जब ऋषि कपूर ने 30 हजार में खरीदा फिल्म फेयर!

क़रीब 45 साल बाद ऋषि कपूर ने बड़ी बेबाकी से इस अवार्ड को हासिल करने का कड़वा सच अपन आत्मकथा ‘खुल्लम खुल्ला’ में बयां किया।

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जब ऋषि कपूर ने 30 हज़ार रूपए में ख़रीदा था फिल्म फेयर अवार्ड, जिसके लिए वो ताउम्र शर्मिंदा रहे…कभी-कभी, अमर अकबर एंथोनी, कुली और नसीब में अमिताभ बच्चन के साथ ऋषि कपूर की वो यादगार फिल्में हैं जिन्हें हमेशा यााद रखा जाएगा। इन फिल्मों में दोनों एक्टर्स की ट्यूनिंग देखकर कोई ये सोच भी नहीं सकता कि एक वक्त ऐसा भी था जब दोनों सितारे एक दूसरे बेहद खिंचे खिंचे रहते थे।

तल्ख़ी की वजह थी फिल्म फेयर अवार्ड। 1973 में आई अपनी पहली फिल्म ‘बॉबी’ की कामयाबी ऋषि कपूर के सिर चढ़कर बोल रही थी। उसी साल फिल्म ‘ज़ंजीर’ से इंडस्ट्री में एंग्री यंग मैन अमिताभ बच्चन की कामयाबी का नगाड़ा भी बजा था। उस साल के फिल्म फेयर अवार्ड के दावेदारों में दोनों ही सितारों का नाम था।लेकिन एंग्री यंग मैन की एंट्री से चॉकलेटी हीरो ऋषि कपूर का रोमांस जीत गया और अवार्ड ऋषि कपूर को मिला।

क़रीब 45 साल बाद ऋषि कपूर ने बड़ी बेबाकी से इस अवार्ड को हासिल करने का कड़वा सच अपन आत्मकथा ‘खुल्लम खुल्ला’ में बयां किया। उन्होनें लिखा, “अमिताभ और मैं शुरूआत में थोड़े असहज रहे, कभी गरम कभी नरम, 1970 की समयावधि में मैं अपरिपक्व था और थोड़ा उद्दंड था वो मुझसे 10 साल बड़े थे फिर भी मैं उन्हें अमिताभ ही पुकारता था ना कि अमित जी, मुझे लगता है कि अमिताभ इसलिए खिंचे खिंचे रहते थे क्योंकि एक प्रसिद्ध सिने पत्रिका द्वारा प्रायोजित सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवार्ड ‘बॉबी’ के लिए मुझे मिल गया था।

मुझे यक़ीन है कि उन्हें लगता था कि इस अवार्ड पर ‘ज़ंजीर’ के लिए उनका दावा था। मैं ये कहते हुए शर्मिंदगी महसूस कर रहा हूं कि मैंने ये अवार्ड ख़रीदा था मैं तब एक नौसीखिया था हमारा पीआरओ तारकनाथ गांधी मेरे पास आया और कहा सर तीस हज़ार दे दो तो मैं आपको अवॉर्ड दिलवा दूंगा। मैं मूलतः इस प्रकार की हेराफेरी करके किसी चीज़ को हासिल करने वालों में से नहीं हूं पर मैं स्वीकार करता हूं कि मैंने बिना सोचे-समझे वो राशि दे दी।

मेरे सेक्रेटरी घनश्याम ने भी कहा कि सर दे देते हैं मिल जाएगा अवार्ड इसमें क्या है। आज मैं केवल इतना कह सकता हूं कि वह साल 1974 का काल था और उस समय मैं केवल 22 वर्ष का नौसीखिया औेर नादान युवक था. ढेर सारा पैसा मेरे हाथों में कुलबुला रहा था और मैं क्या कर रहा हूं इसको समझने की बुद्धि और परिपक्वता मुझमें बिल्कुल नहीं थी. बाद में जाकर अपने इस मूर्खतापूर्ण आचरण की भूल मैं पकड़ पाया.”

आज फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कई सितारे होंगे जिन्होंने फिल्म फेयर अवार्ड ख़रीदा होगा लेकिन अपने जीते जी इस राज़ को पूरी दुनिया को बताने की हिम्मत शायद ही किसी सितारे में हो इसीलिए बॉलीवुड का ये चार्मिंग और चॉकलेटी हीरो अपने बिंदास अंदाज़ और बेबाकी के लिए हमेशा याद रखा जाएगा, अलविदा ऋषि कपूर। 

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