लखनऊ /अयोध्या । केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान Shivraj Singh Chouhan ने बुधवार को आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में आयोजित “स्वस्थ मिट्टी, सशक्त किसान, समृद्ध भारत” विषयक संगोष्ठी में हिस्सा लेते हुए किसानों को प्राकृतिक एवं वैज्ञानिक खेती अपनाने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने किसानों के साथ कृषक चौपाल में संवाद किया, धान की रोपाई में भाग लिया तथा खेती-किसानी से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए। कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि मंत्री Surya Pratap Shahi, कृषि राज्य मंत्री Baldev Singh Aulakh, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष Acharya Shyam Bihari Gupta, आईसीएआर के महानिदेशक M. L. Jat तथा प्रमुख सचिव कृषि रवींद्र कुमार भी मौजूद रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi और मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में देश को रामराज्य की अवधारणा की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि धरती माता के साथ हो रहे अत्यधिक रासायनिक दोहन को रोकना समय की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग जारी रहा तो मिट्टी की उर्वरा शक्ति समाप्त हो सकती है और भूमि बंजर बनने का खतरा बढ़ जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रासायनिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग से खेतों में केंचुओं की संख्या कम हो गई है, जबकि यही जीव मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने किसानों को एकीकृत कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) अपनाने, फसल विविधीकरण करने तथा प्राकृतिक खेती की दिशा में आगे बढ़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज खेतों में पैदा होने वाली सब्जियां और फल भी रसायनों के प्रभाव से प्रभावित हो रहे हैं, जिसका असर मानव स्वास्थ्य पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि अभियान के अगले चरण में व्यापक स्तर पर मिट्टी परीक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा, जिसके लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी बताया कि आईसीएआर द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए वर्ष 2047 तक का कृषि रोडमैप तैयार किया गया है, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा गया है। इस रोडमैप में वैज्ञानिक खेती, जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, सूखा तथा अन्य कृषि चुनौतियों से निपटने की रणनीतियां शामिल हैं। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि पहली बार कोई केंद्रीय कृषि मंत्री आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय पहुंचा है, जो किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 60 हजार क्विंटल ढैंचा बीज की व्यवस्था कर सभी जिलों में उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा कि धान की सीधी रोपाई तकनीक से उर्वरकों की खपत कम होती है, लागत घटती है और उत्पादन बढ़ता है। प्रदेश सरकार किसानों को सात लाख मिनी किट निःशुल्क उपलब्ध करा रही है तथा प्रमाणित बीजों की लागत में भी उल्लेखनीय कमी की गई है।

आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि उत्तर प्रदेश का कृषि रोडमैप किसानों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा और रसायनों के संतुलित उपयोग से कृषि को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। उन्होंने किसानों से जलवायु परिवर्तन और अल नीनो जैसी परिस्थितियों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने खेत में उतरकर धान की रोपाई की और किसानों के साथ संवाद कर उन्हें आधुनिक, वैज्ञानिक तथा प्राकृतिक खेती के समन्वय से कृषि को लाभकारी बनाने के सुझाव दिए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, शोधार्थी और विश्वविद्यालय के शिक्षक उपस्थित रहे। For more updates follow on X




















