कोरोना! काल, महाकाल और प्रोटोकोल

आज एक बहुत ही मामूली से शब्द ने पूरे विश्व में हाहाकार मचाया हुआ है। हर व्यक्ति आज दुख और तकलीफ में है। वह आए दिन वह अपनों को खो रहा है, साथ ही कई प्रिय जनों को भी। आज का माहौल देखकर यह लगता है कि दुनिया अचानक से काल, महाकाल और प्रोटोकोल में बदल गई है।

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आज एक बहुत ही मामूली से शब्द ने पूरे विश्व में हाहाकार मचाया हुआ है। हर व्यक्ति आज दुख और तकलीफ में है। वह आए दिन वह अपनों को खो रहा है, साथ ही कई प्रिय जनों को भी। आज का माहौल देखकर यह लगता है कि दुनिया अचानक से काल, महाकाल और प्रोटोकोल में बदल गई है।

जहां भी देखो, जिसे भी देखो……बस अपने ही परेशानी में परेशान है। अगर सही मायने में कहा जाए तो कोरोना ने सांसो का संसार बदल दिया है। बड़े-बड़े पार्टियों के नेता खुशियां मना रहे हैं रैलियां निकाली जा रही है चुनाव हो रहे हैं उससे कोरोना की संख्या पर भारी तादाद में असर हुआ है बल्कि आधा हमें आज श्मशान में देखने को मिल रहा है यह दुख असहनीय है हर एक बस अपने ही दुख में दुखी है।

कभी एक शब्द हुआ करता था सकारात्मक इंग्लिश में जिसे पॉजिटिव कहते हैं वह आज बुरी तरह से बदनाम हो चुका है क्योंकि लोग भारी संख्या में कोरोना पॉजिटिव हो रहे हैं लोगों को समय पर ऑक्सीजन सिलेंडर ना मिल पाने के कारण भारी तादाद में मौतें भी हो रही है और तो और मरने के बाद भी लोगों को चैन नहीं मिल रहा है क्योंकि लाशों को जलाने के लिए भी लाइन लगानी पड़ रही है।

रविवार को चुनाव के नतीजे आये हैं, लोग खुशियां मना रहे हैं मिठाईयां बांट रहे हैं , आतिशबाजी भी कर रहे हैं , सबकुछ इनकी ही मुट्ठी में होगा। लेकिन जनता को तो शोक मनाने तक का अधिकार नहीं दिया गया है। आज आधी जनता शमशान में है। अपनों के लिए रोने तक की भी मोहलत नहीं मिल रही है। यह अपना दुख आखिर कैसे व्यक्त करें? हम अचानक से अपनों की खबर सुनते हैं कि कल तक वह ठीक था…..पर अचानक से क्या हो गया? हम बिल्कुल ही हैरान हो जाते हैं।

सच में यह बहुत ही संकट की घड़ी है। हम सभी को साथ मिलकर यह वक्त गुजारना है। एक दूसरे का हाथ थामे रहना है। पर हां, अपने ही घरों पर रहकर। अगर जरूरी हो तभी घर से बाहर निकले। हम मानते हैं, आप परेशान हैं……पर यह समय परेशान होने का नहीं, बल्कि इसका डटकर सामना करने का है, तो हिम्मत बांधे रखिए और कुदरत पर भरोसा रखिए। वो एक न एक दिन सभी कुछ ठीक करेगा।

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