Twin Towers : योगी के पास महानायक बनने का सुनहरा मौका

वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक डॉ वेद प्रताप वैदिक कहते हैं कि कुछ नेताओं और अफसरों को चैराहों पर खड़े करके हंटरों से उनकी चमड़ी भी उधेड़ दी जाए ताकि भावी भ्रष्टाचारियों के रोंगटे खड़े हो जाएं। यदि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यदि यह करतब करके दिखा सकें तो उनकी छवि ‘भारत के महानायक’ की बन जाएगी।

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लखनऊ  /दिल्ली  । सुपरटेक द्वारा निर्मित नोएडा के दो Twin Towers का गिराया जाना अपने आप में एतिहासिक घटना है। पहले भी अदालत के आदेशों और सरकारों के अपने हिसाब से कई इमारतें भारत के विभिन्न प्रांतों में गिराई गई हैं लेकिन जो इमारतें कुतुब मीनार से भी ऊंची हों और जिनमें 7000 लोग रह सकते हों, उनको अदालत के आदेश पर गिराया जाना सारे भारत के भ्रष्टाचारियों के लिए एक कड़वा सबक है।

ऐसी गैर-कानूनी इमारतें सैकड़ों-हजारों की संख्या में सारे भारत में खड़ी कर दी गई हैं। नेताओं और अफसरों को रिश्वतों के दम पर ऐसी गैर-कानूनी इमारतें खड़ी करके मध्यमवर्गीय ग्राहकों को अपने जाल में फंसा लिया जाता है। वे अपना पेट काटकर किश्तें भरते हैं, बैंकों से उधार लेकर प्रारंभिक राशि जमा करवाते हैं और बाद में उन्हें बताया जाता है कि जो फ्लेट उनके नाम किया गया है, अभी उसके तैयार होने में काफी वक्त लगेगा। लोगों को निश्चित अवधि के दस-दस साल बाद तक उनके फ्लेट नहीं मिलते हैं।

सिर्फ Twin Towers ही नहीं, नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में बने कई बहुमंजिला भवनों की गुणवत्ता को लेकर लगातार गंभीर सवाल उठते रहे हैं। अनेक आवासीय परियोजनाओं में निर्माण के दौरान बेहद घटिया सामग्री के उपयोग के आरोप सामने आए हैं। कई फ्लैटों में दीवारों में दरारें, सीलन, कमजोर छतें और खराब विद्युत व्यवस्था जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ इमारतें इतनी कमजोर हैं कि उन्हें गिराने की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी, वे स्वयं ही किसी हादसे का कारण बन सकती हैं। हाल ही में गुरुग्राम में एक बहुमंजिला इमारत के हिस्से के ढहने की घटना ने निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

नोएडा के ये संयुक्त टावर सफलतापूर्वक गिरा दिए गए हैं लेकिन भ्रष्टाचार के जिन टाॅवरों के दम पर ये टाॅवर खड़े किए गए हैं, उन टाॅवरों को गिराने का कोई समाचार अभी तक सामने नहीं आया है। जिन नेताओं और अफसरों ने ये गैर-कानूनी निर्माण होने दिए हैं, उनके नामों की सूची उ.प्र. की योगी सरकार द्वारा तुरंत जारी की जानी चाहिए। उन नेताओं और अफसरों को अविलंब दंडित किया जाना चाहिए। उनकी पारिवारिक संपत्तियों को जब्त किया जाना चाहिए। जो नौकरी में हैं, उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए। जो सेवा-निवृत्त हो गए हैं, उनकी पेंशन बंद की जानी चाहिए।

Twin Towers प्रकरण से सबक सीखते हुए अदालतों को चाहिए कि उनमें से जो भी दोषी पाए जाएं, उन अधिकारियों को तुरंत जेल भेजा जाए। कुछ नेताओं और अफसरों को चैराहों पर खड़े करके हंटरों से उनकी चमड़ी भी उधेड़ दी जाए ताकि भावी भ्रष्टाचारियों के रोंगटे खड़े हो जाएं। यदि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यदि यह करतब करके दिखा सकें तो उनकी छवि ‘भारत के महानायक’ की बन जाएगी।

इन 30-30 मंजिला भवनों को बनाने की इजाजत देनेवाली ‘नोएडा अथाॅरिटी’ को सर्वोच्च न्यायालय ने ‘भ्रष्ट संगठन’ की उपाधि से विभूषित किया है। यदि केंद्र और उप्र सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी मारे रखे तो मैं अपने पत्रकार बंधुओं से आशा करुंगा कि इन गैर-काूननी भवनों के निर्माण-काल में जो भी मुख्यमंत्री, मंत्री और अधिकारी रहे हों, वे उनकी सूची जारी करें और उनके भ्रष्टाचार का भांडा फोड़ करें

अदालतों में बरसों तक माथाफोड़ी करने की बजाय लोकतंत्र के चौथे स्तंभ याने खबरपालिका को इस समय सक्रिय होने की जरुरत है। ईंट-चूने के गैर-कानूनी भवनों को गिराना तो बहुत सराहनीय है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरुरी है- भ्रष्टाचार के भवन को गिराना! किसकी हिम्मत है, जो इसको गिरायेगा? For more updates follow on X 

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