लखनऊ। ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की ओर से ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनिवार को शनि जयंती पर भव्य और दिव्य भंडारे का आयोजन किया गया। ज्योतिषीय गणना के अनुसार शनि जयंती पर शनिवार का संयोग लगभग 13 वर्षों बाद बना। यह दुर्लभ संयोग शनि पूजन अनुष्ठान के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे में लेखराज मेट्रो स्टेशन के पास स्थित शिव शक्ति शनिदेव मंदिर पर पूजन अनुष्ठान के उपरांत दोपहर में भव्य और सात्विक भंडारा, वितरित किया गया।।
सपना गोयल ने बताया कि शनि देव हिंदू धर्म में न्याय और कर्मफल के देवता हैं, जो सूर्य देव और माता छाया के पुत्र हैं। वे नवग्रहों में सबसे महत्वपूर्ण और शनिवार के स्वामी हैं। शनिदेव क्रूर नहीं, बल्कि अनुशासनात्मक, गंभीर और तपस्वी हैं। वास्तव में शनिदेव कर्मफलदाता’ और ‘न्यायाधीश हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए कर्मों को शुद्ध रखना और जरूरतमंदों की मदद करना सबसे उत्तम उपाय माना जाता है।
सुश्री गोयल ने बताया कि अयोध्या तीर्थ श्रीराम जन्म भूमि पर बने भव्य मंदिर परिसर में 14वां सुंदरकांड महा अनुष्ठान आगामी शनिवार 23 मई 2026 को होना सुनिश्चित हुआ है। उनके अनुसार सुंदरकांड महा अभियान उत्तर प्रदेश के 42 जिलों और देश के 10 राज्यों तक पहुंच चुका है। उन्होंने देशवासियों को पांच समस्याओं से सावधान रहने का संदेश भी दिया। उनके अनुसार -जनसंख्या विस्फोट, घुसपैठ, दूषित मानसिकता, विदेशी सामान और धर्म परिवर्तन बड़ ससमस्यायें हैं।
सपना गोयल का एकमात्र लक्ष्य है कि संतों और ऋषियों की पावन भूमि, “भारत” एक बार पुन: “विश्व गुरु” के रूप में प्रतिष्ठित हो। भारत उत्थान के इस महा उद्देश्य की पूर्ति के लिए ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की ओर से प्रतिदिन सुंदरकांड पाठ के साथ प्रत्येक सप्ताह मंगलवार और शनिवार को नजदीकी मंदिरों में सामूहिक सुंदरकांड का आयोजन, करवाया जा रहा है।
इस क्रम में सपना गोयल की अगुवाई में 23 जून 2024 को पावन तीर्थ नैमिषारण्य में भव्य सामूहिक सुंदरकांड महायज्ञ का आयोजन करवाया गया था। उसमें चालीस बसों के माध्यम से पांच हजार महिलाओं को इस अनुष्ठान में शामिल करवाया गया था। इसके उपरांत सपना गोयल की अगुवाई में बिना किसी सरकारी मदद के रात-दिन की यात्रा करके उत्तर प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में बड़े स्तर पर सुंदरकांड महायज्ञ सम्पन्न करवाए जा चुके हैं।
इस महातीर्थाटन अभियान के अंतर्गत उत्तराखंड कोटद्वार के प्राचीन सिद्धबली मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, हर की पौड़ी हरिद्वार, रुड़की महादेव मंदिर, प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान मंदिर एवं कानपुर के आनंदेश्वर महादेव मंदिर के गंगाजी घाट परिसर में भी भव्य सुंदरकाण्ड का पाठ सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। इसके साथ ही बीते साल 11 सितम्बर से अयोध्या तीर्थ में प्रभु राम जी के जन्मभूमि परिसर में भी, मासिक सुंदरकांड पाठ का सिलसिला शुरू हो गया है। दूसरी ओर “सेवा परमो धर्म:” को बीज मंत्र मानते हुए दरिद्र नारायण की सेवा के भाव से जाड़ों में कम्बल वितरण और विभिन्न पावन अवसरों पर भंडारों का आयोजन भी किया जा रहा है।







































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