरकारों की चिंता बढ़ा दी है।

इस संकट को देखते हुये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया है साथ ही साथ इस बीमारी से निपटने के लिए अधिकारियों को अहम निर्देश दिए हैं। बताते चलें कि देश में कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कुछ कम हुआ था कि एक और वायरस ब्लैक फंगस मानव जीवन के लिए नया खतरा बन कर सामने आ गया है।

बलैक फंगस से देश मे अब तक 6000 लोग संक्रमित हुए हैं जिनमें 140 लोगों की मौत हो हुई है, वहीं उत्तर प्रदेश मे अब तक क़रीब 150 मामले सामने आए हैं।पिछले 24 घंटों मे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी मे ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है जिनमें से चार कि मौत भी हो चुकी है । जबकि एक मरीज  स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुआ है ।

ब्लैक फंगस बीमारी के बढ़ते क़हर् को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ ने इसे महामारी घोषित कर दिया है ।

गुजरात ,तेलंगाना,आसाम, राजस्थान , ओडिशा ,पंजाब ,चंडीगढ़ के बाद उत्तरप्रदेश महामारी घोषित करने वाला आठवाँ राज्य है । मुख्य्मंत्री ने शुक्रवार को Covid-19 प्रबंधन के अधिकारियों के साथ बैठक में निर्णय लिया तथा सभी अधिकारियो को निर्देशित किया गया कि पीडितों के उपचार और दवाईयों का उचित प्रबंध किया जाए । 

Team India के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार के पिता का निधन

लखनऊ / मेरठ। भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार के पिता किरण पाल सिंह का गुरूवार को लम्बी बिमारी के बाद 63 साल की उम्र में निधन हो गया। किरण पाल सिंह लंबे समय से लिवर कैंसर की बिमारी से जूझ रहे थे। किरण पाल सिंह की मृत्यु उनके मेरठ स्थित गंगानगर आवास पर हुई। डॉक्टर के जवाब दे देने के बाद उन्हें घर लाया गया था जहां पर उन्होनें अन्तिम सांस ली।


भुवनेश्वर कुमार के पिता के लिवर कैंसर का इलाज पिछले आठ महीने से नोएडा के अस्पताल में चल रहा था। उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार ना होने के कारण डॉक्टर ने जवाब दे दिया जिसके बाद उन्हें उनके घर गंगानगर लाया गया और घर पर ही उनकी देख भाल की जा रही थी।


गौरतलब है कि मूल रूप से बुलन्दशहर के रहने वाले किरण पाल सिंह पुलिस विभाग में नौकरी करते थे। वहां से उन्होनें स्वैच्छिक रिटायरमेंट ले लिया। अपने ड्यूटी के दौरान किरण पाल सिंह मेरठ और मुजफ्फरनगर में तैनात रहे। बता दें कि उनके दो बच्चे हैं, जिनमें बेटा भुवनेश्वर कुमार और बेटी का नाम रेखा है।


किरण पाल को पिछले साल कैंसर हुआ था। भुवनेश्वर कुमार उस वक्त यूएई में सनराइजर्स हैदराबाद की तरफ से आईपीएल खेल रहे थे जब उन्हें पता चला कि उनके पिता को कैंसर है। हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद से भुवनेश्वर कुमार अपने पिता के साथ थे।


दिल्ली और नोएडा में उनकी किमोथेरेपी खी गई थी जिसके बाद उनकी हालत में सुधार हुआ था, परन्तु पिधले दो महीने पहले उनकी तबीयत फिर बिगड़ने लगी। उन्हें गंगा नगर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

Privacy Policy : WhatsApp भाई साहब, अपने काम से काम रखिये हमारे काम में दखल मत दीजिये

लखनऊ / दिल्ली। केंद्र सरकार ने वॉट्सऐप को अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी वापस लेने का निर्देश दिया है। सरकार ने वॉट्सऐप से कहा है कि प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव गोपनीयता और डाटा सुरक्षा के मूल्यों को कमजोर करते हैं तथा भारतीय नागरिकों के अधिकारों और हितों को नुकसान पहुंचाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 18 मई को कंपनी को एक पत्र लिखकर कहा कि 7 दिन के भीतर संतोषजनक जवाब न मिलने पर कानून के अनुरूप जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

संचार मंत्रालय का मानना है कि वॉट्सऐप द्वारा नई प्राइवेसी पॉलिसी को टालने का फैसला उन्हें इस बात से बरी नहीं करता कि इससे सूचना की निजता, डाटा की सुरक्षा और उपभोक्ताओं की पसंद नापसंद का ख्याल रखा जाएगा. मंत्रालय का मानना है कि जिस तरह इस नीति में बदलाव किया गया है, उससे भारत में लोगों के अधिकार, निजता और उनकी पसंद को नुकसान होगा. मंत्रालय ने यही बात दिल्ली हाई कोर्ट में भी कही है, जहां इससे जुड़े मामले की सुनवाई चल रही है।

ज्ञातव्य है कि वॉट्सऐप की प्राइवेट पॉलिसी पर यूजर्स ने अपने डाटा की गोपनीयता एवं अधिकार को लेकर चिंता जाहिर की थी. वॉट्सऐप यूजर्स ने कहा था कि नई नीति के तहत उनका डेटा वॉट्सऐप का मालिकाना कंपनी फेसबुक के साथ शेयर किए जाएगा. इसको लेकर मैसेजिंग एवं कॉलिंग सेवा देने वाले वॉट्सऐप की काफी आलोचनाएं हो रही थीं. वॉट्सऐप के एक प्रवक्ता ने बीते सप्ताह शुक्रवार को कहा था कि पॉलिसी से जुड़े अपडेट को स्वीकार न पर 15 मई को कोई खाता डिलीट नहीं किया जाएगा।

रोते हुए लड़की ने कहा, सॉरी पापा मैंने आपकी बात नहीं मानी और फंदा बना कर पंखे से झूल गयी

लखनऊ / रांची। घरेलू हिंसा का शिकार होकर एक महिला ने खुदकुशी कर ली है झारखंड के धनबाद में 21 वर्षीय कोमल पटेल नामक महिला ने बुधवार को पंखे से लटक कर खुदकुशी कर ली है  महिला ने पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है और फिर फांसी के फंदे से झूल कर आत्महत्या कर ली वायरल वीडियो में वह रो रो कर अपने पति और ससुराल वालों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगा रही है। 

दरअसल यह मामला धनबाद के धन सार थाना क्षेत्र स्थित महावीर नगर bhuda का है जहां एक रेलवे कर्मी की पत्नी का शव उसके ससुराल में पंखे से झूलता मिला वायरल वीडियो से धनबाद में सनसनी फैल गई वायरल वीडियो में कोमल रो रो कर बोल रही है कि मैं सुसाइड कर के जा रही हूं गलती की ससुराल आकर सॉरी पापा मैंने आपकी बात नहीं सुनी मुझे लगा कि पति सुधर गया पर फिर से उसने मेरे साथ मारपीट शुरू कर दी, मरने से पहले पापा से कहना चाहती हूं कि मेरे बेटे का ख्याल रखें। 


जानकारी के मुताबिक कतरास बाजार निवासी उमेश प्रसाद ने अपनी बेटी कोमल का विवाह 2018 में धनबाद निवासी आलोक कुमार जो कि ग्रुप डी रेलवे गर्मी है  उसके साथ बड़ी धूमधाम से किया था| दहेज में जेवरात घर के सभी सामानों के साथ 10 लाख नकद भी दिया गया था। 


पोस्टमार्टम के बाद कोमल का शव उसके मायके पहुंचा तो उसके घर मातम छा गया कोमल की मां और बहन रो-रोकर चीख चीख कर कोमल के पति आलोक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। मौके पर मौजूद लोगों ने कोमल की तस्वीर हाथों में लेकर उसे इंसाफ दिलाने की गुहार की है।

कोमल के पिता ने धन सार थाने में कोमल के पति आलोक प्रसाद, नंद, सास और बहनोई के खिलाफ दहेज के लिए हत्या करने का आरोप लगाया है| परिजनों परिजनों ने बताया कि शादी के बाद से ही कोमल के ससुराल वाले उसे बार-बार कार की डिमांड करते थे और उससे मारते थे घटना के बाद से ही आलोक पूरे परिवार के साथ फरार है पुलिस मामला दर्ज पुलिस मामला दर्ज कर जांच पड़ताल कर रही है। 

नेपाल : सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री के सात मंत्रियों को बर्खास्त किया

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लखनऊ / काठमांडूपड़सी देश नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने डगमगाती केपी ओली सरकार के सात मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया और सरकार के सात मंत्रियों के नियुक्ति को असंवैधानिक करार दिया।

आपको बताते चलें कि कुछ दिनों पहले यानी 13 मई को प्रधानमंत्री पद पर दोबारा नियुक्त हुए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने कैबिनेट में साथ ऐसे मंत्रियों को भी स्थान दिया था जो फिलहाल सांसद नहीं है।

सात मंत्रियों की बर्खास्तगी के झटके से प्रधानमंत्री ओली अभी उबर भी नहीं पाये थे ककि उन्हें दूसरा बड़ा झटका लगा है ओली सरकार में गृह मंत्री रहे राम बहादुर थापा को राष्ट्रीय सभा के चुनाव में पराजय मिली है।

दल बदलने के कारण थापा की सदस्यता चली गई थी जिसके बाद गुरुवार को पुनः मतदान हुआ था संसद के उच्च सदन राष्ट्रीय सभा के लिए हुए मतदान में गृहमंत्री थापा को ओली की पार्टी के बागी उम्मीदवार थीम लाल देवकोटा ने पराजित कर दिया है। 

ईश्वर शब्द नहीं बोलने पर प्रधानमंत्री होली विवादों में आ गए थे शुक्रवार को केपी शर्मा ओली ने बतौर नेपाल के प्रधानमंत्री तीसरी बार शपथ ग्रहण की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी की तरफ से दो बार ईश्वर शब्द का इस्तेमाल हुआ लेकिन पीएम ओली ने उनकी बातों को दोहराते हुए ईश्वर शब्द का इस्तेमाल नहीं किया।

लोगों की नजर में यह राष्ट्रपति और उनके पद का अपमान था इस दौरान होली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चार-चार याचिकाएं दायर कर दी गई। हालांकि विवाद पर केपी ओली को खास राहत मिली कोर्ट ने इस मामले में कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया है। 

इजराइल हमास युद्ध में पिसते बच्चे…. मैं सिर्फ दस साल की हूँ आप मुझसे क्या उम्मीद करते हैं मैं इसे कैसे ठीक करुं!

लखनऊ / यरूशलम / ग़ाज़ा।  पिछले दो हफ्ते से इजरायल फिलीस्तीन के बीच जारी खूनी जंग ने दुनिया को हिला कर रख दिया है, इस बीच फीलिस्तीन के ग़ाज़ा पट्टी की 10 साल की बच्ची का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है इसमें बच्ची रोते हुए दुनिया के सामने बड़े सवाल उठा रही है इस बच्चे की वीडियो ऐसे वक्त में  सामने आई है जब इजराइल औ फीलिस्तीन की धरती इंसानी खून से सनी हुई है बिल्डिंग्स औंधे मुंह जमीन पर गिरी पड़ी हैं चारों तरफ मुर्दा विरानी छाई हुई है। 

यह बच्ची जिस तरह अपनी बेबसी बता रही है वे पूरी दुनिया के लिए सोचने वाली बात है। वो बोल रही है, मैं नहीं जानती हूँ कि मैं क्या करूं ? ट्विटर पर इस वीडियो को बैरी Barry Malone(a Malone Barry नाम की यूज़र ने शेयर किया है इस वीडियो में Nadine Abdel Taif नाम की बच्ची बोल रही है मैं बहुत परेशान हूं मुझे नहीं पता है कि मुझे क्या करना चाहिए मैं कुछ नहीं कर सकती।

वो फीलिस्तीनी बच्ची जमींदोज बिल्डिंग्स की ओर इशारा करते हुए बोल रही है आप यह देख रहे हो, आप मुझसे  क्या करने की उम्मीद करते हैं? मैं इसे कैसे ठीक करूं, मैं सिर्फ 10 साल की हूं। मैं इससे और ज्यादा नहीं जूझ सकती।

इसराइल जहां आत्म रक्षा में लगातार फिलिस्तीन के चरमपंथी गुट हमास के ठिकानों पर हमले कर रहा है वही फिलिस्तीन का इस्लामिक चरमपंथी संगठन हमास इजराइली हमलो का पूरी ताकत से जवाब देने की कोशिश कर रहा है इस कारण यहां युद्ध जैसे हालात बन गए हैं ।

इधर  देश विदेश में कई बॉलीवुड हॉलीवुड ऐक्टर्स के बयानों के बाद अब बॉलीवुड एक्ट्रेस गौहर खान ने भी इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़़ी है गौहर खान ने खुलकर फिलिस्तीन के प्रति सपोर्ट दिखाया है और उन्होंने लोगों से इजराइल बेस्ट प्रोडक्ट्स को बॉयकॉट करने को भी कहा है। 

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्यों कहा कि कोरोना की आड़ में हत्यारों को नहीं छोड़ सकते

लखनऊ / दिल्ली। कोरोना वायरस को देखते हुए जेलों में कैदियों की संख्या को कम करने के लिये दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें उन्हें जमानत पर रिहा करने के लिए विचार करने की मांग की गई है।

इस मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि हत्या जैसे गंभीर अपराधों के लिए सजा काट रहे कैदियों को रिलीज नहीं किया जा सकता है।

आपकों बता दे यह याचिका एडवोकेट कन्हैया सिंघल और एडवोकेट ऋषभ जैन द्वारा दायर की है इस याचिका में उन्होंने उन कैदियों की आवाज उठाते इस बात को रखा है कि यदि जेल में कोरोना वायरस महामारी होता है, तो यह बहुत बड़ी संख्या को प्रभावित करेगा और यह कोरोना वायरस फैलाने का केंद्र बन सकता है।

याचिका में कहा गया कि जेल में बंद कैदियों की संख्या अत्यधिक बढ़ी हुई ऐसे में कोरोना संक्रमण फैलने का डर हैं वही दिल्ली सरकार की तरफ साफ कर दिया गया है कि दिल्ली की सभी जेलों में विचाराधीन कैदी और सजा काट रहे कैदियों के लिए कोविड का टेस्ट कराने की सुविधा उपलब्ध है मौजूदा हालत को देखते हुए कैदियों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

आपको बताते चलें इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट का कहना की कई ऐसे अपराधी जिन पर कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं अगर उन्हें जमानत दे दी जाए तो यह इस समाज के लिए ठीक नहीं होगा। 

बोला था ना कि जिंदगी तूफान के खत्म होने के इंतजार करने के लिए नहीं बल्कि बारिश में डांस सीखने के लिए है!

लखनऊ / मुंबई। भारत एक तरफ कोरोना वायरस के दूसरी लहर से घिरा हुआ है तो दूसरी तरफ taute तूफान ने देश में तबाही मचा रखी है। इस तूफान ने महाराष्ट्र गोवा गुजरात में दस्तक दे दी है कई लोगों की इस तूफान ने जान ली है और कई जगह पेड़ टूटकर गिरे हुए हैं देश इस समय संकटों से घिरा हुआ है फिर भी जिंदगी चल रही है।

इसी बीच छोटे पर्दे की मशहूर टीवी एक्ट्रेस दीपिका सिंह ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर टूटे हुए पेड़ के बीच बारिश में भीगते हुए पॉज के फोटो शेयर किये है, सोशल मीडिया यूजर तेजी से दीपिका की इस फोटो को ट्रोल कर रहे हैं दीपिका सिंह ने इन फोटो को शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन के साथ एक अहम मैसेज दीया है “आप तूफान को शान्त नहीं कर सकते हैं तो इसे ट्राई करना बंद कर दें आप खुद को शांत करने की कोशिश करें प्रकृति से प्यार करें और उसके मूड को सहन करने की कोशिश करें क्योंकि तूफान एक दिन चला जाएगा।

पोस्ट में लिखा है कि यह पेड़ मेरे घर के बाहर गिरा है और इसने किसी को चोट नहीं पहुंचाई है अपने दरवाजे से तो इसे दूर नहीं कर सकती एकदम, लेकिन रोहित और मैंने इसके साथ कुछ तस्वीरें लेने की कोशिश जरूर की है जिस से तोक्ते तूफान को हम याद रख सके। “इस फोटो में दीपिका ने पिंक रंग की स्क्रिप्ट ड्रेस पहनी हुई है दीपिका फोटो में काफी रिफ्रेशिंग नजर आ रही है।

आपको बताते चलें कि दीपिका स्टार प्लस के” दिया और बाती”” हम” सीरियल की लीड एक्ट्रेस रह चुकी है घर-घर में दीपिका संध्या नाम से मशहूर है दीपिका ने डांस वीडियो भी शेयर किया है उन्होंने कैप्शन में लिखा है कि “बोला था ना जिंदगी तूफान के खत्म होने का इंतजार करने के लिए नहीं है बल्कि बारिश में डांस सीखने के लिए है “

सोशल मीडिया पर उनकी वीडियोस और फोटोस को जमके टोल किया जा रहा है एक यूजर ने लिखा है कि इस तरह से वीडियोस प्रमोट मत करो बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है कई यूजर ने रिप्लाई किया है कि इस तूफान में कई लोग मर रहे हैं और आप जैसे लोग एंजॉय कर रहे हैं सोशल मीडिया पर दीपिका सिंह काफी एक्टिव रहती है उनके करीब 2 मिलीयन फॉलोअर्स है। 

सुशांत केस : कंगना के बाद अब किस कॉमेडियन को है रिपोर्ट का इंतजार!

लखनऊ / मुंबई। बॉलीवुड ऐक्टर सुशांत सिंह राजपूत को गुजरे साल भर होने को आ रहे हैं लेकिन उनकी मौत को मर्डर मिस्ट्री मानने वालों को अभी भी उनके मौत के खुलासे का इंतजार है। सुशांत की मौत को साजिश करार देने वाली बॉलीवुड ऐक्ट्रेस एवं नेशनल अवार्ड विनर कंगना रनौत के अलावा चरित्र अभिनेता एवं चर्चित टीवी कॉमेडियन शेखर सुमन को भी सुशांत की मौत में साजिश नजर आती है।

उन्होंने कहा कि एक उभरते हुए होनहार अभिनेता का असमय चले जाना दुखद है और वे चाहते हैं कि सुशांत का सच देश के सामने आना चाहिये उनका मानना है कि सुशांत सिंह राजपूत केस की तफ्तीश ठीक चल रही है लेकिन पिछले कुछ समय से इसकी गति में रुकावट आई है उन्होंने कहा शायद इसकी वजह कोरोना हो। 

 

आपको बताते चलें कि बॉलीवुड के राइजिंग स्टार सुशांत सिंह राजपूत का पिछले साल निधन हो गया था इस खबर से बॉलीवुड और नशे के कारोबार के घालमेल पर मीडिया में खूब चर्चा हुई थी लेकिन सबसे ज्यादा धक्का हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को लगा क्योंकि सुशांत सिंह राजपूत की फिल्मों पर फाइनेंस कंपनियों का करोड़ों का निवेश था। 

 

सुशांत के फैंस के अलावा समाज के हर तबके ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया था, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्विटर पर लिखा कि लोकप्रिय अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का यूं अचानक चले जाना हिंदी फिल्म जगत और उनके चाहने वालों के लिए अत्यंत दुखद एवं स्तब्धकारी है। 

यूं तो सुशांत ने कई फिल्मों में अभिनय किया कुछ बेहद शानदार विज्ञापनों में नजर आये लेकिन फिल्म धोनी में उनका अभिनय हमेशा याद रखा जायेगा ।

उनकी मौत को मर्डर मिस्ट्री की तरह देखने वाले उनके फैंस ने हैशटैग जस्टिस फॉर सुशांत के नाम से कई सारे कैंपेन चलाएं और युटुब फेसबुक टि्वटर पे भी अपना दर्द बयां किया मगर यह मिस्ट्री अभी तक अधूरी पड़ी है लेकिन उनके फैंस को जल्दी से जल्दी उस तथाकथित मर्डर मिस्ट्री के खुलासे का इंतजार है। 

कोरोना न देखे राजपाट, कोरोना न देखे टूटी खाट..उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री का कोरोना से निधन

लखनऊ । उत्तर प्रदेश मे कोरोना काा कहर बढ़ता जा रहा है सरकारी आंंकड़ा चाहे कुुुछ भी हो लेकिन कोरोना से लगातार मौतें हो रही हैं  उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री मंत्री की मंगलवार को कोरोना से मौत हो गई।  राज्य मंत्री विजय  कश्यप 20 मई को कोरोना पॉजिटिव हुए थे और वे गुडगांव के मेदांता में भर्ती थे और लंबे समय से उनका इलाज चल रहा था, कश्यप की मौत ने ये साफ कर दिया है कि कोरोना का संक्रमण अभी थमा नही है बल्कि सााामुदायिक  संंक्रमण  का रुप  ले चुका है। 

इससे पहले बीजेपी के 4 विधायको की मौत हो चुकी है विजय कश्यप के निधन से भाजपा में शोक  का माहौल है भाजपा विधायक विजय कश्यप लंबे समय से मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती थे उन्होंने मंगलवार को अंतिम सांस ली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई तमाम नेताओं ने विजय कश्यप को श्रद्धांजलि दी। पिछले विधानसभा चुनाव में श्री कश्यप  मुजफ्फरनगर जिले की चरथावल सीट से विधायक चुने गए थे। 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व एवं बाढ़ नियंत्रण राज्यमंत्री विजय कुमार कश्यप के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है मुख्यमंत्री ने कहा कि विजय कुमार कश्यप एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि थे प्रदेश सरकार के मंत्री के रूप में उन्होंने सदैव अपने दायित्वों का कुशलपूर्वक निर्वहन किया।

उन्होंने कहा कि कश्यप के निधन से जनता ने अपना एक सच्चा हितैषी खो दिया है मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शान्ति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। 

क्या आप दिल्ली में रहते हैं? क्या आप कोरोना पीड़ित हैं? क्या आप के घर में कोरोना से कोई मर गया है? हॉ जी हॉ… तो लीजिये पेंशन और राशन

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने मंगलवार को कई अहम घोषणाएं की। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कोविड महामारी से परेशान दिल्ली की जनता को कुछ राहत देने की कोशिश में कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए। अऱविन्द केजरीवाल ने घोषणा की, कहा कि कोरोना महामारी की वजह से मरने वाले लोगों के प्रत्येक परिवार को दिल्ली सरकार 50,000 रूपए मुआवजे के तौर पर देगी।

दिल्ली सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक यदि किसी परिवार में कमाने वाले व्यक्ति की मृत्यु होती है तो सरकार उस परिवार को मुआवजा देगी और मुफ्त राशन की सुविधा दी जाएगी। इसके साथ ही प्रति माह 2500 रूपए का पेंशन भी दिया जाएगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन बच्चों के माता-पिता की मृत्यु कोविड की वजह से हुई है, जो बच्चे अनाथ हुए हैं, उन बच्चों को 25 वर्ष का होने तक 2500 रूपए की धनराशि प्रत्येक महीने दी जाएगी। इसके साथ ही उनकी शिक्षा की सुविधा भी मुफ्त होगी।

दिल्ली सरकार ने फैसला लिया है कि यदि पति की मृत्यु होती है तो पेंशन पत्नी को दिया जाएगा, पत्नी की मृत्यु होने पर पति को, अविवाहित व्यक्ति की मृत्यु पर माता-पिता को और पिता की मृत्यु पर बच्चों को प्रति माह 2500 रुपए पेंशन दिया जाएगा।

दिल्ली सरकार ने मुफ्त राशन वितरित करने का भी फैसला लिया है। उनके मुताबिक दिल्ली मे कुल 72,00,000 राशन कार्ड धारक हैं, इसके अलावा कई लोग ऐसे भी हैं जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। दिल्ली सरकार ने बताया कि मुफ्त राशन की सुविधा उन लोगों को भी दी जाएगी जिनके पास कार्ड नहीं है। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि यदि कोई कहता है कि वो गरीब है और उसके पास राशन कार्ड नहीं है तो उसे भी राशन दिया जाएगा।

अब तक केन्द्र सरकार की तरफ से लोगों को प्रत्येक महीने 5 किलो राशन मुफ्त में मुहैया कराया जाता था परन्तु दिल्ली सरकार की इस घोषणा के बाद अब उन्हें 10 किलो राशन हर महीने मुफ्त में मिलेगा।

कहासुनी या कानाफूसी! कोरोना, केजरीवाल और केंद्र सरकार

लखनऊ / दिल्ली।  अभी भारत कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा है कि सिंगापुर में कोरोना का नया रुप सामने आ गया है। इसे बच्चों के लिए बेहद खतरनाक बताया जा रहा है बताया तो यह भी जा रहा है कि कोरोना का ये नया म्यूटेंट भारत में तीसरी लहर के रूप में आ सकता है। 

सिंगापुर में  कोरोना वायरस के नये स्‍ट्रेन ने दहशत फैला दी है। वहां बुधवार से स्‍कूल बंद किए जा रहे हैं। यह नया स्‍ट्रेन बच्‍चों को ज्‍यादा प्रभावित कर रहा है। सिंगापुर के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ओंग ये कुंग ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा कि B.1.617 ‘बच्‍चों को ज्‍यादा प्रभावित करता दिख रहा है।’ यह स्‍ट्रेन सबसे पहले भारत में पाया गया था।

प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के दौरान, सिंगापुर के शिक्षा मंत्री ने कहा, ‘इनमें से कुछ म्यूटेंट ज्यादा संक्रामक हैं और वे छोटी उम्र के बच्‍चों पर हमला कर रहे हैं। यह हम सबके लिए चिंता की बात है।’ हालांकि उन्‍होंने यह जरूर कहा कि जितने बच्‍चे संक्रमित हुए हैं, उनमें से किसी की हालत गंभीर नहीं है उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए भी वैक्सीन के विकल्पों पर प्राथमिकता के आधार पर काम होना चाहिए।

धर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से अपील की है कि सिंगापुर के साथ हवाई सेवाएं तत्काल प्रभाव से रद्द हों, साथ ही साथ बच्चों के लिए भी वैक्सीन के विकल्पों पर प्राथमिकता के आधार पर काम हो।

इससे पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा कि आने वाले वक्त में बच्चों को कोरोना से सुरक्षा चाहिए होगी।बच्चों के इलाज की सुविधाएं, वैक्सीन के प्रोटोकॉल अभी से ही तय हो जाने चाहिए।राहुल गांधी ने केंद्र पर हमला करते हुए लिखा कि भारत के भविष्य के लिए वर्तमान के मोदी सिस्टम को नींद से जागने की ज़रूरत है।

आपको बताते चलें कि कोरोना की दूसरी लहर भले ही ढलान पर है, लेकिन खतरा और बढ़ गया है. तीसरी लहर से पहले ही कोरोना की चपेट में बच्चे आ रहे हैं. बीते दिनों दिल्ली में दो बच्चों की मौत भी हो गई थी. बच्चों पर मंडराते खतरे को देखते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से सिंगापुर आने-जाने वाली फ्लाइट तुरंत बंद करने की मांग की है। 

आओ, तुम भी चलो हम भी चलें सब चलें, कोरोना को भगाने निकल पड़ें

लखनऊ / मुंबई। विश्वव्यापी महामारी का रूप धारण कर चुके कोरोना वायरस ने पिछले साल भर से लोगों की नाक में दम कर रखा है पूरी जिंदगी अस्तव्यस्त हो गयी है आये दिन लॉकडाउन की पाबंदिियों और कोरोना प्रोटोकॉल की वजह से जिंदगी तंग सी लगनेे लगी है। कमाई की तो बात ही क्या करना, मरीीजों की दवाई और बच्चों की पढ़ाई पर भी ताले लटक गये हैं। 

कोरोना की दूसरी लहर पहले से ज्यादा घातक बन कर हमारे सामने आई है। तेजी से लोग इसके चपेट में आ रहे हैं और उनको अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है इस बार एक दिलचस्प आंकड़ा देखने में आया है कि जवान लोग भी इस वायरस से असमय ही काल कवलित हो रहे हैं। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि यंग लोगों की प्रतिरोधक क्षमता सशक्त होती है इसलिए वो बीमारियों से ज्यादा कारगर ढंग से मुकाबला कर सकते हैं लेकिन कोरोना ने इस थियरी को भी मिथ्या साबित किया है।

स कठिन समय में गरीबों एवं जरूरतमंदों की मदद के लिए सामाजिक, राजनीतिक एवं धार्मिक संगठनों के साथ साथ बॉलीवुड एक्टर्स भी आगे आये हैं। व्यक्तिगत रूप से बात करें तो अक्षय कुमार ने पीएम केयर फंड मे करोड़ों रुपये का चंदा दिया है आमिर खान एवं सलमान खान ने कोरोना से निपटने के लिए सामुदायिक क्षेत्र में काफी सहयोग किया है। 

वहीं बॉलीवुड ऐक्टर सोनू सूद तो कोरोना के मैन ऑफ द महामारी बन कर उभरे हैं बस एक ट्वीट कीजिये या किसी तरह से उन तक अपनी पुकार पहुंचा दीजिये तो सोनू सूद मदद के लिए सबसे पहले पहुंचने वालों में से होते हैं। चाहे जरूरतमंदों तक आक्सीजन सप्लाई करना हो या रोजगार के लिए पहल करना सोनू सूद हर जगह लोगों के साथ खड़े नजर आते हैं। 

कोरोना महामारी में धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों ने यथासंभव मदद की है  सिख समुदाय ने बड़ी पहल करते हुए देश के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में अपने गुरुद्वारों को कोवीड 19 हेल्थसेंटर के रूप में तब्दील किया है।

वहीं जाने माने एक्टर आदिल हुसैन ने भी इस मुश्किल दौर मे एक मांग की आदिल हुसैन ने मुस्लिम धार्मिक संगठनों एवं मदरसा प्रबंधकों से मांग की है कि वो भी कोरोना से मुकाबले में आगे आयें औ गुरुदारो की तरह मस्जिदों में कोविड हेल्थसेंटर के रूप में फैसिलिटी होनी चाहिए मस्जिदों को भी कोविड सेंटर में तब्दील किया जााये। 

Dr KK Aggrawal passes away

लखनऊ / दिल्ली। डॉक्टर अग्रवाल पिछले सालभर से कोरोना महामारी (Covid-19 Pandemic) पर वीडियो पोस्ट कर रहे थे और बीमारी के विभिन्न पहलुओं और उसके प्रबंधन के बारे में लोगों को जागरूक कर रहे थे. उनके ट्विटर एकाउंट से ही उनके निधन की सूचना दी गई।

इस कोरोना काल ने असमय ही न जाने कितने लोगों के सगे संबंधी छीन लिए. हर तरफ गम और बेबसी का मानो गुबार-सा आ गया है. इन्हीं अंधेरे में डूबे दिनों में बीते कुछ माह से एक रौशनदान की तरह दिल्ली के डॉ केके अग्रवाल इलाज और काउंसिलिंग के जरिये उदास और बीमार दिलों की रौशनी बन गए थे. मगर, आज वो किरन भी अनंत सूर्य में समा गई।

डॉक्टर अग्रवाल पिछले सालभर से, वह कोविड महामारी पर वीडियो पोस्ट कर रहे थे और बीमारी के विभिन्न पहलुओं और इसके प्रबंधन के बारे में बात कर रहे थे. उनके ट्विटर प्रोफाइल पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा गया है कि उन्होंने सोमवार को रात 11.30 बजे इस महामारी के कारण दम तोड़ दिया. उन्हें एक सप्ताह से वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। 

डॉ. के के अग्रवाल अपने पेशे की वजह से तो पूरे देश में मशहूर थे वहीं वो अपनी नेकदिली के लिए भी जाने जाते थे. कोरोना काल के दौरान उन्होंने हजारों लोगों की मदद की. गरीबों और कमजोर तबके के मरीजों का उन्होंने मुफ्त में इलाज किया।

डॉक्टर अग्रवाल हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रमुख भी थे. उन्हें 2005 में डॉ बीसी रॉय पुरस्कार और 2010 में पद्मश्री मिला था. उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली में की और नागपुर विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी। 

पहलवान सुशील कुमार फरार… कितने इनाम रखे हैं रे दिल्ली पुलिस ने हम पर!

लखनऊ / दिल्ली। भारतीय पहलवान और दो बार के ओलम्पिक विजेता सुशील कुमार के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने गैर-जमानती वारन्ट जारी किया है। पहलवान सुशील कुमार और अन्य 9 लोगों के ऊपर 23 साल के जुनियर राष्ट्रीय रेसलर विजेता सागर राणा की हत्या में लिप्त होने के आरोप में केस दर्ज किया गया है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार दिल्ली पुलिस ने सुशील कुमार को गिरफ्तार करवाने के लिए इनाम भी रखा है।

सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने कोर्ट में सुशील कुमार और अन्य आरोपियों के खिलाफ नॉन-बेलेबल एप्लिकेशन फाइल किया था, जिसे कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। पुलिस ने बताया कि उन्होनें दिल्ली सरकार को भी इसकी जानकारी दे दी है जिसमें सुशील कुमार के साथ उनके फिजीकल एजुकेशन के अध्यापक अजीत कुमार का भी नाम है।

पुलिस ने बताया है कि उन्हें जानकारी मिली है कि इस हफ्ते पहलवान सुशील कुमार इस वक्त हरिद्वार के एक योगा गुरू आश्रम में रूके हुए हैं। सोमवार को पुलिस ने दो बार के ओल्मपिक विजेता सुशील कुमार के लिए लुक आउट सर्कुलर जारी किया है जो कि 4 मई के वारदात के बाद से ही लापता हैं।

पुलिस के मुताबिक वो आरोपी अजीत कुमार को पकड़ने के लिए दिल्ली-एनसीआर इलाके और आस-पास के राज्यों में रेड भी मार रही है। पुलिस पूरी कोशिश कर रही है कि आरोपी को पकड़ा जा सके। पीड़ित दल का कहना है कि घटना के समय अजीत कुमार वहीं पर मौजूद था।

बता दें कि मामला दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम का है जहां पर 23 साल के राष्ट्रीय चैम्पियन सागर राणा को पिटाई में गहरी चोट लगने के कारण मृत्यु हो गई थी। दरअसल दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम के पार्किंग एरिया में दो ग्रुपों के बीच लड़ाई हो गई थी। बात इस हद तक बढ़ गई कि दोनों गुटों में मारपीट की नौबत आ गई।

छपास के चक्कर में शासकीय अनुशासन ताक पर रखे कोरोना वैज्ञानिक, देना पड़ा इस्तीफा

लखनऊ / दिल्ली। कोरोना के अलग-अलग रूपों की पहचान करने के लिए केंद्र सरकार ने जिस वैज्ञानिक सलाहकार समिति का गठन किया था, उसके अध्यक्ष सीनियर वायरोलॉजिस्ट डॉ शाहिद जमील ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

डॉ जमील ने हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स में एक लेख में भारत के कोविड-19 प्रबंधन की आलोचना की थी. उन्होंने कम टेस्टिंग, वैक्सीनेशन की धीमी गति, वैक्सीन की कमी और हेल्थकेयर वर्कर्स की जरूरतों को लेकर सवाल उठाए थे. उन्होंने हाल ही में कहा था, “दूसरी लहर को खत्म होने में जुलाई तक का वक्त लग सकता है. कोविड की लहर चरम पर है, लेकिन ये कहना जल्दबाजी होगा कि की पीक खत्म हो चुका है। 

पिछले महीने डॉ जमील ने पीटीआई से बातचीत में कहा था कि अगले कुछ महीनों में वायरस के वेरिएंट और वैक्सीनेशन की स्थिति भारत और विश्व में कोविड का भविष्य तय करेगी। उन्होंने कहा था, तथ्य यह है कि संक्रमण की पहली लहर के समाप्त होने के बाद लोगों ने सावधानी बरतना कम कर दिया और कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जोकि निश्चित तौर पर मामलों में उछाल का एक कारण है।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट कर लिखा कि INSACOG जो कि सरकार की वैज्ञानिक सलाहकार समिति है, उसके प्रमुख एस. जमील ने इस्तीफा दे दिया. INSACOG ने ही पीएमओ को मार्च की शुरुआत में कोरोना के इंडियन म्यूटेंट के बारे में चेतावनी दी थी। 

गर ऐसा हो जाये तो हिन्दुस्तान-पाकिस्तान अफगानिस्तान, यूरोप से भी अमीर हो जायें!

दि जर्मनी के अखबार ‘डेर स्पीगल’ में छपी यह खबर सही है तो मानकर चलिए कि अब अफगानिस्तान ही नहीं, पूरे दक्षिण एशिया के अच्छे दिन आने ही वाले हैं। जो बात मैं पिछले 25-30 साल से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों से कहता रहा हूं, उसके परवान चढ़ने के लक्षण अब दिखाई पड़ने लगे हैं। तीन दिन पहले मैंने लिखा था कि पाकिस्तान के सेनापति क़मर जावेद बाजवा अचानक काबुल क्यों पहुंच गए हैं। अब मालूम पड़ा है कि वे अशरफ गनी और डाॅ. अब्दुल्ला की सरकार से तलवार भिड़ाने नहीं, हाथ मिलाने गए हैं।

बाजवा ने अफगान नेताओं से कहा है कि अफगानिस्तान में इस्लामी अमीरात या तालिबान का राज फिर से कायम होना न तो दक्षिण एशिया के लिए अच्छा है और न ही पाकिस्तान के लिए। पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली आदमी के मुंह से अगर यह बात निकली है तो इससे अधिक खुशी की बात क्या हो सकती है। पाकिस्तान की छत्रछाया में ही तालिबान आंदोलन पनपा है।

1983 में जब मैं पहली बार पेशावर के जंगलों में मुजाहिदीन नेताओं से मिला था तो वह मुलाकात राष्ट्रपति जनरल जिया-उल-हक के कहने से ही हुई थी। उन्हीं में से कई तालिबान नेता बन गए। अब पाकिस्तान में तरह-तरह के तालिबान हैं। कोई क्वेटा शूरा है, कोई पेशावर शूरा है और कोई मिरानशाह शूरा है। अफगानिस्तान में भी तालिबान के कई स्वायत्त गिरोह हैं। मेरी अफगानिस्तान और पाकिस्तान-यात्राओं के दौरान इन तालिबानियों से मेरा बराबर संपर्क बना रहा है। 1999 में हमारे अपहत जहाज को कंधार से छुड़वाने में भी इन तालिबान और मुजाहिदीन नेताओं ने हमारी मदद की थी।

वे मूलतः भारत-विरोधी नहीं हैं। वे पाकिस्तान के कारण अभी भारत का विरोध करते रहे हैं। वे स्वायत्त और स्वेच्छाचारी हैं। वे सत्ता में आते ही पाकिस्तान के ‘पंजाबी राज’ को धता बता सकते हैं। पाकिस्तान को यह बात समझ में आ गई है। इसीलिए काबुल की जो गनी-सरकार एकदम भारतपरस्त लग रही थी, अब पाकिस्तान उससे संबंध सुधार रहा है। अशरफ गनी ने भी साफ़-साफ़ कहा है कि अफगानिस्तान में शांति रहेगी या अराजकता, यह पाकिस्तान के हाथ में है।

यह बात मैं अपने प्रधानमंत्रियों से पिछले 40 साल से कहता रहा हूं। यदि भारत पाकिस्तान को आगे करे और खुद पीछे चले तो अफगानिस्तान को दोनों राष्ट्र मिलकर दक्षिण एशिया का स्विटरजरलैंड बना सकते हैं। मुझे खुशी है कि भारत और पाकिस्तान के अफसर गोपनीय तौर पर इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देशों के गुप्तचर विभाग दुबई आदि शहरों में गुपचुप मिल रहे हैं।

भारत कश्मीर पर बात करने से मना नहीं करेगा और पाकिस्तान भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया के राष्ट्रों तक पहुंचने के लिए थल मार्ग उपलब्ध कराएगा। यदि ऐसा हो जाए तो अगले दस वर्षों में दक्षिण एशिया यूरोप से भी अधिक संपन्न हो सकता है। मुझे ऐसा लगता है कि यदि भारत और पाकिस्तान मिलकर अफगान-संकट को हल कर लें तो कश्मीर का मसला तो अपने आप ही हल हो जायेगा। 

चक्रवाती तूफान की दस्तक, केरल गोवा महाराष्ट्र के तटीय इलाकों को खाली कराया जा रहा

लखनऊ / दिल्ली। भारत के तटीय इलाकों में चक्रवाती तूफान के दस्तक देने से राज्यों को अलर्ट कर दिया गया है केरा गुजरात गोवा और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों को खाली कराया जा रहा है आशंका है कि चक्रवात  3 दिनों तक तटीय इलाकों पर आफत मचा सकता है मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि 17 मई को मुंबई सहित कुछ इलाकों में तेज हवाएं चलने के साथ ही बारिश होने की भी संभावना है अनुमान लगाया जा रहा है कि इस दौरान हवाओं की रफ्तार 150 से 160 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। 

चक्रवाती तूफान से बढ़ते खतरे को देखकर प्रधानमंत्री मोदी ने हाई लेवल मीटिंग रखी और तूफान से बचाव के लिए किए जा रहे हैं प्रबंधों का निरीक्षण किया प्रधानमंत्री मोदी ने राहत बचाव कार्य और लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने का आदेश दिया चक्रवात तौकते को देखते हुए भारत की वायु सेना भी पूरी तैयारी में हैं वायुसेना ने अपने 16 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और अट्ठारह हेलीकॉप्टर को उड़ान के लिए तैयार रहने के लिए कहा है। 

मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार चक्रवाती तूफान तौकते मांगरोल जो कि गुजरात के वेरावल और और बंदर के बीच स्थित है से टकराएगा चक्रवर्ती तूफान के दस्तक देने से लोगों की मुसीबत और भी बढ़ गई है तूफान को देखते हुए नेशनल डिजास्टर रिश्ते को फोर्स और समुद्री इलाकों में कोस्ट गार्ड को अलर्ट पर रखा गया है साथी तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा रहा है मछुआरों को भी मछली पकड़ने और समुद्री तट पर ना जाने की हिदायत दी गई है। 

मुंबई के कोविड-19 से पीड़ित मरीजों को सुरक्षित जगह ले जाया जा रहा है क्योंकि आशंका है कि तूफान के तटीय इलाकों से टकराने पर अस्पताल को नुकसान हो सकता है गुजरात में भी इसके साथ ही बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स को कच्छ भारत-पाक बॉर्डर पर चौकन्ना रहने के लिए कहा गया है अनुमान है कि मौके का फायदा उठाकर पाकिस्तान भारत के घुसपैठ की कोशिश कर सकता है बीएसएफ फोर्स ने बॉर्डर पर अपनी पेट्रोलिंग बढा दी है। 

सास बहू : श्रीमती गॉधी और श्रीमती गॉधी!

श्रीमती इंदिरा गांधी और श्रीमती सोनिया गांधी मे कई समानता हैं। दोनों एक ही वंश की हैं, दोनों ने लम्बे समय तक सत्ता सुख भोगा और अपवाद जाने दें तो कुल मिला कर कानून सम्मत शासन ही किया। और सबसे बड़ी बात भारत को सम्पन्न बनाने मे दोनों का ही खासा योगदान है। लेकिन एक बड़ा फर्क भी है दोनों मे। इंदिरा गांधी पूरी ट्रेनिंग के बाद सायास राजनीति मे आई और सोनिया को समय ने राजनीति की राह दिखा दी। नेहरू जी ने अपनी एकमात्र कन्या इंदिरा के पालन पोषण मे खासी दिलचस्पी ली, लेकिन उस समय नेहरू का ही भविष्य तय नही था तो इंदिरा के राजनीति मे जाने की बात करना ही बेमानी था, लेकिन उस राजनैतिक महौल मे इंदिरा गांधी रच बस तो रही ही थीं। 

ऐसे मे किसी भी दूसरी लड़की की तरह इंदिरा ने पढ़ा ई पूरी करने के बाद शादी की और घर बसाया और अपने बच्चों मे व्यस्त हो गई। तब तक समय बदल गया और नेहरू प्रधानमंत्री बन गए। यह इंदिरा गांधी के जीवन मे भी निर्णयक मोड रहा। एकमात्र कन्या होने के नाते विधुर पिता की देखभाल के लिए वो भी उन के साथ ही रहने लगी। अब इंदिराजी भी राजनीति के केन्द्र मे थीं और निर्णायक नही लेकिन सहायक भूमिका मे तो आ ही गई थीं। इसी मोड पर यह तय हो गया की अब इंदिरा गांधी को भी राजनीति ही करनी है। नेहरू जी के मिजाज के विप रीत इंदिरा गांधी थोड़ा एकाधिकार वादी थीं। १९५९ मे केरल की सरकार गिरा कर उन्होंने यह जता भी दिया था। 

बहरहाल नेहरू जी के काल मे इंदिरा जी सहायक भूमिका मे ही रही और उनके बाद प्रधानमंत्री बने शास्त्रीजी ने भी उन्हें कोई बड़ी भूमिका नही दी। भाग्य इंदिराजी पर मेहरबान हुआ शास्त्री जी की मौत के बाद, जब कामराज की मदद से १९६६ मे वो प्रधानमंत्री बनी। समय पूरी तरह से उनको परास्त करने के लिए कमर कसे हुए था। चीन और पाक से हुए युद्ध से बदहाल देश अनाज की कमी से भी खस्ता हाल था। और भी चुनौतियां थीं। नौ राज्यों मे विपक्ष की सरकार बन चुकी थी और कांग्रेस के खत्म होने की बात होने लगी थी। उन सबका ज़िक्र यहाँ जरूरी नही, जरूरी वो है जो इंदिरा जी ने किया।

१९६६ मे सत्ता मे आने के मात्र आठ साल बाद १९७४ मे ऐटम बम का परीक्षण कर इंदिरा जी ने देश को एक भुखमरे राष्ट्र से शक्तिशाली राष्ट्र मे बदल दिया। इस के पहले १९७१ मे वो पाक से लड़ाई जीत कर बंगला देश बनवा चुकी थीं। इंदिरा जी की और भी तमाम सफलता रही साथ ही १९७१ का आम चुनाव जीत कर वो देश की सबसे शक्तिशाली महिला बन गई, कांग्रेस को भी संजीवनी मिली और वो फिर से पूरे देश पर काबिज हो गई। 

इसी समय इंदिरा जी को अपने तब तक के राजनैतिक जीवन की सबसे बडी चुनौती मिली। १९७४ मे गुजरात से शुरू हुआ आन्दोलन पूरे देश मे फैल गया और उसी समय हाई कोर्ट के एक फैसले ने इंदिरा जी के चुनाव को अमान्य कर दिया। इसी मौक़े पर जय प्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी के विरोध मे आंदोलन शुरू किया।

आर एस एस जो १९४७ से ही कांग्रेस के विरोध मे था, उसने भी इस अराजकता मे अवसर देखा और जय प्रकाश जी को पूरा सहयोग दिया, अब एक तरह से जय प्रकाश जी के आन्दोलन की कमान आर एस एस के हाथों मे थी। इंदिराजी का मानना था की आर एस एस की नीतियां देश के लिए घातक हैं , इसलिए उन्होंने आपात काल लगा कर विरोध को कुचल दिया। हालांकि १९७७ का चुनाव इंदिरा जी हार गई। जनता पार्टी की सरकार बनी लेकिन १९८० मे ही इंदिरा जी फिर से चुनाव जीत कर प्रधानमंत्री बनी।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता

राजनीति मे रची बसी होने के नाते इंदिरा जी, जय प्रकाश जी की आड़ मे खड़े आर एस एस को पहचान गई और उसे करीब २० साल तक और देश की सत्ता तक पहुंचने से रोक दिया। लेकिन भाग्य पर इंदिरा जी का भी बस नही था। संजय गांधी और फिर खुद इंदिरा जी की मौत ने राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बना दिया। उनके भी असमय काल के गाल मे जाने पर कमान नरसिंह राव को मिली। उन्होंने देश को नई दिशा तो दी लेकिन कई कारणों से कांग्रेस संगठन के लिए कुछ नही कर पाए।

अब टूटा फूटा जैसा भी था संगठन सोनिया गांधी ने संभाला। विरासत मे मिली राजनीति से सोनिया सतर्क थी, उन्हे अपनी कमजोरी पता थी इसलिए हर महत्व पूर्ण मसले पर वे खासा विचार विमर्श करती थीं। इधर कांग्रेस विरोधी मानने लगे थे की पार्टी के दिन पूरे हुए। कुछ उनकी गफ्लत, कुछ इंदिरा जी की विरासत और कुछ सोनिया गांधी की मेहनत, दिल्ली फिर से कांग्रेस की हुई। 

श्री राजीव गाँधी

अपनी कमियो से वाकिफ सोनिया , मनमोहन सिंह को ले आई और एक दशक तक देश ने सम्पन्नता का नया कालखंड देखा।लेकिन इसी कालखंड मे कांग्रेस विरोधी खास तौर से आर एस एस और भाजपा अपना धीरज खो बैठे और उन्होंने १९७५ जैसी चालों से कांग्रेस को हटाने की यो जना बनाई। बदनामी, अफवाह और षड्यंत्र का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। साथ मे मनमोहन सिंह की दस साल की सरकार के खिलाफ भी वातावरण था, इन सबसे कैसे निपटा जाये, इसकी सूझ बूझ इंदिरा जी की तरह सोनिया गांधी के पास नही थी। नतीजे मे बेहतर काम के बावजूद कांग्रेस खेत रही और भाजपा साकार दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुई। साथ ही कांग्रेस के नेता भी इतने सुविधा भोगी हो गए थे की आसन्न खतरे को नही भांप पाए। वंशानुगत शासन की बात या उसे किसी चीज के लिए ज़िम्मे दार ठहराने की बात अब बेमानी है क्यों की सभी अब वैसे ही हैं। 

इसी जगह पर रुक कर थोड़ा सोचे १९६७ से आज तक कई बार लगा की अब कांग्रेस खत्म , लेकिन हर बार वह अपनी राख से फिर से जीवित हुई। इसका कारण पार्टी का जन्म स्वतंत्रता संग्राम से होना है, यही वजह है की देश के विकास के लिए इसके पास स मग्र योज ना है साथ ही एक देश भर मे फैला संग ठन भी, भले ही वो आज की तारीख मे कितना कमजोर हो। साथ ही कांग्रेस एक मामले मे और भाग्य शाली है, हर बार विपक्ष अपने बुरे शासन से कांग्रेस को संजीवनी देता है। कांग्रेस से इतर कोई दल आज तक ये नही सीख पाया है की सत्ता मिल जाय तो उसे चलाए कैसे? सत्ता मिलने पर उसके सफल संचालन के बजाय उनका ज़ोर कांग्रेस को गाली देने पर ज्यादा होता है। और यही उसके पतन की बड़ी वजह बनता है।

सरकार के समर्थथकों को जाने दीजिए तो अपने सौ साल के इतिहास के बावजूद आर एस एस देश व्यापी संगठन नही बन पाया है जबकि अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस हर जगह है। अपनी सारी चालाक चालों के बावजूद मोदी सरकार फ्लॉप हो रही है। कांग्रेस का भविष्य क्या होगा ये कहना तो अभी मुश्किल है, लेकिन यह तय है की मोदी सरकार के जाने के साथ ही बहुत कुछ ऐसा होगा जो अभी तक नही हुआ और जिसके आसार दिखने भी लगे हैं।

घेराबंदी शुरू, स्पूतनिक V आया

बेंगलूरू। भारत में शुक्रवार को पहले शख्स को स्पूतनिक V वैक्सीन लगाई गई है. अब तक भारत के पास दो टीके (कोविशील्ड और कोवैक्सीन) ही मौजूद थे। स्पूतनिक V ने ट्वीट करते हुए लिखा कि भारत में स्पूतनिक V का पहला डोज दिया गया. हमें गर्व है कि कोरोना के खिलाफ भारत की इस लड़ाई में हम उनके साथ खड़े हैं. स्पूतनिक V एक रूसी-भारतीय वैक्सीन है।

 

शियन डायरेक्‍ट इंवेस्‍टमेंट फंड के सीईओ किरिल देमेत्रीव ने बताया है क‍ि स्‍पूत‍निक V का ज्‍यादातर उत्‍पादन भारत में होगा। इस साल वैक्‍सीन की 85 करोड़ डोज तैयार किए जाने की उम्‍मीद है।

देश में रूसी वैक्‍सीन Sputnik V की पहली डोज दीपक सपरा हो लगी है। रूस से डेढ़ लाख डोज की पहली खेप 1 मई को भारत पहुंच चुकी थी। यह वैक्‍सीन 91.6 फीसद कारगर है। 

डॉ रेड्डीज लैब में कस्‍टम फार्मा सर्विसेज के ग्‍लोबल हेड दीपक सपरा आईआईएम बेंगलुरु से पढ़े हैं। उन्‍होंने अपने करियर में मार्केटिंग, सेल्‍स, बिजनेस डेवलपमेंट सहित कई क्षेत्रों में सेवाएं दी हैं। उनकी पढ़ाई इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के क्षेत्र में हुई है। वह भारतीय रेल सेवा में भी काम कर चुके हैं। सपरा फुलब्राइट फेलो भी रहे हैं। उनकी पहली पुस्‍तक 2018 में प्रकाशित हुई थी। वह पूर्वी भारत में दिव्‍यांगों के लिए काम करने वाले चैरिटेबल ट्रस्‍ट के संस्‍थापक भी हैं।

किसान आंदोलन के समर्थक अभय सिंह का निधन, क्या था शहीद ए आज़म भगत सिंह से उनका रिश्ता?

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लखनऊ / मोहाली । महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद ए आज़म भगत सिंह के भतीजे और सामाजिक कार्यकर्ता अभय सिंह संधू का शुक्रवार की शाम मोहाली के एक अस्पताल में निधन हो गया। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के भतीजे संधू साहब कोरोना वायरस ‘कोविड-19’ से संक्रमित थे। अस्पताल में भर्ती करने के बाद सांस लेने में दिक्कत होने के कारण उनकी जान चली गई। अभय सिंह संधू कुछ दिन पहले ही कोविड-19 वायरस से संक्रमित थे, तबीयत ज्यादा बिगडने पर उनको मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 

अभय सिंह संधू भगत सिंह के छोटे भाई सरदार कुलबीर सिंह के बेटे थे। अभय सिंह संधू ने हाल ही में तीनों कृषि कानून का खुल के विरोध किया था। संधू साहब ने किसान आन्दोलन में भाग लेते हुए सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शन भी किया था और कई दिनों तक बॉर्डर पर उपस्थित रहकर लोगों का मनोबल बढ़ाते रहे। उसके बाद ही वो कोविड वायरस से संक्रमित हुए थे। अभय सिंह संधू के दुनिया छोड़ जाने पर पूरा पंजाब इस वक्त शोक में डूबा हुआ है।

संधू साहब के निधन पर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने दुख प्रकट किया। अमरिंदर सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा कि शहीद-ए-आजम के भतीजे के निधन से काफी दुखी हुं। मेरी संवेदनाए उनके परिवार के साथ हैं। वाहे गुरू उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करें। इसके साथ ही अमरिंदर सिंह ने संधू साहब के इलाज में लगे सारे खर्च को पंजाब सरकार के वहन करने की बात कही।

इसके साथ ही पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने अभय सिंह संधू को श्रद्धांजलि दी। उन्होनें संधू जी को एक कुशल सामाजिक कार्यकर्ता बताया। बलबीर सिंह ने कहा कि कोरोना के बाद शरीर की स्वास्थ्य जटिलताओं से संधू साहब नहीं लड़ पाए, वो इस दुनिया को और हमें अलविदा कह गए।

आपको बताते चलें कि कोरोना वायरस के मामले में इस वक्त पंजाब की स्थिती सही नहीं है। पंजाब में इस वक्त लगातार कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं।

कोरोना दहकती हुई आग है और पानी की एक बूंद मेरा प्रयास : संजय कुशवाहा

जैसी कि आशंका थी कि पंचायत चुनावों की गहमागहमी के बीच चुपके चुपके कोरोना शहरों से गॉवों की ओर प्रस्थान कर चुका है अब वो आशंका सही साबित हो रही है गॉव गॉव कोरोना की दूसरी लहर से पीड़ित हो गया है। एक तो गॉवों में वैसे ही मेडिकल सुविधाओं का अभाव था अब कोरोना रुपी आफत ने गॉव की जिंदगी और मुश्किल कर दी है। 

कोरोना महामारी से जहां अस्पतालों में मरीजों की बाढ़ सी आ गई है तो वहीं कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी परेशान करने वाला है फिर भी गांवों तक कोरोना की बढ़ती संख्या को काबू में करने के लिए गॉव के चिकित्सकों, शिक्षकों के साथ साथ  समाज सेवी संगठन भी सामने आने लगे हैं। 

उत्तर प्रदेश के पूर्व में स्थित गाजीपुर जिले में हमारे संवाददाता राहल वर्मा ने वहां की जमीनी हकीकत को टटोलने का प्रयास किया उन्होंने वहां के समाज सेवी एवं हैंसी पारा के शास्त्री महाविद्यालय के प्रबंधक संजय कुशवाहा से बात की। 

संजय कुशवाहा ने बताया कि उनका प्रयास रहता है कि स्वयं का उदाहरण सामने रख कर लोगों को जागरूक किया जाये इसलिए मैं खुद कोविड प्रोटोकोल का पालन करता हूं तभी अपने गांव में लोगों को मास्क पहनने और को कोविड-19 का पालन करने का साहस कर पाता हूं।

गॉव में कोरोना पर कैसे काबू पाया जाये इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कोरोना के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। 

संजय कुशवाहा ने बताया कि जब पिछले लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों को खाने से लेकर रहने तक की व्यवस्था की और अब भी इस संकट की घड़ी में प्रशासन के साथ मिलकर वह मजदूर वर्ग के के राहत के लिए हर संभव  प्रयास कर रहे हैं।

उनका कहना है कि मेरा सिर्फ एक ही मकसद है अपने गांव को कोरोना से बचाना और गरीब एवं वंचित तबकों तक शुद्ध एवं पर्याप्त भोजन की व्यवस्था कराना, यह पूछे जाने पर कि क्या पुलिस उनकी सहयोग करती है तो उन्होंने, हॉ में सिर हिला कर जवाब दिया। 

Lock Down : कोरोना बेरोजगारी और मंहगाई, इधर कुंआ उधर खाई!

लखनऊ / दिल्ली।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल कोविड-19 की विभीषिका का सामना करने के लिए देशवासियों को “जान है तो जहान है” का मंत्र दिया था जब महामारी पर थोड़ा काबू पाया जाने लगा तो एक और मंत्र दिया “जान भी जहान भी” तब मोदी सरकार के आलोचकों ने लॉकडाउन की आलोचना करते हुए कहा था कि देश की अर्थव्यवस्था रसातल मे चली गई है और प्रधानमंत्री सिर्फ जुमलेेबाजी कर रहे हैं।

इस साल जब कोरोना महामारी की दूसरी लहर के चलते देश के विभिन्न राज्यों में हाहाकार मचा हुआ है तब केंंद्र सरकार ने लॉकडाउन जैसे उपाय लागू करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों के विवेक पर छोड़ दिया है। 

पूरे देश में कोरोना की भयावह स्थिति है क्या भाजपा सरकारें क्या विपक्ष की सरकारें, चारों तरफ मरीजों एवं उनके तीमारदारों की चीत्कार सुनाई दे रही है और सरकारों और सिस्टम की लापरवाही को चीख चीख कर बयान कर रही हैं ऐसे दौर में राज्य सरकारों के पास फिर से एक ही रामबाण दिखाई दे रहा है कि देश को बंद (लॉकडाउन) कर दिया जाये।

राज्य सरकारों ने आंशिक तौर पर लॉकडाउन करके “जान भी जहान भी” के मंत्र को अपनाने की कोशिश की है जिससे कोरोना के मामले में कुछ कमी आई है लेकिन साथ ही साथ अर्थव्यवस्था में भी कमी देखी जा रही है। 

अर्थशास्त्रियों की मानें तो लॉकडाउन एक दोधारी तलवार है जिसमें एक तरफ तो कोरोना के मामले में कमी आती है वहीं दूसरी तरफ बेरोजगारी और मंहगाई में वृद्धि होती जाती है।

सीएमआई की रिपोर्ट के मुतबिक देश की अर्थव्यवस्था संकट में है रिपोर्ट में कहा गया है कि  लॉकडाउन की परिस्थितियों में  सरकार पर्याप्त रोजगार सृजित नहीं कर सकती ऐसे में लोगों का जीवन संकट में आना लाजमी है। 

लॉकडाउन की वजह से भारी संख्या में लोगों का कृषि क्षेत्र की ओर पलायन हो रहा है क्योंकि शहरों में रोजगार देने वाले सेक्टर पर तालाबंदी है जिससे बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार छिन गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में देश की बेरोजगारी की दर 8% दर्ज की गई है रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि कोरोना की दूसरी लहर में बेरोजगारी बढ़ने का जितना अनुमान लगाया जा रहा है यह उससे कहीं अधिक है आपको बताते चलें कि मार्च में देश की बेरोज़गारी दर 6.5% थी।

अर्थव्यवस्था पर पैनी नजर रखने वाली संस्था थिंक टैंक CMIE (Center for Monitoring Indian Economy) की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च में रोजगार की दर 37.6% से गिरकर अप्रैल में 36.8% पर आ गई है।

आशंका जताई जा रही है कि अर्थव्यवस्था की स्थिति अगर ऐसी ही बरकार रही तो देश के लोगों को दो जून की रोटी के लिए जीवन और भी ज्यादा संघर्ष करना पड़ेगा। 

कोरोना से कैसे लड़ेगा उन्नाव, जब डॉक्टर बिन सूना रहेगा गॉव

लखनऊ । भारत इस वक्त कोविड-19 जैसी भीषण महामारी से जूझ रहा है। भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने तबाही मचा रखा है और इस समस्या से उभरने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इस महामारी में स्वास्थ्यकर्मियों ने अद्भुत किरदार निभाया है, दिन-रात लगातार काम करते हुए मरीजों का इलाज करना और साथ ही उन्हें प्रेरित करना अपने आप में सराहनीय है। हम कह सकते हैं कि इस वक्त वो किसी भगवान से कम नहीं। परन्तु उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक साथ 19 डॉक्टर्स के इस्तीफे से हर कोई हैरान है।

उन्नाव में अचानक 19 स्वास्थ्यकर्मियों जिनमें कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के 11 और प्राइमरी हेल्थ सेंटर 5 इंचार्ज शामिल हैं, के सामूहिक इस्तीफे से प्रशासन भी सकते में आ गया है। इन डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा उन्नाव के सीएमओ को सौंपना चाहा परन्तु सीएमओ के इस्तीफा स्वीकार ना करने पर उन्होनें डिप्टी सीएम को अपना सामूहिक इस्तीफा सौंपा। इस्तीफे की पेशकश में मुरादाबाद हेल्थ सेंटर के प्रमुख डॉक्टर संजीव कुमार भी शामिल हैं।

डॉक्टर्स का आरोप है कि दिन-रात मेहनत करने के बाद भी प्रशासन की तरफ से उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है जैसे वो अपना काम ढंग से नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन के अधिकारी उनके साथ बुरा बर्ताव करते हैं और उन्हें जेल भेजने की भी धमकी देते हैं। उनके मुताबिक उन्हें यह एहसास दिलाया जाता है कि वो अपना काम ठीक से नहीं कर रहें हैं और जो भी परेशानी हो रही है वो डॉक्टर्स की वजह से हो रही है।

डॉक्टर्स का कहना है कि हम दिन भर काम करते हैं उसके बाद हमें 30-40 किलोमीटर दूर मीटिंग के लिए बुलाया जाता है यह पूछने के लिए हमने क्या काम किया। हमें बाध्य किया जाता है कि हम यह प्रूफ करें कि हमने क्या काम किया। हम पर झूठे आरोप लगाए जाते हैं।

इस घटना के बाद उन्नाव के डीएम ने तत्काल इस्तीफा देने वाले इंचार्जेज़ को मीटिंग के लिए बुलाया और उनसे इस्तीफे का कारण पूछा। दोपहर बाद डीएम ने यह जानकारी दी कि डॉक्टर्स ने इस्तीफा वापस ले लिया है।

इस मुद्दे पर उन्नाव के सीएमो डॉक्टर आशुतोष ने बताया कि उन्हें इन सब के बारे में कुछ भी नहीं पता था। वो नहीं जानते थे कि हेल्थ सेंटर के डॉक्टर जिला प्रशासन से नाराज चल रहे हैं। उनके मुताबिक डॉक्टर्स को पहले उन्हें अपनी परेशानी बतानी चाहिए थी। हमें यह बात तब पता चली जब हमें इस्तीफा सौंपा जाने लगा।

सीएममो का कहना है कि काम को कई स्तर पर मॉनिटर किया जाता है। डॉक्टर्स का स्थानांतरण भी नीतियों के आधार पर ही किया जाता है। उनके परफॉर्मेंस के आधार पर ही फैसला लिया जाता है। गौरतलब है कि डॉक्टर्स पहले से ही फतेहपुर और असोहा में प्राइमरी हेल्थ सेंटरों के प्रभारी अधिकारियों के ट्रांसफर से भी नाराज चल रहे थे।

उस बॉलीवुड हिरोइन का आज जन्मदिन है जो डॉक्टर बनना चाहती थी

लखनऊ । एक्ट्रेस जरीन खान बॉलीवुड की खूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक हैं इन्होंने फिल्मों में शानदार किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में  जगह बनाई है  आज जरीन खान का बर्थडे है आज वो 33 साल की हो गई हैं। 

हेट स्टोरी जैसी तीन बड़ी फिल्मों में काम करने से पहले एक्ट्रेस जरीन खान ने सलमान खान स्टारर फिल्म वीर से फिल्मी दुनिया में डेब्यू किया था उस फिल्म में दर्शकों ने उनकी एक्टिंग को काफी सराहा था उन्होंने अपनी एक पहचान बनाई।

ऐसा भी कहा जाता हैं की इन्होने घर की स्थिति को देखते हुए कॉल सेंटर में भी काम किया और साथ ही ये भी कहा जाता की बचपन में ही जरीन खान के माता पिता उनसे अलग हो गए थे और इनकी घर की स्थिति काफी ठीक नहीं थी भी ये कहा जाता है इनके पिता बेटियो जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं थे मां पिता से अलग होने का कारण यही बताया जाता है।

आपको बता दें जरीन खान फिल्मी दुनियां में नही आने वाली थी उनका डॉक्टर बनने का सपना था लेकिन किसी अचानक से उन्होंने फिमली दुनिया मे कदम रखा और अपनी अच्छी पहचान बनाई।

 

ऐसा कहा जाता है कि बचपन में ही जरीन खान के माता-पिता उनसे अलग हो गए थे, जिसका कारण था कि उनके पिता दो बेटियों की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं थे. जरीन एक्टिंग लाइन में बिलकुल भी नहीं जाना चाहती थीं उनका डॉक्टर बनने का सपना था लेकिन परिवार की स्थिति को देखते हुए उन्होंने पॉकेट मनी के लिए कॉल सेंटर ज्वाइन कर लिया था। 

यहूदी VS मुसलमान : क्यों होता है घमसान

लखनऊ । यूं तो दुनिया में शांति की वैसे ही बहुत कमी है, पर क्या महसूस होता होगा, किस तरह जिंदगी के अगले पल की उम्मीद की जाती होगी जब हमें यह पता हो कि किसी भी छण हम पर हवाई हमला हो सकता है, किसी भी पल हमारी जान जा सकती है। हम किसी भी छण अपनों से दूर हो सकते हैं। इसी डर का एहसास करती दो देशों के बीच फंसी एक पवित्र जमीन जो तीन धर्मों के लिए एक पवित्र स्थान है, जिसे हम सब येरूसलेम कहते हैं।

बीते दिन 10 मई को हमास द्वारा इजरायल के कई हिस्सों पर 150 से भी अधिक रॉकेट दागने के कारण दोनों देशों के बीच फिर से हॉली वॉर शुरू हो गया है। बता दें कि हमास को फिलीस्तीन का एक चरमपंथी गुट माना जाता है जो कि फिलीस्तीन के आधे हिस्से गाजा को हैंडल करता है। अटैक के जवाबी कार्यवाई में इजरायल ने भी 11 मई की सुबह तक फिलीस्तीन के कई इलाकों में करीब 130 एयर स्ट्राइक किए। सूत्रों के मुताबिक इस हमले में 23 लोगों की जान गई जिसमें 9 बच्चे भी शामिल थे। इस हमले में लगभग 100 से भी ज्यादा लोग घायल हुए।

हवाई हमले का यह सिलसिला येरूसलेम के टेम्पल माउंट में हुई झड़प से शुरू हुआ। 10 मई को टेम्पल माउंट में दोनों पक्षों में हुए झड़प में दोनों ही पक्ष अपना-अपना तर्क दे रहे। फिलीस्तीनियों का कहना है कि इजारयली फोर्सेज़ जबरदस्ती मंदिर परिसर में घुस आई और उन पर ग्रेनेड और रबड़ बुलेट्स दागे। वहीं दूसरी तरफ इजरायली फोर्सेज़ का कहना है कि वो मंदिर के पास वाले रास्ते पर थे जब फिलीस्तीनियों नें उन पर पत्थरबाजी करना शुरू किया।

इस घटना के बाद ही हमास ने इजारयली सेना को टेम्पल माउंट से अपने सैनिक वापस लेने को कहा था। उनके मुताबिक यदि वो ऐसा नहीं करते हैं तो हमास इजरायल पर रॉकेट दागेगा। 

दोनों देश के बीच अक्सर ही संघर्ष होता रहता है और संघर्ष भी ऐसी जमीन के लिए जो दोनों ही देशों के लिए एक पवित्र स्थान माना जाता है। येरूसलेम वो ही जगह है जहां पर फिलीस्तीन और इजरायल अपने-अपने हक का दावा करते हैं। येरूसलेम में 35 एकड़ में फैली एक ऐसी जगह जिसे यहूदी ‘हर हवाईयत’ यानी ‘टेम्पल माउन्ट’ और मुस्लिम ‘हरम-अल-शरीफ’ कहते हैं, ही झगड़े की असली वजह है।

1948 में इजरायल देश का गठन होने के बाद इजरायल येरूसलेम को ही अपनी राजधानी बनाना चाहता था, मुस्लिम समुदाय जो कि पहले से ही इजरायल गठन का विरोध कर रहा था वो इस बात के लिए राजी नहीं था।

इसके बाद 1966 में दोनों देशों के बीच चले 6 दिन युद्ध के बाद टेम्पल माउंट पर इजरायल ने कब्जा कर लिया। टेम्पल माउंट पर कब्जा करने के बाद उस वक्त के इजरायली रक्षा मंत्री मोसे डायन और मुस्लिम नेताओं के बीच समझौता हुआ, और टेम्पल माउंट के देख-रेख की जिम्मेदारी जॉर्डन को दे दी गई। इससे पहले यह जिम्मेदारी इस्लामिक ट्रस्ट ‘वक्फ’ के पास थी।

इस समझौते में यह तय किया गया कि यहूदी इस स्थान पर पर्यटक के तौर पर जा सकते हें परन्तु पूजा नहीं कर सकते हैं। इस समझौते का दोनों ही पक्षों के कट्टरपंथियों ने विरोध किया। नतीजन 1982 में फिर दोनों ही पक्षों के बीच संघर्ष हुआ। 2014 में यहूदी कट्टरपंथी को जान से मारने की कोशिश करने वाले फिलीस्तिनी की इजरायली फोर्स द्वारा हत्या करने के बाद से इजरायल ने टेम्पल माउंट में मुस्लिमों पर पाबंदी लगा दी, जिसे फिलीस्तिनी नेताओं ने युद्ध का ऐलान मान लिया।

इस वक्त दोनों देशों के बीच झगड़े का मुख्य कारण येरूसलेम के पूर्वी हिस्से में शेख जर्राह नामक स्थान पर रह रहे 6 फिलीस्तीनियों को घर खाली करवाना माना जा रहा है। यहूदियों के मुताबिक इस हिस्से पर उनका मालिकाना हक़ है जबकि फिलीस्तीनियों का कहना है कि वो उनका पुस्तैनी इलाका है और वो हमेशा वहीं पर रहते आए हैं। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 10 मई को होने वाली थी, और उसी दिन इजरायल 1966 में येरूसलेम पर जीत की खुशी में येरूसलेम डे मनाने वाला था। 

इजरायल और फिलीस्तीन के बीच मनमुटाव की कहानी आज की नहीं है। इसके तार उनके सदियों पुरानी प्रथाओं से जुड़े हुए हैं जिसके कारण अक्सर ही दोनों देशों के बीच झड़प होती रहती है। इस ‘होली वॉ’र की कहानी बहुत ही पुरानी है। जिसमें उनका उस जगह से जुड़े धर्म पर विश्वास सबसे बड़ा कारण हैं। 

यहूदियों के मुताबिक इसी जगह पर ईश्वर ने उस व्यक्ति का सृजन किया जिससे आगे चलकर पूरी मानव जाति का निर्माण हुआ। यहूदियों का यह भी मानना है कि अब्राह्म द्वारा अपने ही बेटे का बलिदान देने वाली घटना भी इसी जगह पर हुई थी जिसमें ईश्वर ने अब्राह्म की भक्ति से खुश होकर यह वरदान दिया था कि उसके वंशज उस जगह पर राज करेंगे। इस जगह पर यहूदियों द्वारा बनवाए गए मंदिर में सारे यहूदियों को जाने की इजाजत नहीं थी, वहां पर केवल पुजारी ही पूजा करने के लिए जा सकता था। उस जगह को ‘होली ऑफ होलीज़’ यानि ‘पवित्र से भी पवित्र स्थान’ कहा जाता है।

वहीं मुस्लिम समुदाय के मुताबिक मक्का और मदीना के बाद तीसरा सबसे पवित्र स्थान यही है। उनके मुताबिक पैगम्बर मुहम्मद इसी जगह से जन्नत गए थे और इसी जगह पर वो जन्नत से वापस आए थे जिसे ‘डोम ऑफ द रॉक’ कहा जाता है। इसी जगह पर मुस्लिमों का कब्जा होने पर उन्होनें एक भव्य मस्जिद का निर्माण किया जिसे अल अक्स़ नाम दिया गया।

35 एकड़ में फैले इस स्थान पर इसाई भी अपना अधिकार मानते हैं। उनके मुताबिक ईसा मसीह ने यहीं पर उपदेश दिया, यहीं पर वो शूली पर चढ़ाए गए और फिर यहीं पर उन्होनें पुनर्जन्म भी लिया। इसाईयों के मुताबिक ईसा मसीह फिर से जन्म लेंगे और उसमें जेरूसल्म का अहम किरदार होगा। 

जनता हो या सरकार! दोनों हैं गंगा के गुनाहगार

लखनऊ / बक्सर /गाजीपुर। वैसे तो देश की तमाम सरकारें गंगा को स्वच्छ रखने के लिए दशकों से कई अभियान चलाती आ रही हैं, जिसमें अब तक अरबों रूपए खर्च भी हो चुके हैं पर यदि हम गंगा नदी की तुलना पहले के समय से करें तो हालात और भी बदतर होते नजर आ रहे हैं। दिन-प्रतिदिन गंगा नदी और भी गंदी होती जा रही है।

प्रदुषित गंगा को स्वच्छ करने का सफाई अभियान अभी चल ही रहा था कि अब एक नयी परेशानी सामने आ खड़ी हुई है। इस कोराना काल के समय में जहां पर भारत का प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी परेशानी का सामना कर रहा है वहीं अब गाजीपुर और बक्सर में गंगा नदी में कई तैरती लाशों के मिलने से सनसनी मचा हुआ है। कहा जा रहा है कि नदी में जो भी लाशें मिली हैं उन सबकी मृत्यु कोविड-19 वायरस की वजह से हुई हैं। 

प्रदेश सरकारों का कहना है यह लाशें उनके प्रदेश की नहीं हैं
एक तरफ हर कोई इस बात से परेशान है कि इतनी ज्यादा संख्या में लाशें कहां से आईं, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश और बिहार प्रशासन इस बात को मानने से इनकार कर रहा है कि यह लाशें उनके प्रदेश की हैं। गंगा नदी में मिली लाशों पर कई स्वास्थ्य जानकारों और विशेषज्ञों ने अपनी राय और सुझाव दिए।

डॉक्टर बलराम भार्गव के मुताबिक मृत शरीरों से संक्रमण का कम खतरा नहीं है गंगा नदी में लाशें मिलने से लोगों में खौफ पनपने लगा है कि सामान्य लोगों में संक्रमित होने का खतरा अब और भी बढ़ गया है। इस पर कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना वायरस फैलने की अशंका तब तक बहुत कम रहती है जब तक कि उसे शरीर में कोई भी होस्ट नहीं मिल जाता। डॉक्टर बलराम भार्गव जो कि आईसीएमआर के चेयरमैन हैं उन्होनें बताया कि वायरस को फैलने के लिए जीवित मानव शरीर की जरूरत पड़ती है, मृत शरीर से वायरस के फैलने का खतरा कम ही रहता है। लेकिन हमें फिर भी पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।

वहीं दूसरी तरफ बीएचयू के प्रोफेसर ने बाताया कि पानी में कोरोना वायरस पैदा नहीं होता है बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के जीन विज्ञान के प्रोफेसर ने अपनी राय रखते हुए कहा कि अभी तक जो भी रिसर्च कोरोना वायरस पर किया गया है उसमें यह कहीं भी नहीं बताया गया है कि कोविड-19 वायरस पानी में जन्म लेता है इसलिए इसका मानव जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। अगर हम देखें तो न जाने कितने ही सीवर गंगा में रोज बहाए जाते हैं।

पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डॉकेटर ओपी उपाध्याय ने कहा इससे हमारा वातारवरण प्रदुषित होगा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के ही पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर ओपी उपाध्याय ने मृत शरीरों को इस तरह गंगा में फेकने को समाज के साथ जघन्य अपराध करने जैसा बताया। उन्होनें सबसे निवेदन किया कि कोई भी व्यक्ति इस तरह का कार्य ना करे, क्योंकि इससे वायरस के फैलने का खतरा शायद हो ही साथ ही इससे हमारा पर्यावरण भी प्रदूषित होगा। नदी मे लाशें सड़ेंगी जिससे कई प्रकार के कीटाणु पानी में जन्म लेंगे, दुर्गंध फैलेगी और पानी भी साफ नहीं रह जाएगा। गंगा नदी के पानी को जानवर भी पीते हैं इससे उनकी जान को भी खतरा होगा।

महामना मालवीय रिसर्च सेंटर के प्रो बीडी त्रिपाठी ने कहा कि शवों कों नदी में फेकना दुर्भाग्यपूर्ण है  बीएचयू के महामना मालवीय गंगा रिसर्च सेंटर के चेयरमैन प्रो बीडी त्रिपाठी ने कहा कि ऐसा सुनने में आया था कि नदियों के किनारे कई लाशें मिली हैं। उन्होनें बताया कि लोगों का कहना है कि परिजनों के पास शवों को जलाने के पैसे ना होने के कारण उन्होनें शव को नदी में फेक दिया जिससे कि मृत शरीर को मोक्ष मिल सके। उन्होनें कहा कि इस तरह से लाशों को गंगा में प्रवाहित करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

भारत के वैज्ञानिक सलाहकार डॉक्टर विजन राघवन ने कहा डरने की कोई जरूरत नहीं है गंगा नदी में मिली लाशों पर बात करते हुए भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार डॉक्टर विजय राघवन ने आजतक को बताया कि संक्रमित लाशों से खतरा रूके हुए पानी में अधिक होता है, यदि पानी बहाव में है तो प्राकृतिक क्रियाओं के कारण वायरस का संपर्क किसी भी क्रिया से टूट जाता है और संक्रमण का खतरा नही रहता है।

आपको बता दें कि गंगा नदी के तट पर 30-40 लाशें मिली हैं, जिससे अन्दाजा लगाया जा रहा है कि गंगा की धारा में और भी कई लाशें बह रही होंगी। इस तरह से लाशों का मिलना सबके लिए चिंता और जिज्ञासा का विषय बना हुआ है। समझने वाली यह बात है कि जिस गंगा नदी के पानी को हम सबसे शुद्ध मानते हैं और जिसके जल से हम अपना कोई भी कार्य करना शुभ समझते हैं आज उस गंगा नदी की स्थिती ऐसी हो गई है कि उसका पानी जानवरों के पीने लायक भी नहीं रहा। प्रतिदिन यह स्थिती और भी भयावह होती जा रही है।

क्या करे जनता बिचारी! सस्ती जान मंहगी बीमारी, नेताजी का Vista बीस AIIMS पर भारी

ये बहस बेकार है कि इस महामारी काल में ज्यादा जरूरी 20,000 हजार करोड़ रुपये खर्च कर हमारे भाग्य विधाताओं ड्रीम सेन्ट्रल विज़्टा प्रोजेक्ट है या कोविड-19 से लड़ने की तैयारी। कोविड-19 की दूसरी लहर ने भारत में कोहराम मचा रखा है। महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था एक बुरे स्तर पर पहुंच चुकी है। अस्पतालों में मरीजों के लिए पर्याप्त मात्रा में बेड नहीं मौजूद हैं और यदि परिजन मरीज को घर पर ही रख कर इलाज करना चाहें तो उन्हें पर्याप्त मात्रा में ना ही दवाइयां मिल पा रहीं और ना ही ऑक्सीजन की कमी को पूरा किया जा पा रहा है।

देश में रोज हजारों की मात्रा में मरीजों की मृत्यु हो रही है। लाखों की संख्या में कोविड-19 मरीज बढ़ रहे। हर कोई यहां तक स्वास्थ्य कर्मचारी भी बेबस और मजबूर दिख रहे हैं। डॉक्टर्स अपनी आंखों के सामने मरीजों को मरते देख रहे पर कुछ नहीं कर पा रहे हैं। अपनों को बचाने की कोशिश में लगे लोग खुद को भी इस बीमारी की आंच में झोंक दे रहे बावजूद इसके उनके हाथ केवल निराशा और हताशा ही हाथ लग रही।

देश की जनता कोविड महामारी की मार से जूझ रही है, भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था का मजाक बनाती यह महामारी केन्द्र में बैठे पदाधिकारियों पर भी कई सवाल खड़े कर रही है। एक तरफ जहां दूर-दूर तक मरीजों के लिए सुव्यवस्थित और उचित इलाज की व्यव्था में सुधार करने की कोई बड़ी पहल नजर नहीं आ रही, वहीं दूसरी तरफ केन्द्र सरकार के सेन्ट्रल विज़्टा प्रोजेक्ट पर भी अब प्रश्न उठ रहे हैं।

केन्द्र सरकार अपने सेन्द्रल विज़्टा प्रोजेक्ट पर 20,000 करोड़ की लागत लगा रही है जिसमें दिल्ली में बनने वाला नया संसद भवन भी शामिल है। ऐसे में प्रश्न यह है कि इस महामारी काल में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण क्या है, देश की राजधानी दिल्ली को सजाना या अपने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार करना और उसे मजबूत करना।

भारत इस वक्त भीषण महामारी से लड़ रहा है जिससे बाहर निकलने का केवल एक मात्र उपाय समझ आ रहा है औऱ वो है स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार। केन्द्र सरकार की छोटी-छोटी पहल महामारी पर उतनी असरकारी साबित नहीं हो रही है।

केन्द्र सरकार द्वारा ही स्वास्थ्य पर गठित कमेटी ने अक्टूबर 2020 में ही सरकार को ऑक्सीजन कमी की चेतावनी दी थी, तो फिर यह जानने के बावजूद सरकार पहले से ही इस परिस्थिती से लड़ने के लिए तैयार क्युं नहीं थी। लगभग 14 महीने हो गए है कोविड महामारी को भारत में दस्तक दिए और 7 महीने हो गए हैं विशेषज्ञों द्वारा ऑक्सीजन की कमी के बारे मे बताए हुए, परन्तु उसके बाद सितम्बर 2020 सेन्ट्रल विज़्टा प्रोजेक्ट को प्रस्तुत किया जाता है जिसका काम जनवरी 2021 से शुरू भी हुआ।

बजट में कोविड महामारी के नाम पर 3500 करोड़ का बजट रखा गया जो कि केवल टीकाकरण के लिए आवंटित था। बजट में कहीं भी ऑक्सीजन कंटेनर, कंसंनट्रेटर्स, वेंटिलेटर या फिर कहें कि ऐसे किसी भी व्यवस्था का जिक्र नहीं किया गया जिससे कि लोगों को कोविड महामारी से लड़नें में सहायता मिले। यदि हम व्यवस्था को देखें तो हमें किसी भी योजना की पहले से तैयारी नजर नहीं आती। अभी तीसरे कोविड वेव के आने की संभावनाएं भी बनीं हुई हैं।

14 महीने में एक भी हॉस्पिटल का निर्माण नहीं किया गया जो कि इस महामारी से लड़ने में मदद करे। सेन्ट्रल विज़्टा प्रोजेक्ट का काम दो साल में पूरा हो जाएगा जबकि एम्स को बनने में छ साल का समय लगता है। ऐसे में हमें यह समझने की जरूरत है कि हमारे लिए ज्यादा जरूरी क्या है।

14 महीने के कोविड महामारी में 25 अप्रैल 2021 को मोदी सरकार 551 जीएसए आक्सीजन प्लांट को और एक मई 2021 को 61000 वेंटिलेटर्स को मंजूरी देती है। यह सोचने वाली बात है कि खतरे का अन्दाजा पहले से होने के बावजूद हमने खुद को बचाना तब शुरू किया जब खतरा हमारे में घुस आया जिसमें हमारे कई अपनों की जान चली गई और कई चाहने वालों को हमने खो दिया।

कहीं 5G से तो नहीं जुड़े हैं Corona के तार!

लखनऊ /दिल्ली। पूरे विश्व में कोरोना का अपडेटेड वर्जन रस बहुत तेजी से फैल रहा है लेकिन भारत एक ऐसा देश बन चुका है जहां हर रोज तकरीबन 4 लाख से अधिक मरीज पाए जा रहे हैं। मीडिया खबरें दिखाा रहा है और सोशल मीडिया पर नई-नई धारणाएं सामने आ रही है कि आखिर इस बढ़ते कोरोना वायरस का कारण क्या है? उनमें से एक धारणा 5G रेडिएशन को भी बताया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर एक संदेश बहुत तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें कहा जा रहा है कि कोरोना की जो दूसरी लहर आई है उसका कारण 5G रेडिएशन है। साथ ही एक न्यूज़ पेपर की कटिंग भी वायरल हो रही है जिसमें पानीपत की समाज सेविका शशि लूथरा ने 5G नेटवर्क टावर बंद करवाने की मांग की है।

वैज्ञानिकों के समूह ने ऐसे दावों को महज कोरी कल्पना बताया  है जो 5G तकनीक को कोविड-19 का जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। बल्कि यह दावा पूरी तौर से गलत है। वहीं दूसरी लोगों का कहना है कि घर में हल्के करंट के झटके भी महसूस हो रहे हैं। लोग पूरी तरह से 5G रेडिएशन को ही कोरोना वायरस की दूसरी लहर का जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। साथ ही वायरल पोस्ट में 5G रेडिएशन की टेस्टिंग को बंद करवाने के लिए मांग की जा रही है। वायरल फोटो में लोगों का कहना है की पाइप की रेडिएशन की बजाज से घर में करंट का लगता है। गला सामान्य से ज्यादा सूखता है।

कोरोना महामारी को लेकर जितनी भी भ्रामक खबरें फैलाई जा रही हैं उन सभी को विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के द्वारा एक रिपोर्ट में जवाब दिया गया है। डब्ल्यूएचओ(WHO) की रिपोर्ट में इन सभी दावों को फर्जी घोषित किया गया है।

डब्ल्यूएचओ(WHO) का कहना है कि 5-G टेस्टिंग का कोरोना वायरस फैलाने में कोई भी हाथ नहीं है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कोरोना मोबाइल नेटवर्क और रेडियो तरंगों के साथ एक जगह से दूसरी जगह पर नहीं फैलता है। डब्ल्यूएचओ(WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस उन देशों में भी फैल रहा है जहां 5-G मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

इतना तो करम कीजिये जरूर, वैक्सीन पर तो GST ना लगाईये हुजूर

लखनऊ / दिल्ली। कोविड महामारी की दूसरी लहर ने पूरे देश को झकझोर रखा है। एक तरफ ऑक्सीजन की कमी ने लोगों की परेशानियों को बढ़ा दिया है और मरीजों को हॉस्पिटल में एड्मिट होने के लिए बेड्स भी नहीं मिल रहे। वहीं दूसरी तरफ लोगों को लगने वाले वैक्सीन पर 5% जीएसटी लगने से प्रदेश सरकार की मुश्किल बढ़ गई हैं। कोविड वैक्सिन पर जीएसटी लगने से अब एक नया हंगामा शुरू हो गया है। प्रदेश सरकार का कहना है कि वैक्सिन की कीमत पहले से ही ज्यादा है ऐसे में 5% जीएसटी उन्हें और भी मुश्किल में डाल रहा है।

वैक्सीन पर जीएससटी लगने के कारण केन्द्र पर उठ रहे सवाल

शुक्रवार को ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस मामले में निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा था जो कि इस वक्त केन्द्रीय वित्त मंत्री हैं। नवीन पटनायक ने यह मांग की थी कि वैक्सीन पर लगने वाले जीएसटी को हटा दिया जाय।

अब शनिवार को इस मामले पर राहुल गांधी ने भी ट्वीट करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लिया है। राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में कहा कि जनता की जान भले ही चले जाए पर प्रधानमंत्री मोदी की टैक्स वसूली चलती रहनी चाहिए। अपने ट्वीट में उन्होनें हैशटैग के साथ जीएसटी को भी जोड़ा।

विदेशों से आ रही वैक्सीन पर नहीं लग रहा कोई जीएसटी

बता दें कि बाहरी देशों से आने वाले वैक्सीन पर लगाई गई जीएसटी को केन्द्र सरकार ने खत्म कर दिया है। लेकिन राज्यों को दिए जाने वाले या पूरे देश के अन्दर कहीं पर भी वैक्सीन खरीदने पर अब भी 5% जीएसटी लिया जा रहा है।

राज्यों का कहना है कि जीएसटी लगने से उन पर ज्यादा खर्च पड़ रहा है। भारत में इस वक्त एक कोविशील्ड डोज की कीमत 300 रूपए है जो जीएसटी की वजह से 315 हो गया और एक कोवैक्सीन डोज की कीमत 400 रूपए है जो 5% जीएसटी की वजह से अब 420 रूपए हो गया है। राज्स सरकारें वैक्सीन पर लगने वाले टैक्स की छूट की मांग कर रहे हैं।अगर केन्द्र सरकार की बात करें तो सरकार को दोनों ही वैक्सीन के एक डोज के लिए 150 रूपए देना पड़ता है।

भारत में तीन वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी जिसमें रसिया का स्पुतनिक-V भी शामिल

रतलब है कि पूरे देश में इस वक्त तीन तरह की वैक्सीन को इस्तेमाल करने की मंजूरी मिली है। जिसमें कोविशिल्ड को सीरम इंस्टीट्यूट बनाता है और कोवैक्सिन को भारत बायोटेक और आईसीएमआर एक साथ मिल कर बनाते हैं। इसके अलावा इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए रसिया के वैक्सीन स्पुतनिक-V को भारत में मंजूरी दी गई है, जिसे भारत के डॉक्टर रेड्डी लैब में बनाया जाएगा। स्पुतनिक-V वैक्सीन की कीमत को अभी तय नहीं किया गया है।

बंगाल हिंसा : RSS का आह्वान, सभी सामाजिक धार्मिक और राजनैतिक दल पीड़ित परिवार के साथ खड़े हों

लखनऊ / नागपुर। लोकतंत्र में चुनावों की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चुनावों के इसी क्रम में पश्चिम बंगाल का चुनाव अभी-अभी सम्पन्न हुआ है। बंगाल के सम्पूर्ण समाज ने इसमें बढ़-चढ़ कर सहभाग लिया है। चुनावों में स्वाभाविक ही पक्ष-विपक्ष, आरोप-प्रत्यारोप कभी-कभी भावावेश में मर्यादाओं को भी पार कर देता है। पर, हमें यह सदैव स्मरण रखना होगा कि सभी दल अपने ही देश के दल हैं और चुनावों की प्रक्रिया में भाग लेने वाले प्रत्याशी, समर्थक, मतदाता सभी अपने ही देश के नागरिक हैं।
 
चुनाव परिणाम के तुरंत बाद उन्मुक्त होकर अनियंत्रित तरीक़े से हुई राज्यव्यापी हिंसा न केवल निंदनीय है, बल्कि पूर्व नियोजित भी है। समाज-विघातक शक्तियों ने महिलाओं के साथ घृणास्पद बर्बर व्यवहार किया, निर्दोष लोगों की क्रूरतापूर्ण हत्याएँ कीं, घरों को जलाया, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों-दुकानों को लूटा एवं हिंसा के फलस्वरूप अनुसूचित जाति-जनजाति समाज के बंधुओं सहित हज़ारों लोग अपने घरों से बेघर होकर प्राण-मान रक्षा के लिए सुरक्षित स्थानों पर शरण के लिए मजबूर हुए हैं। कूच-बिहार से लेकर सुंदरबन तक सर्वत्र जन सामान्य में भय का वातावरण बना हुआ है।
 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस वीभत्स हिंसा की कठोर शब्दों में निंदा करता है। हमारा यह सुविचारित मत है कि चुनाव-परिणामों के पश्चात अनियंत्रित चल रही हिंसा भारत की सह-अस्तित्व और सबके मतों का सम्मान करने की परंपरा के साथ-साथ भारतीय संविधान में अंकित जन और लोकतंत्र की मूल भावना के भी विपरीत है।संघ ने कहा कि इस पाशविक हिंसा का सर्वाधिक दुखद पक्ष यह है कि शासन और प्रशासन की भूमिका केवल मूक दर्शक की ही दिखाई दे रही है। दंगाइयों को ना ही कोई डर दिखाई दे रहा है और ना ही शासन-प्रशासन की ओर से नियंत्रण की कोई प्रभावी पहल दिखाई दे रही है।
 
शासन-व्यवस्था कोई भी हो, किसी भी दल की हो, उस का सर्वप्रथम दायित्व समाज में क़ानून-व्यवस्था के द्वारा शांति और सुरक्षा का वातावरण बनाना, अपराधी और समाज-विरोधी तत्वों के मन में शासन का भय पैदा करना और हिंसक गतिविधियाँ करने वालों को दंड सुनिश्चित करना होता है। चुनाव को दल जीतते हैं, पर, निर्वाचित सरकार पूरे समाज के प्रति जवाबदेह होती है।
 
हम नव निर्वाचित सरकार से यह आग्रह करते हैं कि उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य में चल रही हिंसा को तुरंत समाप्त कर क़ानून का शासन स्थापित करना, दोषियों को अविलंब गिरफ्तार कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना, हिंसा-पीड़ितों के मन में विश्वास और सुरक्षा का भाव पैदा कर पुनर्वास के लिए आवश्यक कदम उठाना, होनी चाहिए। हम केंद्र सरकार से भी आग्रह करते है कि वह बंगाल में शान्ति क़ायम करने हेतु आवश्यक हर सम्भव कदम उठाए एवं यह सुनिश्चित करे कि राज्य सरकार भी इसी दिशा में कार्रवाई करे।
 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज के सभी प्रबुद्ध जनों, सामाजिक-धार्मिक-राजनैतिक नेतृत्व का भी आहवान करता है कि इस संकट की घड़ी में वे पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हो कर विश्वास का वातावरण बनाएं, हिंसा की कठोर शब्दों में निंदा करें एवं समाज में सद्भाव और शांति व भाईचारे का वातावरण खड़ा करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायें।

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पुत्र नहीं रहे

  • लखनऊ । केन्द्र सरकार में कई बार मंत्री रह चुके और राष्ट्रीय लोक दल के मुखिया चौधरी अजित सिंह का 82 साल की उम्र में गुरूग्राम के अस्पताल में कोविड-19 वायरस से संक्रमित होने के कारण निधन हो गया। चौधरी अजीत सिंह की मृत्यु 6 मई की सुबह अस्पताल में फेंफड़े में इंफेक्शन की वजह से हुआ। उनके निधन की जानकारी चौधरी साहब के बेटे जयन्त चौधरी ने अपने ट्विटर अकाउंट से दी। अजित सिंह 20 अप्रैल को कोविड पॉजिटिव पाए गए थे।

बेटे जयन्त चौधरी ने दी अजीत सिंह के मृत्यु की जानकारी

जयन्त चौधरी ने ट्वीट करते हुए कहा कि, चौधरी साहब ने इतने सालों में लोगों से बहुत प्यार और इज्जत कमाया है। उन्होनें हर किसी को हमेशा अपना परिवार माना है और सबकी चिन्ता की है। इस महामारी के समय में मेरा आप सबसे निवेदन है कि अपना ध्यान दें और सुरक्षित रहें। खुद को अपने घरों में सुरक्षित रखें इससे डॉक्टर्स को भी काफी मदद मिलेगी और यही चौधरी साहब को असली श्रद्धांजलि होगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कॉग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनके निधन पर दुख जताया 

अजीत चौधरी के निधन पर प्रधानमंत्री मोदी ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वे हमेशा किसानों की मदद के लिए तत्पर रहे और केन्द्र द्वारा मिली जिम्मेदारियों का उन्होनें कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। वहीं राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख अजित सिंह के असमय निधन से मुझे बहुत दुख पहुंचा है।

चौधरी अजीत सिंह राजनीति की दुनिया के बड़े चेहरों में शामिल थे। अजित सिंह को राजनीति विरासत में मिली है। अजित सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे हैं। इन्होनें कम्प्यूटर इंजीनियरिंग करने के बाद 15 साल के लिए विदेश में नौकरी की परन्तु पिता की मृत्यु के बाद इन्होनें पार्टी की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेते हुए पार्टी का नेतृत्व करना शुरू किया।

अजित सिंह में राजनैतिक अवसर पहचानने का था हुनर

यह भी कहा जाता है कि अजित सिंह को राजनैतिक अवसर की खुब पहंचान थी और परिस्थिती के हिसाब से पार्टी बदलने का हुनर उन्हें विरासत में हांसिल था। चौधरी साहब लम्बे समय तक केन्द्र में मंत्री पद पर भी कार्यरत रहे। चाहे वो 1989 की वीपी सिंह की सरकार रही हो या 1991 की नरसिंह राव की सरकार। अजित सिंह अटल वाजपेयी और मनमोहन सिंह के सरकार में भी केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं।

राष्ट्रीय लोक दल पार्टी का प्रभाव जाटों पर अधिक था परन्तु चौधरी चरण सिंह की मृत्यु के बाद वह प्रभाव कम होता दिखाई दिया। पार्टी की कमान अजित सिंह के हाथों में आने के बाद पार्टी लगातार कमजोर होती गई। अजित सिंह ने ही अपनी पार्टी का नाम जनता दल से राष्ट्रीय लोक दल पार्टी रखा था।

2014 में बीजेपी के केन्द्र में आने के बाद खराब होता गया अजीत सिंह का राजनैतिक करियर

अजित सिंह के राजनैतिक दुनिया का बुरा दिन तब शुरू हुआ जब केन्द्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार आई। बीजेपी के उत्थान के बाद उनकी पार्टी का प्रभाव और कम होता गया, यहां तक कि अजित सिंह लोकसभा चुनाव तक नहीं जीत पाए। बताया यह भी जाता है कि उनकी पार्टी पर कई बार यह भी दबाव बनाया गया कि वो किसी और बड़े पार्टी में अपनी पार्टी का विलय कर लें।

शादी की धूम थी चहुंओर पर दुल्हे की गणित थी कमज़ोर। दुल्हन ने पूछ लिया 2 का पहाड़ा, बता न पाया दुल्हा बिचारा… और शादी टूट गयी

लखनऊ /महोबा। मंडप सजा था शहनाई बज रही थी कि अचानक दुल्हन ने दूल्हे से 2 का पहाड़ा पूछ लिया बिचारे दूल्हे की गणित कमज़ोर थी वो जवाब ना दे पाया और शादी टूट गयी।

उत्तर प्रदेश के महोबा में दुल्हन ने दूल्हे से ऐसा सवाल पूछ लिया जिसका दूल्हे के पास जवाब नहीं था। बस इस बात पर ही बारात को बैरंग लौटना पड़ा। दूल्हे ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि एक साधारण ‘मैथ्स टेस्ट’ में फेल होने पर उसकी शादी का प्लान गड़बड़ा जायेगा।

जानकारी के अनुसार दूल्हा शाम अपनी बारात के साथ शादी के मंडप में पहुंचा। दुल्हन को पहले ही उसकी शैक्षणिक योग्यता के बारे में संदेह था। जब वरमाला का मौका आया तो माला पहनने से पहले दुल्हन ने दूल्हे को 2 का पहाड़ा (टेबल) सुनाने के लिए कहा। दूल्हा इधर-उधर बगलें झांकने लगा। जिसके बाद दुल्हन ने शादी तोड़ दी।

पुलिस ने बताया कि यह एक अरेंज मैरिज थी और दूल्हा महोबा जिले के धवार गांव का रहने वाला था। दुल्हन ने मंडप से बाहर निकलते हुए कहा कि वह उस व्यक्ति से शादी नहीं कर सकती, जिसे गणित की मूल बातें पता नहीं हैं। दोस्त और रिश्तेदार भी दुल्हन को समझाने में नाकाम रहे।

दुल्हन के चचेरे भाई ने कहा कि वे यह जानकर चौंक गए कि दूल्हा अशिक्षित था। उन्होंने कहा कि दूल्हे के परिवार ने हमें उसकी शिक्षा के बारे में अंधेरे में रखा था। वह शायद स्कूल भी नहीं गया था। दूल्हे के परिवार ने हमें धोखा दिया था। उन्होंने अपनी बहन की सराहना की।

दोनों पक्षों द्वारा गाँव के प्रमुख नागरिकों के हस्तक्षेप पर समझौता करने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। यह सौदा हुआ कि दूल्हा और दुल्हन के परिवार उपहार और आभूषण लौटा देंगे।

तो यूपी का सेमीफाइनल हार गयी भाजपा!

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को काफी उम्मीदें थीं कि वो इस बार भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे। मगर चुनाव के नतीजों ने बीजेपी को काफी निराश किया है। जिन क्षेत्रों को बीजेपी का गढ़ कहा जाता था वहां भी बीजेपी को निराशा ही हाथ लगी। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का दावा है कि उनकी पार्टी ने इन क्षेत्रों में बी बीजेपी से अधिक सीटों को अपने नाम किया है।

मोदी के गढ़ में भी बीजेपी को नहीं मिली आशापूर्ण सफलता

प्रधानमंत्री मोदी का क्षेत्र जहां पर उन्हें टक्कर देने की छमता किसी भी पार्टी के नेता में नहीं थी, वहां पर भी बीजेपी अपने खाते में केवल 8 सीटें ही कर पाई। विपक्षी पार्टियों में समाजवादी पार्टी ने 14 और बहुजन पार्टी ने कुल 5 सीटों पर जीत दर्ज की। बता दें कि वाराणसी में पंचायत क्षेत्र में कुल 40 सीटें आती हैं। वाराणसी क्षेत्र में बीजेपी को इतनी कम सीटों का मिलना यह बताता है कि वहां कि जनता भी केंद्रीय पार्टी से ज्यादा खुश नहीं है।

राम की नगरी अयोध्या में बीजेपी नहीं कर पाई  कमाल

अयोध्या जिसे हम राम की नगरी कहते हैं, में बीजेपी का अच्छा प्रभाव माना जाता है, मगर इस बार पंचायत चुनाव के नतीजे से ऐसा लग रहा है कि वहां कि जनता इस पार्टी से ज्यादा खुश नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार अयोध्या में आये नतीजों में बीजेपी को केवल आठ सीटें ही मिली हैं जबकि वहां पर कुल 40 सीटें हैं। जबकि समाजवादी पार्टी ने 22 सीटों पर अपना मुहर लगाया है और बहुजन पार्टी ने जिला पंचायत चुनाव में कुल चार सीटें जीती हैं।

यही हाल हमें मथुरा में भी देखने को मिला, वहां पर भी बीजेपी के खाते में केवल 8 सीटें ही आईं। जबकि बहुजन पार्टी ने यहां पर पांच सीटों पर जीत हांसिल की और समाजवादी पार्टी ने 14 सीटों को अपने नाम किया।

पशुओं का फसल को नष्ट करना बीजेपी के हार की बड़ी वजह

बीजेपी के अयोध्या जिला अध्यक्ष दिवाकर सिंह ने यह खुद स्वीकार किया कि उन्हें जितनी उम्मीद थी पार्टी को उतनी सफलती नहीं मिली है। बीजेपी को मिली हार के बाद विपक्षी पार्टी के नेता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के लोग इस सरकार से तंग आ गए हैं। योगी सरकार के पशु पॉलिसी की वजह से किसानों की फसल को काफी नुकसान हुआ है जिससे कई किसानों को आत्महत्या करने की नौबत आ गई। सरकार की कई और पॉलिसी से भी ग्रामीणों को कुछ खास फायदा नहीं हुआ जिसका नतीजा पंचायत चुनाव में सबको देखने को मिला।

पंचायत चुनाव के नतीजों से यह समझ आता है कि बीजेपी कहीं न कहीं ग्रामीणों तक पहुंचनें में असफल रही है।

हम आपके दर पर आये हैं, देखिये मी लॉर्ड प्लीज़ देखिये! हाईकोर्ट बहुत तंग कर रहा है।

लखनऊ /दिल्ली। केंद्र सरकार को ऑक्सीजन मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से नोटिस मिलने के बाद केंद्र सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट में में अर्जी डाला है। बुद्धवार को केंद्र सरकार की तरफ से दी गई अर्जी में कहा गया है कि दिल्ली हाई कोर्ट के नोटिस के बाद उन्हें इस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है जैसे भारत सरकार ऑक्सीजन संकट की गहराई को नहीं समझ रहा है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपील किया है कि इस मामले की सुनवाई आज ही की जाए। हालांकि चीफ जस्टिस एनवी रमना ने जजों की कमी होने के कारण इस मामलें को जस्टिस चन्द्रचूड़ की बेंच को सौंपा है जो इसकी सुनवाई करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट  के बाद ही अब हाई कोर्ट में होगी सुनवाई

गौरतलब है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई नहीं कर लेता तब तक दिल्ली हाई कोर्ट में इसकी सुनवाई नहीं की जा सकती। हालांकि कि बुद्धवार को ही हाई कोर्ट में ऑक्सीजन मामले की सुनवाई हुई जिसमें दिल्ली सरकार ने बताया कि पिछले ऑक्सीजन सप्लाई के मुकाबले इस बार उन्हें केन्द्र सरकार द्वारा ऑक्सीजन ज्यादा मात्रा में भेजा गया है। दिल्ली सरकार के द्वारा की हाई कोर्ट में अपील किया गया था कि उन्हें उतनी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है जितनी उन्हें जरूरत है, जिस पर हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस भेजा था।

मंगलवार को हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई थी फटकार

बीते दिन मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजते हुए कहा था कि आप इस ऑक्सीजन संकट की गंभीरता से मुंह मोड़ सकते हैं हम नहीं। इसके साथ ही केंद्र के दो अधिकारियों को भी कोर्ट ने समन भेजा था। जिस पर केंद्र सरकार ने नाराजगी जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट की तरफ रूख किया उनके मुताबिक मीडिया उनके छवि को गलत तरह से दिखा रही है। केंद्र सरकार मामले की गंभीरता को बहुत अच्छे से समझती है और वो उसे ठीक करने का पूरा प्रयास कर रही है।

दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी चिन्ता विषय बना हुआ है

बता दें कि इस वक्त दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी बहुत बड़ा मसला बना हुआ है। ऑक्सीजन की कमी के कारण प्रतिदिन दिल्ली में कई लोगों की जाने जा रही हैं, लोगों को उनके जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन ना मिल पाना चिन्ता का विषय बना हुआ है। हालांकि बुद्धवार को कोविड मरीजों की संख्या में कमी आई है और मरीजों के रिकवरी रेट में भी इजाफा हुआ है पर इसके साथ ही कोविड-19 के कारण मरीजों के मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी हुई है।

बंगाल में हिंसा पर नाराज प्रधानमंत्री ने गवर्नर से बात की

लखनऊ /कोलकाता। बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही हिंसा का दौर जारी है। अलग-अलग इलाकों में कथित तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों व पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ और आगजनी हो रही है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ से फोन पर बात की है और राज्य के हालात पर चिंता व्यक्त की है।  राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मंगलवार दोपहर को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज फोन पर बात कर बंगाल में जारी हिंसा को लेकर चिंता व्यक्त की है।

इधर, राज्यपाल ने एक बार फिर पुलिस व प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों से हालात पर काबू पाने व स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य बनाने को कहा है। आपको बता दें कि बंगाल में दो मई यानी रविवार को चुनाव के नतीजे घोषित किए गए हैं, जिसके बाद से ही राज्य में हिंसा का दौर जारी है। बंगाल के कई जिलों में तोड़फोड़, आगजनी, लूटपाट, दुष्कर्म और हत्या होने की शिकायत सामने आई है। भाजपा का दावा है कि तृणमूल कार्यकर्ताओं के हमले में अब तक कम से कम उसके नौ कार्यकर्ताओं की मौत हो चुकी है।

बिहार के नये मुख्य सचिव, जानिये दूरदर्शन से क्या है उनका रिश्ता!

लखनऊ /पटना। बिहार को नया मुख्य सचिव मिल गया है आपको बतााते चलें कि बिहार के मुुख्य सचिव  की कोरोना से मृत्यु हो गई थी। नवनियुक्त मुख्य सचिव 1985 बैच के आईएएस अधिकारी और दिल्ली दूरदर्शन के महाानिदेशक रह चुके हैं। 

डीडी न्यूज के वरिष्ठ संवाददाता राजेश राज ने मुख्य सचिव त्रिपुरारि शरण को बधाई देते हुए बिहार सरकार का देर से लिया लेकिन सही फैसला बताया। उन्होंने कहा कि त्रिपुरारि बाबू जैसे योग्य ब्यूरोक्रेट को पहले ही मुख्य सचिव का दायित्व दिया जाना चाहिए था।

जेएनयू के छात्र रह चुके त्रिपुरारि शरण  एक हरफनमौला व्यक्तिव के मालिक हैं। जिनकी साहित्य और कला में भी गहरी अभिरुचि है। यही वजह है कि उन्होंने दूरदर्शन के अलावा फिल्म इंस्टिट्यूट पुणे यानि FTI के निदेशक का ज़िम्मा भी बखूबी संभाला।

राजेश राज कहते हैं कि श्री शरण एक सुलझे हुए ब्यूरोक्रेट हैं,जिन्हें उलझी हुई गुत्थियां सुलझाने में महारत हासिल है। दूरदर्शन दिल्ली का उनका कार्यकाल स्वर्णिम काल माना जाता है। जिसमें उन्होंने अपने अधीन काम करने वाले छोटे छोटे सहकर्मियों का भी खूब ख्याल रखा।

इससे पहले त्रिपुरारि शरण बिहार सरकार में उद्योग, वन और पर्यावरण समेत आधा दर्जन से भी ज़्यादा विभागों में प्रधान सचिव का दायित्व संभाल चुके हैं वो एक ऐसे समय में मुख्य सचिव का पद संभालने जा रहे हैं हैं। जब देश और प्रान्त कोरोना की मार झेल रहा है।

लेकिन राजेश राज ने उम्मीद जताई कि श्री शरण चुनौतियों के बीच  बिहार के विकास की नई इबारत लिखेंगे और एक बेहतरीन खाका खींचेंगे। 

वो गुलामी तो गयी लेकिन ये गुलामी कब जायेगी!

हमारे मुल्क का इतिहास सिंधु घाटी की सभ्यता से शुरू हो कर मध्यकालीन भारत से होता हुआ 1757 में आधुनिक भारत में प्रवेश करता है। यह देश तुर्कों, मंगोलों, मुगल राजाओं और बादशाहो के कब्जे में था उसके बाद ब्रिटिश शासन  में रहा।

चूंकि बादशाहों और राजाओं का मिजाज जनता को गुलामी का एहसास कराये रखना था इसलिए वो आम जन के लिए ऐसे प्रोटोकोल बनाते थे जिससे कि उनका स्वाभिमान कभी बुलंद ना हो सके इसलिए जनता को भी उन्हीं तौर तरीकों को फॉलो करने की और उसके कसीदे पढ़ने के लिए अपने मन में गुलामी की भावना रखने और उसकी चाकरी करने की आदत पड़ गई है।

15 अगस्त 1947 को हमेें राजनीतिक आजादी मिली और 26 जनवरी 1950 को हम एक स्वयंभू गणराज्य बन गये हमे लोकतंत्र तो मिला लेकिन हम अभी लोकतन्त्र की मूल भावना जो बराबरी का हक देती है इस को समझने में हम विफल रहे हैं जहाँ तक उसपर अमल करने की बात है तो इसमें नेता और जनता के बीच में साझदारी और बराबरी में एक गहरी खाई जैसी दूरी है जिस कारण हम अपने हक की आवाज उठाने में डरते हैं।

बल्कि ये समझते है की ये वही हमारे मालिक और बादशाह या राजा है जिनके हमारे बाप दादा गुलाम हुआ करते थे ये अब MLA MP, MINISTER , का रूप लेकर जन्मे है तो हमको इनकी जीत पर वैसा ही जश्न मनाना चाहिए जैसे एक गुलाम, किसी बादशाह के विजयी होने पर मनाता है।

अगर आपको इसका तजुर्बा करना हो तो उत्तर प्रदेश में पंचायती चुनाओ और बंगाल में विधान सभा चुनाओं के रिजल्ट पर नेतााओं की जीत पर गुलाम जनता का पागल दीवानों की तरह  सड़को पर भौंडा प्र्रदर्शन  देखा जा सकता है यहाँ तक कि उसकी झलक आप फेसबुक पर देख सकते है।

चुनाव के रिजल्ट पर कोई अपनी राय देना खुशी का इजहार करना तो समझ आता है लेकिन नेता जी के इतने कसीदे गुलामों की तरह पड़ना तो गुलामों की आदत का हिस्सा है और गुलाम को हमेशा एक मालिक की तलाश होती है जो MLA,MP ,PRADHAN,ZILA PACHANT,BDC , के रूप में उसको मिल जाती है और वो उसको अपने सर रख कर नाचता है और इस खुशी में वो अपनी और अपने बच्चो की जरूरतों को भूल जाता है। 

कोरोना! काल, महाकाल और प्रोटोकोल

आज एक बहुत ही मामूली से शब्द ने पूरे विश्व में हाहाकार मचाया हुआ है। हर व्यक्ति आज दुख और तकलीफ में है। वह आए दिन वह अपनों को खो रहा है, साथ ही कई प्रिय जनों को भी। आज का माहौल देखकर यह लगता है कि दुनिया अचानक से काल, महाकाल और प्रोटोकोल में बदल गई है।

जहां भी देखो, जिसे भी देखो……बस अपने ही परेशानी में परेशान है। अगर सही मायने में कहा जाए तो कोरोना ने सांसो का संसार बदल दिया है। बड़े-बड़े पार्टियों के नेता खुशियां मना रहे हैं रैलियां निकाली जा रही है चुनाव हो रहे हैं उससे कोरोना की संख्या पर भारी तादाद में असर हुआ है बल्कि आधा हमें आज श्मशान में देखने को मिल रहा है यह दुख असहनीय है हर एक बस अपने ही दुख में दुखी है।

कभी एक शब्द हुआ करता था सकारात्मक इंग्लिश में जिसे पॉजिटिव कहते हैं वह आज बुरी तरह से बदनाम हो चुका है क्योंकि लोग भारी संख्या में कोरोना पॉजिटिव हो रहे हैं लोगों को समय पर ऑक्सीजन सिलेंडर ना मिल पाने के कारण भारी तादाद में मौतें भी हो रही है और तो और मरने के बाद भी लोगों को चैन नहीं मिल रहा है क्योंकि लाशों को जलाने के लिए भी लाइन लगानी पड़ रही है।

रविवार को चुनाव के नतीजे आये हैं, लोग खुशियां मना रहे हैं मिठाईयां बांट रहे हैं , आतिशबाजी भी कर रहे हैं , सबकुछ इनकी ही मुट्ठी में होगा। लेकिन जनता को तो शोक मनाने तक का अधिकार नहीं दिया गया है। आज आधी जनता शमशान में है। अपनों के लिए रोने तक की भी मोहलत नहीं मिल रही है। यह अपना दुख आखिर कैसे व्यक्त करें? हम अचानक से अपनों की खबर सुनते हैं कि कल तक वह ठीक था…..पर अचानक से क्या हो गया? हम बिल्कुल ही हैरान हो जाते हैं।

सच में यह बहुत ही संकट की घड़ी है। हम सभी को साथ मिलकर यह वक्त गुजारना है। एक दूसरे का हाथ थामे रहना है। पर हां, अपने ही घरों पर रहकर। अगर जरूरी हो तभी घर से बाहर निकले। हम मानते हैं, आप परेशान हैं……पर यह समय परेशान होने का नहीं, बल्कि इसका डटकर सामना करने का है, तो हिम्मत बांधे रखिए और कुदरत पर भरोसा रखिए। वो एक न एक दिन सभी कुछ ठीक करेगा।

हाल ए बंगाल : मोदी का हाल बेहाल, ममता ने किया कमाल

लखनऊ / कोलकाता। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने तीसरी बार बहुमत हासिल करते हुए जीत दर्ज की। सारे विपक्षी पार्टियों के पुरजोर कोशिशों के बाद भी ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने में सफल रहीं। ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार के शुरूआत में ही ‘खेला होबे’ नारे के साथ चुनावी बिगुल फूंका था। वहीं विपक्षी पार्टी बीजेपी के पूरी ताकत लगाने के बाद भी वो दहाई का आंकडा पार नहीं कर पाए और 77 सीटों पर ही सिमट कर रह गए। हालांकि पश्चिम बंगाल में 77 सीटें मिलना भी बीजेपी के लिए बड़ी उपलब्धि है।

बीजेपी ने ममता बनर्जी के खेला होबे के तर्ज पर ‘विकास होबे’ को अपना चुनावी बुनियाद बनाते हुए चुनाव प्रचार की शुरूआत की। तीन महीने तक बीजेपी के कई मंत्रियों ने पश्चिम बंगाल में लगातार सभाएं और रैलियां की, जिनमें केंद्र के कई मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्रियों ने भी चुनाव प्रचार किया। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद ड़ेढ़ दर्जन से अधिक चुनावी सभाएं की। एक भी दिन ऐसा नहीं गया होगा जिस दिन बीजेपी नें पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार ना किया हो। लगातार रोड शो और रैलियां करने और अपने हिंदुत्ववाद की भावना को आगे करने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी को बंगाल में दीदी उप-राष्ट्रवाद नीति से करारी सिकस्त मिली।

3 सीटों से 77 सीटों तक पहुंचना बीजेपी के लिए बड़ी उपलब्धि

हालांकि बीजेपी ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा के पिछले चुनाव की तुलना में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। बीजेपी का तीन सीटों से 77 सीटों तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ी जीत माना जा रहा है। परन्तु बीजेपी ममता के बेड़े में सेंध नहीं लगा पाई। बीजेपी को इतनी सीटों के मिलने से बंगाल में कांग्रेस का पूरी तरह सफाया हो गया। बीजेपी के राष्ट्रवाद नीति पर ममता का उपराष्ट्र वाद की नीति का पलड़ा भारी पड़ गया।

बीजेपी के हिंदुत्वाद तोड़ के लिए ममता ने किया चंड़ीपाठ

बीजेपी के ममता बनर्जी पर भाई-भतीजावाद औऱ अल्पसंख्यक के तुष्टीकरण का, और जातिगत राजनीति करने का आरोप लगाने के बाद भी इन तबगो का वोट ममता की झोली में ही अधिक गया। जहां पर बीजेपी ने हिन्दुवाद की राजनीति की तो ममता ने खुद को ब्राह्मण की बेटी बताया और चंडीपाठ किया, जिससे हिन्दु वोटरों के साथ-साथ अल्पसंख्यक वोटरों का भी समर्थन दीदी को मिला।

औरतों की अस्मिता को ममता ने बनाया अहम मुद्दा

ममता बनर्जी ने औरतों की अस्मिता को भी अपना एक मुद्दा बनाया, ‘कन्याश्री’ और ‘रूपश्री’ की जिक्र करते हुए बंगाल की महिलाओं को लुभाने का प्रयत्न किया जिसमें वो काफी हद तक सफल भी रहीं। ममता ने बीजेपी को हमेशा बाहर वाला कह कर ही जनता के सामने संबोधित किया जिसका फायदा चुनाव नतीजों में देखा जा सकता है। दीदी की ओर अधिक वोटरों के झुकाव का एक कारण यह भी माना जा रहा है कि पैर में चोट और व्हील चेयर पर होने के बाद भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार को नहीं रोका और लोगों के बीच जाती रहीं।

बीजेपी के केन्द्रीय मंत्रियों और कई नेताओं की लाख कोशिशों और ताम-झाम के बाद भी वो बंगाल की महिला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जड़ को छू भी नहीं पाए और अगले पांच सालों के लिए दीदी ने अपना रास्ता साफ कर लिया है।

एक थीं शूटर दादी

बहुत पुरानी बात नहीं है बल्कि कोरोना के दौर में हमने एक ऐसा अनमोल हीरा खोया है जो हम सभी के लिए अनुकरणीय था। जी हां, हम बात कर रहे हैं दादी “चंद्रो तोमर” की जिन्हें हम सब “शूटर दादी” के नाम से भी जानते हैं। कोरोना से पीड़ित “चंद्रो तोमर” दादी का इलाज मेरठ के एक निजी अस्पताल में हो रहा था। उनके चरणों में भावपूर्ण श्रद्धांजलि प्रकट करते हुए यह लेख लिखा जा रहा है। 

दादी “चंद्रो तोमर” अपनी देवरानी प्रकाशी तोमर के साथ मिलकर निशानेबाजी करती थी। निशानेबाजी के जगत में इन दोनों का बहुत ही बड़ा हाथ हैं। जब भी “बागपत” गांव की बात होती है तो, शूटर दादियों को जरूर याद किया जाता है। “बागपत” गांव ने बहुत से निशानेबाज इस देश को दिए हैं। दादी “चंद्रो तोमर” ने अंतरराष्ट्रीय स्तर तक के अवॉर्ड अपने नाम किए हैं।

जिस उम्र में लोगो के हाथ कांपते हैं, उस उम्र में इन्होंने हाथ थामने वाले काम किए हैं। ये दोनों महिलाएं आज पूरे विश्व में अपनी निशानेबाजी के लिए मशहूर हैं। दादी चंद्रो तोमर और उनकी देवरानी प्रकाशी तोमर दोनों की ही जोड़ी काफी जंचती थी साथ में…..जो कि अब अधूरी हो चुकी है। प्रकाशी तोमर ने ट्वीट भी किया था कि हमारा साथ छूट गया।

इन मशहूर निशानेबाजों का जीवन इतना सराहनीय है कि इनके जीवन पर एक फिल्म भी बनी है जिसका नाम है “सांड की आंख”। गांव में इन्हें बहुत से लोगों ने ताने मारे, इन्हें रोकने की भी कोशिश की पर यह रुकी नहीं। इनका जज्बा इतना अटूट था कि ये दोनों आगे बढ़ती ही गई, बढ़ती गई और बढ़ती ही चली गई।

काश! दादी ने कोरोना वायरस को भी शूट कर दिया होता!

लखनऊ/मेरठ। शूटर दादी के नाम से मशहूर चन्द्रो तोमर का 89 साल की उम्र में कोविड-19 से निधन हो गया। चन्द्रो तोमर को 26 अप्रैल को सांस लेने मे परेशानी होने के कारण मेरठ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पर टेस्ट से पता चला कि वो कोविड-19 वायरस से ग्रसित हैं। शुक्रवार को शूटर दादी चन्द्रो तोमर ने अपनी अन्तिम सांस ली। कोरोना वायरस से प्रतिदिन लगभग 3000 लोगों की देश में मृत्यु हो रही है।

चन्द्रो तोमर की भाभी प्रकाशी तोमर ने अपने ट्विटर हैंडल से जो खुद भी एक शूटर हैं, दुख व्यक्त करते हुए लिखा कि ‘चन्द्रो तुम कहां चली गई, तुम मुझे अकेला छोड़ गई’। गौरतलब है कि चन्द्रो औऱ प्रकाशी तोमर हमेशा साथ में किसी भी प्रतिस्पर्धा में भाग लेती थीं।

60 से अधिक की उम्र में शुरू किया अपना शूटिंग करियर

उत्तर प्रदेश के मेरठ के बागपत में रहने वाली शूटर दादी ने 60 साल से अधिक उम्र में अपने शूटिंग करियर की शुरूआत की थी। शूटिंग करियर में उन्होनें कई अन्तर्राष्ट्रीय मेडल अपने नाम किए और सबसे अधिक उम्र की खिलाड़ी होने का रिकॉर्ड भी उनके नाम पर दर्ज है। परिवार का सहयोग ना होने के बाद भी चन्द्रो तोमर ने शूटर बनने की ठानी और शूटिंग करियर में कदम रखा।

चन्दो तोमर की कहानी पर ‘सांड की आंख’ नाम से बन चुकी है फिल्म

चन्द्रो तोमर और प्रकाशी तोमर की कहानी से प्रेरित होकर बॉलीवुड में ‘सांड की आंख’ नाम से फिल्म भी बनाई गई है। फिल्म में चन्द्रो तोमर का किरदार निभाने वाली अदाकारा भूमि पेडनेकर ने इस क्षति पर संवेदना व्यक्त करते हुए लिखा कि ‘ऐसा महसूस हो रहा है जैसे मेरी जिंदगी का एक हिस्सा चला गया। उन्होनें अपने लिए खुद रास्ता बनाया और कई लड़कियों को प्रेरित किया है।’

खेल मंत्री किरन रिज्जू ने भी शूटर दादी के निधन पर शोक जताते हुए लिखा कि ‘वो हजारों लोगों के लिए प्रेरणा थी और हमेशा रहेंगी’। कई हस्तियों ने चन्द्रो तोमर के निधन को देश की बहुत बड़ी छति बताया और उन्हें श्रद्धांजलि दी।

हिम्मत! ताकि उन दिनों में लड़कियाँ ना हों बेचैन

लखनऊ। महिलाओं, बेटियों और बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए यूपी में चलाये जा रहे ‘मिशन शक्ति’ अभियान के तहत हस्तशिल्प एवं सांस्कृतिक महोत्सव का मंच एक खास अभियान का गवाह बना। आशियाना स्थित कथा मैदान में शनिवार को आयोजित इस अभियान में गरीब महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता के मद्देनजर सेनेटरी पैड ‘हिम्मत’ को लॉन्च किया गया।

सृजन फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान कई महिलाओं और बेटियों के बीच मुफ्त सेनेटरी पैड का वितरण किया गया। इस खास मुहिम में कल्याणी फाउंडेशन ने भी पूरा सहयोग दिया।

सृजन फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. अमित सक्सेना ने बताया कि किसी भी समाज को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले परिवार का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। जिसमें महिलाओं के स्वास्थ्य पर सबसे अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। इसी के मद्देनजर फाउंडेशन की ओर से सेनेटरी पैड ‘हिम्मत’ का निर्माण किया गया है।

उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में मामूली कीमत में सेनेटरी पैड उपलब्ध कराना है। जो महिलाएं बहुर्राष्ट्रीय कंपनियों के प्रोडक्ट नहीं खरीद सकतीं, वे भी इस सेनेटरी पैड का इस्तेमाल कर कई बीमारियों से बच सकती हैं।

कार्यक्रम में कल्याणी फाउंडेशन की सचिव स्वाति चटर्जी ने कहा कि पीरियड यानी माहवारी को लेकर समाज में अभी भी भ्रम है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में आज आधुनिक समय में भी खुल कर बात नहीं करते। इसकी वजह से अक्सर महिलाओं को कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं से बचने के कई उपायों में से एक सैनिटरी नैपकिन है।

उन्होंने कहा कि कल्याणी और सृजन फाउंडेशन मिलकर दूरदराज के क्षेत्रों में माहवारी से संबंधित समस्याओं के प्रति जागरूकता फैलाएंगे और महिलाओं व बच्चियों का सेनेटरी पैड के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करेंंगे। इस उद्देश्य के लिए दोनों फाउंडेशन मिलकर भविष्य में एक-दूसरे के कार्यक्रम में सहभागिता दर्ज कराएंगे।

कार्यक्रम के दौरान सृजन फाउंडेशन के सचिव अरुण प्रताप सिंह, उपसचिव संदीप शुक्ला, संयोजक सुमित भौमिक, रणवीर सिंह, विनय दुबे आदि मौजूद रहे।

एक हिन्दोस्तान में बन रहे हैं कई पाकिस्तान !

लखनऊ /दिल्ली /हैदराबाद। हैदराबाद की नगर-निगम के चुनाव और उसके परिणामों की राष्ट्रीय स्तर पर विवेचना हो रही है लेकिन मुझे इस स्थानीय बिल में से एक अंतरराष्ट्रीय सांप निकलता दिखाई पड़ रहा है। यह स्थानीय नहीं, अंतरराष्ट्रीय चुनाव साबित हो सकता है। यह एक भारत को कई भारत बनानेवाली घटना बन सकता है।

मोहम्मद अली जिन्ना ने तो सिर्फ एक पाकिस्तान खड़ा किया था लेकिन अब भारत में दर्जनों पाकिस्तान उठ खड़े हो सकते हैं। भाजपा के नेता खुशी मना रहे हैं कि उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी की मुस्लिम एकता पार्टी के मुकाबले ज्यादा सीटें जीत ली हैं। पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार की जीत 12 गुनी हो गई है। 4 से 48 हो गई है। भाजपा इस प्रचंड विजय पर अपना सीना फुलाए, यह स्वाभाविक है। इसे वह पूर्ण दक्षिण-विजय का शुभारंभ मान रही है।

AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी

इस अपूर्व विजय का श्रेय सभी भाजपा नेता अपने महान नेता नरेंद्र मोदी को दे रहे हैं। इसके अलावा वे किसी को दे भी नहीं सकते। लेकिन इसका श्रेय मैं ओवैसी को भी देता हूं। मोदी और ओवैसी ने हैदराबाद के मतदाताओं के बीच हिंदू—मुसलमान की दीवार खड़ी कर दी है। ओवैसी की पार्टी ने सिद्ध किया है कि वह भाजपा से भी अधिक मजबूत है। उसने पिछली बार 60 सीटें लड़ी थीं और 44 सीटें जीती थीं। इस बार उसने 51 सीटें लड़ीं और फिर भी वह 44 सीटें जीतीं। जबकि भाजपा ने 149 सीटें लड़ीं थी। ओवैसी की पार्टी सिर्फ 6 सीटें हारी जबकि भाजपा 101 सीटें हार गई। दूसरे शब्दों में हैदराबाद का चुनाव का असली महाविजेता ओवैसी है।

ओवैसी ने बिहार के चुनाव में भी अपना जल्वा दिखा दिया था। बिहार और हैदराबाद में कांग्रेस का सफाया किस बात का सूचक है ? क्या इस बात का नहीं कि सारे मुस्लिम वोट अब ओवैसी-पार्टी की तरफ खिंचे चले जा रहे हैं ? क्या ओवैसी की पार्टी जिन्ना, लियाकत अली और खलीकुज्जमान की मुस्लिम लीग नहीं बनती जा रही है ?

मुस्लिम लीग ने भी 1906 में पैदा होने के वक्त भारत-विभाजन की मांग नहीं की थी। जिन्ना के जमाने में वह भारत के अंदर ही मुसलमानों के लिए जगह-जगह स्वायत्त इलाके मांगने लगी थी। ऐसे मुस्लिम-बहुल इलाके 1947 में तो थे। जैसे पंजाबी, सिंधी, बलूच, पठान और बंगाली। वे पाकिस्तान बन गए। अलग हो गए। अब किस इलाके को आप अलग करेंगे ? 25-30 साल बाद क्या देश के अंदर ही दर्जनों मुस्लिम भारतों की मांग खड़ी नहीं हो जाएगी?

भारतीय जनता पार्टी नेता अमित शाह

देश के इन दर्जनों टुकड़ों की घंटियां मुझे आज हैदराबाद से सुनाई पड़ रही हैं। अप्रत्याशित विजय के शंखनाद में भाजपा के नेताओं को ये वीभत्स घंटियां चाहे सुनाई न पड़ें लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा समस्त राष्ट्रवादी और राष्ट्रप्रेमी चिंतकों के लिए यह चिंता का विषय है। इस चिंता को लव-जिहाद और नागरिकता संशोधन जैसे अपरिपक्व कानूनों ने ज्यादा गहरा कर दिया है। भारत को यदि हमें सबल और अटूट बनाए रखना है तो उसे सांप्रदायिकता से मुक्त रखना पड़ेगा। 

 

नई शिक्षा नीति का उददेश्य बच्चों को मिले संस्कारी शिक्षा : गवर्नर

लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने मंगलवार को  राजभवन से ईश्वर शरण डिग्री कालेज, प्रयागराज के स्वर्ण जयन्ती समारोह को आनलाइन सम्बोधित किया।

समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उददेश्य ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है जो भारत की परम्परा, विरासत, सांस्कृतिक मूल्यों एवं तकनीकी ज्ञान तथा कौशल विकास में समन्वय स्थापित करे।

इसलिए इस नीति में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा की प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तन किये गये हैं। बच्चों को रूचिकर और संस्कारी शिक्षा प्राप्त हो यही नई शिक्षा नीति का मुख्य उददेश्य है।

नई शिक्षा नीति से देश आत्मनिर्भर बनेगा : Governor of UP

लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को द एसोसिएटेड चैम्बर्स आफ कामर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज आफ इण्डिया (एसोचैम), नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर आयोजित वेबिनार को संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में देश को ताकतवर बनाने, विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचाने, नागरिकों को और सशक्त करने के लिए ज्यादा से ज्यादा नये अवसर बनाने पर जोर दिया गया है। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। यह शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी।

गौरतलब है कि मैडम गवर्नर उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों की चांसलर भी हैं। 

World Heart Day : अगर नहीं करोगे डायबिटीज और बीपी कंट्रोल तो हो जायेगा हार्ट आउट आफ कंट्रोल

लखनऊ। विश्व हृदय दिवस (वर्ल्ड हार्ट डे) के मौके पर रीजेंसी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ ने एक डिजिटल प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया जिसमें डॉ दीपक दीवान,एम डी, डी एम (नेफ्रोलॉजी), रीनल साइंस डायरेक्टर ने दिल और किडनी की बीमारियों का लिंक होने के बारे में बात की।

डॉ दीपक दीवान ने कहा कि हार्ट और किडनी की बीमारी अक्सर एक साथ चलती हैं और जो भी मरीज इनमे से किसी एक से भी पीड़ित होता है वह कार्डियोरीनल सिंड्रोम (सीआरएस) से भी पीड़ित हो सकते है। सीआरएस एक अम्ब्रेला टर्म है- हार्ट और किडनी में डिसऑर्डर होने पर इसका इस्तेमाल किया जाता है।


कांफ्रेंस का संचालन डॉ अभिषेक श्रीवास्तव, सलाहकार-क्रिटिकल केयर एनेस्थीसिया और एमेरजेंसी मेडिसिन, रीजेंसी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ ने किया। जिन मरीजों में क्रॉनिक हार्ट फेलियर हो चुका है और उन्हें किडनी की बीमारी भी है, तो ऐसे मरीजों कीमृत्युहोनेका सबसे ज्यादा खतरा होता है। और जिन मरीजों को क्रोनिक किडनीकी बीमारी है अगर उनमे हार्ट की बीमारी होती है तो लगभग ऐसे आधे लोगों में मृत्युका खतरा होता है।

रीजेंसी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ रीनल साइंस डायरेक्टर, एम डी, डी एम (नेफ्रोलॉजी) डॉ दीपक दीवान ने कहा,  पूरे शरीर में एक साइड की किडनी का टोटल वेट 0.2 % होता है। किडनी शरीर में 20-22% खून को साफ़ करती है। इसी वजह से किडनी और हार्ट के बीच में काफी सम्बन्ध नज़र आता है।

जब किडनी में समस्या होती है तो यह हार्ट को नुकसान पहुंचाती है और जब हार्ट में समस्याहोती है तो यह किडनी को नुकसान पहुंचाती है। इसे कार्डियोरीनल सिंड्रोम कहते है। किडनी और हार्ट फेल दो तरह से होते है। जिन मरीजों में किडनी की समस्या है उनमे कार्डियोवस्कुलर समस्या की सम्भावना तीन गुना हो जाती है। ठीक इसी तरह जिन में हार्ट की बीमारी होती है उनमे किडनी की बीमारी होने की संभावना 30% होती है।

दुर्भाग्य से 1.34 बिलियन लोगों की आबादी वाले भारत में कार्डियोरीनल सिंड्रोम के बारे में व्यापक जागरूकता न होने के बावजूद यह लोगों में ज्यादा हो रहा है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से किडनी और हार्ट की बीमारी होती है। अपना ब्लड प्रेशर 130/80 से कम रखें और अगर आपको डायबिटीज है तो अपने ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा को कंट्रोल रखें।

यह भी देखा गया है कि किडनी और हार्ट की बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं अक्सर एक दूसरे पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप बहुत नपी तुली खुराक लें ताकि आपकी बीमारी अन्य अंग को प्रभावित किए बिना ठीक हो जाए। किडनी की बीमारी और हार्ट की बीमारी के इलाज के लिए हेल्थी लाइफस्टाइल को मेंटेन रखना भी बहुत जरूरी होता है।


डॉ दीवान ने आगे कहा, “एक्टिव रहने से आपकी किडनी और आपके हार्ट की रक्षा में मदद मिल सकती है। हफ्ते में लगभग हर दिन 30 मिनट या अधिक समय के लिए योग, एक्सरसाइज या वाक करे। कोई भी आसान एक्टिविटी से शुरू करें और बाद में ऐसी एक्टिविटी जो आपके हार्ट को पंप करें उसे करने की कोशिश करें, तेज एक्टिविटी जैसे- जैसे तेज चलना या तैरना ।

हमेशा अपनी सेहत के बारे में या किसी नई एक्टिविटी को शुरू करने से पहले अपने हेल्थ प्रोवाइडर से सलाह लें। एक हेल्थी डाईट आपको हार्ट और किडनी की बीमारी से बचाने में मदद कर सकती है। फल ,सब्जियों, असंतृप्त वसा (अनसैचुरेटेड फैट) , अनाज, मछली और कम सोडियम वाले खाद्य पदार्थ,खाकर अपने हार्ट और गुर्देको स्वस्थ रखें।

VC says MCNUJMC to establish Community Radio at New campus

Bhopal / Lucknow : The Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication, Bhopal will soon establish a community radio at its upcoming new campus at Bishankhedi in Bhopal. New Vice Chancellor Prof KG Suresh announced here on Friday.

Addressing the university leadership team, Prof Suresh said an internet radio would also be established soon along with the community radio to provide hands-on training to students and create awareness on various issues among the local community. 

A committee chaired by Shrikant Singh, Head of Department of Electronic Media, with Shreedhar Rammurthy, who established India’s first community radio ‘Radio Anna’ as honorary advisor, has been set up for the purpose. The other members of the panel are Ramesh Hangloo (Head of Radio Sharda), Ashish Joshi (Director, Production, MCU).

Prof Suresh said, it has been decided to revive the popular course BSc. (Graphic and Animation) from this academic session itself. Similarly, number of seats in M.Sc. (New Media) has been increased. Prof Suresh took a review of activities of different departments.

Upper house passes Indian medicine central council bill and homeopathy council bill 2020

New Delhi : The Rajya Sabha today passed the Homoeopathy Central Council (Amendment) Bill, 2020 and the Indian Medicine Central Council (Amendment) Bill, 2020. Homoeopathy Central Council (Amendment) Bill amends the Homoeopathy Central Council Act, 1973. The Act sets up the Central Council of Homoeopathy which regulates homoeopathic education and practice. The bill replaces the Homoeopathy Central Council (Amendment) Ordinance, 2020 which was promulgated in April this year. The legislation amends the 1973 Act to increase the period for the supersession of the Central Council from two years to three years.

The Indian Medicine Central Council (Amendment) Bill amends the Indian Medicine Central Council Act, 1970. The Act provides for the constitution of a Central Council which regulates the education and practice of the Indian medicine system including Ayurveda, Yoga and Naturopathy. The bill replaces the Indian Medicine Central Council (Amendment) Ordinance, 2020 which was promulgated in April this year. It provides that the Central Council will stand superseded from April this year and the council will be reconstituted within one year from the date of its supersession. In the interim period, the Central Government will constitute a Board of Governors, which will exercise the powers of the Central Council. The Board will consist of up to ten members.

Replying to discussion on the Bills, Health and Family Welfare Minister Dr. Harsh Vardhan said that the government is committed to bring the positive changes in the Indian medicine systems in a transparent manner to provide quality health care facilities. He said that Homeopathy, Yoga and Naturopathy are the ancient medicine systems and these have the scientific basis.


The Minister said that historic decisions have been taken in the health care sector under guidance of Prime Minister Narendra Modi. He refuted the allegation of biases in the constitution of the Board of Governors adding that it will be set up keeping in mind the quality and competency. He also said, the government has no intention of interfering in the autonomy of these bodies. The house also negated the resolutions moved by Congress and Left members objecting to the bills.

Earlier, initiating the discussion, Ripun Bora of Congress questioned the government for delaying the reconstitution of the Homoeopathy Central Council. He accused the government of putting their favourable people in the council. Santanu Sen of TMC raised the issue of transparency in the Board of Governors. Prasanna Acharya of BJD questioned the ordinance route to bring the legislation. 

Ram Gopal Yadav of Samajwadi Party asked the government that there should not be any delay in setting up the councils after the passing of the bills. Dr. Sudhanshu Trivedi of BJP said, the bills will ensure quality education and health care system in the country. He said, it will also ensure the unified research in the Homeopathy and Allopathy medicine systems. He said, India has the potential to become world leader in the areas of Homeopathy and other ancient medicine systems. Tiruchi Siva of DMK, Manoj Jha of RJD, Binoy Viswam of CPI, Sanjay Singh of Aam Aadmi Party and others also participated in the discussion.

लखनऊ के Postal Services Director कृष्ण कुमार यादव बने बनारस के Chief Post Master General

लखनऊ। प्रशासन के साथ-साथ सामाजिक व साहित्यिक सरोकरों से जुड़े अधिकारी विरले ही मिलते है। ऐसे अधिकारी न सिर्फ विभाग को नई पहचान देते हैं बल्कि अपनी सक्रियता से समाज में भी विशिष्ट मुकाम हासिल करते है। उक्त उद्गार लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव के प्रमोशन पश्चात वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल बनने पर आयोजित अभिनंदन व विदाई समारोह में वक्ताओं ने व्यक्त किये। डाक विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने श्री यादव को पुष्पगुच्छ व स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित किया और उनके नये दायित्वों के बारे में शुभकामनायें देते हुए उज्जवल भविष्य की कामना की।
 
इस अवसर पर लखनऊ मंडल के प्रवर डाकघर अधीक्षक  आलोक  ओझा ने कहा कि अपने सवा दो वर्ष के कार्यकाल में डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने डाक सेवाओं को न सिर्फ लोगों  से जोड़ा बल्कि उसे व्यापक आयाम भी प्रदान किये। सतर्कता अधिकारी शशि कुमार उत्तम ने कहा कि इस दौरान न सिर्फ विभागीय लक्ष्यों की प्राप्ति के मामले में लखनऊ परिक्षेत्र ने नए आयाम स्थापित किये, बल्कि डाक सेवाओं के बारे में जनजागरूकता और भागीदारी भी बढ़ी।
डाक निदेशक श्री यादव को भावभीनी विदाई देते हुए लखनऊ जीपीओ के चीफ पोस्टमास्टर रामनाथ यादव ने कहा कि, विभागीय कार्यों में तत्परता के साथ -साथ सामाजिक और साहित्यिक सरोकारों से  अटूट लगाव, उन्हें एक संवेदनशील और लोकप्रिय अधिकारी के रूप में प्रतिष्ठित करता है। उनके बहुमुखी व्यक्तित्व और कृतित्व से सीखने की बात कही। प्रवर रेलवे डाक अधीक्षक बीपी त्रिपाठी ने  कहा कि  निदेशक के रूप में कृष्ण कुमार यादव ने सभी को सकारात्मक रूप में कार्य करने को प्रोत्साहित किया। सहायक निदेशक एपी अस्थाना और बीएन मिश्रा ने कहा कि आप  स्टाफ और आमजन दोनों के प्रति संवदेनशील हैं ।
 
इस अवसर पर डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने लखनऊ में अपने सवा दो वर्ष के कार्यकाल के अनुभवों को शेयर करते हुए कहा कि लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र में  सभी विभागीय योजनाओं  को तत्परता के साथ लागू किया गया और इसमें सभी विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों ने भरपूर सहयोग दिया। कोरोना संक्रमण के दौर में जिस तरह से यहाँ के डाककर्मियों ने आगे बढ़कर भूमिका निभाई, वह उत्कृष्ट है। उन्होंने लखनऊ के लोगों की आत्मीयता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहाँ के लोगों  ने जो सहयोग एवं स्नेह दिया, वह सदैव याद रहेगा।
 
इस अवसर पर लखनऊ जीपीओ के डिप्टी  चीफ पोस्टमास्टर राम बिलास, एसआर गुप्ता, सीनियर पोस्टमास्टर चौक प्रधान डाकघर आर एस राणा, सहायक अधीक्षक उमेश कुमार, एसएस श्रीवास्तव, अनूप अग्रवाल, एके पांडेय, सहायक लेखा अधिकारी अभिषेक कुमार, डाक निरीक्षक प्रभाकर वर्मा, अमित कुमार, विजय कुमार, रबीश कुमार, आर के गौतम, अखंड प्रताप सिंह, अनुराग शुक्ल, शुभम, प्रवीर कुमार, सूरज, अनामिका सिंह, रूचि, रेनू सहित तमाम अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

मैडम गवर्नर ने लखनऊ विश्वविद्यालय के Recruitment Portal का शुभारंभ किया


लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने लखनऊ विश्वविद्यालय ने  पांच अन्य डिजिटल सुविधाओं के साथ साथ विश्वविद्यालय के नए रिक्रूटमेंट पोर्टल का उदघाटन किया। समारोह के दौरान मैडम गवर्नर व सभी  विद्वतजनों के समक्ष  कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने यह घोषणा की थी की देश के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर विश्वविद्यालय आचार्यों की नयी नियुक्ति के विज्ञापन लेकर आएगा।

इसी कथन को सिद्ध करते हुये लखनऊ विश्वविद्यालय  180 नयी नियुक्तियों के लिए विज्ञापन प्रकाशित कर चुका है। आवेदन लखनऊ विश्वविद्यालय के नियुक्ति पटल अर्थात Recruitment Portal के द्वारा आमंत्रित हैं,  सम्पूर्ण सूची विश्वविद्यालय वेबसाइट पर उपलब्ध है।

विश्विविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित आहर्ताओ के आधार पर प्राप्त आवेदनों का परीक्षण किया जाएगा, चयनित आवेदको को साक्षात्कार के लिए सूचना भेजी जाएगी तथा साक्षात्कार के उपरांत चयनित सदस्यो की सूची भी नियुक्ति पटल के माध्यम से ही प्रदर्शित की जाएगी।

क्लास आफ 83…Film Review

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क्लास ऑफ ’83 पूरे एक घण्टे 38 मिनट तनाव बनाकर रखती है, जो इस जेनर की फिल्म के लिए एक आवश्यक तत्व है। पर उसका असर बस फ़िल्म तक ही रहता है. आपको गॉडफादर का वो दृश्य याद होगा जिसमें गॉडफादर के बेटे का करदार निभा रहे अलपचीनो एक रेस्तरां में अपने बाप के दुश्मनों को गोली मारते हैं। उस दृश्य में और खासकर अलपचीनो के चेहरे पर इतना तनाव है कि एक लम्हे के लिए लगता है स्क्रीन फट जाएगी। क्लास ऑफ 83 में कई तनाव के क्षण हैं। वो दृश्य जिसमें सब इंस्पेक्टर शुक्ला एक गैंगस्टर के ठीक सामने बैठे हैं. एक दूसरे दृश्य जिसमें सब इंस्पेक्टर असलम बदमाशों के बीच फंस गए हैं। अगर लेखक, अभिनेता और निर्देशक मिलकर दृश्यों को और टेन्स कर सकते तो बेहतर होता। क्लाइमैक्स बहुत रूटीन बल्कि बचकाने ढंग से फिल्माया गया है। जिस कलसेकर को पहली बार मंत्री बचा लेता है, वही उसे दूसरी बार बचाने नहीं आता। लगता है तब तक डाइरेक्टर थक गए थे और समझ गए थे की फिल्म के लिए उन्होने गलत कहानी चुन ली है।

फिल्म ट्रेनिंग स्कूल तक तो ठीक चलती है, फिर भी वो कल्ट क्लैसिक प्रहार की बराबरी नहीं कर पाती, शायद इसलिए कि निर्देशक (और लेखक) के रूप में नाना पाटेकर को फिल्म की ट्रेजक्टरी पता थी, शायद इसलिए कि यहाँ इंस्ट्रक्टर या डीन के रूप में नाना पाटेकर जैसा अभिनेता नहीं है, शायद इसलिए कि वो हॉस्टल लाइफ में क्लीशे का कुछ ज़्यादा ही सहारा ले लेती है, और आप बेचैनी से सोचते हैं – नहीं, ये इस फ़िल्म की थीम नहीं है, प्लीज इसे मत दिखाओ, ये मख़मल में टाट के पैबंद जैसा है, ये फ़ैमिली आडियन्स को दूर कर देगा। यहाँ निर्देशक बहुत निराश करते हैं। 

फ़िल्म का सम्पादन बहुत अच्छा है। फ़िल्म की लम्बाई बढ़ानी मुश्किल थी क्यूंकि ज़्यादा कुछ बताने को था नहीं।

फ़िल्म में कहीं भी पुलिसवालों को बुलेटप्रूफ़ जैकेट पहने नहीं दिखाया गया है। इसी चूक की वजह से 6 पुलिसवाले कलसेकर के साथ मुठभेड़ में मारे जाते हैं। फ़िल्म बॉबी देओल द्वारा 5 कैडेट्स को चुनने की जो वजह बताती है वो कन्विंसिंग नहीं है। कहानी आज के हिसाब से मौजू नहीं है. आज के समय में 1983 में पुलिस के इस तरह एंकाउंटर करने से आप खुद को रिलेट नहीं कर पाते। हम बहुत आगे आ गए हैं, हमारा वक़्त दूसरा है, इसकी मुसीबतें और बारीकियाँ अलग हैं।

निर्देशक अतुल सभरवाल ने 2010 सोनी टीवी और यशराज फिल्म्स के लिए “पाउडर” धारावाहिक बनाया था, जो मुंबई में ड्रग्स के धंधे को लेकर था। उसके संवाद उसे ऊपर उठाते थे। एक दृश्य में नोरकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अफ़सर मुंबई पुलिस से एक अपराधी वसीम की कस्टडी लेने गए हैं। पुलिस के ये पूछने पर कि “और 407 फाइलें हैं एनसीबी में, लेकिन उनमें से ख़ास वसीम की कस्टडी के लिए आप लोग यहाँ आए हैं,” वो जवाब देते हैं – “हाँ, हमने 407 नामों की पर्ची डाली, जब एक निकाली तो वसीम के नाम की निकली।” इस तरह के इंटेलिजेंट डाइलॉग “क्लास ऑफ 83” में मिसिंग हैं। निर्देशक प्रतिभावान हैं। उसकी झलक कुछ दृश्यों में मिलती है. एक दृश्य में क्लास में खड़े शुक्ला को उसके पास का कैडेट बैठने के लिए बोलता है। दूसरे दृश्य में जब सब इंस्पेक्टर शुक्ला एक अख़बार के दफ़्तर में संपादक का कालर पकड़े है और उसकी बीवी दूसरी तरफ़ मुंह कर लेती है।

इन दिनों लेखक किरदारों को उभारने में मदद नहीं करते हैं। नतीजा यह होता है कि बहुत से किरदार एक ही जैसे सोचते बोलते हैं और वे अलग से याद नहीं रह जाते। उनका अपना कुछ स्पेसिफिक नहीं होता। वो एक समूह बन जाते हैं। उनकी इंडिविजुअलिटी खो जाती है। जबकि हर चरित्र का अपना एक रंग होना चाहिए।

1957 एक एक फ़िल्म “दीदार” के एक दृश्य में अशोक कुमार, गरीब और अंधे दिलीप कुमार की आँखों की जांच कर रहे हैं। बाहर फर्श पर निम्मी और उनका एक दोस्त बैठा है।

निम्मी कहती हैं – “आस न तोड़ना भगवन, आस न तोड़ना।”

दोस्त – “…ये आँखों की चीरफाड़ में कहीं दम तो नहीं तोड़ दिया भइया ने।”

निम्मी – “ऐसी मनहूस बातें न किया कर बल्लम, अगर उन्हें कुछ हो गया तो मैं तुझे भी जान से मार डालूँगी।”

दोस्त – “…जान से मारने की क्या ज़रूरत है पगली। अगर भइया लंबे हो गए तो हम खुद ही सूख-सूख कर मर जाएंगे।”

इस सीन में चार चरित्र हैं। सब का अपना अलग-अलग व्यक्तित्व है। दोस्त दिलीप कुमार का बचपन का साथी है, पर यहाँ भी वो मज़ाक करना नहीं छोड़ता। “क्लास ऑफ 83” में पाँचों कडेट्स की इंडिविजुअलिटी उभर कर सामने नहीं आती। ये हमारे ज़माने के सिनेमा का दोष है। वो चरित्रों पर मेहनत नहीं करता। क्या आपको ऐसे चरित्र याद हैं जो थोड़ी देर के लिए आए और आप सोचने लगे वो कौन था. “प्यासा” में सम्पादक का वो असिस्टेंट, “स्पाइडर मैन” में जर्मन मकान मालिक की लड़की, “अपूर संसार” में नायक का हमनाम पड़ोसी।

सब इंस्पेक्टर शुक्ला का किरदार निभा रहे भूपेंद्र जादावत ने एनएसडी की अपनी ट्रेनिंग की वजह से अपने किरदार को बहुत अच्छे ढंग से कैरी किया है। उन्हें इस फ़िल्म के बाद भी देखने का इंतज़ार रहेगा. 

फ़िल्म कहती है कि वो मोटे तौर पर सय्यद हुसैन जैदी की 2019 में आई किताब “द पनिशर्स ऑफ मुंबई पुलिस, द क्लास ऑफ 83” पर आधारित है। उनकी कई किताबों पर फिल्में बनी हैं। 1993 के दंगों पर आधारित “ब्लैक फ्राइडे” पर अनुराग कश्यप ने इसी नाम से फ़िल्म बनाई थी, जो बैन हुयी और अब जाकर प्राइम पर आ पाई है।

बैक्ग्राउण्ड स्कोर विजू शाह का है। निर्देशक वही 80 के दशक का सिंथ म्यूजिक चाहते थे इसलिए। 80 के दशक की बंबई का प्रभाव लाने के लिए निर्देशक ने फ़िल्म डिविजन की डाक विभाग, नेशनल पुलिस अकादमी आदि पर बनी डॉक्युमेंट्रीज़ को खंगाला और उस समय को रिक्रिएट करने की कोशिश की। उन्होने पुरानी फ़िल्मों के दृश्य भी डाले।

फ़िल्म का क्लाइमैक्स अनकन्विंसिंग है। कहानी कंटेम्पररी नहीं है, इंगेज करने वाली भी नहीं है। जो है, उसका ट्रीटमेंट भी अच्छा नहीं है। किरदारों पर मेहनत नहीं की गयी है। बस एक किताब है, जिस पर एक फ़िल्म बनी है। अब किताब कैसी है, वो एक अलग लेख का विषय है.

क्यों न बढ़ा दी जाये लड़कियों की शादी की उम्र!

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 से 18 देश के नागरिकों को समानता का अधिकार देता है। अनुच्छेद 21 में गरमापूर्ण जीवन जीने का भी अधिकार देता है। लोकतांत्रिक सरकारों ने समय-समय पर महिलाओं और पुरुषों की असमानता को खत्म करने के लिए प्रयास किया हैं। लेकिन जब हम समानता और गरिमापूर्ण जीवन की बात करते हैं तो क्यों न्यूनतम शादी की उम्र में असमानता की बात भूल जाते हैं?

क्या हम पितृसत्तात्मक सोच से अभी तक बाहर नहीं आ पाए हैं? आज ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है, जहां पुरुषों से महिलाएं कम हों। भारतीय कानून में पुरुषों की शादी की उम्र न्यूनतम 21 वर्ष निर्धारित की गई है, लेकिन लड़कियों की न्यूनतम शादी की उम्र 18 वर्ष निर्धारित की गई है। जो भारतीय संविधान के समानता वाले ही अधिकार का उल्लंघन करती है। यह असमानता का परिचायक है। इस तरह से रूढ़िवादी मान्यताओं और परंपराओं को बढ़ावा मिलता है।

वर्तमान समय के परिपेक्ष में बदलती महिलाओं की भूमिका के बारे में समाज और देश को विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है। लड़कियों की जल्दी शादी होने से उन्हें पढ़ाई; सामाजिक सहभागिता से दूर कर देता है। और उनके पास अच्छे अवसरों की अनुपलब्धता हो जाती हैं। यह किसी एक अच्छे लोकतंत्र राज्य के लिए सकारात्मक बात नहीं है।

लड़कियों के न्यूनतम शादी की उम्र 21 वर्ष करने पर भारतीय संसद, भारतीय समाज और कानून विशेषज्ञों को विचार करने की आवश्यकता है। लड़कियों की न्यूनतम शादी की उम्र 18 वर्ष होने से मौलिक अधिकारों का हनन होता ही है, साथ ही प्राकृतिक न्याय के खिलाफ हम जाने का कार्य करते हैं।

समाज को भी इस पर गहन विचार विमर्श की आवश्यकता है। क्या नारी की दशा सुधारने में समाज अपनी मानसिकता को बदलने के लिए तैयार है? क्योंकि जब तक समाज की तरफ से पहल नहीं हो होगी। तब तक इस असमानता को पाटा नहीं जा सकता है। महिलाओं की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक गतिविधियों में सहभागिता बढ़ने से, वह खुद तो मजबूत होंगी ही, बल्कि देश भी सामाजिक रूप से सशक्त होगा। 

मोदी तानाशाह… और सोनिया!

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अब फिर देश को बासी कढ़ी परोस दी। मां ने बेटे को भी मात कर दिया। छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन के भूमिपूजन समारोह में बोलते हुए वे कह गईं कि देश में ‘गरीब-विरोधी’ और ‘देश-विरोधी’ शक्तियों का बोलबाला बढ़ गया है। ये शक्तियां देश में तानाशाही और नफरत फैला रही हैं। देश में अभिव्यक्ति की आजादी खतरे में है।

ये सब बातें वे और उनका सुपुत्र कई बार दोहरा चुके हैं लेकिन इन पर कोई भी ध्यान नहीं देता। यहां तक कि कांग्रेसी लोग भी इनकी मज़ाक उड़ाते हैं। वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के उत्तम कामों तक अपना भाषण सीमित रखतीं तो बेहतर होता। जहां तक तानाशाही की बात है, वह तो आपात्काल के दौरान इंदिरा गांधी भी स्थापित नहीं कर पाई थीं। उन्हें और उनके बेटे संजय गांधी को भारतीय जनता ने 1977 के चुनाव में फूंक मारकर सूखे पत्ते की तरह उड़ा दिया था।

उन्हें आज नाम लेने में डर लगता है लेकिन वह कहना यह चाहती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तानाशाह है और भाजपा अब भारतीय तानाशाही पार्टी (भातपा) बन गई है। उनका यह आशय क्या तथ्यात्मक है ? इस पर हम जरा विचार करें।

आज भी देश में अखबार और टीवी चैनल पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। जो जान-बूझकर खुशामद और चापलूसी करना चाहें, सरकार उनका स्वागत जरुर करेगी (सभी सरकारें करती हैं) लेकिन देश में मेरे-जैसे दर्जनों बुद्धिजीवी और पत्रकार हैं, जो जरुरत होने पर मोदी और सरकार की दो-टूक आलोचना करने से नहीं चूकते लेकिन किसी की हिम्मत नहीं है कि उन्हें कोई जरा टोक भी सके।

जहां तक तानाशाही का सवाल है, वह देश में नहीं है, पार्टियों में है। एकाध पार्टी को छोड़कर सभी पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र का अंत हो चुका है लेकिन सोनियाजी ज़रा पीछे मुड़कर देखें तो उन्हें पता चलेगा कि उसकी शुरुआत उनकी सासू मां इंदिराजी ही ने की थी। कांग्रेस का यह ‘वाइरस’ भारत की सभी पार्टियों को निगल चुका है। कांग्रेस की देखादेखी हर प्रांत में पार्टियों के नाम पर कई ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां’ खड़ी हो गई हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी

यदि सोनिया गांधी कुछ हिम्मत करें और कांग्रेस-पार्टी में लोकतंत्र ले आएं तो भारत के लोकतंत्र के हाथ बहुत मजबूत हो जाएंगे और उनका नाम भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। सोनियाजी की हिंदी मुझे खुश करती है। यह अच्छा हुआ कि उनके भाषण-लेखक ने सरकार के लिए ‘गरीबद्रोही’ और ‘देशद्रोही’ शब्द का प्रयोग नहीं किया। 

जिस ने यूपी को गीत संगीत का नया अंदाज दिया उसका जन्मदिन खामोशी से गुजर गया!

लखनऊ । कोविड 19 की खामोशियों के बीच यूपी के पहले एफ़ एम रेडियो स्टेशन (100.7 एफ़ एम रेनबो ने अपनी बीसवीं सालगिरह आन एयर मनाई । वर्ष 2000 से शुरू हुए गीत- संगीत ,चटपटी बातों और मुलाक़ातों के सुनहरे इस सफ़र के लिए तमाम एंकर्स ने अपने श्रोताओं से मिले बेहिसाब मोहब्बतों और प्यार दुलार का शुक्रिया अदा करते हुए कहा है कि, आप हैं तो हम हैं।

बताते चलें कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आकाशवाणी के एफ0एम0 रेनबो प्रसारण सेवा की शुरुआत 20 अगस्त 2000को हुई थी । उन दिनों इस केन्द्र के निदेशक डा0 सतीश कुमार ग्रोवर थे और अधीक्षण अभियन्ता डा0 एस0 एम0 प्रधान थे । भारत रत्न उस्ताद बिसमिल्ला खां और उनके साथियों ने उदघाटन दिवस की संध्या पर शहनाई वादन करके इसकी शुरुआत की थी ।

उद्घाटन समारोह के लिए 10किलोवाट हैरिस ट्रांसमीटर स्टूडियो परिसर में ही लगाया गया था जिससे लखनऊ और आसपास के लगभग 60 किलोमीटर क्षेत्र के श्रोताओं को इसका लाभ मिलना शुरु हुआ था । स्वस्थ मनोरंजन और जानकारियां देने वाले युवाओं के इस प्रिय चैनल की आवृत्ति 100.7 मेगाहर्ट्ज है ।इसका प्रसारण सुबह 5 बज कर 55 मिनट पर मंगल ध्वनि से शुरू हो कर  रात के 12 बजे जय हिंद पर अगली सुबह तक के लिए विराम पाता है। 

दूरदर्शन की पूर्व समाचार वाचिका श्रीमती निर्मला कुमारी एफ एम रेनबो के बारे में कहती हैं ओल्ड इज़ गोल्ड । उनका कहना है बीते हुए स्वर्णिम दिन हालांकि वापस नहीं आया करते हैं लेकिन उनकी सचित्र यादें मन को बेहद सुकून दिया करती हैं। दूरदर्शन केेन्द्र लखनऊ के ऐंकर  और एफएम रेनबो के आर जे अब्राहम मिएराज ने एफ एम रेनबो के खूबसूरत पलों को श्रोताओं से रुबरु कराने के लिए पूर्व समाचार वाचिका निर्मला कुमारी से बात की।

निर्मला कुमारी ने शिद्दत से याद करते हुए बताया कि आप सबको याद होगा कि देश में पहले सिर्फ़ दिल्ली और बंबई में ही मुख्य दूरदर्शन केंद्र थे । उसके बाद कलकत्ता, मद्रास और लखनऊ में दूरदर्शन के केन्द्र खुले । फिर एक समय ऐसा आया जब सही प्रसारण के लिए हर दिन प्रदेश में एक LPT यानी Low power transmitter खुलने लगा और उनको मुख्य केंद्र से जोड़ा जाने लगा । VIPs द्वारा बड़े बड़े रंगारंग कार्यक्रमों के बीच उस LPT का उद्घाटन हुआ करता था। भागदौड़, उत्साह, कलाकारों का साथ,शरारतें, thrill और अजीबोग़रीब fun…. ऐसे में मुझे भी कानपुर, इटावा, सुल्तानपुर, बलिया और इलाहाबाद में कार्यक्रम संचालन का मौक़ा मिला। 

योगी-सुशासन और विकास के दैदीप्यमान आदित्य

ठीक साढ़े तीन साल पह सपा के शासनकाल का उत्तर प्रदेश जिसनें भी देखा था उसे याद होगा कि प्रदेश में अपराध चरम पर था,भूमाफियाओ के द्वारा किसानों की गरीबों की शोषित की पीड़ित की कई हज़ार हेक्टेयर जमीन हडप ली गयी थी।

स्वाईन फ्लू, डेंगू बुखार, जापानी इंसैफलाइटिस,बदहाल चिकित्सा सेवा से हर साल लाखों लोग असमय काल के गाल में समा रहें थे,किसान आत्महत्या कर रहा था,बुंदेलखंड की जनता भुखमरी के कारण फिकारा नामक घास की रोटी खाने को मजबूर थी,बाराबंकी कुशीनगर देवरिया सहित कई जिलों में भूख से मौतें हो रही थी, वहीं तत्कालीन मुख्यमंत्री के द्वारा सैफई महोत्सव में जनता की गाढी कमाई का पैसा पानी की तरह बहा कर बर्बाद किया जा रहा था ,महिलाओं से छेड़छाड़ और बलात्कार की घटनाओं में बाढ़ सी आ गयीं थी,निघासन खीरी में थाने में ही बलातकार करके महिलाओं को मार के टांग दिया गया था और उन बलात्कारियों का मनोबल मुलायम सिंह यादव जैसे लोग ये कहकर बढ़ा रहें थे कि ‘बच्चो से गलतियाँ हो जाती हैं ‘

मथुरा के कोसीकलां और मुजफ्फरनगर के दंगो से पश्चिमी उत्तर प्रदेश जल उठा था।सैकड़ो लोगों ने अपनी जान गवायी लाखों लोग शरणार्थी कैंपों में रहने को मजबूर थे, हजारों लोग अपना घर छोडकर पलायन को मजबूर थे, पूर्वांचल के कई जिलों में आर्सेनिक युक्त पानी पीकर पता नहीं कितनी जान चली गयी थी,सपा सरकार में लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर पुलिस अधिकारी को गाड़ी के बोनट पर लादकर गुंडे तांडव करते थे,प्रतापगढ़ और मथुरा में दिन दहाणे पुलिस अधिकारियों की हत्या करके अपराधी खुलेआम कानून को चुनौती दे रहें थे,थानो पर अपराधियों का कब्जा था,विकास कागजों तक सीमित था,सडके कागजों पर बनती थी,प्रदेश की जनता के घरों में बिजली आना चमत्कार से कम नहीं था, भय और भूख।

भ्रष्टाचार के उस विकराल दानव के रूप को देखकर लगता था कि क्या इससे आजादी मिलेंगी ?

2017 मे जब योगी जी प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले रहें थे तो उस समय लोगों में ये भ्रम था कि एक धार्मिक आस्था में विश्वास रखनें वाले योगी जी क्या विविधता भरें प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में 23 करोड़ जनता के “आदित्य” बन पाएँगे। क्या उत्तर प्रदेश भय भूख भ्रष्टाचार मुक्त हो पाएगा ?

राजनीति की दशा और दिशा बदलने के लिए योगी आदित्यनाथजी जैसी सोच वैसी ही कर्तव्यपरायणता सत्य निष्ठा रखनें की आवश्यकता है। पिछले तीन साल में प्रदेश को सुशासन और विकास के रास्ते पर रफ्तार देने वाले योगी जी के लिए कोरोना एक गंभीर समस्या बनकर आयी पूरे देश में लाक डाउन होंने के बाद योगी जी ने प्रशासन और जन सहयोग के द्वारा लाक डाउन को सफल बनाया। प्रदेश की जनता को कोई परेशानी न हो इसके लिए जरूरी सामान की आपूर्ति के लिए होम डिलीवरी सिस्टम शुरू किया। इतने बङे प्रदेश में होम डिलीवरी सिस्टम जैसा भागीरथ प्रयास लागू कर सफल बनाना किसी आशचरय से कम नहीं है।

विकास के पथ पर अग्रसर 

आज बुंदेलखंड में डिफेंस कारीडोर बन रहा है आज पूर्वांचल एक्सप्रेस वे अपनी पूर्णता की ओर हैं,बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे,का कार्य प्रगति पर है,गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे का निर्माण कार्य तेज़ी से हो रहा है, वहीं गंगा एक्सप्रेस वे परियोजना को भी साकार किया जा रहा है, प्रदेश के ज़िले और तहसील को चार लेन की सडक से जोडा जा रहा है, प्रदेश में 7एअरपोर्ट है और 11 एअरपोर्ट पर काम हो रहा है।नहरों की समय से मानक के अनुरूप सफाई हो रहीं हैं, नहरों के टेल तक पानी पहुँच रहा है, प्रदेश आज खुलें मे शौच से मुक्त हो चुका है। 

नया प्रयोग पुलिस कमिश्नरेट 

प्रदेश में लखनऊ और नोएङा में पुलिस कमिश्नरेट वयवस्था को लागू कर योगी सरकार ने सुशासन के प्रति अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति की झांकी प्रसतुत किया है। आज प्रदेश में साइबर थाने बन रहें हैं,पुलिस फोरेंसिक युनिट बन रही है। वहीं भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति पर शत प्रतिशत अमल करते हुए अपराधियों और भ्रष्टाचारियो को जेल के अंदर पहुँचाया जा रहा है ।हजारों की संख्या में एनकाउन्टर होने से अपराध और अपराधियों की कमर टूट गयी है।

लॉकडाउन में लालन पालन 

योगी सरकार ने लाकडाउन में कोई गरीब भूखा न रहें इसके लिए कम्युनिटी किचन की शुरुआत करवायी। जिला तहसील ब्लाक, न्याय पंचायत , ग्राम पंचायत और गाँव तक गरीबों के खाने का जो बेहतर और सफल इंतजाम किया गया ये शायद विश्व का सबसे बड़ी और सबसे अनूठी मानवता की मिशाल थी।राजस्थान से 10 हज़ार छात्रो को लाना पैदल अपने घरों को जा रहें मजदूरों को बसों से उनके गंतव्य तक पहुँचाना योगी जी की संवेदनशीलता का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है।

योगी जी अपने पूर्वाश्रम के जन्मदाता के अंत्येष्टि में न जाकर अपने अथाह पितृशोक को दबाकर प्रदेश के कल्याण को प्रदेश की जनता के दुख को दूर करने को सर्वोपरि रखते हैं, आज उत्तर प्रदेश में अपराध पूरी तरह नियंत्रण में हैं,जनता के अंदर अपराधियों का भय नहीं है, बल्कि अपराधियों के अंदर कानून का भय है,जमीन के अवैध कब्जे नगण्य हो चुके हैं और भूमाफियाओ से अवैध कब्जे की जमीन मुक्त करायी जा चुकी है।

स्वास्थ्य सुविधाएं 

आज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से लेकर चिकित्सा विश्व विधालयो में डाक्टर और दवाई दोनों नियमित रूप से मिलते हैं। गोरखपुर में एम्स बनकर तैयार हो गया है, गोरखपुर और रायबरेली दोनो एम्स में ओ.पी.डी शुरू हो गयी है।आयुष्मान योजना के तहत दस लाख लोगों का बीमा कराया गया है। प्रदेश में और बेहतर चिकित्सा जनता को सुलभ हो इसके लिए केन्द्र सरकार द्वारा और मेडिकल कालेज खोलने की मंजूरी मिल गयी है,इस तरह जहाँ 2017 तक प्रदेश में सिर्फ 12 मेडिकल कॉलेज थे ,वही अब 30 मेडिकल कॉलेज पर काम किया जा रहा है, पूर्वांचल में जुलाई अगस्त में होने वाली संक्रमित बीमारियों को शत प्रतिशत नियंत्रित किया जा चुका हैं।

गंभीर बीमारियों किडनी,हार्ट,लीवर व अन्य रोगों से ग्रसित लाखो लोगों के ईलाज के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से धनराशि भेजी जा रही है, मुख्यमंत्री राहत कोष से इलाज के लिए धनराशि भेजने के मामलें में अब तक योगी जी नं एक पर हैं, पूर्वांचल के कई जिलों में आर्सेनिक रिमूवल पलांट लगाए जा चुके हैं।

महिला सुरक्षा 

एंटी रोमियो स्कवाएड के गठन से महिलाओं से खुलेआम छेड़छाड़ के मामलों पर पूरी तरह रोक लग चुकी हैं। आज कोरोना के टैस्टिंग मे उत्तर प्रदेश पहलें स्थान पर है,कोरोना से होने वाली मृत्युदर 1.6%है,वहीं कोरोना से अब तक 70% लोग ठीक होकर घर जा चुके है,

जहाँ पहलें उत्तर प्रदेश में बिज़ली का आना दिवा स्वप्न था वहीं आज योगी सरकार में ग्रामीण क्षेत्रों में भी कम से कम 18 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे निर्बाध बिधुत की आपूर्ति हो रहीं हैं। 1.67 लाख गावों में बिजली पहुँच गयीं हैं, एक करोड 24 लाख से अधिक लोगों को फ्री बिजली कनेक्शन दिया गया है। मुसहर और वनटंगिया के जीवन स्तर में आमूल चूल क्रांतिकारी परिवर्तन करके योगी जी ने ये एहसास करा दिया कि दृढ़ इच्छा शक्ति के द्वारा सब कुछ संभव है।

स्थानीय रोजगार 

आज हर श्रमिक को मनरेगा का पूरा भुगतान हो रहा है, हर गरीब को शत प्रतिशत खाद्यान्न का वितरण हो रहा है, योगी सरकार बनते ही 1.87करोड किसानों का 36 हज़ार करोड़ रुपए कर्ज माफ किया गया, किसान सम्मान निधि योजना के तहत सभी किसानों के खातें में नियमित रूप से धनराशि भेजी जा रही है,सपा बसपा की सरकारों में 29 चीनी मिलें बंद हो गयी थी,देश के किसान नेता चौधरी चरण सिंह की कर्म भूमि रमाला से चीनी मिलों के पुनरोद्धार का काम शुरू हुआ पूर्वी उत्तर प्रदेश के मुडेरवा चीनी मिलों को फिर से शुरू कराया गया, गोरखपुर के पिराइच में 5000 टी.सी.डी पेराई क्षमता की नई चीनी मिल और 27 मेगावाट का जनरेटर प्लांट का लोकार्पण योगी जी ने किया।गोरखपुर के बंद पड़े फर्टिलाइजर कारखाने (हिन्दुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड) को फिर से योगी सरकार ने शुरू किया।

शिक्षा 

तो वही दूसरी तरफ गरीब के बच्चो को भी अच्छी शिक्षा मिले इसके लिए काया कल्प योजना के तहत प्राथमिक विद्यालय की दशा में ऐतिहासिक सुधार हुआ है, आज़ादी के 70 साल बाद गरीब के बच्चे भी डेस्क बेंच पर बैठ कर पढेंगे, प्राथमिक शिक्षा में यह क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है।

अगर सरकारी आकङो पर गौर करें तो 35 लाख से अधिक प्रवासी मजदूर अपनें गाँव वापस आ चुके हैं, आज उन्हे उनकी योग्यता अनुसार योगी सरकार रोजगार उपलब्ध करवा रहीं हैं। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत कामगारों को उनकी रूचि के अनुसार क्षेत्र में कार्य करने के लिए पूरी किट प्रदेश सरकार मुहैया करवा रहीं हैं। प्रयागराज में भव्य कुंभ के शत प्रतिशत सफल आयोजन ने पूरे विश्व में सनातन परंपरा का जीवंत उदाहरण देखा,तो अयोध्या की देव दीपावली मे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का पौराणिक स्वरूप का प्रदेश साक्षी बना। श्री राम जन्म भूमि पर मंदिर निर्माण के पक्ष मे कोर्ट का डिसीजन आता है,केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटायी जाती है पूरे प्रदेश में कहीं भी एक दंगा तो छोडिए कोई छुटपुट घटनाएँ भी नहीं होती हैं।

कानून व्यवस्था 

केंद्र सरकार के द्वारा लाए गए कानून सी.ए.ए.और एन.आर.सी के विरोध करने वालों से सख्ती से पेश आकर योगी जी ने दिखा दिया कि प्रदेश में दंगाइयो और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। आज 500 वर्षो के बाद अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का शिलान्यास हो चुका है,मंदिर आंदोलन में गोरक्ष पीठ की तीन पीढ़ियों और योगी जी का योगदान अतुलनीय है।

आज ऐसे मुख्यमंत्री को पाकर प्रदेश के गाँव, गली मोहल्ले में ये आम जनमानस चर्चा करता है कि योगी जी जैसा ईमानदार करतवयपरायण मुख्यमंत्री मिलना सौभाग्य की बात है। योगी जी मुख्यमंत्री हैं इसलिए प्रदेश में अमन चैन कायम है।कोरोना महामारी से पूरा विश्व लड रहा है वहीं इस लड़ाई को लड़कर भी आज उत्तर प्रदेश में सुशासन और विकास दोनों प्रगति के पथ पर अग्रसर है। सुशासन युक्त और विकास युक्त उत्तर प्रदेश का सपना साकार हो रहा है। 

अयोध्या तो सजी लेकिन लव के लाहौर का क्या!

लाहौर के नौलखा बाजार में श्रीशहीदी गुरुद्वारा स्थान को मस्जिद बनाया जा रहा है| कांग्रेसी मुख्यमंत्री कप्तान अमरिंदर सिंह तथा अकालीदल विपक्ष के नेता सुखबीर सिंह बादल की अपील पर भाजपायी विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस्लामी पकिस्तान के उच्चायुक्त से नई दिल्ली में गत मंगलवार (28 जुलाई) को इस ज्यादती पर आक्रोश व्यक्त कर दिया है|

लाहौर के इसी इलाके में चौथे मुग़ल बादशाह नूरुद्दीन जहांगीर ने पांचवे सिख गुरु अर्जुन देव को मार डाला था| कारण था कि इस शहीद ने गुरुग्रंथ साहिब को छोड़कर कुरआन पढने से इनकार कर दिया था| जिस गुरुद्वारे पर चाँदसितारा का परचम लहराया जा रहा है, उसी स्थल पर 25-वर्षीय भाई तारु सिंह जी को लाहौर के मुग़ल सूबेदार जकारिया खान ने शहीद किया था| तारु सिंह ने केश कटाने ने इनकार कर दिया तो उनके सर के बाल खाल समेत उखाड़े गए थे| पहले तो नाई को बुलवाया, फिर लोहार को| उसने आरी का उपयोग किया था| फिर भी तारु सिंह ने लाइलाही इल अल्लाह नहीं उच्चारा|

इस संधू –जाट सिख पर लघु फिल्म भी बनी| कवीन्द्र रवीन्द्र नाथ टैगोर ने इनकी श्रद्धांजलि में गीत भी लिखा| इसी माह, पौने तीन सौ वर्ष बीते, (15 जुलाई 1775 से) उनका बलिदान दिवस पड़ा था| भाई तारु सिंह सिख बलिदानियों की ढाई सदी से बनी श्रृंखला की विशेष कड़ी थे| उनकी उत्सर्ग स्थली के पास ही शहीदगंज सिंहानिया है| जहाँ ढाई लाख सिख बच्चों और स्त्रियों का मुसलमानों ने सर कलम किया था| कुछ ही आगे है दारा शिकोह चौक| इस मुग़ल युवराज ने उपनिषदों का फ़ारसी में अनुवाद कराया था| उसने काशी में शिक्षा ली| इनके गुरु कांग्रेसी नेता पंडित कमलापति त्रिपाठी के पूर्वज थे|

अगले बुधवार (5 अगस्त) को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम जन्मभूमि का पूजन करेंगे तो उन्हें याद रखना होगा कि ठीक हजार किलोमीटर दूर लाहौर में 8 दिसंबर 1992 के दिन तीस हिन्दू-जैन आराधना स्थल मटियामेट कर दिए गए थे| उनमे था भव्य मूलचंद मंदिर| इसे ढाने के लिए इस्लामी इंतजामिया ने बुलडोजर, हथौड़े, फावड़े, कुदाल आदि मुहैया कराये थे| मगर अभी तक वहाँ इन आर्त आस्थावानों को एक इंच भी जमीन नहीं मिली, जबकि पांच एकड़ भूमि मस्जिद के लिए योगी सरकार ने निकटस्थ रौनाही ग्राम में दान दे दी है|

अन्य दुखद उदाहरण भी इस इस्लामी जम्हूरिया से मिलते हैं| सिंध में मनोरा सागरतट पर तीन सौ वर्ष पुराने वरुण देवता का मन्दिर था| वह तोड़ दिया गया| कोहट में शिव मन्दिर था वो अब वस्त्र की दूकान है| मगर बलूचिस्तान प्रान्त, जो भारत का मित्र है, ने हाल ही में क्वेटा के पूर्वोत्तर में मंदिर हेतु भूखंड आवंटित कर दिया है | उसने दो सदी पुराना गुरुद्वारा भी हाल ही में सिखों को लौटा दिया है| यहाँ तोड़कर महिला शिक्षा संस्थान बनाया गया था|

यूं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वयं लाहौर के गुरूद्वारे की सुरक्षा हेतु पाकिस्तानी शासकों से बात करनी होगी| उन्हें याद दिलाना होगा कि लाहौर का अयोध्या से आत्मिक रिश्ता है| साकेत के युवराज लव ने लाहौर बसाया था| सनातन धर्म छोड़कर मतान्तरण करने वालों के कारण हुई ऐतिहासिक विकृतियाँ तथा विवशताएँ भुलायी नहीं जा सकतीं हैं| भूगोल को खंडित नहीं रखा जा सकता है|

अतीत पर नजर डालें तो प्रमाणित हो जाता है कि यह शहीदी स्थल सिख समुदाय का ही है| मुसलमानों का कोई हक़ ही नहीं है| मुग़ल बादशाह शाहाबुद्दीन शाहजहाँ के एक अदना खानसामें ने नौलखा बाजार का इलाका कभी निर्मित कराया था| समीपस्थ इबादतगाह भी बनी| सामने प्रांगण में काफिरों को कलमा पढवाना अथवा सर कलम करने का जालिम सिलसिला सदियों से चलता रहा|

ब्रिटिश राज ने April 1849 में पंजाब कब्जिया लिया| तो इसे सिखों को गुरूद्वारे हेतु दे दिया| मुसलमान लोग लाहौर हाई कोर्ट में दावा हारे| पाकिस्तान बनने के बाद फिर दो बार अदालती सुनवाई हुई| मुसलमान दावेदार पुनः हारे| गुरुद्वारा प्रबन्धन समिति का ही आधिपत्य रहा|मगर मुस्लिम लीगियों ने अब बलपूर्वक हथिया कर मस्जिद निर्माण की शुरुआत कर दी वर्तमान संकट उसी से जन्मा है। 

यह सब इस तथ्य का सूचक है कि भारत तभी तक सेक्युलर रहेगा, जब तक हिन्दू बहु संख्या में है| क्योंकि वे सहिष्णु हैं। 

AKTU ने आपदा को अवसर में बदला, E Content का कांसेप्ट गवर्नर को पसंद आया

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विवि का स्थापना दिवस रविवार को विवि के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से समारोह पूर्वक मनाया गया| इस अवसर पर प्रदेश की राज्यपाल एवं विवि की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया| साथ ही राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी, अपर मुख्य सचिव प्राविधिक शिक्षा राधा एस चौहान एवं प्रो मंगल सुंदरम, चीफ कार्डिनेटर, डीटीएच, आईआईटी, मद्रास ने बतौर विशिष्ट अतिथि प्रतिभाग किया|

विवि के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक ने वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से आयोजित स्थापना दिवस समारोह में सभी का स्वागत किया| उन्होंने कहा कि विवि, कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन में लगातार सकारात्मक प्रगति कर रहा है|

उन्होंने कहा कि कुलाधिपति द्वारा प्राप्त मार्गदर्शन का परिणाम रहा है कि विवि द्वारा कोविड-19 महामारी के कारण हुए लॉकडाउन में भी टेक्नोलॉजी के मदद से सक्रियता से कार्य करता रहा है| उन्होंने कहा कि प्राविधिक शिक्षा मंत्री कमल रानी एवं अपर मुख्य सचिव प्राविधिक शिक्षा राधा एस चौहान के निर्देशन ने भी विवि को शीर्ष पर पहुँचाने का कार्य किया है| उन्होंने कहा कि एकेटीयू प्रदेश में ‘स्वयंप्रभा’ पर डिजिटल कंटेंट का प्रसारण शुरू करने वाला पहला प्राविधिक विवि बनने जा रहा है|

प्राविधिक शिक्षा मंत्री कमल रानी अस्वस्थता के कारण समारोह में प्रतिभाग नहीं कर सकीं| उनके द्वारा प्रेषित सन्देश को समारोह के दौरान पढ़ा गया| समारोह के दौरान कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के द्वारा विवि के 178 मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन धनराशि प्रदान करके सम्मानित किया गया| विद्यार्थियों को विवि की टैलेंट इंसेंटिव स्कीम के अंतर्गत प्रोत्साहन धनराशि प्रदान की गयी|

इनमें उत्तर प्रदेश राज्य प्रवेश परीक्षा के 2018 एवं 2019 के 60 मेधावी, विभिन्न पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष के 42 मेधावी, विभिन्न पाठ्यक्रमों के द्वितीय वर्ष के 33 मेधावी, विभिन्न पाठ्यक्रमों के तृतीय वर्ष के 36 एवं चतुर्थ वर्ष के 7 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया| उत्तर प्रदेश राज्य प्रवेश परीक्षा के 2018 एवं 2019 के 60 मेधावी को 7500 रूपये बतौर प्रोत्साहन धनराशि प्रदान की गयी| जबकि प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष, तृतीय वर्ष एवं चतुर्थ वर्ष के प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 15000 रूपये एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 10000 रूपये की प्रोत्साहन धनराशि प्रदान की गयी|

श्रीमती आनंदीबेन पटेल के द्वारा स्वयंप्रभा चैनल पर विवि द्वारा निर्मित डिजिटल कंटेंट के प्रसारण का शुभारम्भ किया गया| इस डिजिटल कंटेंट में प्राविधिक शिक्षा के डिग्री एवं डिप्लोमा दोनों के डिजिटल कंटेंट के प्रसारण का शुभारम्भ शामिल है| विवि का डिजिटल कंटेंट स्वयंप्रभा के चैनल नंबर 15 पर प्रसारित किया जायेगा| प्रतिदिन सायंकाल 4 बजे, रात्रि 12 बजे एवं सुबह 8 बजे दो घंटे प्रसारित किया जायेगा|

इस अवसर पर आनंदीबेन पटेल ने कहा कि एकेटीयू द्वारा कोविड-19 महामारी के इस दौर में नियमित रूप से ई-कंटेंट की उपलब्धता कराना सराहनीय रहा है| उन्होंने कहा लॉकडाउन के दौरान विवि द्वारा 3 हजार घंटे के ई-कंटेंट को डिजिटली विद्यार्थियों तक पहुंचाने का कार्य भी प्रसंसनीय है| उन्होंने कहा स्वयं प्रभा चैनल पर डिजिटल कंटेंट के प्रसारण का निर्णय ऐतिहासिक है| स्वयंप्रभा चैनल के माध्यम से सुदूर के विद्यार्थियों तक प्राविधिक शिक्षा के गुणवत्तापूर्ण डिजिटल कंटेंट की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी|

उन्होंने कहा कि विवि ने यूनिवर्सिटी इंडस्ट्री इंटरफेस सेल के माध्यम से पूल कैम्पस प्लेसमेंट के लिए सफल प्रयास किये हैं| विवि की कार्य प्रणाली का डिजिटलीकरण भी सराहनीय है| उन्होंने कहा संस्थानों की गुणवत्ता सुधर के लिए विवि द्वारा एनबीए एक्रिडिटेशन के लिए भी सफल प्रयास किये जा रहे हैं| उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थानों की कुल 62 ब्रांचो को हाल ही में एनबीए से एक्रिडिटेशन प्राप्त हुआ है| उन्होंने कहा कि एकेटीयू एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन को बढ़ावा देने के लिए एक कंपनी की स्थापना किये जाने पर कार्य चल रहा है| इस कम्पनी की स्थापना प्राविधिक शिक्षा में प्रोडक्ट बेस्ड लर्निंग के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी|

समारोह के दौरान राज्य सभा सदस्य डॉ.सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि विवि ने पिछले 20 वर्षों में प्रदेश की तकनीकी शिक्षा के विकास में अहम् भूमिका का निर्वाह किया है| उन्होंने कहा मैं इस विवि का हिस्सा रहा हूँ| ऐसे में विवि की प्रगति देखकर मुझे हमेशा हर्ष होता है| उन्होंने कहा कि यदि हमें भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों और शिक्षकों को प्रयास करने होंगे| उन्होंने कहा कि विवि को टेक्नोलॉजी के इस दौर में ऐसी तकनीकी सुविधाएँ एवं उपकरण विकसित करने पर भी शोध कार्य करने चाहिए, जिसमें हम टेक्नोलॉजी के फालोवर बनने के स्थान पर टेक्नोलॉजी के लीडर बन सकें| उन्होंने कहा कि वैदिक गणित इस तरह के शोध कार्यों में सहायक सिद्ध हो सकती है| उन्होंने कहा कि विवि द्वारा कोविड-19 महामारी के दौर में ई-कंटेंट्स के विकास के लिए सराहनीय कार्य किया गया है |

उन्होंने अपनी सांसद विकास निधि से विवि को मोबाइल स्टूडियो वैन देने की घोषणा की| सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि ई-कंटेंट तैयार करने के लिए यह वैन सीधे शिक्षक के निवास स्थान पर जाकर ऑडियो-विजुअल कंटेंट रिकॉर्ड करेगी| इससे इस महामारी में ई-कंटेंट प्रोड्यूस करने का कार्य अनवरत रूप से संचालित हो सकेगा|

राधा एस चौहान ने कहा कि एकेटीयू द्वारा तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सकारात्मक कार्य किये जा रहे हैं| उन्होंने कहा कि विवि द्वारा मानव के लिए उपयोगी टेक्नोलॉजी विकसित की जा रही है| कोविड-19 महामारी के दौरान विकसित किये गये उपकरण उदाहरण मात्र हैं| उन्होंने कहा कि बाल विकास विभाग द्वारा प्रदान किये जाने वाले पुष्टाहार की गुणवत्ता की सुनिश्चतता के लिए एकेटीयू द्वारा फ़ूड टेक्नोलॉजी में शोध कार्यों के माध्यम से सहयोग प्रदान किया जा रहा है| जोकि बच्चों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सिद्ध होगा| उन्होंने कहा विवि रोबोटिक्स, मैकाट्रोनिक्स एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शोध कार्यों के क्षेत्र ने उत्कृष्ट कार्य कर रहा है|

प्रो मंगल सुंदरम ने कहा कि स्वयं प्रभा के चैनल 15 पर एकेटीयू एवं डिप्लोमा सेक्टर के डिजिटल कंटेंट का नियमति प्रसारण किया जायेगा| अंत में विवि के कुलसचिव नन्द लाल सिंह ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया|

इस अवसर पर विवि के प्रतिकुलपति प्रो विनीत कंसल, वित्त अधिकारी जीपी सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो राजीव कुमार, आईईटी के निदेशक प्रो एचके पालीवाल, सीएएस के निदेशक प्रो मनीष गौड़, यूपीआईडी के निदेशक प्रो वीरेन्द्र पाठक, एफओए की डीन प्रो वंदना सहगल, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो ओपी सिंह, डीन पीजी प्रो एमके दत्ता, डीनयूजी प्रो सुबोध वैरिया एवं सम्बद्ध संस्थानों के चेयरमेन, निदेशक, शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं ने ऑनलाइन प्रतिभाग किया|

क्या हुआ थाने में! जब किसान ने अपना नाम लिखा और ठप्पा लगाया Prime Minister of India.

सन 1979 की बात है। शाम 6 बजे के करीब एक किसान इटावा जिला के ऊसराहार थाने में मैला कुचैला कुर्ता धोती पहने पहुंचा और अपने भैसा (बैल) की चोरी की रपट लिखाने की बात की। छोटे दरोगा ने पुलिसिया अंदाज में 4 आड़े-टेड़े सवाल पूछे और बिना रपट लिखे किसान को चलता किया। जब वो किसान थाने से जाने लगा तो एक सिपाही पीछे से आया और बोला थोड़ा खर्चा पानी दो तो रिपोर्ट लिख जाएगी। अंत में 35 रूपये की रिश्वत लेके रपट लिखना तय हुआ।

थाने के उसी कमरे के बीच में दरोगा की मेज और 3 कुर्सियां लगी थी और एक कोने में लिखिया मुंशी की चौकी थी। रपट लिख के मुंशी ने किसान से पूछा, “बाबा हस्ताक्षर करोगे कि अंगूठा लगाओगे ” किसान ने हस्ताक्षर करने को कहा तो मुंशी ने दफ़्ती आगे बड़ा दी जिसपे प्राथमिकी का ड्राफ्ट लिखा था… किसान ने अंगूठे वाला पैड उठाया तो मुंशी सोच में पढ़ गया कि हस्ताक्षर करेगा तो अंगूठा लगाने की स्याही का पैड क्यों उठा रहा है।

किसान ने हस्ताक्षर में नाम लिखा “चौधरी चरण सिंह” और मैले कुर्ते की जेब से मुहर निकाल के कागज पे ठोंक दी जिसपे लिखा था “Prime Minister Of India”.

ये देख के पहले मुंशी उछल गया, फिर दरोगा और फिर हड़कंप मच गया। असल में ये मैले कुर्ते वाले बाबा किसान नेता और भारत के उस समय के वर्तमान प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह थे जो थाने में किसानों की सुनवाई का औचक निरिक्षण करने आये थे।

अपनी कारो का दस्ता-काफिला थोड़ी दूर खड़ा करके कुर्ते पे थोड़ा मिट्टी डालके आ गए थे। ऊसराहार का पूरा थाना सस्पेंड कर दिया गया और उसके बाद तो हड़कंप मच गया। इस तरह की अफ़वाए भी उस समय ख़ूब फैली थी लेकिन सिस्टम एकदम दुरुस्त हो गया था। आज पुनः आवश्यकता है ऐसे युग पुरूष की व इसी तरह ओचक निरीक्षण की। 

महाराष्ट्र का राजभवन भी कोरोना की चपेट में, गवर्नर ने खुद को आईसोलेट किया

मुम्बई , महाराष्ट्र में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है अब इसकी चपेट में राजभवन भी आ गया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के राजभवन के 18 कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. कोरोना पॉजिटिव पाए गए लोगों में राज्यपाल के करीब रहकर काम करने वाले लोग भी शामिल हैं।
राजभवन में संक्रमण की स्थिति को देखते हुए राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी  सेल्फ आइसोलेशन में चले गए हैं. बता दें कि अब तक राजभवन के 100 लोगों का कोविड टेस्ट किया जा चुका है।
महाराष्ट्र देश के उन राज्यों में शुमार है जहां कोरोना का सबसे ज्यादा प्रकोप देखने को मिला है. शनिवार को रिकॉर्ड एक दिन में 7,862 नए मामले सामने आए हैं. जिसके बाद राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या 238,461 पर पहुंच गई है. बता दें कि महाराष्ट्र में एक्टिव केस की संख्या 95,647 है. राज्य में एक बार फिर कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए उद्धव सरकार कई इलाकों में लॉकडाउन की अवधि को बढ़ा दिया है।

राजस्थान! एक बार फिर CM Vs Dy CM

राजस्थान कांग्रेस में उठापटक का दौर बदस्तूर जारी है।सीमाओं को सील कर दिया गया है। ऐसा कहा जा रहा हैं कि एक बार फिर गहलोत और पायलट आमने सामने है।

राजस्थान में अक्सर कहा जाता है अजगर के लपेटे में आया हुआ आदमी और गहलोत के लपेटे में आया हुआ नेता बच नहीं सकता। सचिन को यह नसीहत सरकार बनने के साथ ही मिल चुकी है सरकार बनने के साथ ही गहलोत और पायलट की अदावत पॉवर सेंटर को लेकर जारी है। सचिन युवा है, भारतीय राजीनीति में लोकप्रिय भी है, बोलने का बेहत्तर सलीका है। अपने पिता की बड़ी राजनीतिक विरासत को संभाल रहे है।

वही गहलोत बुजुर्ग है, लोकप्रिय है। बोलने में कोई महारत हासिल नहीं हैं, न कोई राजनीतिक विरासत न ही जातीय समीकरण लेकिन जितनी पायलट की उम्र है उतना राजनीतिक अनुभव रखते है और टाइमिंग स्ट्रोक के बेहत्तर खिलाड़ी है। देखा जाए तो गहलोत कांग्रेस के सबसे बड़े अपवाद है।अगर कहा जाए कि गहलोत कांग्रेस के ढांचे से ही खारिज है, तो गलत नहीं होगा। गहलोत कांग्रेस के कायदों में फिट नहीं बैठते हैं।

अव्वल तो गहलोत कांग्रेस के ओल्ड गार्ड लॉबी में आते है। दूसरा ग्राउंड कमेंट्री के मझे हुए नेता हैं। इंदिरा राजीव के दौर से ही कांग्रेस में कभी भी बुजुर्ग और लोकप्रिय नेताओ को ढोने की परंपरा नहीं रही है। कांग्रेस में शुरू से आलाकमान कल्चर रहा है। राज्यों को कभी स्वतंत्र नहीं छोड़ा गया। उसमे भी गहलोत हर बार आलाकमान से अपनी बात मनवा कर अपनी शातिर बुद्धि और राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दे देते है।

कांग्रेस में न जाने कितनी ही बार ग्राउंड पर लोकप्रिय,शक्तिशाली और स्वतंत्र होते मुख्यमंत्रियो को कोई न कोई बहाना बनाकर हटा दिया है। हरिदेव जोशी, दिग्विजय सिंह सहित कांग्रेस ने ऐसे दर्जनों मुख्यमंत्रीयो को बदला है।

इंदिरा राजीव के दौर में एक जुमला प्रसिद्ध हुआ करता था कि एक बिजली का बल्ब बदलने के लिए कांग्रेस को तीन मुख्यमंत्री बदलने की जरूरत होती है। दो बल्ब को लगाने के लिए और तीसरा नीचे से स्टूल को ठोकर मारकर गिराने के लिए। गहलोत की स्टूल को भी बहुत बार ठोकर मारने की कोशिश हुई लेकिन तब तक गहलोत बल्ब बदल आते है।

वरिष्ठ पत्रकार राशिद किदवई अपनी किताब 24 अकबर रोड में लिखते है कि कांग्रेस के स्ट्रक्चर में दो तरह के नेता होते है। एक वो जो दरबार पॉलिटिक्स में माहिर होते है यानी कि गांधी परिवार के नजदीक। दूसरे वो जो ग्राउंड पॉलिटिक्स में अच्छे होते है,यानी कि अपने क्षेत्र में लोकप्रिय। लेकिन गहलोत इसके अपवाद है। वो दरबार पॉलिटिक्स भी बेहत्तर ढंग से कर रहे है और ग्राउंड पॉलिटिक्स भी।

सही मायनों में देखा जाए तो आज तक अपने राजनीतिक करियर में गहलोत ने दोनों ही मोर्चो पर बेहत्तर काम किया है। सरकार जाने के बाद जब उनकी 10 जनपथ पर समीकरण गड़बड़ाते है तो दिल्ली डेरा डाल लेते है और जब ग्राउंड समीकरण गड़बड़ाते है तो जयपुर में अकेले गाड़ी लेकर छोटी चौपड़ चाय पीने पहुंच जाते है।

एक बार फिर पायलट और गहलोत आमने सामने है।माना जा रहा है कि पायलट से कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा मांगा जा रहा है। दूसरा प्रदेश में होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों पर पायलट और गहलोत में मनमुटाव है। राजनीतिक सरगर्मियां तेज है,बैठकों का दौर जारी है। पायलट समर्थकों में उनके भाजपा जॉइन करने की भी चर्चा है। कांग्रेस आलाकमान भी अब मैदान में आ चुका है।

देखते है इस बार राजनीति की शतरंज में प्यादों से वजीरो को हराने के माहिर खिलाड़ी गहलोत एक बार फिर अपने चिरपरिचित अंदाज में आलाकमान को अपनी बात मनवा पाते है या फिर ये साबित हो जाएगा कि राजस्थान कांग्रेस में अब गहलोत युग का पटाक्षेप होने वाला है।

लखनऊ पुलिस प्रेरित करेगी और जनता CCTV कैमरे लगवायेगी

लखनऊ (राज्य मुख्यालय) । लखनऊ कमिश्नरेट के दक्षिणी जोन के थाना मोहनलालगंज गोसाईगंज नगराम सुशांत गोल्फ सिटी पारा व काकोरी के प्रभारी निरीक्षकों व सभी हल्का चौकी प्रभारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वह यह सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्र में अंकित स्थलों पर 4-4 कैमरे जनता के सहयोग से लगवाए जाएं  इन कैमरों में दो कैमरे का फोकस मुख्य मार्ग की तरफ होना चाहिए l यह जानकारी साऊथ लखनऊ के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त यातायात सुरेश चंद्र रावत ने दी।

उन्होंने बताया कि दक्षिणी जोन के समस्त थानों में कुल 1240 स्थलों पर 4-4 कैमरे अर्थात कुल लगभग 5000 कैमरे 31 अगस्त 2020 तक लगवाए जाने का लक्ष्य समस्त चौकी प्रभारियों वह हल्का प्रभारियों को दिया गया है।

प्रमुख चौराहों पर स्मार्ट सिटी के द्वारा कैमरे लगाए जा रहे हैं लेकिन गलियों और छोटे चौराहों पर और ग्रामीण क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरो का अभाव है l इसके लिए जनता के संभ्रांत व्यक्तियों से समन्वय स्थापित करते हुए अधिक से अधिक भागीदारी किए जाने का अनुरोध करें।

सभी चौकी /हल्का प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि वह बड़े दुकानदारों, ढाबा संचालकों ,विद्यालय संचालकों ,शस्त्र धारकों ,अधिक कैश का लेनदेन करने वाले दुकानदारों, रियल स्टेट के कार्यालयों के बाहर अस्पताल ,नर्सिंग होम, मेडिकल स्टोर व सड़क के किनारे बने हुए बड़े मकानों के स्वामियों से समन्वय स्थापित करते हुए अपने-अपने चौकी/ हल्के क्षेत्र में कैमरा लगवाए जाने हेतु दिए गए लक्ष्य की प्राप्ति करें।

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त यातायात रावत ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा कि पॉली गन मोबाइल पर नियुक्त आरक्षी भी अपने क्षेत्र में घूम घूम कर संभावित घटना वाले स्थलों के आसपास के घरों में व दुकानों मैं कैमरे लगाए जाने हेतु लोगों को प्रेरित करें l 12 से 15 हजार की लागत में एक लोकेशन पर चार कैमरे लगाए जा सकते हैं। 

क्या! हवा से भी फैलता है कोरोना? इस सवाल का क्या जवाब दिया WHO ने!

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आख़िरकार यह स्वीकार किया कि कोरोना वायरस संक्रमण के हवा से फैलनेके सबूत मिले हैं। इससे पहले दुनिया भर के वैज्ञानिकों के एक समूह ने डब्ल्यूएचओ को खुली चिट्ठी लिखकर इससे अपने मौजूदा दिशानिर्देशों में सुधार करने की अपील की थी।

डब्ल्यूएचओ में कोविड-19 महामारी से जुड़ी टेक्निकल लीड डॉक्टर मारिया वा केरख़ोव ने एक न्यूज़ ब्रीफ़िंग में कहा, हम हवा के ज़रिए कोरोना वायरस फैलने की आशंका पर बात कर रहे हैं।

इस बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन की बेनेदेत्ता आल्लेग्रांजी ने कहा कि कोरोना वायरस के हवा के माध्यम से फैलने के सबूत तो मिल रहे हैं लेकिन अभी यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने कहा, सार्वजनिक जगहों पर, ख़ासकर भीड़भाड़ वाली, कम हवा वाली और बंद जगहों पर हवा के ज़रिए वायरस फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता हालांकि इन सबूतों को इकट्ठा करने और समझने की ज़रूरत है. हम ये काम जारी रखेंगे। 

जन अधिकारों को रौंदती चीन की कम्युनिस्ट तानाशाही

उत्तरी बीजिंग के प्रतिष्ठित शिंगहुआ विश्वविद्यालय में कल (6 जुलाई 2020) भोर में, पौ फटने के पहले ही, चीनी जनवादी पुलिस के आठ सिपाहियों ने साठ-वर्षीय प्रोफेसर शु झान्ग्रून को उनके शयनकक्ष से हिरासत में ले लिया। अनजान स्थान पर कैद में हैं।

न्यायशास्त्र और विधिविज्ञान के निष्णात इस वयोवृद्ध प्राचार्य पर अभियोग है कि वे वेश्यायों से संसर्ग कर रहे थे। इस पर उनकी पत्नी ने बताया कि बहुधा सत्ता के बौद्धिक आलोचकों पर यौन अपराध ही मढ़े जाते हैं। उनकी मान मर्यादा आसानी से मटियामेट हो जाती है। कल दोपहर को अकादमिक परिसर में खबर फैलते ही आक्रोशित प्रतिक्रियायें हुईं कि अब

“चीन के विश्वविद्यालयों में चुप्पी, सांठ-गाँठ और रूढ़िपालन ही जीवन शैली होगी|” सूत्र भी सुनाये गए: “हम सब लोगों की उदार सोच के इस प्रतीक (प्रोफ़ेसर झान्ग्रून) के उसूलों को ज्यादा दृढ़ बनाना कि : कहो सहजता से, जो बोलना चाहिए”


विश्वविद्यालय के अन्य प्राचार्यों, खासकर जेंग शियोनान, का चीन शासन पर आरोप है कि शी जिनपिंग के सरकारी तथा कम्युनिस्ट पार्टी के निर्णयों की आलोचना करते प्रो. झान्ग्रून की विशद पुस्तक न्यूयार्क में प्रकाशित हुई थी, उसी के अंजाम में कल की यह गिरफ़्तारी है। 

आखिर इस असहमत प्रोफ़ेसर की आलोचना के केंद्र बिंदु क्या हैं ? उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति पद का निर्वाचन हर दो वर्षों में होना चाहिए था। शी जिनपिंग ने संविधान में संशोधन कर इस सीमाअवधि को निरस्त कर दिया। आजीवन राष्ट्रपति घोषित हो गए।

साथ ही सामान्य नागरिक अधिकारों को रद्द कर चीन को “पुलिस स्टेट” ही बना दिया है। प्रोफ़ेसर झान्ग्रून ने यह भी लिखा कि कोरोना वायरस चीन के वूहान में जन्मा तथा फैला। इस सूचना को कम्युनिस्ट सत्ता ने दबाया। फलस्वरूप विश्वव्यापी मानव त्रासदी व्यापी। 

तीसरा आयाम, जो चीन की अकादमिक जनचर्चा का विषय है, कि अपनी शासकीय स्थिति को डांवाडोल देखकर, जनता का ध्यान इन आंतरिक विपदाओं से हटाने हेतु, सीमा पर संघर्ष तथा सैनिक टकराव को प्रायोजित किया गया है। 

गत सप्ताह ही चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने शिनहुआ विश्वविद्यालय के मानव संसाधन विभाग के माध्यम से प्रोफ़ेसर झान्ग्रून को सूचित किया गया था कि उनकी अनुशासनहीनता के कारण उनका वेतन भत्ता काट दिया गया है उनके अधिकार वापस ले लिए जा रहे हैं। 

पर्यवेक्षकों का अनुमान है कि शी जिनपिंग का निर्णय है कि चीन के विश्वविद्यालयों में सत्ता-विरोधी हरकतों का दमन किया जाय अकादमिक स्वतंत्रता के नाम पर चीन के एकमात्र राजनीतिक दल कम्युनिस्ट पार्टी के विरुद्ध चल रहा अभियान बंद हो। 

इन आन्तरिक घटनाओं, जिनसे अधिनायकवाद अधिक क्रूर और ताकतवर हुआ है, के परिवेश में हांगकांग के नए सुरक्षा कानून का प्रभाव भी देखा जा रहा है। द्वीपराज्य हांगकांग में सदियों पुराने जनतांत्रिक अधिकारों का खात्मा हो गया है। यही प्रयोग अब राष्ट्रभर में किया जा रहा है इसमें तीन तात्कालिक वैश्विक घटनाएँ भी जुड़ गई हैं।

पहला, भारत की सीमा पर से जनमुक्ति सेना का पीछे हटना दूसरा, दलाई लामा का ताईवान की यात्रा का कार्यक्रम। तिब्बत और ताईवान का यह मिलन चीन की वैश्विक धाक को कालिमापूर्ण बनाता है कि कार्ल मार्क्स के पुजारी विस्तारवादी और साम्राज्यवादी हो रहे हैं। तीसरा है, दक्षिण चीन सागर तट पर महाबली अमरीका पश्चिम यूरोप से अपनी थल एवं जल सेना लाकर जमावड़ा कर रहा है ताकि इस कम्युनिस्ट राष्ट्र के एशियाई साम्राज्यवादी मंसूबों को ध्वस्त किया जाय।

लाजिमी है कि चीन अब त्रस्त है। आशंका है कि जनमुक्ति सेना में विद्रोह हो जाय। अतः शी जिनपिंग चालीस साल पुराना माओवादी कठोरपन पुनर्जीवित कर रहे हैं। वे सरकार, पार्टी और सशत्र सेना के एक अकेले नियंता हैं। आज के चीन की स्वाधीनताप्रेमी युवा पीढ़ी को यह सहन नहीं है। अतः प्रोफ़ेसर झान्ग्रून वाली घटना एक सूचक है चुनौती आजादी पसंद जनता को दी गई है।

भारतीयों की पुरानी यादों को प्रो. झान्ग्रून की यह अमानुषिक घटना ताजा कर रही है। स्मरण हो लब्धप्रतिष्ठित प्रयाग विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्रोफ़ेसर, महान साहित्यकार और सत्ता के घोर आलोचक डॉ. रघुवंश को 1975 में जेल में डाल दिया गया थाह। उनपर आरोप था कि वे खम्भे पर चढ़कर तार काट रहे। हालाँकि डॉ. रघुवंश जन्मना दिव्यांग रहे, लुंज पैरों से कलम पकड़कर लिखते थे| फिर भी आपातकाल का विरोध करने का साहस किया था, जेल गए। 

69000 शिक्षक भर्ती : सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार को राहत दी

उत्तर प्रदेश में 69000 सहायक शिक्षकों की भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया। उम्मीद है कि प्रदेश को अब जल्द ही 69000 शिक्षक मिल सकेंगे।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने आंसर शीट विवाद को लेकर दाखिल याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि मामले में लखनऊ बेंच में ही अपील कर सकते हैं।

बता दें कि मामले में कुल पांच याचिकाएं थीं जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार कर दिया। दरअसल, 3 जून को लखनऊ खंडपीठ ने भर्ती पर रोक लगा दी थी जिसके बाद उसी दिन (3 जून) से शुरू हो रही काउंसलिंग प्रक्रिया भी रुक गई थी। https://sverige-ed.com/kopa-receptf…-levitra/

किसने कहा? योगी के दलित मंत्रियों की हैसियत नहीं कि वो दलित उत्पीड़न के खिलाफ बोल सकें

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग ने आज एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए योगी सरकार को दलित-पिछड़ा विरोधी करार देते हुए कटघरे में खड़ा किया । वार्ता में कहा गया कि दलित- पिछड़ा उत्पीड़न करने वालो को संस्थानिक संरक्षण मिला हुआ है ।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि योगी राज के तीन सालो में प्रदेश दलित-पिछड़ा हिंसा, उत्पीड़न और बलात्कार का हब बन गया है । दलितों पिछडो पर होने वाले अत्याचार का दिनों दिन इजाफा हो रहा है । योगी मंत्रिमंडल और भाजपा में शामिल दलित- पिछड़े नेताओं मंत्रियों की हैसियत नहीं है कि वो ऐसे उत्पीड़न के खिलाफ आवाज तक उठा सके ।
 
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष अलोक प्रसाद ने कहा कि पिछले दिनों हुयी विभाग की प्रदेश स्तरीय बैठक में प्रदेश में बढ़ती हिंसा , बलात्कार और उत्पीड़न को लेकर एक निंदा प्रस्ताव पास किया है । उन्होंने कहा कि दलितों के उत्पीड़न के कुल दर्ज मामलो (2008) में से आधे से ज्यादा उत्तर प्रदेश में है ।
 
अनु0जाति विभाग के अध्यक्ष अलोक प्रसाद ने आगे कहा कि प्रदेश में बढ़ती हिंसा , उत्पीड़न की घटनाओं पर विभाग बड़े पैमाने पर आन्दोलन कर के दलितों-पिछडो की आवाज को उठाएगा । वार्ता में उन्होंने सिलसिलेवार तरीके से जिलों में हुयी उत्पीड़न की घटनाओं का जिक्र करते हुए व्योरा दिया।
 
अम्बेडकर नगर में दलित युवती के साथ बलात्कार,मेरठ में शादी से दो दिन पहले दलित लड़की और उसके पिता की हत्या, कानपुर में दलित युवक को बुरी तरह मारा गया फिर उसी को जेल भेज दिया गया। अमरोहा में 17 साल के युवक की मंदिर में घुसने भर के लिए हत्या , आजमगढ़ के उबारपुर गांव में भाजपा जिला अध्यक्ष द्वारा दलितोंके साथ सांस्थानिक रूप से दमन की बात रखी ।

प्रेस वार्ता में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के उपाध्यक्ष तनुज पुनिया ने कहा कि कोरोना आपदाकाल में बड़े पैमाने पर असंगठित क्षेत्र में लगे दलित-पिछड़े मजदूरो को अपना रोजगार खोना पड़ा है । यह रोजगार ही उनकी प्रमुख आय का श्रोत है । ऐसे में सरकारों को तत्काल दलितों-पिछडो के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा करनी चाहिए । अधिकांश दलित परिवार या तो भूमिहीन है या एक दो बिस्सा जमीन के मालिक है । ऐसे में आय के न होने से वो भुखमरी के कगार पर है। सरकार को जल्द आर्थिक पैकेज की घोषणा करनी चाहिए।