मनमानी फीस वसूली पर पैरेंट्स हलकान, शिकायत पर लखनऊ प्रशासन सख्त

जिलाधिकारी विशाख जी (DM Vishakh G) ने कहा कि नियमों के विरुद्ध फीस वसूली बर्दाश्त नहीं होगी। सभी विद्यालयों को शासन की फीस निर्धारण नीति का पालन करना होगा। शिकायत सही मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी वहीं

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लखनऊ (राज्य मुख्यालय) । लखनऊ प्रशासन ने निजी स्कूलों में मनमानी फीस वसूली पर बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी विशाख जी की अध्यक्षता में हुई बैठक में आठ स्कूलों को नोटिस जारी किया गया। इन स्कूलों को पांच लाख रुपये तक जुर्माने की चेतावनी दी गई है।बता दें कि लखनऊ प्रशासन lucknow.nic.in⁠ को कुल 20 विद्यालयों के खिलाफ 28 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। जांच के बाद आठ शिकायतें सही पाई गईं। जिला प्रशासन  ने संबंधित स्कूलों से जवाब मांगा है।

लखनऊ ज़िला प्रशासन के साथ बैठक में दो प्राइवेट स्कूलों ने मनमानी फीस वसूली की बात स्वीकार की है, दोनों स्कूलों ने अतिरिक्त शुल्क वसूली को रेग्युलर फीस में समायोजित करने का आश्वासन दिया। जिला प्रशासन ने छात्रों और उनके अभिभावकों को आश्वस्त किया है कि उनके हितों से कोई समझौता नहीं किया जायेगा।

लखनऊ के स्कूलों में मनमानी फीस वसूली पर नोटिस पाने वाले विद्यालयों में एलेन हाऊस पब्लिक स्कूल (Allen House Public School) सीलवटी आइडियल पब्लिक स्कूल (Seelwati Ideal Public School) आश्रम एकेडमी (Ashram Academy) हुकुम सिंह मेमोरियल इंटर कॉलेज (Hukum Singh Memorial Inter College) सेंट डॉमिनिक इंटर कॉलेज (St. Dominic Inter College) सेठ एमआर जयपुरिया (Seth M.R. Jaipuria Goyal Campus) ब्राइट वे इंटर कॉलेज (Bright Way Inter College) और केजे मॉडर्न पब्लिक स्कूल (KJ Modern Public School) शामिल हैं।

Symbol of Administration of Govt of UP, it is used here to an indicator of Lucknow district Administration.
जिलाधिकारी कार्यालय लखनऊ

लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी (DM Lucknow Vishakh G) ने कहा कि नियमों के विरुद्ध स्कूल फीस वसूली कत्तई बर्दाश्त नहीं की जायेगी । सभी विद्यालयों को शासन की फीस निर्धारण नीति का अनिवार्यतः पालन करना होगा। अगर अधिक फीस वसूली की शिकायत  सही पायी गयी तो ऐसे स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी तरफ अभिभावकों ने ज़िला प्रशासन के इस कदम का स्वागत किया है। समाज के गणमान्य लोगों ने लखनऊ ज़िला प्रशासन के कार्यवाही की सराहना की और इसे  शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला बताया।

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