UPPCL Accidents! नीतियों पर सवाल, एक माह में 26 हादसे और 15 मौतें

जेई संगठन (Junior Engineers) ने संसाधनों की कमी, ट्रांसफार्मर नीति और अधिकारियों की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

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लखनऊ (राज्य मुख्यालय) । सूबे में बिजली दुर्घटनाओं के मद्देनजर (UPPCL Accidents) उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) और चारों विद्युत वितरण निगमों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जूनियर इंजीनियर संगठन (Junior Engineers) ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों की नीतियों से बिजली व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है। संगठन के अनुसार बीते एक माह में 26 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 15 कर्मचारियों की मौत हो गई जबकि 11 की हालत गंभीर बनी हुई है।

जूनियर इंजीनियर्स संगठन ने 15 मई 2026 को निगम प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर स्टाफ की भारी कमी का मुद्दा उठाया। संगठन का कहना है कि संविदाकर्मियों और अभियंताओं को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण तथा आधुनिक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं इससे फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की जान जोखिम में पड़ रही है। उन्होंने मांग की है कि दुर्घटनाओं (UPPCL Accidents) को रोकने के लिए शीघ्र उचित कदम उठाये जाने चाहिए।

जूनियर इंजीनियर्स के संगठन ने आरोप लगाया कि तमाम नये नये प्रयोगों के बावजूद भी बिजली दुर्घटनाएं (UPPCL Accidents) रुकने का नाम नहीं ले रहीं,उन्होंने कहा कि पुराने ट्रांसफार्मरों की मरम्मत लगभग बंद कर दी गई है और खराब ट्रांसफार्मरों को अनर्थिक घोषित कर स्क्रैप में बेचा जा रहा है तथा उनकी जगह नए महंगे ट्रांसफार्मर खरीदे जा रहे हैं। नई खरीद नीति में ट्रांसफार्मरों की गारंटी अवधि 8 से बढ़ाकर 15 वर्ष करने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

उत्तर प्रदेश विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (फाइल फोटो)
UP Power Corporation Limited

बताते चलें कि मार्च 2026 में जारी “जीरो टॉलरेंस” आदेश के तहत छोटे ट्रांसफार्मर जलने पर जेई, एसडीओ और एक्सईएन से लागत वसूली का प्रावधान लागू किया गया है हालांकि इस फैसले से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा है इस पर संगठन का कहना है कि दंडात्मक कार्रवाई और संसाधनों की कमी से कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा है। जेई संगठन ने मांग की कि बिजली व्यवस्था सुधारने और दुर्घटनाओं (UPPCL Accidents) में कमी के लिए अनुभवी अभियंताओं को निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाए और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

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