प्लॉट मकान रजिस्ट्री में खत्म होने जा रहा कोर्ट कचहरी का झंझट!

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग को हाईटेक बनाने की तैयारी, रजिस्ट्री कार्यालय पासपोर्ट सेवा केन्द्रों की तर्ज पर विकसित होंगे। 

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लखनऊ (राज्य मुख्यालय) ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने रविवार को स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए विभाग को प्लॉट मकान रजिस्ट्री अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और जनसुविधा केन्द्रित बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, निवेश गतिविधियों और शहरीकरण को देखते हुए विभागीय व्यवस्थाओं का आधुनिकीकरण आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने उप निबंधक कार्यालयों को चरणबद्ध तरीके से पासपोर्ट सेवा केन्द्रों की तर्ज पर विकसित करने पर जोर दिया।

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें  बताया गया कि प्रदेश के रजिस्ट्री कार्यालयों में प्रतिवर्ष लगभग 2.4 करोड़ लोगों का प्रत्यक्ष संपर्क होता है। इसे देखते हुए हेल्प डेस्क, टोकन एवं क्यू मैनेजमेंट सिस्टम, आधुनिक प्रतीक्षालय, महिला एवं शिशु कक्ष तथा डिजिटल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नागरिकों को अनावश्यक प्रतीक्षा और असुविधा से बचाने के लिए व्यवस्थाएं और बेहतर बनाई जाएं।

CM योगी ने कहा कि स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग राज्य की राजस्व व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। समीक्षा बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2016-17 में विभाग की सकल आय 11,613.84 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 32,598.49 करोड़ रुपये हो गई है। इसी अवधि में पंजीकृत लेखपत्रों की संख्या 28.25 लाख से बढ़कर 49.34 लाख से अधिक पहुंच गई। मुख्यमंत्री ने प्लॉट मकान रजिस्ट्री से राजस्व वृद्धि के साथ-साथ सेवा गुणवत्ता और नागरिक संतुष्टि को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डिजिटल गवर्नेंस को विभागीय सुधारों का मुख्य आधार बताते हुए प्लॉट मकान रजिस्ट्री एवं विवाह पंजीकरण में आधार प्रमाणीकरण, बायोमेट्रिक और आइरिस आधारित सत्यापन, ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन तथा खतौनी आधारित डिजिटल जांच को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली, अभिलेखों के डिजिटाइजेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कार्यप्रणाली तथा जियो-टैगिंग व्यवस्था को तेजी से लागू करने पर बल दिया। उनका कहना था कि तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ेगी, विवाद कम होंगे और राजस्व अपवंचन पर रोक लगेगी।

सूबे के मुख्यमंत्री ने सम्पत्तियों के मूल्यांकन में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के लिए मानकीकृत मूल्यांकन व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि इससे बाजार आधारित मूल्यांकन सुनिश्चित होगा और मूल्यांकन संबंधी विवादों में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से निवेश और औद्योगिक विकास का केन्द्र बन रहा है, ऐसे में विधिक व्यवस्थाओं को भी वर्तमान आर्थिक और व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कॉरपोरेट पुनर्गठन, विलय, विभाजन, समामेलन, अधिग्रहण, सीमित दायित्व भागीदारी (एलएलपी), शेयरधारिता में परिवर्तन, आवासीय सहकारी समितियों तथा रेरा के अंतर्गत विक्रय करारों से जुड़े विषयों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट और व्यावहारिक स्टाम्प शुल्क व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्लॉट मकान रजिस्ट्री में अन्य राज्यों की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं का अध्ययन कर ऐसा विधिक ढांचा तैयार किया जाए, जिससे निवेश को प्रोत्साहन मिले, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस मजबूत हो और विवादों में कमी आए। For more updates follow on X 

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