KGMU and SGPGI… दो अस्पताल, एक में पड़ताल दूसरा कमाल

लखनऊ के दो बड़े Medical संस्थानों KGMU and SGPGI से दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं। जहां KGMU में दवा घोटाले की आशंका जन्म ले रही है वहीं SGPGI में अंगदान से बचीं 5 जिंदगियां फिर से जिंदा हो गयी है। 

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White building with round dom on the top is seen of KGMU Lucknow campus
KGMU, Lucknow

लखनऊ (राज्य मुख्यालय)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दो प्रमुख चिकित्सा संस्थानों KGMU and SGPGI से स्वास्थ्य व्यवस्था की दो बिल्कुल अलग तस्वीरें सामने आई हैं। एक ओर King George’s Medical University (KGMU) में करोड़ों रुपये के दवा घोटाले की आशंका ने चिकित्सा जगत को चिंतित कर दिया है, वहीं दूसरी ओर Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences (SGPGI) में एक अंगदाता के परिवार ने पांच मरीजों को नया जीवन देकर मानवता की मिसाल पेश की है।

KGMU में कैंसर मरीजों को दी जाने वाली महंगी दवाओं और इंजेक्शनों की खरीद व खपत में गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। प्रारंभिक जांच में लगभग दो करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी सामने आने की बात कही जा रही है। जांच के दौरान पाया गया कि कुछ ऐसे इंजेक्शन, जिन्हें सामान्यतः छह माह में एक बार लगाया जाता है, उन्हें रिकॉर्ड में एक ही माह में चार से पांच बार उपयोग दिखाया गया।

LOGO of King Georges Medical University in lucknow, it is a state owned premiere institution in medicine.
KGMU, Lucknow

बताया जा रहा है कि फरवरी और मार्च 2026 के दौरान संबंधित दवाओं की खपत अचानक 40 से 45 लाख रुपये तक पहुंचने पर भी सवाल उठे हैं। बिलों, प्रिस्क्रिप्शन और ऑडिट दस्तावेजों की जांच में कई गंभीर विसंगतियां मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित दवाओं और इंजेक्शनों के भुगतान पर तत्काल रोक लगा दी है। हालांकि KGMU की कुलपति प्रोफेसर (डॉक्टर) सोनिया नित्यानंद ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है फिर भी KGMU and SGPGI के स्टाफ की कार्यप्रणाली की तुलना तो होगी ही।

वहीं SGPGI में ब्रेन डेड घोषित किए गए संस्थान के सेवानिवृत्त कर्मचारी फनीश मणि त्रिपाठी के परिवार ने अंगदान का ऐतिहासिक निर्णय लिया। उनके दो गुर्दे, एक लिवर और दो कॉर्निया दान किए गए, जिससे एक ही दिन में पांच मरीजों को नया जीवन मिला। दो गंभीर किडनी रोगियों का सफल प्रत्यारोपण किया गया, जबकि अन्य अंगों और कॉर्निया से भी जरूरतमंद मरीजों को लाभ पहुंचा। संजय गॉधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर (डॉक्टर) आरके धीमान ने कहा यह पहल अंगदान के प्रति जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रेरक उदाहरण बन गई है।

LOGO of Sanjay Gandhi Post Graduate Institute of Medical Sciences, Lucknow. It appears in the black letters on white base.
SGPGI Medical Sciences, Lucknow

बता दें कि उत्तर प्रदेश के साथ साथ पडोसी राज्यों और नेपाल के मरीज़ों की आस KGMU and SGPGI से जुड़ी रहती है। सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था (Health) से जुड़ी ये दोनों घटनाएं एक ओर पारदर्शिता की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं तो दूसरी ओर मानवता और जीवनदान के सर्वोच्च मूल्य को भी सामने लाती हैं।

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