मुख्तार अंसारी Case :सुनवाई से Justice Rajiv Gupta अलग हुए

मुख्‍तार अंसारी पूर्व एमएलए हैं। उत्तर प्रदेश के मऊ सदर निर्वाचन क्षेत्र से 1996 से मार्च 2022 तक विधायक रहे।

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लखनऊ / प्रयागराज ।इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राजीव गुप्ता ने बुधवार को पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी Case मे उनकी ओर से दायर दो महत्वपूर्ण याचिकाओं पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। मुख्तार अंसारी इस समय बांदा जेल में बंद हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जस्टिस राजीव गुप्ता ने व्यक्तिगत कारणों से इन मामलों की सुनवाई से स्वयं को अलग करने का फैसला लिया। इसके बाद दोनों मामलों को अब इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया है, जो इनकी सुनवाई के लिए किसी अन्य बेंच का गठन करेंगे।

मुख्तार अंसारी उत्तर प्रदेश की राजनीति का चर्चित नाम रहे हैं। वह मऊ सदर विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1996 से लेकर मार्च 2022 तक लगातार विधायक रहे। राजनीति के साथ-साथ उनका नाम कई आपराधिक मामलों में भी सामने आता रहा है। फिलहाल वे विभिन्न मामलों में बांदा जेल में निरुद्ध हैं।

मुख्तार अंसारी Case के जिन दो मामलों से जस्टिस राजीव गुप्ता ने खुद को अलग किया है, उनमें सबसे महत्वपूर्ण मामला वर्ष 2012-2013 के दौरान विधायक निधि में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि विधायक निधि के धन के उपयोग में अनियमितताएं हुई थीं। इस मामले की जांच के बाद पुलिस ने मुख्तार अंसारी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। मुख्तार अंसारी ने इस चार्जशीट को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और राजनीतिक द्वेष के तहत कार्रवाई की गई है।

उत्तर प्रदेश का चर्चित अपराधी एवं विधायक मुख्तार अंसारी
पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी

मुख्तार अंसारी Case का दूसरा मामला भी आपराधिक प्रकृति का बताया जा रहा है, जिस पर हाई कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित थी। हालांकि जस्टिस राजीव गुप्ता द्वारा सुनवाई से अलग होने के कारण अब इन मामलों की सुनवाई नई बेंच के समक्ष होगी। न्यायिक प्रक्रिया के तहत किसी भी जज को यह अधिकार होता है कि यदि किसी कारणवश वह किसी मामले की सुनवाई उचित न समझें तो स्वयं को उससे अलग कर सकते हैं। इसे न्यायपालिका की निष्पक्षता और पारदर्शिता का हिस्सा माना जाता है।

गौरतलब है कि मुख्तार अंसारी के खिलाफ उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में कई आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में उनकी कई संपत्तियों पर प्रशासनिक कार्रवाई भी की गई है। ऐसे में हाई कोर्ट में लंबित मामलों पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं। मुख्य न्यायाधीश द्वारा नई बेंच तय किए जाने के बाद इन मामलों में आगे की सुनवाई होगी। For more updates follow on X 

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