अब्राहम मिएराज
देश की अर्थव्यवस्था से काला धन समाप्त करने, आतंक के आकाओं की जेब कुतरने की ग़र्ज़ से 9 नवंबर की रात को प्रधानमंत्री ने 1000 और 500 के नोटों को प्रचलन से बाहर करने का निर्णय किया। नरेंद्र मोदी ने देश से 50 दिन की मोहलत मॉगी थी और दावा किया था कि नोटबंदी से काला धन समाप्त होगा नकली नोट खत्म होंगे और आतंकवादियों की जेबें खाली हो जाएंगी।
नोटबंदी के तकरीबन 100 दिन बाद जो आंकड़े आ रहे हैं लगता है इन तीनों मुद्दों पर मोदी सरकार मात खा गई है।
कैशलेस सिस्टम का सच।
पांच राज्यों में चल रहे इन चुनावों में इतने ज्यादा नकद नोट पकड़े गए हैं कि केशलेस व्यवस्था की नाक कट गई है। उप्र के 2012 के चुनाव में जितना काला धन पकड़ा गया था उससे तीन गुना यानि इस बार 109 करोड़ 79 लाख रु. पकड़े गए हैं जबकि अभी उप्र मेंचार चरणों के मतदान और होने बाकी हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि चुनाव पूरा होने तक यह राशि 300 करोड़ रु. का आंकड़ा पार कर जाए। पंजाब में यही राशि 2012 के मुकाबले इस बार पांच गुना ज्यादा है। 58 करोड़ के काला धन के अलावा करोड़ों रु. की शराब की बोतलें और नशीली दवाइयां पकड़ी गई हैं। यही हाल उत्तराखंड और गोवा का है। गोवा में
इस चुनाव में पकड़ा गया काला धन 60 लाख से बढ़कर सवा दो करोड़ हो गया।
यह तो पकड़े हुए धन का हाल है, जो नहीं पकड़ा गया जरा उसकी कल्पना तो कीजिए।नोटबंदी पर सीना फुलाकर बोलने वाली सरकार के लिए क्या ये जरुरी नहीं कि वो देश को बताये कि आखिर नोटबंदी से हासिल क्या हुआ।
संसद का सामना कैसे करेगी सरकार।
अगर मोदी ने नोटबंदी को इस
चुनाव में अपने विरोधियों को बेबस ओ बीमार करने के लिए चलाया था तो यह मान लीजिए कि उन्होंने और भाजपा ने नोटबंदी का गला घोंट दिया है। पूरे भारत को ‘डिजिटल ट्रांजेक्शन’ वाला देश बनाने का दावा करनेवाली सरकार अब संसद का सामना किस मुंह से करेगी? क्यूंकि आज तक सरकारऔर उसके इशारों पर ता ता थैया करने वाली रिजर्व बैंक यह नहीं बता सकी है कि उन्होंने कितना काला धन उगलवाया है। लोगों ने अपना सारा काला धन सफेद करके सरकार को चारों खाने चित कर दिया है। और तो और
सरकार ने 2000 का नोट जारी करके लोगों की काला धन जुटाने की सुविधा को दुगुनी कर दी है। इस छोटे आकर के बड़े नोट के लिए
सभी चुनावी चोर मोदीजी का तहेदिल से शुक्रिया अदा कर रहे हैं।






































