लखनऊ (राज्य मुख्यालय)। उत्तर प्रदेश के आयुष विभाग में बड़े पैमाने पर हुए तबादलों को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलकों में महाघमासान छिड़ गया है। आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी विभागों में समूह ‘ख’, ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों के 580 से अधिक तबादलों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विवाद तब और गहरा गया जब आयुष विभाग की महानिदेशक (DG) चैत्रा वी. ने इन तबादलों को नियम विरुद्ध बताते हुए मुख्य सचिव एस.पी. गोयल को औपचारिक शिकायत पत्र भेज दिया।
महानिदेशक Chaitra V ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि निदेशकों द्वारा किए गए तबादलों में उनकी वैधानिक स्वीकृति नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि शासनादेश के अनुसार तबादला प्रक्रिया में महानिदेशक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, लेकिन इस मामले में उन्हें पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आयुष विभाग के तबादलों में पारदर्शिता, मेरिट और प्रशासनिक आवश्यकता जैसे मानकों की अनदेखी की गई है।

सूत्रों के अनुसार, कई ऐसे कर्मचारियों को तबादलों से बाहर रखा गया है जिनके खिलाफ शिकायतें और विभागीय जांच लंबित हैं। इससे तबादला प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि कुछ तबादले राजनीतिक और व्यक्तिगत प्रभाव के आधार पर किए गए हैं।
महानिदेशक चैत्रा वी. ने मुख्य सचिव एसपी गोयल से पूरे मामले की जांच कराने और सभी तबादलों को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमों की अनदेखी कर इस तरह तबादले किए जाएंगे तो विभागीय व्यवस्था और प्रशासनिक अनुशासन प्रभावित होगा। (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की खबरों के लिए यहाँ क्लिक करें)

वहीं दूसरी ओर आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर दयालु निदेशकों के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि आयुष विभाग में सभी तबादले नियमानुसार और विभागीय जरूरतों को ध्यान में रखकर किए गए हैं। मंत्री ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सरकार पारदर्शी व्यवस्था के तहत काम कर रही है और किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है।
अब यह मामला शासन स्तर पर पहुंच चुका है। मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है और विवादित तबादले रद्द होते हैं या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। For more updates follow on X


































