लखनऊ / दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल और रीपक कंसल ने दाखिल की है. याचिका में कहा गया कि नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा-12 में आपदा से मरने वाले लोगों के लिए सरकारी मुआवजे का प्रावधान है. याचिकाकर्ताओं ने कहा कि पिछले साल केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से मृतकों के परिजनों को 4 लाख का मुआवजा देने को कहा था, लेकिन इस साल ऐसा नहीं हुआ।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में कहा कि कोरोना वायरस से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 4-4 लाख रूपये का मुआवजा नहीं दिया सकता है। कोरोनो बीमारी (Covid-19) से मरने वालों के परिवार के सदस्यों को 4-4 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग वाली याचिकाओं के जवाब में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह हलफनामा दायर किया।
कोरोना संक्रमण के चलते मरने वाले लोगों के परिजनों को मुआवजा देने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। इसके बाद केंद्र ने हलफनामा दायर कर कहा कि वह मृतक के परिजनों को मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं कर सकता, क्योंकि यह एक बड़ी वित्तीय देनदारी होगी।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि करोना से मरने वालों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए मुआवजा नहीं दे सकते। केंद्र ने अपने जवाब में कहा कि हर कोरोना संक्रमित मरीज की मौत पर मुआवजा राज्यों के वित्तीय सामर्थ्य से बाहर है।
सरकार ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो कोरोना महामारी से निपटने के इंतजाम करने के लिए पैसा नहीं बचेगा। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके कोरोना महामारी से मरने वाले लोगों के परिजनों के लिए 4-4 लाख रुपये मुआवजे की मांग की गई है।
केंद्र सरकार ने कहा है कि अभी तक देश में कोरोना से 3,85,000 मौतें हो चुकी हैं और यह संख्या बढ़ भी सकती है ऐसे में प्रत्येक परिवार को मुआवजा के 4-4 लाख देना संभव नहीं होगा। केंद्र ने कहा कि मुआवजा देने के लिए संसाधनों का उपयोग महामारी के खिलाफ कार्यवाही और स्वास्थ्य व्यय को प्रभावित कर सकता है।

हलफनामे में सरकार ने महामारी में लोगों को दी गई वित्तीय और बाकी मदद का भी विस्तार से हवाला दिया है। साथ ही महामारी के दौरान ऑक्सीजन आदि के इंतजाम का भी ब्योरा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना से मरने वालों को मुआवजे की मांग पर केंद्र को नोटिस जारी किया है।
याचिकाकर्ताओं ने साथ में यह भी कहा कि मरने वालों को अस्पताल से सीधे अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा है. उनका न पोस्टमॉर्टम होता और न डेथ सर्टिफिकेट में लिखा जाता है कि मृत्यु का कारण कोरोना था. याचिका में कहा गया कि अगर ऐसे में मुआवजा दिया भी जाए तो लोग उसका लाभ नहीं ले पाएंगे. याचिका में मांग की गई कि कोर्ट सभी राज्यों को यह निर्देश दे कि वह मरने वाले लोगों के डेथ सर्टिफिकेट पर मौत की सही वजह दर्ज करें, जिससे की उनके परिवार को मुआवजा मिल सके।
याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अशोक भूषण और एमआर शाह की बेंच ने पूछा कि क्या किसी राज्य ने अपनी तरफ से मुआवजा दिया है? जिस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि ऐसा किसी राज्य ने नहीं किया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने याचिका को अहम बताते हुए केंद्र से जवाब देने के लिए कहा है. साथ में सुप्रीम कोर्ट ने मृत्यु प्रमाणपत्र में कोरोना को मौत की वजह लिखने को लेकर सरकार की नीति और ICMR के निर्देशों के बारे में भी जानकारी मांगी है।







































