लखनऊ (राज्य मुख्यालय)। अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस (World Day Against Child Labour) हर वर्ष 12 जून को मनाया जाता है।इस दिवस की शुरुआत International Labour Organization द्वारा वर्ष 2002 में की गई थी, ताकि बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता बढ़ाई जा सके और बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा एवं बेहतर भविष्य दिलाने पर जोर दिया जा सके। अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने की दिशा में अभियान तेज कर दिया है। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक प्रदेश के 15 जिलों को पूरी तरह बाल श्रम मुक्त घोषित करना है। इसी क्रम में 12 जून को 15 जिलों के 140 चिन्हित बाल श्रम हॉटस्पॉट को बाल श्रम मुक्त घोषित किया जाएगा।
राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस (World Day Against Child Labour) पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में बाल श्रम उन्मूलन, बच्चों की शिक्षा, पुनर्वास और संरक्षण को लेकर जागरूकता गतिविधियां आयोजित होंगी।
प्रदेश सरकार के अनुसार राज्य में अब तक 543 बाल श्रम हॉटस्पॉट चिन्हित किए जा चुके हैं। इन क्षेत्रों में लगातार निगरानी, सर्वेक्षण और जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। विशेष रूप से बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती सहित कई जिलों में अभियान को तेज किया गया है, जहां बाल श्रम की रोकथाम के लिए विभागीय टीमें सक्रिय हैं। बाल श्रम उन्मूलन अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश के 9 मंडलों में कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं। मंडलायुक्तों की अध्यक्षता में आयोजित इन कार्यशालाओं में विभिन्न विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं और संबंधित एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। World Day Against Child Labour की आमद के साथ ही उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में टास्क फोर्स का गठन कर स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। संबधित खबरों के लिए यहाँ क्लिक करें।

सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (international Labour Organization) की अवधारणा के अनुरूप बच्चों का सर्वे, चिन्हांकन और पुनर्वास सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि प्रदेश को चरणबद्ध तरीके से बाल श्रम मुक्त बनाया जा सके। For more updates follow on X



































