NRC, CAB वापस जाओ वापस जाओ

कांग्रेस प्रवक्ता सदफ जफर ने कहा कि मैं अपना कोई भी दस्ताबेज़ प्रस्तुत नहीं करूंगी। सीएबी के खिलाफ एक सविनय अवज्ञा आंदोलन का आह्वान करूंगी क्योंकि यह सामाजिक और संवैधानिक दोनों मूल्यों को नष्ट करने के लिए है।

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लखनऊ । समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने सोमवार को हज़रतगंज स्थित गॉधी प्रतिमा पर नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 (CAB) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में धरना दिया और प्रदर्शन का आयोजन किया।

आर्टिकल 14 का उल्लंघन 

विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए प्रो रमेश दीक्षित ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता संविधान आ मूल तत्व है CAB संविधान के इस दर्शन का उल्लंघन करता है प्रस्तावित विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14 का भी उल्लंघन करता है। वहीं प्रो. अली खान महमूदाबाद ने कहा कि CAB न केवल अवैध है बल्कि यह अनैतिक भी है यह सीएबी संविधान की हत्या और ‘भारत के विचार’ की हत्या है। 

कानून के शिक्षक अब्दुल हफीज गांधी और डॉ पवन आंबेडकर ने संयुक्त रूप से तथ्यों और तर्कपूर्ण रूप से अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत में धर्म कभी भी नागरिकता का आधार नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि सीएबी और एनआरसी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों का हमारे देश और संविधान की आत्मा को बचाने के लिए विरोध किया जाना चाहिए। डॉ. पवन राव अंबेडकर ने सीएबी पर बोलते हुए कहा कि बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने कभी भी इस स्थिति की कल्पना नहीं की, जहां सरकार भारतीय संविधान के बहुलतावादी मूल्यों के खिलाफ काम करेगी। उन्होंने कहा कि लोगों को सीएबी और एनआरसी का बहिष्कार करने के लिए खुलकर सामने आना चाहिए।

साम्प्रदायिक साजिश! 

वक्ताओं ने प्रदर्शन में बोलते हुए प्रस्तावित बिल को मुस्लिम समुदाय के खिलाफ साजिश करार दिया अमीक जामई ने कहा कि सीएबी संविधान विरोधी है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को वर्तमान सरकार के संवैधानिक विरोधी कदमों का खुलकर विरोध करना चाहिए।  जामई ने कहा कि सीएबी और एनआरसी के बारे में जागरूकता पैदा करना जरूरी है। असली मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए सरकार यह सब कर रही है। यह सरकार हमेशा सांप्रदायिक विभाजन पैदा करती है। अब्दुल हन्नान ने कहा कि CAB और NRC देश की अखंडता और धर्मनिरपेक्षता पर हमला है। हम इसे किसी सूरत में बर्दास्त नहीं करेंगे और इसके खिलाफ अपने आंदोलन को गति देते रहेंगे।

नहीं दूंगी दस्तावेज 

कांग्रेस प्रवक्ता सदफ जफर ने कहा कि मैं अपना कोई भी दस्ताबेज़ प्रस्तुत नहीं करूंगी। सीएबी के खिलाफ एक सविनय अवज्ञा आंदोलन का आह्वान करूंगी क्योंकि यह सामाजिक और संवैधानिक दोनों मूल्यों को नष्ट करने के लिए है। महिला अधिकार कार्यकर्ता ताहिरा हसन ने कहा कि यह किस तरह का बिल है, जहां एक समुदाय अलग-थलग है। क्या यह संविधान पर हमला नहीं है? यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है। हम सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, जो संविधान के अनुसार चलता है। जिसके अनुसार देश का प्रत्येक नागरिक कानून के समक्ष समान है, इसलिए संविधान और मानवता की रक्षा के लिए एकजुट होकर लड़ें सीएबी न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि अपरिपक्व भी है।

ओवैस सुल्तान खान ने कहा कि NRC पूरी तरह से एक निरर्थक प्रयास है जैसा कि असम के मामले में साबित हुआ। जब यह सत्तारूढ़ पार्टी के अनुरूप नहीं था, तो उसने घोषणा की कि वे एनआरसी को स्वीकार नहीं करेंगे। पूरे अभ्यास पर बहुत पैसा खर्च किया गया। लेकिन परिणाम शून्य है। सुहैब अंसारी ने कहा कि इस बिल को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। यह देश सभी का है। विधेयक हमारे संवैधानिक मूल्यों पर हमला है। समानता हमारा मौलिक अधिकार है। धर्म के आधार पर भेदभाव असंवैधानिक है।

एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मशकूर अहमद उस्मानी ने कहा कि सीएबी पूरी तरह से असंवैधानिक है। यह संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन करता है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का भी उल्लंघन है जो सभी को यह अधिकार देता है कि किसी को भी धर्म, आयु, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा।

नहीं होने देंगे एक और विभाजन 

मुस्लिम महिला कार्यकर्ताओं ने भी CAB, NRC की आलोचना की, गॉधी प्रतिमा कर आयोजित विरोध प्रदर्शन में सबीहा फातमा ने कहा कि CAB का एकमात्र उद्देश्य भारत के मुसलमानों को दरकिनार करना प्रतीत होता है और मैं इसका कड़ा विरोध करती हूँ। सामाजिक कार्यकर्ता नाहिद अकील ने कहा इस देश का दूसरा विभाजन नहीं होने देंगे। हम इस देश के संस्थापक हैं और हम एक बार फिर बलिदान देंगे। CAB और NRC स्वीकार्य नहीं है। विरोध प्रदर्शन में लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रविकांत समेत सैकड़ों लोग उपस्थित थे। 

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