Teachers Day :आज के टीचर्स भी बदल गये और स्टूडेंट्स भी

अब शिष्य भी बदल गये हैं और टीचर्स भी! यूं तो टीचर्स डे को गुजरे काफी वक्त हो गया लेकिन क्या प्यार भी कभी पुराना होता है! टीचर्स डे के मौके पर उच्च प्राथमिक विद्यालय सालेह्पुर कोटला हापुड़ की सन्कुल शिक्षिका एवं  प्रधानाध्यापिका शाज़िया गुल उस्मानी ने अपने स्टूडेंट्स के लिए रिटर्न गिफ्ट के रूप में ये कविता समर्पित की है। 

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लखनऊ / ग़ाज़ियाबाद । दोनों के मूल में प्यार है दोनों की मंशा में प्यार है लेकिन वक्त बदलने के साथ साथ प्रेम जताने के नये नये तरीके वजूद में आ गए हैं। एक वो दौर था जब हम स्कूलों में पढ़ते थे तो अपने शिक्षकों से उचित दूरी बना कर रखते थे। अब वो दूरी उनके सम्मान में थी हमारी झिझक की वजह से थी या फिर मास्टर साहब के ऐनक के ऊपर से घूरती हुई रौबदार आंखों की वजह से!फिर भी उस दौर में भी टीचर्स डे (Teachers Day) पर हम सब लोग अपने शिक्षकों को कुछ उपहार भेंट किया करते थे लेकिन तमाम माथापच्ची के बाद भी भेंट करने के लिए पेन के अलावा कुछ और देने का जोखिम नहीं पालते थे।

रिटर्न गिफ्ट के रूप में हमारे मास्साब मुंह में कुछ बुदबुदाते थे उस वक्त हम नहीं समझ पाते थे लेकिन बाद में पता चला कि मास्साब अपने शिष्यों की सलामती के लिए आशीर्वाद देते हुए हमारे उज्ज्वल भविष्य की कामना करते थे।

समय के साथ शिक्षा का स्वरूप बदला है, तकनीक बदली है, पढ़ाने और सीखने के तरीके बदले हैं, लेकिन गुरु और शिष्य के रिश्ते की आत्मीयता आज भी उतनी ही गहरी है। भले ही Teachers Day को गुजरे कुछ समय हो गया हो, मगर शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच का स्नेह किसी एक दिन का मोहताज नहीं होता। इसी भावना को जीवंत करते हुए उच्च प्राथमिक विद्यालय सालेहपुर कोटला, हापुड़ की संकुल शिक्षिका एवं प्रधानाध्यापिका शाज़िया गुल उस्मानी ने अपने विद्यार्थियों के लिए एक भावनात्मक कविता समर्पित की।

Teachers Day पर उन्होंने इस कविता को अपने छात्रों के लिए “रिटर्न गिफ्ट” बताया, जिसमें एक शिक्षक का प्यार, मार्गदर्शन, उम्मीदें और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना झलकती है। कविता यह संदेश देती है कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कारों और रिश्तों का भी माध्यम है। विद्यार्थियों ने भी अपनी शिक्षिका के इस स्नेहपूर्ण उपहार को बेहद भावुकता और सम्मान के साथ स्वीकार किया। For more updates follow on X 

प्यारी मीना

देखो ये है प्यारी मीना
सिखलाती सम्मान से जीना
अच्छी बातें बताती है
सबके मन को भाती है

यूनिसेफ ने इसे बनाया
मोन्वार जी ने सजाया
राजू मिट्ठू साथ हैं रहते
मीना की ही बोली कहते

लड़की हो चाहे हो लड़का
पढ़ने पे हक़ हो हम सबका
भेद भाव अब खत्म करो
बेटा बेटी साथ चलो

साफ़ सफाई का रखो ध्यान
मीना कहती बनो महान
छोटो से प्यार से बोलो
और बड़ो का करो सम्मान

कम उम्र में करें ना शादी
पहले पढ़ाई बाद में शादी
स्वस्थ तन हो स्वस्थ हो मन
अच्छा बनने का करो जतन

आज जन्मदिन है मीना का
मिल कर धूम मचाएंगे
मीना की प्यारी बातें
हम सबको बतलायेंगे।

थैंक्यू बच्चों.. शाज़िया गुल उस्मानी, प्रधानाचार्य उच्च प्राथमिक विद्यालय, सालेह्पुर कोटला, हापुड़।

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