Merchant Navy: भारत की वो अदृश्य सेना जिसकी बलि सबसे पहले चढ़ती है

भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक crude oil आयात करता है। यदि Merchant Navy रुक जाए तो देश की अर्थव्यवस्था की धड़कन धीमी पड़ जाएगी। लेकिन विडंबना यह है कि जिन नाविकों पर हमारी ऊर्जा और व्यापार निर्भर करता है, उनकी सुरक्षा अक्सर वैश्विक राजनीति के बीच सबसे कमजोर कड़ी बन जाती है।

0
17
Merchant Navy symbolic LOGO
Merchant Navy symbolic LOGO

लखनऊ (संपादकीय डेस्क)। समुद्र के बीचों-बीच, अपने वतन से हजारों किलोमीटर दूर, एक युवा भारतीय अपने सपनों के साथ डेक पर खड़ा था। हिमाचल प्रदेश का युवा Deck Cadet आदित्य शर्मा शायद अपने घर लौटने की योजनाएँ बना रहा होगा। Chief Engineer पतनाला सुरेश अपने अनुभव से जहाज़ को सुरक्षित रखने में जुटे होंगे और Fitter शिवानंद चौरसिया मशीनों की आवाज़ों के बीच अपना कर्तव्य निभा रहे होंगे। लेकिन 9-10 जून 2026 की रात Gulf of Oman में मौत ने  Merchant Navy के नाविकों को अचानक घेर लिया। Palau-flagged tanker MT Settebello पर हुए अमेरिकी precision strike में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई। 21 भारतीय क्रू को ओमानी अधिकारियों ने बचा लिया लेकिन तीन परिवार हमेशा के लिए उजड़ गए।

अक्सर ये Phrase कहा जाता है “जब राष्ट्र नींद में होता है, तब Merchant Navy के नाविक जागते रहते हैं लेकिन इस बार मौत ने उन्हें सुला दिया।”

अमेरिका का आरोप है कि MT Settebello ईरानी तेल लेकर Iran blockade का उल्लंघन कर रहा था। इसी आधार पर यह सैन्य कार्रवाई की गई। भारत ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी Charge d’Affaires को तलब कर विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio से स्पष्ट कहा कि commercial shipping के खिलाफ ऐसी घातक कार्रवाई उचित नहीं है। केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मृत नाविकों के शव भारत लाने की घोषणा की।

US Secretary of State Marco Rubio stepping down from his official aircraft
US Secretary of State Marco Rubio

यह घटना केवल एक जहाज़ पर हमला नहीं है यह भारत की उस ‘अदृश्य सेना’ पर हमला है, जो बिना हथियार के राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को जीवित रखती है। भारत आज दुनिया के शीर्ष Seafarer Supplying देशों में शामिल है। वैश्विक समुद्री कार्यबल का लगभग 9-10 प्रतिशत हिस्सा भारतीय नाविकों का है। 2025-26 तक 3.20 लाख से अधिक सक्रिय भारतीय seafarers दुनिया के समुद्रों में कार्यरत हैं। 2014 के बाद यह संख्या लगभग 173 प्रतिशत बढ़ी है। हजारों भारतीय नाविक Gulf region, Strait of Hormuz और Arabian Sea जैसे संवेदनशील इलाकों में काम करते हैं। यही नाविक तेल लेकर आते हैं, वैश्विक व्यापार को गति देते हैं, विदेशी मुद्रा कमाते हैं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत रखते हैं। भारतीय सशस्त्र सेनाओं की खबरों के लिए यहाँ क्लिक करें। 

भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक crude oil आयात करता है। यदि Merchant Navy रुक जाए तो देश की अर्थव्यवस्था की धड़कन धीमी पड़ जाएगी। लेकिन विडंबना यह है कि जिन नाविकों पर हमारी ऊर्जा और व्यापार निर्भर करता है, उनकी सुरक्षा अक्सर वैश्विक राजनीति के बीच सबसे कमजोर कड़ी बन जाती है। इतिहास गवाह है कि हर बड़े संकट में भारतीय नाविक सबसे आगे रहे हैं। 1990 के Gulf War से लेकर Somalia piracy और हाल के Red Sea attacks तक भारतीय seafarers ने जान जोखिम में डालकर समुद्री आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखा। लेकिन उनके लिए न पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था बनी, न युद्ध क्षेत्रों में स्पष्ट evacuation protocol और न ही पर्याप्त diplomatic shield। सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि Merchant Navy के ये नाविक किसी युद्ध का हिस्सा नहीं होते, फिर भी सबसे पहले बलि चढ़ते हैं।

LOGO of Merchant Navy Welfare Board
Merchant Navy Welfare Board

भारत की विदेश नीति आज बहुआयामी संतुलन पर आधारित है। अमेरिका हमारा सबसे बड़ा strategic partner है — रक्षा, तकनीक और QUAD जैसे मंचों पर दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दूसरी ओर, ईरान भारत की ऊर्जा और रणनीतिक जरूरतों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रूस और चीन के साथ क्षेत्रीय संतुलन भी हमारी मजबूरी है। लेकिन इस geopolitical tug-of-war की सबसे बड़ी कीमत कभी-कभी हमारे Merchant Navy के जवान चुकाते हैं। यह समय है कि भारत की Merchant Navy को केवल एक commercial sector नहीं, बल्कि national strategic asset के रूप में देखे। जैसे सेना के जवानों के लिए सुरक्षा ढाँचे, बीमा, intelligence support और welfare mechanisms मौजूद हैं, उसी तरह Merchant Navy के लिए भी dedicated protection framework तैयार किया जाना चाहिए। High-risk maritime zones में real-time intelligence sharing, emergency rescue coordination, बेहतर insurance coverage और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की तत्काल आवश्यकता है। Merchant Navy welfare fund को और मजबूत बनाना होगा ताकि शहीद नाविकों के परिवार आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा का शिकार न हों।

इसके साथ ही भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर Commercial Shipping की सुरक्षा के लिए अधिक आक्रामक भूमिका निभानी होगी। Strait of Hormuz जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय Maritime Safety Convention को और कठोर बनाया जाना चाहिए। Chabahar Port, diversified shipping corridors और renewable energy जैसे विकल्पों पर तेज़ी से आगे बढ़ना भी रणनीतिक आवश्यकता है, ताकि भारत की ऊर्जा निर्भरता किसी एक संकटग्रस्त क्षेत्र पर अत्यधिक केंद्रित न रहे लेकिन केवल सरकार ही नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी है।

हम और हमारा समाज वर्दी वाले सैनिकों को सम्मान देते हैं, शहीदों को याद रखते हैं और यह होना भी चाहिए लेकिन Merchant Navy के नाविक भी राष्ट्र की समृद्धि और सुरक्षा के सिपाही हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि उनकी लड़ाई सीमा पर नहीं, समुद्र के बीच लड़ी जाती है। उनकी वर्दी पर camouflage नहीं होता, लेकिन उनके कंधों पर भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था का भार होता है। Merchant Navy Day को प्रतीकात्मक आयोजन से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय सम्मान का स्वरूप देना होगा। Seafarers के बच्चों की शिक्षा, परिवारों के पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा के लिए विशेष कार्यक्रम चलाने होंगे। मीडिया और समाज को भी इन नाविकों की कहानियों को सामने लाना होगा, ताकि वे हमेशा अदृश्य न बने रहें। क्योंकि सच यही है “बदन पर सेना की वर्दी भले न सही लेकिन  Merchant Navy की यूनिफॉर्म में भी भारत की रक्षा और समृद्धि के सिपाही हमारे लिए लड़ रहे हैं। उन्हें अदृश्य तो मत रहने दो” For more updates follow on X 

LEAVE A REPLY